श्री लंका में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय आबादी और समुदाय विशेष के बीच ताजा तनातनी एक फेसबुक पोस्ट को लेकर हुई और देखते ही देखते कर्फ्यू लगाने की स्थिति आ गई। यह घटना चिलॉव नाम के शहर में हुई है। स्थानीय पुलिस ने...
कश्मीर से इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों का खात्मा करने के लिए जाकिर मूसा को मौत के घाट उतारना सुरक्षा बलों के लिए ज़रूरी हो गया है। जिसके लिए घाटी में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
माओवादी कहीं ना कहीं अब ये बात जान और समझ गए हैं कि 'जल-जंगल-जमीन' का उनका नारा अब प्रासंगिक नहीं रहा है। इनके पोषक ये बात अच्छे से जानते है कि यदि अब यह 3 मुद्दे ही प्रासंगिक नहीं रहे, तो अब माओवंशी किस तरह से अपना अभियान आगे बढ़ाएँ? लोगों के बीच डर पैदा कर के ही ये आतंकवादी संगठन अब प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं।
मेजर जनरल आसिफ गफूर ने रावलपिंडी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि 1947 में पाकिस्तान में 247 मदरसे थे, जो कि 1980 में बढ़कर 2861 हो गए और मौजूदा वक्त में पाकिस्तान में 30 हजार से ज्यादा मदरसे चलाए जा रहे हैं।
“हमने हिंसक चरमपंथी संगठनों और जिहादी संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया है और हम उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। दहशतगर्दी का समूल नाश करने के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। हमारे देश ने इस दहशत के साम्राज्य के कारण बहुत नुकसान उठाया है। आतंकवाद के कारण लाखों डॉलर गँवाए हैं।”