जमीअत ने छात्रों और परिजनों से कहा है कि अगर उनपर प्रार्थना, सूर्य नमस्कार जैसी गतिविधियों में शामिल होने का दबाव डाला जाए, तो वो भी वो इसमें शामिल न हों, बल्कि विरोध करें और कानूनी कार्रवाई करें
जो चैतन्य महाप्रभु की भूमि थी, उसे पहले 1946 के नरसंहार के बाद खंडित किया गया और अब भी वहाँ शरिया ही चलाया जा रहा है। सीरिया से लेकर तमिलनाडु तक ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं। मोपला से लेकर चोपरा तक, खून हिन्दुओं का ही बहता है।