मालदास स्ट्रीट बाजार की गलियों में लगभग 300 दुकानें हैं जहाँ लोगों का हुजूम उमड़ता था, लेकिन अब सन्नाटा ही यहाँ की तस्वीर है। पत्नी दिवंगत पति की सिलाई मशीन को निहारती रहती हैं।
इस्लामी कानून, रवायत और कठमुल्ले किसी के लिए मुस्लिम महिलाओं की आवाज का मोल नहीं। उलटे तकरीरों में उन्हें इस तरह पेश किया जाता है जैसे 'भोग की वस्तु' से अधिक उनका मोल न हो।