उद्धव ठाकरे की आलोचना पर शिवसैनिकों ने राहुल तिवारी को घर में घुस कर पीटा था। उनका सिर मुंडवा दिया था। आदित्य ने पार्टी कार्यकर्ताओं की इस गुंडई को स्वभाविक गुस्सा बताया है।
हीरामणि तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन लोगों ने उनके अकेले होने का फायदा उठाया है। उनको सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनलोगों ने उन्हें इतनी बुरी तरह से पीटा कि उनके कान का पर्दा फट गया है। उन्होंने शिव सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है, ताकि फिर......
“मीडिया से हमें पता चला है कि इस कानून के अंतर्गत जितने भी हमारे देश की जनता है, उनकी जनगणना की जाएगी, उनको यहाँ पर नागरिक रखा जाएगा… इस एक्ट के अंदर हमें यही बताया गया है कि हमारे जो मुस्लिम भाई हैं, उनको अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।”
'हिंदू हृदय सम्राट' बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में सरकार बना चुके हैं। तीन पहियों वाली कभी भी पलटने वाली सरकार। अब CAA पर एक बार फिर से शिवसेना ने पलटी मारी है। वो भी कॉन्ग्रेस और UPA को आँख दिखाती हुई पलटी।
ठाकरे द्वारा जामिया के (हुड़दंगी और हिंसक) छात्रों को रोकने के लिए की गई सीमित पुलिस कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड से करने को महाराष्ट्र भाजपा के शीर्ष नेता ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। फडणवीस ने कहा है कि इससे ठाकरे ने...
'पेंडुलम हिंदुत्व' या 'पेंडुलम-त्व' के शिकार उद्धव ठाकरे का पेंडुलम एक बार फिर डोल कर हिंदुत्व से कॉन्ग्रेस-छाप सेक्युलरता के सिरे पर पहुँच गया है। उद्धव ठाकरे ने जामिया में हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड से कर दी है।
सावरकर को लेकर राहुल गॉंधी की टिप्पणी पर भाजपा और शिवसेना का आक्रामक रवैया बरकरार है। इसका असर आज से शुरू हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर भी दिखा। इस बीच, केंद्रीय मंत्री अठावले ने राज्य में सियासी भूकंप के संकेत दिए हैं।
"यदि राहुल गॉंधी का नाम राहुल सावरकर होता तो हम सबको अपना मुॅंह छिपाना पड़ता। अब हम उम्मीद करते हैं कि उद्धव ठाकरे अपना वादा निभाएँगे। वे कई बार कह चुके हैं कि यदि किसी ने सावरकर का अपमान किया तो वे उसे सार्वजनिक रूप से पीटेंगे। मैं उम्मीद करता हूॅं कि शिवसेना ने सावरकर पर अपना स्टैंड नहीं बदला होगा।"
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के सावरकर को लेकर दिए गए बयान ने भी प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। इस मसले पर भाजपा और शिवसेना के सुर एक जैसे हैं। इससे दोनों के जल्द साथ आने की अटकलों को बल मिला है।
नागरिकता संशोधन विधेयक पर कॉन्ग्रेस के दबाव और कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से दुविधा में शिवसेना। उप मुख्यमंत्री और महकमों को लेकर जारी खींचतान से पिंड छुड़ाने के लिए क्या फिर भाजपा के पास लौटेंगे उद्धव ठाकरे?