दुनिया भर में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में अपनी भारी भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने आतंकवादी हमलों में नियमित रूप से भाग लिया। 2017 के लंदन ब्रिज हमले में हमलावरों में से एक, यूसुफ ज़ाग्बा को तबलीगी जमात से जुड़ा था। 2005 में लंदन बम धमाकों को अंजाम देने वाले 7/7 आतंकवादियों के सरगना मोहम्मद सिद्दीकी खान और सहयोगी शहजाद तनवीर को भी तबलीगी जमात से जुड़ा था।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजामुद्दीन क्षेत्र में कई कोरोना मरीजों के मस्जिद में छिपे मिलने वाली घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये फाल्ट-फाइंडिंग का समय नहीं है बल्कि जल्द से जल्द एक्शन लेने का वक़्त है।
निजामुद्दीन में मिले विदेशियों ने वीजा नियमों का भी उल्लंघन किया है, ऐसा गृह मंत्रालय ने बताया है। यहाँ तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम में न सिर्फ़ सैकड़ों लोग शामिल हुए बल्कि उन्होंने एम्बुलेंस को भी लौटा दिया था। इन्होने सतर्कता और सोशल डिस्टन्सिंग की सलाहों को भी जम कर ठेंगा दिखाया।
डॉक्टर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन ने नोटिस जारी किया हैं। नोटिस में बताया गया है कि जो भी मरीज या लोग 12 मार्च से 20 मार्च के बीच इस मोहल्ला क्लीनिक में इलाज कराने आए हो वो अगले 15 दिन तक अपने घर में ही क्वारनटीन रहें।
वाइस प्रिंसिपल से संतुष्टीपूर्ण जवाब न मिलने पर डॉक्टरों ने एक बार फिर से पीपीई किट के लिए दबाव डाला। इसके जवाब में उन्होंने डॉक्टरों को ड्यूटी पर आने के लिए मना कर दिया।
हाल ही में पंजाब के मोगा से 390 टन खाद्य पदार्थों को एक पार्सल स्पेशल ट्रेन के जरिए असम के चंगसारी पहुँचाया गया। इनमें डेयरी प्रोडक्ट्स और नूडल्स सहित कई अन्य चीजें शामिल थीं। रेलवे ने जनता को जागरूक करते हुए बताया है कि भारतीय रेल सेवा कभी युद्धकाल में भी नहीं रुकी, ऐसे में वो स्थिति की गंभीरता को समझें और घरों में ही रहें।
मौलवी ने कहा कि अल्लाह ने अगर मदद नहीं की तो कोरोना सब कुछ ख़त्म कर देगा। उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पूरे देश में लॉकडाउन पर विचार करने से इनकार कर दिया है। उन्हें अर्थवयवस्था की चिंता सता रही है। वो पहले भी कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान में लॉकडाउन हुआ तो खाने के लाने पड़ जाएँगे।
कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर इंद्रनील ख़ान को रातोंरात पुलिस उठा कर ले गई और उन्हें हिरासत में रख लिया। कहा जा रहा है कि सरकार की खामियों को उजागर करने की उन्हें सज़ा दी गई है। चीन में जिन भी डॉक्टरों या प्रबुद्ध जनों ने कोरोना वायरस को लेकर आवाज़ उठाई थी, उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
जब क्वारंटाइन सेंटर में सभी तबलीगी जमातियों का टेस्ट किया जा रहा था तो उनमें से एक प्रचारक ने क्वारंटाइन से बचने के लिए पुलिस ऑफिसर SHO अशरफ मलिक माखी पर चाकू से हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। हालाँकि हमलावर को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में स्वाबी जिले से पुलिस ने पकड़ लिया गया।