हम आपकी आजादी का सम्मान करते हैं। लेकिन, नहीं चाहते कि यह आजादी उन टुच्चों को भी मिले जो आपके कंडोम प्रेम की अफवाहें फैलाते रहते हैं। बस यही हमारे और आपके बीच का फर्क है। और यही भक्त और लिबरल होने का भी फर्क है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें भी कई पाकिस्तानी नंबरों से फोन आए थे। कुछ सही मायने में कश्मीर में रिश्तेदारों की खैरियत के बारे में पूछताछ करते हैं, लेकिन कुछ पाकिस्तानी सिर्फ गालियाँ देने और...
"स्थानीय कश्मीरियों को भी इस बात की खबर नहीं है कि सेना लोगों को डराने के लिए युवकों को यातनाएँ दे रही है। आखिर कैसे कुछ कार्यकर्ता दिल्ली के 5 सितारा होटल में बैठकर इस संबंध में जानकारी जुटा रहे हैं?"
जम्मू-कश्मीर में स्थिति को क़ाबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती कर रखी है। घाटी में माहौल ख़राब करने की आशंका के चलते कई नेताओं को नज़रबंद भी किया गया है। हालाँकि, जम्मू-कश्मीर में अब धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं।
डर का माहौल बनाने और लोगों को गुमराह करने के लिए पाकिस्तान ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद-370 को रद्द करने और जम्मू-कश्मीर के विभाजन के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का सहारा भी लिया।
आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से डोभाल ने जम्मू-कश्मीर में ही डेरा डाल रखा था। उनके दिल्ली लौटने के बाद जम्मू-कश्मीर के मसले पर यह पहली शीर्ष बैठक है।
दो बीएसएनएल कर्मचारियों के निलंबन के बाद यह सवाल फिर से उठने लगा है कि पाकिस्तान परस्त अलगाववादियों का नेक्सस कितना बड़ा है और इसमें किस-किस स्तर के लोग शामिल हैं? रणनीतिक मामलों के जानकार दिव्य कुमार सोती ने निलंबित कर्मचारियों के 'इस्लामिक लिंक' की जाँच कराने की माँग की है।
एक ट्विटर यूजर ने शाह फैसल की ओर इशारा करते हुए पूछा कि अगर शेहला के 'तुर्की बॉस' को गिरफ़्तार किया जा सकता है तो फिर उसे क्यों नहीं? शेहला फिलहाल आईएएस से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्थापित होने की कोशिश कर रही हैं।
शेहला के दावों को खारिज करते हुए सेना ने कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं। जम्मू के डिविजनल कमिश्नर कहा है कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।