जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार का फैसला संवैधानिक प्रावधानों के तहत ''व्यापक अनुसंधान" के बाद लिया गया है और यह किसी भी कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।
ट्वीट में शेहला ने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।
"पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने ‘फॉरवर्ड पॉलिसी’ अपनाई जिसमें कहा गया कि हमें एक-एक इंच चीन की ओर बढ़ना चाहिए। कार्यान्वयन के दौरान यह ‘बैकवर्ड पॉलिसी’ बन गई। यही वजह है कि अक्साई चीन पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में है। उसके जवान डेमचोक ‘नाला’ तक पहुँच गए।"
दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जल्दी ही कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।
गफूर ने ट्विटर पर लोगों से सस्पेंड एकाउंट्स के बारे में जानकारी माँगी। इसके बाद पाकिस्तानी लोगों ने कई भारत-विरोधी हैंडल्स के सस्पेंड होने की बात बताई। तलत नामक महिला ने बताया कि पिछले 2 दिनों के भीतर उसके 4 एकाउंट्स सस्पेंड किए गए हैं।
"जम्मू-कश्मीर में विकास के लिए आर्टिकल 370 के प्रावधान खत्म किए गए हैं। हमारा पड़ोसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दरवाजे खटखटा रहा है और कह रहा है कि भारत ने गलती की है। पाकिस्तान से बात तभी होगी जब वह आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करेगा।"
वामपंथी एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने सोशल मीडिया में वायरल हुए अपने लीक ईमेल में भी कपिल काक, जस्टिस शाह के बारे में बात की है। लीक मेल में जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिला विशेष दर्जा हटने के विरोध की रणनीति का ब्यौरा मौजूद है।
खुसरो की कविताओं से पहले कल्हण की राजतरंगिणी को याद करना जरूरी है, जिसमें कश्मीर को 'कश्यपमेरू' बताया गया है। कहा जाता है कि महर्षि कश्यप श्रीनगर से तीन मील दूर हरि-पर्वत पर रहते थे। जहाँ आजकल कश्मीर की घाटी है, वहाँ अति प्राचीन प्रागैतिहासिक काल में एक बहुत बड़ी झील थी, जिसके पानी को निकाल कर महर्षि कश्यप ने इस स्थान को मनुष्यों के बसने योग्य बनाया था।
अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक कोई भी आम आदमी निजी हैसियत से ICJ में केस दायर नहीं कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद जो प्रतिबंध लगाए गए थे उन्हें चरणबद्ध तरीक़े से हटाया जाएगा। फ़िलहाल, जम्मू, रियासी ज़िले, सांबा, कठुआ और उधमपुर में 2G इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई है।