प्रोपेगैंडा वेबसाइट द वायर ने हिंदू विरोधी खबर को अंजाम देने की जल्दबाजी में न केवल झूठी खबर को फैलाया, बल्कि अपराध को जातिगत एंगल देकर लोगों को भड़काने का भी काम किया।
द वायर सरीखे एजेंडापरस्त मीडिया समूहों के लिए इस श्रेणी का गिरगिटनुमा विश्लेषण या दावा कोई नई बात नहीं है। प्रोपेगेंडा ही इनका एकमात्र उद्देश्य है भले उसके लिए स्क्रीन पर कुछ अनर्गल ही क्यों न परोसना पड़े।
बात यह है कि हर मामले में खास मजहब का लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?
द वायर के 'मनगढ़ंत' अध्ययन में बताया गया कि उन्होंने सोशल मीडिया के ट्रेंड्स का पिछले तीन महीने में विश्लेषण किया ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया पर अफवाहों को कैसे बढ़ाते हैं।
द वायर ने मेडिकल रिपोर्ट के तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है। सेक्शन 16 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान को डॉक्टर का वर्जन बताकर निष्कर्ष निकाला है कि बलात्कार हुआ था।