नरेंद्र मोदी ने गुजरात में 4 और केंद्र में 2 सरकारें चलाई हैं, ऐसे में ये उनके लिए 7वीं सरकार होगी। क्या जो हिन्दुओं के कोर एजेंडे हैं उन सब पर काम करने में वो सफल होंगे? ये सब इस पर निर्भर करता है कि गठबंधन साथी उनका कितना साथ देंगे।
हैरानी की बात ये है कि जिस राम मंदिर को लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी की जीत की गारंटी माना जा रहा था, उसी अयोध्या में बीजेपी को हार का मुँह देखना पड़ा, वो भी उस पार्टी के खिलाफ, जिसके दामन पर राम भक्तों के खून के छींटे पड़े।
जब वहाँ पहली बार नौका सेवा प्रारंभ की गई तो स्थानीय नाविकों ने इसका बहिष्कार कर दिया। फिर केरल से नाविकों को बुलाना पड़ा। ईसाइयों ने शिलालेख फेंक दिया था।
स्वामी विवेकानंद का संन्यासी जीवन से पूर्व का नाम भी नरेंद्र था और भारत के प्रधानमंत्री भी नरेंद्र हैं। जगह भी वही है, शिला भी वही है और चिंतन का विषय भी।