लोकसभा चुनाव से पहले AAP और कॉन्ग्रेस चुनाव पूर्व गठबंधन बनाने के लिए बातचीत कर रहे थे। केजरीवाल तो गिरगिराने तक की सीमा पार कर कॉन्ग्रेस से जुड़ने को तैयार थे लेकिन...
बीजेपी नेता मिश्र प्रखर राष्ट्रवादी और कट्टर हिंदूवादी छवि वाले नेता माने जाते हैं। हाल ही में इन्होंने एक कार्यकर्ता की हत्या को लेकर भीड़ को संबोधित करते हुए समुदाय विशेष अल्पसंख्यकों पर हमला किया था। जिसके बाद से ही इनके पास धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए थे।
एक तरफ जहाँ बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि (17 नवंबर) को सरकार बनाने की बात सामने आ रही है वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि सरकार बनने में अभी वक्त लगेगा।
कृषि राज्य मंत्री के साथ सांसद हनुमान बेनीवाल भी थे। कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के निशाने पर बेनीवाल ही थे। उन्होंने हाल ही में राज्य के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यदि शिवसेना को हमारा समर्थन चाहिए तो उसे बीजेपी के साथ सारे रिश्ते तोड़ने का ऐलान करना होगा। और अब अरविंद सावंत के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के ऐलान के साथ ही यह साफ हो गया है कि शिवसेना ने एनडीए छोड़ने का मन बना लिया है।
कॉन्ग्रेस विधायकों ने सर्वसम्मति से शिवसेना को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) को एक पत्र प्रस्तुत करने की योजना बना रही है। राजस्थान में कॉन्ग्रेस की मीटिंग में...
त्रिपुरा के अंतिम राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य ने 28 अप्रैल, 1947 को एक शाही फ़रमान जारी करके त्रिपुरा की तत्कालीन रियासत को भारतीय संघ में विलय करने का फ़ैसला किया था। उन्हीं की याद में भाजपा की सरकार ने...
कॉन्ग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव और अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडीशा और सिक्किम के विधानसभा चुनावों में प्रचार अभियान के लिए 820 करोड़ रुपए खर्च किए थे। यह आँकड़ा 2014 में पार्टी द्वारा आम चुनाव के दौरान खर्च किए गए 516 करोड़ रुपए से कहीं ज्यादा है।
"सभी कॉन्ग्रेस विधायक एकजुट हैं। कोई भी विधायक पार्टी से अलग नहीं होगा। पार्टी हाईकमान के आदेश का विधायक पालन करेंगे। उन्होंने कहा, “हम बीजेपी को राज्य में सरकार बनाने नहीं देंगे राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) हमारी सहयोगी है, वे हमारे साथ हैं।"
शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि वो महाराष्ट्र के राज्यपाल से मिल चुके हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के रामदास अठावले भी राज्यपाल से मिल चुके हैं। अगर अब बीजेपी नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा करने जा रहे हैं, तो उन्हें सरकार बनानी चाहिए।