लोग इस मामले में बात छिपा रहे हैं कि बिमल जालान को सरकार में लाने वाले मोदी नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी हैं। 1970 के दशक में इंदिरा गाँधी ने 4-5 उभरते हुए आर्थिक और सार्वजनिक नीति (पब्लिक पॉलिसी) के विद्वानों को सरकारी तंत्र का हिस्सा बनाया था।
“हम प्री-फिल्ड आईटी रिटर्न की तरफ बढ़ रहे हैं। हमारी अर्थव्यवस्था का मोमेंटम खत्म नहीं हुआ है। हमारे लिए ग्रोथ का एजेंडा सबसे ऊपर है। इसके साथ ही ESIC मे भी राहत का ऐलान किया है। अधिग्रहण-विलय के लिए आसानी से अनुमति मिल रही है।"
आरबीआई की रिपोर्ट 'बेंचमार्किंग इंडियाज पेमेंट सिस्टम्स' में कहा गया है कि पिछले 4 साल में भारत में खुदरा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान में 50% से ज्यादा का इजाफा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) में जबरदस्त बढ़ोतरी के कारण मुख्य रूप से 2018-19 में इसमें इजाफा हुआ है।
IMF का कहना है कि चूँकि भारत देश ने पिछले 5 सालों में आर्थिक मोर्चे पर कई सारे अहम बदलाव किए हैं, इसलिए भारत हर साल 7% से ज्यादा की विकास दर से आगे बढ़ रहा है। GDP में वृद्धि की वजह से भारत, आने वाले सालों में अच्छी प्रगति कर सकता है।
रोजगार के मामले में अगर NDA के तीन वर्ष के शासनकाल और UPA-2 के पिछले तीन वर्षों के कार्यकाल की तुलना करें तो पता चलता है कि मोदी के शासनकाल में रोजगार में दोगुनी दर से वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि पहले इस प्रकार की धारणा बनाई गई थी कि सरकारें एक ही समय विकासोन्मुखी तथा गरीबोन्मुखी नहीं हो सकतीं, लेकिन भारत के लोग अब इसे संभव बना रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था निगरानी (ग्लोबल इकोनॉमी वॉच) रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष (2019 में) ब्रिटेन की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 1.6%, फ्रांस की 1.7% जबकि भारत की 7.6% रहने की सम्भावना है।