20 साल लग गए, 200 चीतों की मौत हुई और 9 बार विफलता हाथ लगी - लेकिन, दक्षिण अफ्रीका ने कर दिखाया। भारत के 'प्रोजेक्ट चीता' का मजाक नहीं उड़ाइए। इससे जुड़ी चुनौतियों को समझिए।
केरल में जन्मे शंकराचार्य ने बाल्यावस्था में ही गृह-त्याग कर के ओंकारेश्वर में शरण ली थी। मान्यता है कि वो 4 वर्षों तक यहाँ रहे थे। 12 वर्ष की उम्र में यहाँ से किया था प्रस्थान।