अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी की लोकप्रियता और कार्यक्रम की सफलता महबूबा के गले नहीं उतर रही है। वे भी इस कार्यक्रम पर तीखी टिप्पणी से बाज नहीं आईं।
"चूँकि अर्थव्यवस्था मंदी की स्थिति में थी, इसलिए सरकार ने लोगों को इस मुद्दे से भटकाने के लिए ये कदम उठाया। सरकार को यह दिखाना था कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में 100 दिन के अंदर अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया।"
"मोदी सरकार के इस कदम से साफ हो गया है कि राष्ट्र विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए देश में कोई जगह नहीं है। जन संघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू- कश्मीर में एक संविधान और एक विधान को लेकर जो संघर्ष किया उनका पक्ष आखिरकार सही साबित हुआ है और नेहरू और शेख अब्दुल्ला गलत साबित हुए हैं।"
बीजेपी में शामिल होने के बाद इनायत अली ने कहा, "दो सालों में आप बदलाव देखेंगे। कई लोग जो भाजपा का आज विरोध कर रहे हैं, वे पार्टी को ज्वाइन करेंगे। उनके पास हमारे साथ आने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।"
महबूबा मुफ्ती को चश्मे शाही में रखा गया है। उनके बारे में पता चला है कि वो अपना समय किताबें पढ़कर काट रही हैं। इसके अलावा प्रशासन की ओर से उन्हें पास के मुगल गार्डन में टहलने की अनुमति मिली हुई है।
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद ने एक वॉयस नोट जारी करते हुए बोला कि उनकी माँ महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें भी अपने ही घर में नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने अमित शाह से कहा कि...
महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ की गई तो J&K में कोई तिरंगे को कंधा देने वाला भी नहीं बचेगा। पिछले 3 साल में 700 आतंकियों को कन्धों की ज़रूरत पड़ चुकी है, वो भी चार-चार। समय बदल गया है। ब्लैकमेलिंग का ज़माना गया।
महबूबा के साथ विवाद के दौरान उमर उन पर चिल्ला पड़े। उन्होंने महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर भाजपा के साथ 2015 में गठबंधन करने का आरोप मढ़ा। महबूबा ने भी उमर को याद दिलाया कि किस तरह से उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा का साथ दिया था।
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद इन नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं हैं। सुरक्षा के लिहाज से यहाँ इंटरनेट कनेक्शन और मोबाइल सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। साथ ही धारा 144 भी लागू है।
मुराद ने कहा है कि मुफ़्ती और अब्दुल्ला ने देश की सरकार के ख़िलाफ़ जनता को भड़काते हुए 370 हटाने का विरोध किया। उनके मुताबिक, "इन नेताओं ने देश के अन्य राज्यों के लोगों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने देश की एकता और अखंडता चोट पहुँचाई है।"