इसके अलावा 600 किलोग्राम वजनी एक और पीतल का घंटा एराल रामकृष्ण नादर बर्तन व्यापारी की दुकान पर तैयार की जा रही है। इसी तरह आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों से भी अयोध्या के राम मंदिर में घंटे लगाए जाएँगे।
एक एनजीओ जिसका नाम शायद ही किसी ने सुना हो वह रथ यात्रा के विरोध में बड़े वकील किसके दम पर खड़ा कर लेता है। क्या ये NGO नक्सलियों या फिर ईसाई मिशनरियों द्वारा बनाया गया है?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथपुरी में होने वाली वार्षिक रथयात्रा पर इस साल कोरोना वायरस संक्रमण के कारण रोक लगा दी है। इसके बाद से ही हिन्दुओं में आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब अनलॉक के तहत सारी चीजें खुल ही रही हैं तो फिर रथयात्रा पर रोक क्यों?
इस यात्रा ने सत्ता में भाजपा को स्थापित करने के बीज बोए। आज उसकी जड़ें इतनी फैल गई हैं कि जो नेहरू कभी राम को बेदखल करने पर अमादा थे, आज उनकी ही राजनीति के वारिस मंदिर-मंदिर प्रदक्षिणा को मजबूर हैं। बाकायदा मुनादी की जाती है उनके जनेऊधारी हिन्दू होने की।
इस वीडियो को पुरी के एसपी ने ख़ुद ट्विटर पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “1200 वॉलिंटियर्स, 10 संगठनों और घंटों की मेहनत के बाद रथयात्रा 2019 के दौरान ऐम्बुलेंस की सरल संचालन के लिए ह्युमन कॉरिडोर बनाना संभव हो पाया।”
स्टिंग ऑपरेशन में यह खु़लासा हुआ है कि ज़मीनी स्तर पर कोई खास इंटेलीजेंस इनपुट नहीं था, जिसके आधार पर रथ यात्रा पर रोक लगाने की बात को वाजिब ठहराया जा सके।