Saturday, February 14, 2026
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मंदिर-घर-संपत्ति सबको इस्लामी कट्टरपंथी बना रहे निशाना, पर मुस्लिमों से ही पूछकर वॉयस ऑफ अमेरिका ने हिंदुओं को बताया सुरक्षित: अब इसी सर्वे को दिखा प्रोपेगेंडा कर रही बांग्लादेशी मीडिया

ऐसा लग रहा है मानो इस सर्वे में अल्पसंख्यकों से ही पूछा गया होगा कि उन्हें बांग्लादेश में सुरक्षित लगता है या नहीं। लेकिन खबर के अंदर देखने पर पता चलेगा कि ये सर्वे का निष्कर्ष भी बांग्लादेश की बहुसंख्यक आबादी यानी मुस्लिमों से पूछकर दिया गया है।

बांग्लादेश में एक तरफ हिंदुओं के खिलाफ हिंसा खत्म होने का नाम नहीं ले रही, चुन-चुनकर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, हिंदू नेताओं पर ईशनिंदा के केस लगाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ बांग्लादेश का मीडिया दुनिया के सामने अलग माहौल बनाने में लगा है जहाँ ये बताया जा रहा है कि मुहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेशी अल्पसंख्यक अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

नीचे कुछ बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट की हेडलाइन देख सकते हैं। इनमें वॉयस ऑफ अमेरिका के सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया है कि सर्वे बता रहा है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में अल्पसंख्यक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

हेडलाइन से बिलकुल ऐसा लग रहा है मानो इस सर्वे में अल्पसंख्यकों से ही पूछा गया होगा कि उन्हें बांग्लादेश में सुरक्षित लगता है या नहीं। लेकिन खबर के अंदर देखने पर पता चलेगा कि ये सर्वे का निष्कर्ष भी बांग्लादेश की बहुसंख्यक आबादी यानी मुस्लिमों से पूछकर दिया गया है।

ढाका ट्रिब्यून हो या डेली स्टार, सबने अपनी रपोर्ट में वॉयस ऑफ अमेरिका (VOA) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि, बांग्लादेश में अधिकांश लोग मानते हैं कि अंतरिम सरकार धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को पिछले अवामी लीग सरकार की तुलना में अधिक सुरक्षा प्रदान कर रही है।

दिलचस्प बात ये है कि अक्टूबर के अंत में किए गए इस सर्वे में 1,000 लोगों ने भाग लिया था, जिनमें से 92.7% मुस्लिम ही थे। सोचिए, अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में मुस्लिमों से पूछा गया कि अल्पसंख्यक उनके देश में कैसा महसूस करते हैं।

नतीजे आए कि 64.1% का मानना है कि वर्तमान अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को बढ़ा रही है। इसके विपरीत, केवल 15.3% उत्तरदाताओं ने कहा कि स्थिति पहले से खराब हुई है, जबकि 17.9% ने महसूस किया कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। सर्वेक्षण में शामिल मुसलमानों का केवल 13.9% हिस्सा मानता है कि यूनुस सरकार के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा स्थिति खराब हुई है। इसके विपरीत, गैर-मुसलमानों में से 33.9% ने कहा कि स्थिति पहले से खराब हो गई है।

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में एक तरफ मीडिया ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ जैसे सर्वेक्षणों के नतीजों के जरिए प्रोपगेंडा रच रहा है और दूसरी तरफ हिंदू अपने हालातों पर रोते-बिलखते दिख रहे हैं। उनकी आवाज उठाने को कोई नहीं है। ये जिस युनूस सरकार के राज में अल्पसंख्यकों के साथ इंसाफ की बातें मुस्लिम कर रहे हैं उसी सरकार के आने के बाद हिंदुओं के साथ बांग्लादेश में तमाम घटनाएँ हुईं।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने न केवल उनके घरों को जलाया, उनके सामानों को लूटा बल्कि उनकी महिलाओं से बदसलूकी की, उनके देवी-देवताओं का अपमान किया और कई जगह हत्या जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया गया। इतने से जब मन नहीं भरा तो हिंदुओं को रैली करता देख भी कट्टरपंथी भड़क गए। उन्होंने कुछ दिन पहले ही बांग्लादेशी झंडे के अपमान का आरोप लगाकर हिंदू नेता कृष्ण दास को गिरफ्तार करवा दिया। फिर उनपर ईशनिंदा का आरोप लगाया और उन्हें देशद्रोह के इल्जाम में जेल में डाल दिया।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति इतनी बदतर है कि सोशल मीडिया पर हिंदुओं की तमाम वीडियो है जिसमें वो रो रोकर मदद माँगने को मजबूर हैं। युनूस सरकार के आने के बाद भी कई हिंदू महिलाओं की रोती-बिलखती वीडियोज सामने आईं थी। बड़े-बड़े कलाकार इसलिए निशाना बनाए गए क्योंकि वो हिंदू थे। उनके घरों को तबाह कर दिया गया, उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। और, जब बात उन्हें इंसाफ देने की आई तो युनूस सरकार ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वो छात्र आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे। इतने पर भी मीडिया ये फैला रहा है कि युनूस सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षित माहौल दे रही है

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