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डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने अमेरिका की वैश्विक साख को ‘गटर’ में पहुँचाया: US के पूर्व NSA जेक सुलिवन, कहा – दशकों की मेहनत पर फिरा पानी, बीजिंग के करीब जा रहा भारत

एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी ट्रम्प की नीतियों को 'उलझा हुआ' बताया। उन्होंने ट्रम्प को 'असामान्य राष्ट्रपति' कहा और सुझाव दिया कि उनके बचे हुए कार्यकाल में द्विपक्षीय रिश्तों को और नुकसान से बचाने की कोशिश होनी चाहिए।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इन टैरिफ ने अमेरिका की वैश्विक साख को ‘गटर में’ पहुचा दिया है। सुलिवन ने चेतावनी दी कि ये कदम भारत को चीन के करीब ले जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों की मेहनत से बनी रणनीतिक साझेदारी खतरे में पड़ गई है।

सुलिवन ने ‘द बुलवर्क पॉडकास्ट’ में टिम मिलर से बात करते हुए कहा कि ट्रंप की नीतियों ने अमेरिका को अपने सहयोगियों के लिए ‘भरोसेमंद साथी’ की बजाय ‘बड़ा बाधक’ बना दिया है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के नेता अब अमेरिका से दूरी बनाने की बात कर रहे हैं।

सुलिवन ने कहा, “पहले अमेरिका को स्थिर और भरोसेमंद माना जाता था, लेकिन अब कई देशों में चीन की साख बढ़ गई है। लोग कह रहे हैं कि अमेरिका की छवि खराब हो चुकी है और चीन ज़िम्मेदार खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।”

भारत पर बात करते हुए सुलिवन ने कहा कि अमेरिका ने सालों तक भारत के साथ गहरे और टिकाऊ रिश्ते बनाने की कोशिश की, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए। लेकिन ट्रंप के 50% टैरिफ (25% रूस से तेल खरीदने की सजा) की वजह से भारत अमेरिका से इतर भी सोच रहा है।

सुलिवन ने कहा, “भारत अब सोच रहा है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए हमें बीजिंग जाकर चीन के साथ बात करनी पड़ रही है।” ये टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गए हैं और इससे भारत के टेक्सटाइल, ज्वैलरी और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में नौकरियों और विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

सुलिवन ने ये भी बताया कि भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिशें दोनों पार्टियों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) ने मिलकर की थीं, लेकिन ट्रंप की नीतियों ने इसे नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी को खोना अमेरिका के लिए बड़ा नुकसान होगा, खासकर जब भारत को चीन के खिलाफ एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखा जाता है।

इसके अलावा, एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी ट्रंप की नीतियों को ‘उलझा हुआ’ बताया। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते अभी ‘बुरे दौर’ में हैं।

बोल्टन ने सवाल उठाया कि जब चीन भी रूस से तेल खरीदता है, तो सिर्फ भारत को ही 25% अतिरिक्त टैरिफ की सजा क्यों दी जा रही है? उन्होंने ट्रंप को ‘असामान्य राष्ट्रपति’ कहा और सुझाव दिया कि उनके बचे हुए कार्यकाल में द्विपक्षीय रिश्तों को और नुकसान से बचाने की कोशिश होनी चाहिए।

जेफ़रीज़ की एक रिपोर्ट ने भी कहा कि टैरिफ की एक वजह ट्रंप की नाराज़गी है, क्योंकि भारत ने उन्हें भारत-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता करने से मना किया था। साथ ही, भारत के कृषि क्षेत्र को आयात से बचाने की नीति भी टैरिफ का कारण बनी। भारत ने इन टैरिफ को ‘अनुचित और गलत’ बताया है।

सुलिवन और बोल्टन जैसे विशेषज्ञों की चेतावनी साफ है कि ये टैरिफ न सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि भारत को चीन के करीब धकेल रहे हैं, जो अमेरिका के लिए रणनीतिक तौर पर बड़ा झटका हो सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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