उत्तर प्रदेश के बरेली में जुमे की नमाज के बाद 26 सितंबर 2025 को ‘I Love Muhammad’ को लेकर फिर हिंसा हुई है। यह देश भर के कई शहरों में जारी इस्लामी कट्टरपंथियों के हिंसक प्रदर्शनों की बस एक झलक भर है।
कानपुर से एक मनगढ़ंत कहानी के आधार पर ‘I Love Muhammad’ को लेकर शुरू हुए बवाल के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने अपनी आक्रामकता साबित करने के लिए पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ का सहारा लिया है तो हिंदुओं की तरफ से उसका उत्तर सिर्फ ‘I Love Mahadev’ है।
कानपुर से शुरू हुए ‘I Love Muhammad’ के बवाल को लेकर गुजरात के गोधरा, उत्तर प्रदेश के उन्नाव, कर्नाटक के देवानगेरे और उत्तराखंड के काशीपुर समेत देश के कई शहरों में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंसक प्रदर्शन किए हैं।
मुस्लिमों का आक्रामकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस को कई राज्यों में 1300 से ज्यादा मुस्लिमों के खिलाफ FIR दर्ज करनी पड़ी है और करीब 40 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। हिंसा का आलम यह है कि गुजरात के गाँधीनगर में तो ‘I Love Mahadev’ का स्टेट्स लगाने पर एक हिंदू की कट्टरपंथियों की भीड़ ने बेतहाशा पिटाई कर दी है।
इस हिंसा, पथराव के जवाब में हिंदुओं ने वही रास्ता चुना जो वो हमेशा से चुनते आए हैं, शांति का रस्ता, आदियोगी का रास्ता, ‘I Love Mahadev’ का रास्ता। देश के अलग-अलग शहरों में संत समाज समेत सामान्य लोग ‘I Love Mahadev’ के पोस्टर लगा रहे हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में कई साधु-संत यह पोस्टर पकड़े नजर आए।
वाराणसी के अलावा देश के कई शहरों में भी यह ट्रेंड दिखा है। कहीं चौराहे पर ‘I Love Mahadev’ के पोस्टर लगाए हए हैं तो कहीं गलियों में बड़े-बड़े बैनर लगे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को देखे तो साफ पता चलता है कि यह लड़ाई इन दो नारों से अधिक दो विचारधाराओं की हैं। एक तरफ हिंसा, आक्रोश और उन्माद का है, तो दूसरी तरफ सहिष्णुता, श्रद्धा और शांति का रास्ता है। हिंदुओं का रास्ता ही असल में भारत की सहिष्णुता, शिवत्व और एकात्मता का रास्ता है।
जब कट्टरपंथी ‘I Love Muhammad’ के नाम पर समाज में डर और आतंक फैलाने की कोशिश कर रहे थे, तब साधु-संतों और युवाओं ने ‘I Love Mahadev’ लिखकर यह दिखाया कि यह देश किसी एक धर्म का बंधक नहीं है। यहाँ हर कोई अपनी आस्था रख सकता है लेकिन इसकी शर्त यही है कि वह दूसरों पर खुद की आस्था को ना थोपे।
हिंदुओं के इस जवाबी अहिंसक आंदोलन का एक पहलू यह भी है कि यह हिंदुओं की एकता का प्रतीक भी है। सोशल मीडिया से लेकर गलियों और चौक-चौराहों तक जिस तरह ‘I Love Mahadev’ का संदेश फैल रहा है और लोग इसे अपनी पहचान और संस्कृति के गर्व के रूप में अपना रहे हैं। यह दिखाता है कि जब-जब सनातन संस्कृति को मजबूती की जरूरत होती है तब समाज एकजुट होकर खड़ा हो जाता है।
भारत का बहुसंख्यक हिंदू समाज अपनी सहिष्णुता से दिखा रहा है कि चार पत्थर लेकर किसी पर हमला कर देना असली ताकत नहीं है। असली ताकत शांति के साथ समाज की चेतना को जागृत करने में ही है।


