दरअसल चुनावों में लगातार हो रहे हार से कॉन्ग्रेस के नेता और कार्यकर्ता हताश हैं। नेतृत्व की नाकामियों पर अब खुलकर बोलने के लिए मजबूर हो गए हैं। राहुल गाँधी की जमीनी कार्यकर्ताओं से ‘दूरी’ पर अब कॉन्ग्रेस के नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। साथ ही पार्टी का नेतृत्व बुजुर्ग खरगे के हाथों से लेकर युवा हाथों में देने की माँग कर रहे हैं।
कॉन्ग्रेस को ‘ऑपन हार्ट सर्जरी’ की जरूरत- मोकिम
ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम ने कहा कि पार्टी को एक ऑपन हार्ट सर्जरी की जरूरत है। हाल ही में पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को उन्होंने एक तीखा पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक पतन, नेतृत्व की नाकामियों और तत्काल सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया है।
मोकिम ने चेतावनी दी है कि पार्टी बाहरी विरोधियों की वजह से नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर लिए गए फैसलों की वजह से अपनी विरासत खो रही है।
दरअसल कॉन्ग्रेस में खलबली मची हुई है। पार्टी अपने ही जमीनी कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने में नाकाम दिख रही है। पंजाब और कर्नाटक में भूचाल के बाद अब ओडिशा से बवंडर उठने लगा है। बाराबाती कटक के पूर्व एमएलए ने पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर न सिर्फ राहुल गाँधी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने की माँग भी कर डाली है।

तीन साल तक राहुल गाँधी से मिलने की कोशिश की- मोकिम
कॉन्ग्रेस नेता मोकिम ने कहा है कि आंतरिक फैसलों से पार्टी को नुकसान पहुँचा है। राहुल गाँधी पर आरोप लगाते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि अपनी विरासत बाहरी विरोधियों के कारण नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लिए गए फैसलों के कारण कमजोर हुई है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि विधायक होने के बावजूद, वह करीब 3 वर्षों तक राहुल गाँधी से मिलने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिल पाए। दरअसल राहुल गाँधी से मिलना उनके ‘पहुँच’ से बाहर था। कॉन्ग्रेस नेता के मुताबिक, राहुल से मिलने में नाकामी ये दिखाता है कि केंद्रीय नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच कितनी बड़ी खाई है।

मोकिम ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र पर भी टिप्पणी की और कहा कि पार्टी मौजूदा नेतृत्व में देश के युवाओं से जुड़ने में असमर्थ है। उन्होंने प्रियंका गांधी को नेतृत्व संभालने का ‘जिम्मा’ देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ये स्थिति पहले कभी नहीं रही। पार्टी कार्यकर्ताओं के हौसले टूट रहे हैं इसलिए नई लीडरशिप की जरूरत है। पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पहल कर नई लीडरशिप को आगे लाएँ, ताकि पार्टी में नई जान लाई जा सके।

इस पत्र से ओडिशा कॉन्ग्रेस के भीतर चल रहे आपसी खींचतान, कलह और असंतोष को भी उजागर किया गया है। उनका कहना है कि जब कोई नेता अपने ही विधानसभा में विश्वास मत हासिल नहीं कर पाता है, तो कार्यकर्ताओं का स्वाभाविक रूप से भरोसा कम हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता भाई-भतीजावाद से परेशान हैं।
पत्र में उन्होंने ओडिशा के अध्यक्ष भक्त चरण दास के खिलाफ हमला बोला है। तीन चुनाव हार चुके भक्तचरण दास को राज्य का नेतृत्व सौंप दिया गया। इतना ही नहीं वे ऐसी विचारधारा से जुड़े थे, जो कॉन्ग्रेस की कभी नहीं रही है।
अध्यक्ष के बेटे ने कोसल राज्य का समर्थन क्यों किया- मोकिम
उन्होंने ओडिशा से अलग कोसल राज्य बनाने की माँग का समर्थन करने पर प्रदेश अध्यक्ष के बेटे विधायक सागर पर भी हमले किए। उन्होंने दावा किया कि इससे पार्टी में अशांति पैदा हुई।
ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भक्त चरण दास की नियुक्ति फरवरी 2025 में हुई है। उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष की रेस में मोकिम भी शामिल थे।
राज्य के लोगों के घटते भरोसे के एक सबूत के तौर पर भक्त चरण दास के संसदीय क्षेत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नुआपाड़ा विधानसभा सीट पर फरवरी में उपचुनाव हुआ था, जिसमें कॉन्ग्रेस की शर्मनाक हार हुई। कॉन्ग्रेस यहाँ 83000 मतों से हारी। ये दिखाता है कि प्रदेश अध्यक्ष के गढ़ में भी जनता उन्हें पसंद नहीं करती है।
पार्टी का किसी मुद्दे पर स्टेंड साफ नहीं है। इससे हजारों जमीनी स्तर के कार्यकर्ता भ्रमित, दिशाहीन और निराश हैं। कई ईमानदार कार्यकर्ता इसकी वजह से पार्टी से किनारा कर चुके हैं।


