क्रिसमस के दौरान देश के कई हिस्सों में इस पार्टी के नाम पर चल रही गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। बीते कुछ दिनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से लगातार ऐसी खबरें आई हैं, जहाँ क्रिसमस कार्यक्रमों के दौरान धर्मांतरण के आरोप लगे, विरोध हुए और हालात तनावपूर्ण हो गए। कहीं लोगों को भोजन, इलाज या आर्थिक मदद का लालच देकर बुलाया गया, तो कहीं महिलाओं और बच्चों को हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काने की बातें सामने आईं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये आयोजन केवल मजहबी प्रार्थनाएँ थीं, या फिर इनके पीछे कोई एजेंडा काम कर रहा था? क्या गरीब, अशिक्षित और जरूरतमंद लोगों को उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है? हिंदू संगठनों का दावा है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि लोगों की मजबूरी का उनकी गरीबी और उनके लालच का फायदा उठाना है।
राजस्थान के बूंदी में बढ़ा तनाव
राजस्थान के बूंदी जिले में चित्तौड़ रोड के एक चर्च के बाहर उस समय तनाव फैल गया, जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धर्मांतरण की घटना का विरोध करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। संगठनों का कहना था कि चर्च में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मिशनरी गतिविधियों के तहत लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे और चर्च का घेराव कर नारेबाजी की।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस मौके पर पहुँची और समझा कर हालात पर काबू पाया और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि ऐसे कार्यक्रम नहीं रुके, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
बीकानेर में धर्मांतरण, 34 लोग हिरासत में
इसी तरह बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मोमासर गाँव में क्रिसमस की रात एक घर में चल रही मजहबी गतिविधि पर पुलिस ने दबिश दी। सूचना थी कि बाहर से आए लोग बाइबल पाठ और धर्मांतरण में शामिल हैं। पुलिस ने 34 लोगों को हिरासत में लिया और चार गड़िया जब्त की। प्रशासन यह जाँच कर रहा है कि यह सामान्य प्रार्थना सभाथी या सोची समझी धर्मांतरण की कोशिश।
मध्य प्रदेश के विदिशा में क्रिसमस कार्यक्रम में धर्मांतरण की कोशिश
मध्य प्रदेश के विदिशा में एक होटल में आयोजित क्रिसमस कार्यक्रम के दौरान धर्मांतरण की कोशिश की। संगठन का कहना था कि लोगों को खाना और अन्य सुविधाओं का लालच देकर बुलाया गया और बाइबल के जरिए ईसाई बनने के लिए प्रेरित किया गया। मंत्री सारंग ने कहा कि धर्मांतरण की कोशिशें पूरी नहीं हो पाएँगी। ऐसे लोगों पर कार्रवाई का जाएगी।
जबलपुर में दिव्यांग बच्चों का धर्मांतरण, विरोध के बाद मारपीट
वहीं जबलपुर के कटंगा में हवाबाग चर्च परिसर में दिव्यांग बच्चों के लिए आयोजित भोज कार्यक्रम के दौरान गुपचुप धर्मांतरण का कार्यक्रम चलाया जा रहा था। दोनों पक्षों में मारपीट हुई, कई लोग घायल हुए और पुलिस को सख्ती करनी पड़ी।
हरियाणा के फतेहाबाद में धर्मांतरण
हरियाणा के भूना शहर में क्रिसमस पर्व के दौरान धर्म परिवर्तन के आरोप लगने से तनाव की स्थिति बन गई। वार्ड नंबर 5 और 3 में आयोजित कार्यक्रमों का पड़ोसियों ने विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। एक स्थान पर कार्यक्रम रोकना पड़ा, जबकि दूसरे स्थान पर पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्वक कार्यक्रम संपन्न हुआ। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में किया और निवासियों ने धर्म परिवर्तन की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।
उत्तर प्रदेश के घरों में धर्मांतरण कार्यक्रम, मोहल्लों में विरोध
उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में क्रिसमस के दौरान घरों में आयोजित कार्यक्रमों में धर्मांतरण कराया जा रहा था, जिसका पड़ोसियों ने विरोध किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची। कहीं कार्यक्रम रोकने पड़े, तो कहीं पुलिस की मौजूदगी में उन्हें पूरा कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन घरों में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियाँ चल रही थीं और महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा था।
धर्मांतरण का वीडियो वायरल, महिला ने पोंछ दिया माँग का सिंदूर
धर्मांतरण के ऐसे ही एक खुलासे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में सुजीत मुखिया नाम के एक शख्स बताते हुए कह रहे है, “यहाँ पर जो भी महिलाएँ और बच्चियाँ दिख रहीं हैं इनलोगों का ऐसा माइंडवॉश किया गया है कि ये लोग कहते हैं कि हमारा जीवन परिवर्तन हो रहा है।” वे कह रहे हैं, “हमारे पंचायत में एक भी ईसाई समुदाय से नहीं हैं तो यहाँ चर्च हम नहीं चलने देंगे।”
पोछ दिए। हमारे पति को क्या हो गया। हम सिंदूर नहीं लगाएंगे। सिंदूर लगाने से क्या होता है।
— अ स अजीत (@JhaAjitk) December 25, 2025
ब्रेनवॉश का स्तर देखिए और कपार पीटिए। उम्मीद है इन मुखिया से और भी जन प्रतिनिधियों को प्रेरणा मिलेगी।
बाकी बिहार ऐसा प्रदेश है जहां कुएं में ही भांग मिला हुआ है। pic.twitter.com/QxzyXpK6ws
वह एक महिला से धर्मांतरण के नाम पर सवाल करते हैं कि ने सिंदूर क्यों लगाया है फिर, इस पर वह तुरंत अपना सिंदूर पोंछ लेती है। महिला कहती है, “पोछ दिए, पोछ दिए तो हमारे पति को क्या हो गया? सिंदूर लगाने से होता क्या है हम सिंदूर नहीं लगाएँगे”?
वे बाकि महिलाओं से सवाल करते हुए कहते हैं हम भी बड़े कष्ट में हैं क्या धर्मांतरण करने से हमारा कष्ट दूर हो जाएगा?” इस पर वे सब कहने लगती हैं कि हाँ दूर हो जाएगा। सुजित साफ-साफ कहते हैं कि वे यहाँ चर्च नहीं चलने देंगे और वे सभी को वहाँ से निकलने के लिए कहते हैं, लेकिन महिलाएँ अड़ी रहती हैं।
नजर अंदाज नहीं की जा सकती ये घटनाएँ
क्रिसमस के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई घटनाएँ अब महज गलतफहमी या स्थानीय विवाद कहकर टाली नहीं जा सकतीं। जब बार-बार एक ही पैटर्न सामने आए, जिसमें भोजन, इलाज, आर्थिक मदद या मनोरंजन के नाम पर लोगों को बुलाया जाए और फिर धर्मांतरण की घटनाएँ सामने आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। राजस्थान के बूंदी-बीकानेर से लेकर मध्य प्रदेश के विदिशा और जबलपुर तक और उत्तर प्रदेश के मोहल्लों तक हर जगह तस्वीर लगभग एक जैसी दिखाई देती है।
हिंदू संगठनों का आरोप है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग गरीब, महिलाएँ, बच्चे और दिव्यांग को निशाना बनाया जा रहा है। अगर यह सच है, तो यह धार्मिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि मजबूरी का शोषण है। धर्म वह होना चाहिए जिसे व्यक्ति बिना लालच, डर या दबाव के अपनाए। खाना, दवा या किसी अन्य सुविधा के बदले आस्था बदल वाना न सेवा है, न ही संवैधानिक अधिकारों की सही व्याख्या।
यदि आयोजन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के भीतर हैं, तो फिर विरोध और पुलिस कार्रवाई की नौबत क्यों आ रही है? बार-बार पुलिस का दखल, हिरासत और झड़पें इस बात का संकेत हैं कि जमीनी हकीकत कुछ और है।


