Homeविविध विषयअन्यहिंदुओं की मौत पर भी चुप्पी, मुस्तफिजुर रहमान के सिर्फ IPL से जाने पर...

हिंदुओं की मौत पर भी चुप्पी, मुस्तफिजुर रहमान के सिर्फ IPL से जाने पर छलका दर्द: जहाँ रोज मर रहे हिंदू, उस बांग्लादेशी खिलाड़ी के लिए आँसू बहा रहा लेफ्ट-लिबरल गैंग

मुस्तफिजुर रहमान को बाहर करने पर गुस्सा कई चीजों को अभिव्यक्त करता है। लेफ्ट-विंग इकोसिस्टम हर हाल में सवाल भारत से ही करता है। हिन्दुओं पर बांग्लादेश में हो रहे अत्याचार से भारत की प्रतिक्रिया भी उन्हें भारत की 'नैतिक पतन' लगती है।

3 जनवरी 2025 को लेफ्ट-विंग लिबरल इकोसिस्टम को मोदी सरकार के खिलाफ बोलने का एक और कारण मिल गया, जब बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिज़ुर रहमान को आने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन से रिलीज करने का निर्देश दिया।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हिंदुओं को अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद से टारगेटेड हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। बांग्लादेशी खिलाड़ी रहमान को शामिल किए जाने पर लोगों में काफी गुस्सा था। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बेकाबू इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं के घरों, मंदिरों पर हमला किया। हिन्दुओं की मॉब लिंचिंग हुई। इसके बाद बांग्लादेशी खिलाड़ियों को आईपीएल की टीम में सेलेक्शन का विरोध हुआ और बैन करने की माँग उठने लगी।

BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने कन्फ़र्म किया कि बोर्ड ने KKR को अपने फैसले के बारे में ऑफ़िशियली बता दिया था और अगर फ़्रैंचाइज़ी चाहे तो उसे रिप्लेसमेंट खिलाड़ी साइन करने की इजाज़त दे दी थी। KKR ने बाद में साफ़ किया कि उसने मुस्तफ़िज़ुर रहमान को अपनी टीम से रिलीज कर दिया है।

हिन्दुओं पर अत्याचारों की वजह से लोगों का गुस्सा

शेख हसीना को हटाए जाने के बाद लगातार भारत-बांग्लादेश के रिश्ते खराब होते जा रहे हैं, लेकिन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग और ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा कर लगातार हिंदुओं पर हो रहे हमलों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। ये घटनाएँ धार्मिक ज़ुल्म के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा थीं, जिसे बांग्लादेशी सरकार पूरी तरह से रोकने में नाकाम रही है।

NDTV की गार्गी रावत ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया: “सोचिए कि इससे हमारे पड़ोसी बांग्लादेश को कैसा मैसेज जाएगा। संगीत सोम ने अपने घरेलू दर्शकों के लिए पॉइंट्स बनाए होंगे, लेकिन इससे भारत की डिप्लोमेसी और रिश्तों को नुकसान होगा।”

राम गुहा, जो खुद को इतिहासकार बताते हैं और जिन्हें फैक्ट्स को तोड़-मरोड़कर पेश करने और कहानी गढ़ने का हुनर ​​है, ने बीसीसीआई के फैसले को ‘बहुत ही बेवकूफी भरा’ बताया। उन्होंने कहा कि ढाका के साथ अच्छे रिश्तों के लिए क्रिकेट के रिश्ते बहुत जरूरी हैं। इस तरह का कदम बांग्लादेश को इस्लामाबाद के और करीब ला सकता है।

विदेशी मामलों की एडिटर सुहासिनी हैदर ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर बांग्लादेश जा सकते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेशी नेताओं से मिल सकते हैं, लेकिन एक क्रिकेटर को भारत में खेलने का हक नहीं दिया जा रहा है।

इसी बात में और जोड़ते हुए, ‘कॉलमिस्ट’ सबा नकवी ने भी BCCI के निर्देश के कुछ घंटों बाद कहा कि भारत ने दक्षिण एशिया में अपनी सारी ‘नैतिक प्रतिष्ठा’ खो दी है और एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को कमर्शियल लीग में खेलने की इजाजत न देकर ‘मतलबी’ बन गया है।

X पर एक लंबे पोस्ट में, नकवी ने कहा कि बांग्लादेश की आजादी में भारत की ऐतिहासिक भूमिका रही है। बांग्लादेश का राष्ट्रगान रवींद्रनाथ टैगोर का लिखा हुआ है। भारत में अभी भी बांग्लादेशी की पूर्व प्रधानमंत्री की मेजबानी कर रहा है, ऐसे हालात में ये फैसला नहीं होना चाहिए था।

उन्होंने आगे दावा किया कि भारत एक ‘बड़ी ताकत की तरह नहीं, बल्कि घटिया और असभ्य स्क्रिप्ट’ चुन रहा है, जो कथित तौर पर आने वाले राज्यों के चुनावों और ‘हिंदू कट्टरपंथियों’ की वजह से हो रहा है। अंत में उन्होंने दुख जताया कि भारत एक ‘नैतिक ताकत जिसकी दुनिया तारीफ़ करती थी’ को गिरा दिया है।

यह तर्क नैतिकता की चिंता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को महत्वहीन बनाने के लिए दिया गया है। एक बार फिर हिन्दुओं के साथ हो रही हिंसा को एक छोटी सी परेशानी माना गया, जबकि एक विदेशी एथलीट को प्राइवेट लीग से बाहर करने को सभ्यता का संकट बना दिया गया।

नैतिकता में ‘चुनाव’ और पाखंड

नैतिकता पर ये उपदेश सिर्फ भारत की सरकार के लिए होते हैं। अगर विराट कोहली को राजनीतिक कारणों से किसी विदेशी देश में खेलने से रोक दिया जाता, तो वही वामपंथी विचारक तुरंत इसे भारत की विदेश नीति की नाकामी बता देते। कोई भी बैन लगाने वाले देश पर सवाल नहीं उठाता। इसके बजाय, नई दिल्ली से खुद को समझाने के लिए कहा जाता।

यह तरीका सिर्फ खेलों तक ही सीमित नहीं है। जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाए, तो लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े करने लगा। कुछ लोगों ने पूछा कि अमेरिका भारत को वॉशिंगटन के फायदे वाले ट्रेड डील के लिए मजबूर क्यों कर रहा था। हमेशा की तरह, सबसे पहले भारत पर इल्जाम लगाया गया।

चाहे मुद्दा डिप्लोमेसी हो, ट्रेड हो, या क्रिकेट, स्क्रिप्ट में कोई बदलाव नहीं होता। भारत का खुद को साबित करना एक नैतिक नाकामी के तौर पर दिखाया जाता है। भारत का जनता की भावनाओं पर प्रतिक्रिया देना मेजॉरिटी की दादागिरी के तौर पर दिखाया जाता है। इसके अलावा सरकार जब अपने फैसले ‘एलीट क्लास’ की मंज़ूरी के बगैर लेती है तो इसे सभ्यता का पतन बताया जाता है।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Jinit Jain
Jinit Jain
Writer. Learner. Cricket Enthusiast.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जानिए दुबई के उस ‘Botim’ ऐप की कहानी, जिसके जरिए कनेक्टेड थे राँची में RSS दफ्तर पर बम फेंकने वाले पाकिस्तानी एजेंट

व्हाट्सएप की तरह दुबई में 'Botim' ऐप का इस्तेमाल होता है। जिन लोगों ने RSS दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमला किया, उन्हें इसी ऐप पर टास्क मिला था।

आरफा जी, बेवकूफ तो आपने उन सेकुलर हिंदुओं को बनाया है जिन्होंने आपको ‘पत्रकार’ समझा

आरफा अगर इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव का काम और भारत सरकार की बुराई करना वो छोड़ दें तो उन्हें उनके अपने दर्शक ही नहीं पूछेंगे।
- विज्ञापन -