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जिस ‘चिकन नेक’ को काटना चाहता था शरजील इमाम, वहाँ जमीन के भीतर से गुजरेगी ट्रेन: 40 km अंडरग्राउंड रेल टनल में दफन होंगी इस्लामी साजिशें

अंडरग्राउंड टनल टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बीच बनेगा। यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को पूरे भारत से जोड़ता है। इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है, इसलिए सामरिक दृष्टि से काफी अहम है।

सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत का वह संकरा क्षेत्र है, जो पूर्वोत्तर से पूरे देश को जोड़ता है। इसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर और लंबाई करीब 60 किलोमीटर है। जेल में बंद शरजील इमाम जैसे देशद्रोही हों या बांग्लादेश-चीन जैसे पड़ोसी देश, सबने भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए सामरिक दृष्टि से अहम इस ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ को काटने की बात कही थी। इसको देखते हुए अब भारत चिकन नेक को अभेद्य किला में परिवर्तित करने जा रहा है, जिससे दुश्मनों के मंसूबे धरे के धरे रह जाएँगे।

भारत की चिकन नेक को लेकर योजना

केंद्र सरकार चिकन नेक की सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है। इसके लिए ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रखी जा रही है, बल्कि अब धरती के अंदर भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है। अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को कहा, “नॉर्थ-ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग हो रही है। अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार लाइन बनाने का काम चल रहा है।” बंगाल में टिन माइल हाट से रंगापानी तक जाने वाली अंडरग्राउंड रेल लाइनें 20-24 मीटर की गहराई पर बिछाई जाएँगी।

भारतीय रेलवे ने पश्चिम बंगाल के टिन माइल हाट और रंगापानी स्टेशनों के बीच अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाना तय किया है। यह भौगोलिक दृष्टि से काफी अहम है। टिन माइल हाट बंगाल के दार्जिलिंग जिले में है, जो सिलीगुड़ी से करीब 10 km दूर है। यह बांग्लादेश बॉर्डर के पास है। यहाँ से बांग्लादेश का पंचगढ़ जिला सिर्फ 68 किलोमीटर दूर है।

‘चिकन नेक’ भारत के लिए क्यों है अहम

चिकन नेक 22 किमी चौड़ी जमीन की पतली सी पट्टी है, ये पूरे भारत को पूर्वोत्तर के 8 राज्यों से जोड़ती है। असल में, यह नॉर्थ-ईस्ट का एकमात्र पुल है, जिससे होकर हाईवे, रेल लिंक, फ्यूल लाइन गुजरती है और यह सैनिक साजोसामान के पूर्वोत्तर तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता भी है।

दरअसल चिकन नेक कॉरिडोर सामरिक दृष्टि से ऐसा चौराहा है, जहाँ से दक्षिण में बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में चीन की चुम्बी वैली जाने का द्वार खुलता है। खास बात यह है कि चुम्बी वैली में, चीनी सेना का अच्छा खासा जमावड़ा है। इसलिए हर दिशा पर भारत को नजर रखने के लिए चिकन नेक की जरूरत है।

चिकन नेक पर कमजोर होते ही भारत का पूर्वोत्तर तक पहुँच खत्म हो जाएगा साथ ही सिक्किम और अरुणाचल जैसे राज्य की सीमा तक पहुँचना भी मुश्किल हो जाएगा। इन राज्यों के बड़े क्षेत्र पर चीन अपना दावा करता रहा है।

अंडरग्राउंड रेल से भारत को जबरदस्त फायदा होगा

रेलवे माल ढोने का सबसे आसान तरीका माना जाता है। एक मालगाड़ी एक बार में करीब 300 ट्रकों के बराबर माल ढो सकती है। चिकन नेक कॉरिडोर में अभी तक निर्माण कार्य जमीन पर होते रहे हैं। इन्हें पड़ोसी देश निशाना बना सकते हैं। प्राकृतिक आपदा से भी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँच सकता है। अंडर ग्राउंड टनेल हर आपदा में सुरक्षित रहेगा। न तो इसे दुश्मन देश हवाई हमला कर सकते हैं और न ही ड्रोन, आर्टिलरी से इसे निशाना बनाया जा सकता है। यानी युद्ध के वक्त ये कॉरिडोर जवानों और सामानों की आवाजाही के लिए संजीवनी साबित होगा।

डिफेंस एक्सपर्ट संजीव उन्नीथन के मुताबिक, अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर का पता लगाना मुश्किल होता है और यह सुरक्षित होता है। युद्ध में आपकी स्थिति मजबूत हो जाती है।”

उन्नीकृष्ण के मुताबिक, केन्द्र का यह कदम सामरिक दृष्टि से सबसे तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का उदाहरण है। यह भारत की टनलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमताओं के परिपक्व होने और कम समय में बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू करने की क्षमता को दर्शाता है।

केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह ‘लंबे समय से चली आ रही स्ट्रेटेजिक कमज़ोरी’ को दूर करने वाला कदम है, जिसे 1971 के युद्ध के बाद ही कर लिया जाना चाहिए था। सरमा ने ट्वीट किया, “प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेल लिंक एक बड़ी स्ट्रेटेजिक सफलता है, जो नॉर्थ ईस्ट और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक सुरक्षित और फुलप्रूफ ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर बनाता है।”

चीन का बड़ा सैनिक नेटवर्क पास में है मौजूद

चीन डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश के पास इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर चुका है। सैटेलाइट से तस्वीरों के द्वारा भी इसकी पुष्टि हुई है। दूसरी तरह बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्तों में खटास आए हैं। कई कट्टरपंथी बांग्लादेशी नेताओं ने भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर कब्जा करने और नॉर्थ ईस्ट को अलग करने की धमकी दे चुके हैं।

इसके अलावा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास रंगपुर में लालमोनिरहाट एयरबेस को बांग्लादेश फिर से विकसित कर रहा है। ऐसे में पड़ोसी देशों से भारत की एकता को अक्षुण्ण रखने का एकमात्र उपाय है कि हम अपने क्षेत्रों को अभेद्य बना लें।

भारत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बंगाल, असम और त्रिपुरा के एयरस्ट्रिप के नेटवर्क को मजबूत करने में जुट गया है। ये एयरस्ट्रिप द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त एक्टिव थे। भारत इन क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा मजबूत करने में लगा हुआ है। इसको लेकर बंगाल में चोपड़ा, बिहार में किशनगंज और असम में लचित बोरफुकन में नए आर्मी बेस बनाए हैं। चीन की बढ़ती नेवल मौजूदगी और बांग्लादेश के साथ उसके गहरे डिफेंस जुड़ाव के बीच बंगाल के हल्दिया में एक नया नेवी बेस भी बनने वाला है।

रेलवे के कदम से देश की जीवन रेखा मानी जाने वाली इस नेटवर्क में कहीं से भी मिसाइलों को ट्रांसपोर्ट करना, छिपाना और लॉन्च करना आसान हो जाएगा। देश की सुरक्षा के लिए ये कदम मील का पत्थर साबित होगा।

शरजील इमाम ने चिकन नेक काटने की धमकी दी थी

2020 में दिल्ली दंगों की साजिश रचने वाला और भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला शरजील इमाम ने सिलिगुडी कॉरिडोर को लेकर कहा था, “अगर 5 लाख लोग हमारे पास संगठित हों, तो हम हिंदुस्तान और नॉर्थ-ईस्ट को स्थाई तौर पर कट कर सकते हैं। स्थाई नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए तो कट कर ही सकते हैं। मतलब, इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उन्हें हटाने में एक महीना लगे। जाएँ एयर फोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।”

अमित शाह ने दिया जवाब

शरजील इमाम ने चिकन नेक को अलग करने की बात कही थी, इस पर हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने सिलिगुड़ी में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी गलियारा भारत का था, है और रहेगा। इसपर धमकी देने या छेड़छाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा, “दिल्ली में कुछ लोगों ने नारे लगाए कि वे चिकन नेक को काट डालेंगे। अरे इसे कैसे काटोगे क्या तुम्हारे बाप की जमीन है यह भारत की जमीन है इस पर कोई हाथ नहीं लगा सकता”

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने ऐसे लोगों को जेल में डाल दिया है और विपक्ष ऐसे लोगों की पैरवी कर रहा है। लेकिन देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने करारा जवाब दिया और बेल अर्जी भी खारिज कर दी।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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