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टेक्सास में भगवान हनुमान की प्रतिमा पर ट्रंप के समर्थक ने उठाए सवाल, भारतवंशियों ने जमकर लताड़ा: कहा- यह हिंदुओं के पैसों की जमीन पर है

अमेरिका के टेक्सास में शुगरलैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊँची विशाल प्रतिमा पर एक बार फिर विवाद सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता ने प्रतिमा की मौजूदगी पर सवाल उठाया है। इस पर भारतवंशियों ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई है।

अमेरिका के टेक्सास में शुगरलैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊँची विशाल प्रतिमा पर एक बार फिर विवाद सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता ने प्रतिमा की वीडियो शेयर की है और इसकी मौजूदगी पर सवाल उठाया है। इस पर भारतवंशियों ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई है।

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर रिपब्लिकन के कार्यकर्ता कार्लोस टर्सियोस ने वीडियो शेयर कर लिखा, “यह इस्लामाबाद, पाकिस्तान या भारत का नई दिल्ली नहीं है। यह अमेरिका के टेक्सास राज्य का शुगर लैंड शहर है। तीसरी दुनिया से आए एलियंस धीरे-धीरे टेक्सास और पूरे अमेरिका में बढ़ते जा रहे हैं। आखिर अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति यह क्यों है?”

बता दें कि ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ नाम से मशहूर भगनाव हनुमान की ये प्रतिमा अमेरिका की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक है। इस प्रतिमा का अनावरण अगस्त 2024 में हुआ था और इसे भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकारों द्वारा तैयार किया गया है। यह प्रतिमा भगवान हनुमान को खड़े हुए आशीर्वाद मुद्रा में दर्शाती है, जो शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक है। प्रतिमा के चलते यह स्थान टेक्सास और आसपास के राज्यों में रहने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता को भारतवंशियों ने लताड़ा

टेक्सास में भगवान हनुमान की प्रतिमा वाले पोस्ट पर रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता कार्लोस टर्सियोस को भारतवंशियों ने मिलकर लताड़ा। उनके पोस्ट पर वसंत भट्ट नाम यूजर ने प्रतिक्रिया दी, “यह निजी जमीन पर बना है, जिसे हिंदुओं ने अपने पैसों से खरीदा है। सांस्कृतिक बहस आप लोग सालों पहले ही हार चुके हैं और आने वाले चुनाव भी हारने वाले हैं। आपका ‘अमेरिका फर्स्ट’ वाला नारा अब सिर्फ पुरानी नस्लवादी सोच जैसा दिखता है।”

आँचल नाम के एक्स यूजर ने कहा, “इसमें गलत क्या है? भारत में भी कई ऐसे धर्मों के पूजा स्थल हैं जिनकी शुरुआत भारत में नहीं हुई। वैसे भी, भारत दुनिया के उन शीर्ष 20 देशों में है जहाँ ईसाइयों की बड़ी आबादी है। हमारे ईसाई भाई-बहन भारत में उतनी ही आज़ादी के साथ रहते हैं जितनी भारतीय हिंदू रहते हैं।”

वहीं ‘हिंदू ऑफ वर्ल्ड’ ने कहा, “इतने ‘बहादुर’ बन रहे हो कि गदा पकड़े एक भगवान की मूर्ति से ही डर लग रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “भगवान हनुमान निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं, शायद तुम्हारी समझ वाली ईसाई धर्म की सोच में यही बात छूट गई। अगर तीसरी दुनिया जैसा व्यवहार देखना है, तो आईने में देखो- नफरत, डर और अज्ञान ही किसी गिरते समाज की असली निशानी होती है।”

उन्होंने यह भी कहा, “तुम एक मूर्ति को ‘हमला’ बता रहे हो, लेकिन असल में तुम्हारा अपना मन कड़वाहट और अज्ञान से भरा हुआ है। मूर्ति की ऊँचाई पर रोते रहो, शायद एक दिन तुम्हारी समझ भी उतनी ऊँची हो जाए।”

एक भारतवंशी ‘कार्तिक गाडा’ ने अमेरिका में बोले जाने वाली भाषाओं का चार्ट पेश करते हुए कहा कि अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं के आँकड़ों से साफ दिखता है कि करीब 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि टॉ-10 भाषाओं में कोई भी भारतीय भाषा शामिल नहीं है।

उन्होंने कहा कि घर की भाषा किसी समुदाय के घुलने-मिलने का बड़ा संकेत होती है, इसीलिए इस आधार पर अभी तुलना करना सही नहीं है। उन्होंने टर्सियोग पर तंज कसते हुए कहा कि इस हिसाब से तुम्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है, तब जाकर तुम भारतीय-अमेरिकियों के बराबर घुलने-मिलने की बात कर सकते हो।

ट्रंप के नेता भी प्रतिमा पर सवाल उठाने पर लताड़े जा चुके

यह पहली बार नहीं है, जब किसी अमेरिकी ने टेक्सास में भगवान हनुमान की प्रतिमा पर सवाल खड़े किए हों। इससे पहले भी रिपब्लिकन पार्टी के नेता और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी अलेक्जेंडर डंकन में विवादित टिप्पणी कर चुके हैं, जिसे लेकर उनकी खूब आलोचना हुई थी।

सितंबर 2025 में अलेक्जेंडर डंकन ने भी ‘एक्स’ पर भगवान हनुमान की प्रतिमा का वीडियो शेयर करते हुए सवाल किया था, “हम टेक्सास में इस मूर्ति को क्यों बनने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं।” उन्होंने बाइबिल का हवाला देते हुए कहा था कि ईश्वर के अलावा किसी और देवता की पूजा करना और मूर्तियाँ बनाना गलत है। तब भी डंकन के इस बयान ने अमेरिकी हिंदू समुदाय के गुस्से को बढ़ा दिया था।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की थी और इसे हिंदू-विरोधी तथा भड़काऊ करार दिया था। संगठन ने रिपब्लिकन पार्टी से माँग की है कि वे डंकन के खिलाफ कार्रवाई करें, क्योंकि उनके बयान से न केवल धार्मिक भावनाएँ आहत हुई, बल्कि यह अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के भी खिलाफ है, जो हर धर्म को समान स्वतंत्रता देता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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