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PM मोदी की केनेसेट स्पीच को जो वामपंथन बता रही ‘एंटी नेशनल’, प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के प्रोपेगेंडा गिरोह से जुड़े हैं उसके तार: जानिए इसके बारे में सबकुछ

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल मई 2020 में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय वामपंथी संगठन है जो इजरायल विरोधी और फिलिस्तीन समर्थक एजेंडा चलाता है। इसमें हर्ष मंदर, जेरेमी कॉर्बिन, जयति घोष जैसे लोग शामिल हैं। ये संगठन भारत और हिंदुओं के खिलाफ भी आग उगलता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। जहाँ भारत और इजरायल व्यापार से लेकर रक्षा तक कई क्षेत्रों में अपनी साझेदारी मजबूत कर रहे हैं, वहीं ‘फ्री फिलिस्तीन’ इस्लामी-वामपंथी गिरोह इससे बुरी तरह तिलमिला गया है।

इस्लामवादियों, दिखावटी ‘सेक्युलर’ नेताओं, वामपंथी प्रचार मंचों और तथाकथित बुद्धिजीवियों सभी ने बिना सोचे-समझे पीएम मोदी के इजरायल दौरे और कनेसेट में संबोधन की निंदा शुरू कर दी है। इसी क्रम में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की सह-जनरल कोऑर्डिनेटर वर्षा गंडिकोटा-नेल्लुतला ने पीएम मोदी को ‘राष्ट्र-विरोधी’’ तक कह दिया।

उन्होंने 25 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हमारे खूबसूरत देश का नाम खून से सने कनेसेट में लिखना सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी काम है।”

गौरतलब है कि 25 फरवरी 2026 को पीएम मोदी ने इजरायल की संसद कनेसेट को संबोधित किया। पीएम मोदी ने हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को किए गए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “हम आपके दर्द को महसूस करते हैं। भारत पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़ा है। निर्दोष नागरिकों की हत्या को जायज नहीं ठहराया जा सकता।”

अंत में पीएम मोदी को ‘स्पीकर ऑफ द कनेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया, जो कनेसेट द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।

वर्षा गंडिकोटा-नेल्लुतला, प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और न्यूजक्लिक कनेक्शन

वर्षा गंडिकोटा प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (PI) की सह-जनरल कोऑर्डिनेटर हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनियाभर में वामपंथी कार्यकर्ताओं और समूहों को एकजुट करता है। इसके वेबसाइट के अनुसार, “प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल मई 2020 में दुनिया की प्रगतिशील ताकतों को संगठित करने के उद्देश्य से शुरू हुआ।”

वर्षा इस संगठन में ‘ब्लू प्रिंट’ पॉलिसी वर्क और द हेग ग्रुप का नेतृत्व करती हैं। यह संगठन खुले तौर पर इजरायल विरोधी और फिलिस्तीन समर्थक एजेंडा चलाता है, यहाँ तक कि हमास जैसे आतंकी संगठन की हिंसा को भी कमतर दिखाता है। इसकी वेबसाइट पर मोदी सरकार और हिंदुओं के खिलाफ कई आपत्तिजनक प्रचार लेख मौजूद हैं।

2023 में हरियाणा के नूंह में दंगाइयों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई को इस संगठन ने ‘भारत के लोकतंत्र का ध्वंस’ बताया था, जिस बयान पर जेरेमी कॉर्बिन और जारा सुल्ताना जैसे इस्लामवादी नेताओं के हस्ताक्षर थे। ‘नेकेड हिंदू सुप्रीमिज्म’ हेडलाइन वाली ऐसी ही एक रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए हिंदुओं को बदनाम किया।

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल लगातार हिंदुओं, हिंदुत्व, भाजपा-RSS और मोदी सरकार को बदनाम करता रहा है। मणिपुर संकट पर लिखे एक लेख में, प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने ‘हिंदू राष्ट्रवादियों’ को दोषी ठहराते हुए उन पर ‘सर्वोच्चता’ का युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया।

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल में हर्ष मंदर जैसे लोग परिषद सदस्य हैं। मंदर ने हिंदुत्व और उससे जुड़े हिंदुओं को बदनाम करने वाले कई लेख लिखे हैं। ऐसे ही एक लेख में, जिसका शीर्षक था, क्या भारत नरसंहार की ओर बढ़ रहा है?, मंदर ने ग्रेगरी स्टैंटन का हवाला देते हुए झूठा दावा किया कि भारत में मुस्लिमों का नरसंहार हो सकता है।

गौरतलब है कि हर्ष मंदर ने बतौर IAS लगभग दो दशकों तक काम किया था और 2002 में गुजरात में हुए ‘राज्य प्रायोजित दंगों’ के विरोध में उन्होंने सेवा से इस्तीफा दे दिया था। पद से इस्तीफा देने के बाद, मंदर ने सोनिया गाँधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में काम किया, जिसने हिंदू विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया था।

मैंडर ने सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के निदेशक के रूप में भी कार्य किया है, जिसे ईसाई इंजीलवादी संगठनों से फंड प्राप्त हुआ था और उन्होंने अतीत में खुले तौर पर धार्मिक धर्मांतरण का समर्थन किया है। हर्ष मंदर का लेख, जो मुस्लिमों में पीड़ित होने की भावना को भड़काने के उद्देश्य से लिखा गया था, पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान द्वारा साझा किया गया था।

उन्होंने 2018 में प्रकाशित अपने लेख में लिखा था, “आज मुस्लिम लगभग हर राजनीतिक दल के लिए बेघर और बेसहारा हैं। यह स्थिति तब है जब भारत दुनिया के दसवें हिस्से के मुस्लिमों का घर है, लगभग 18 करोड़ लोग, जो इसे इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद सबसे बड़ा मुस्लिम देश बनाता है। भारत में मुस्लिम होना कभी इतना कठिन नहीं रहा, भारत के विभाजन के बाद के तूफानी महीनों के बाद से तो बिल्कुल भी नहीं।”

हर्ष मंदर, इशरत का भी एक जाना-माना समर्थक है, जो आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की महिला काडर थी। इशरत को 3 साथियों के साथ गुजरात क्राइम ब्रांच ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। हर्ष मंदर उन 40 ‘कार्यकर्ताओं’ में से एक था जिन्होंने अयोध्या फैसले के खिलाफ कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

हर्ष मंदर उस ग्रुप का भी हिस्सा है, जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ भी याचिका दायर की है। मंदर ने CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मुस्लिमों को दंगा भड़काने के लिए भी उकसाया था। उसका नाम दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भी बार-बार आया है।

खैर, हर्ष मंदर की तरह ही प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की परिषद में पूर्व JNU प्रोफेसर और इस्लामी आतंकवादी अफजल गुरु की प्रशंसक जयति घोष भी शामिल हैं।

2016 में घोष ने आतंकवादी अफजल गुरु की मौत की सजा के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों को दबाने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की थी। इसके अलावा घोष का नाम सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव के साथ 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के पूरक आरोप पत्र में भी शामिल है।

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की कार्यकारी संस्था ‘कैबिनेट’ में ब्रिटेन की लेबर पार्टी के पूर्व नेता जेरेमी कॉर्बिन शामिल हैं। कॉर्बिन विवादों में घिरे रहते हैं। 2023 में पियर्स मॉर्गन के साथ एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने हमास को आतंकवादी संगठन मानने से इनकार कर दिया था।

2009 में जेरेमी कॉर्बिन ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों हिजबुल्लाह और हमास से जुड़े आतंकवादियों को ब्रिटेन की संसद में आमंत्रित किया था। इससे पहले, कॉर्बिन ने ‘फ्री रियाज एंड कय्यूम कैंपेन’ का समर्थन किया था, जिसका उद्देश्य भारतीय राजनयिक रविंद्र म्हात्रे के अपहरण और हत्या के दोषी मोहम्मद रियाज और अब्दुल कय्यूम राजा को जेल से रिहा कराना था।

2022 में कॉ़न्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की विवादास्पद ब्रिटेन यात्रा के दौरान कॉर्बिन की उनके साथ तस्वीर खींची गई थी। कॉर्बिन से मुलाकात को लेकर भारी विवाद खड़ा हुआ था, क्योंकि पूर्व लेबर नेता का कश्मीरी अलगाववादी विचारों का समर्थन करने, जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख से सहमत होने और भारत के आंतरिक मामलों में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग का समर्थन करने का इतिहास रहा है।

गौरतलब है कि PI के ‘मानद’ सलाहकार सदस्यों में नोआम चोम्स्की और न्यूजक्लिक से जुड़े मार्क्सवादी पत्रकार विजय प्रसाद जैसे लोग शामिल हैं। प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल में पहले विजय प्रसाद परिषद के सदस्य थे। वे प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की संस्थापक अंतरिम परिषद का हिस्सा थे।

विजय प्रसाद नेविल रॉय सिंघम द्वारा वित्तपोषित वामपंथी नेटवर्क में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। सिंघम ने पीपुल्स डिस्पैच सहित विभिन्न चीन समर्थक और भारत विरोधी प्रचार माध्यमों में लाखों डॉलर का निवेश किया है। यहाँ विजय प्रसाद ने प्रचार संबंधी लेख लिखे हैं।

पीपुल्स डिस्पैच एक मीडिया पोर्टल है जो खुद को एक ‘अंतरराष्ट्रीय मीडिया परियोजना’ बताता है जिसका मिशन दुनिया भर के जन आंदोलनों और संगठनों की आवाजों को दुनिया के सामने लाना है। जनवरी 2020 के एक लेख में, प्रसाद ने JNU प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की और मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की।

न्यूजक्लिक का हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह किसी से छिपा नहीं है। इसके अलावा न्यूजक्लिक पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से कथित संबंधों को लेकर भी जाँच चल रही है। 2023 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जाँच में कार्यकर्ता संगठनों, गैर-लाभकारी संस्थाओं, फर्जी कंपनियों और चीनी प्रचार से उनके घनिष्ठ संबंधों का खुलासा हुआ, जिसका नेतृत्व नेविल रॉय सिंघम कर रहे थे।

2024 में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र में चीनी सरकार को ‘अंतिम धनदाता’ बताया गया, जिसके माध्यम से भारत-विरोधी विचारों, विशेष रूप से कश्मीर और किसानों के विरोध प्रदर्शनों को भड़काने के लिए धन भेजा गया था। यह मामला अभी अदालत में चल रहा है।

साल 2021 में ही OpIndia ने NewsClick के संबंधों की विस्तृत जाँच की और खुलासा किया कि यह कई ऐसे व्यक्तियों से जुड़ा हुआ था जो नियमित रूप से भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं, जिनमें शहरी नक्सली, तीस्ता सेतलवाद, अभिसार शर्मा और कई अन्य शामिल हैं। OpIndia की वह रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के टाइड्स फाउंडेशन से संबंध

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की वेबसाइट के अनुसार, इसके 70 से अधिक संगठन सदस्य हैं। इनमें हमास समर्थक समूह अरब रिसोर्स एंड ऑर्गेनाइजिंग सेंटर भी शामिल है, जिसे टाइड्स फाउंडेशन फंडिंग करती है।

दिलचस्प बात यह है कि OpIndia ने पहले ही टाइड्स फाउंडेशन और न्यूजक्लिक के बीच संबंधों का पता लगाया था। टाइड्स फाउंडेशन कई हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी संगठनों और तत्वों को वित्तपोषण देने के लिए कुख्यात है। इस फाउंडेशन ने हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) को अनुदान दिया था, जिसके इस्लामवादियों और खालिस्तानियों से संबंध हैं।

इस फाउंडेशन का गठन 2019 में दो इस्लामवादी समर्थक समूहों, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइनॉरिटीज ऑफ इंडिया (OFMI) द्वारा किया गया था। टाइड्स ने अमन पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट को भी वित्त पोषित किया था। यह ट्रस्ट न्यूजक्लिक-चीन फंडिंग घोटाले से जुड़ा है।

वर्षा गंडाकोटी का हिंदुत्व विरोधी और हमास समर्थक दृष्टिकोण

हमास को नॉन-स्टेट एक्टर बताकर वर्षा लगातार इस फिलिस्तीनी इस्लामी आतंकी गुट का बचाव करती रही हैं। जबकि हमास की विचारधारा साफ है कि इजरायल वक्फ की संपत्ति है, यानी मुसलमानों की और वो आखिरी यहूदी को धरती से खत्म करने तक संघर्ष करता रहेगा। हमास यही कर भी रहा है।

इस्लामी-वामपंथी लंबे समय से हिंदुत्व को बदनाम करते आ रहे हैं। वर्षा ने भी पहले हिंदुत्व की तुलना जायोनिज्म से की थी। हालाँकि वर्षा के समर्थकों के अनुसार जायोनिज्म एक नरसंहारवादी विचारधारा है, लेकिन उन्होंने कभी यह स्पष्ट नहीं किया कि यदि हिंदुत्व जायोनिज्म की तरह ही है, तो ‘हिंदू राष्ट्रवादियों’ ने वास्तव में कौन सा नरसंहार किया है।

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि फिलिस्तीन और इस्लामी आतंकवादी समूह हमास का समर्थन करने वाली वर्षा पहलगाम हमले के बाद मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान में इस्लामी आतंकवादी ठिकानों पर किए गए हमले से नाराज थीं। उसने लिखा, “आज भारत में एक भी युद्ध-विरोधी राजनीतिक नेता का न दिखना चिंताजनक है।”

वर्षा का सोशल मीडिया और प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल में उनका काम मुख्य रूप से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और गाजा में कथित ‘नरसंहार’ के इर्द-गिर्द घूमता है। वर्षा प्रोग्रेसिव इंटरनेशल द्वारा बनाए गए ‘द हेग’ ग्रुप की एक्टिंग चेयर (अंतरिम मुखिया) भी है, जिसका काम ही है इजरायल की कार्रवाई को नरसंहार घोषित करना। ऐसे में वो इजरायल की आत्मरक्षा हर की कार्रवाई को गाजा के मुस्लिमों नरसंहार तो घोषित करती ही है, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं पर किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ कभी मुँह नहीं खोलती।

वर्षा वामपंथी प्रचार प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ पर भी लगातार आर्टिकल लिखती रही है, जिसमें अधिकतर कंटेंट हिंदुओं, राष्ट्रवादियों और इजरायल के खिलाफ है।

(यह रिपोर्ट मूल रुप से अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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Shraddha Pandey
Shraddha Pandey
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