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योगी आदित्यनाथ का चुनावी मैदान में दिखा दम, बिहार के बाद बंगाल में छाए: अखिलेश यादव सोशल मीडिया तक सिमटें, समझें- किस बात है उन्हें डर, जो ममता से बनाई दूरी

बाबा की लोकप्रियता हर दिन बढ़ रही है। उनकी हर रैली में जनसैलाब उमड़ रहा है। हिंदू एकजुटता की दीवार खड़ी हो रही है। अखिलेश इस दीवार को देखकर ही कांप रहे हैं। इसलिए बंगाल नहीं जा रहे। इसलिए सिर्फ रीट्वीट कर रहे हैं।

एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जिन्हें लोग प्यार से बाबा योगी आदित्यनाथ बोलते हैं, उनकी देश भर में आँधी चल रही है। वो बिहार से लेकर असम और पश्चिम बंगाल तक डटे हुए हैं, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव डर के मारे बंगाल की मिट्टी पर पैर रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

दरअसल, बिहार 2025 में योगी ने मात्र दस दिनों में 31 धुआँधार रैलियाँ कीं। समस्तीपुर, मोहिउद्दीननगर, सीवान, वैशाली, भोजपुर, दानापुर, सहरसा, दरभंगा, बगहा, बेला समेत दर्जनों जिलों में लाखों हिंदू वोटरों को एकजुट किया। बुलडोजर हिंदुत्व, सख्त कानून-व्यवस्था और विकास का जादू चला।

इसका नतीजा ये हुआ कि एनडीए को 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में 200 से ज्यादा सीटें मिलीं। ऐतिहासिक दो-तिहाई बहुमत और 87 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट। योगी आदित्यनाथ ने जिन 43 उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, उसमें से 27 उम्मीदवार जीत गए। वहीं, अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला पिछड़ा-दलित-मुस्लिम बुरी तरह फ्लॉप हो गया। पूरा महागठबंधन महज 40 सीटों के आसपास सिमट गया।

लेकिन अखिलेश को यह हार अभी तक हजम नहीं हुई। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पूरे जोरों पर हैं। बाबा योगी वहां भी रैलियों का तूफान ला रहे हैं। हर जगह उनकी डिमांड है। हिंदू वोट एक हो रहा है। टीएमसी की सत्ता हिल रही है।

और अखिलेश यादव? वो लखनऊ के एयर-कंडीशंड कमरे में बैठे सिर्फ ट्विटर पर बयानबाजी कर रहे हैं। वो जुलाई 2024 में धरमतला रैली में ममता बनर्जी के साथ सिर्फ चेहरा दिखाने के बाद एक बार भी बंगाल की मिट्टी पर नहीं उतरे हैं। 27 जनवरी 2026 को पत्नी के साथ ‘व्यक्तिगत यात्रा’ का बहाना बनाकर कोलकाता पहुंचे। नबन्ना में ममता से मुलाकात भी की, लेकिन कोई रैली नहीं की। कोई कैंपेनिंग नहीं की, सड़क पर कोई लड़ाई नहीं और न किसी जनसभा में दिखे।

दरअसल, अखिलेश यादव के डर का असली कारण बिहार की वो सुनामी है। नवंबर 2025 में बाबा ने 30 से ज्यादा रैलियों में हिंदू वोट को एकजुट कर दिया था। उनकी आँधी में यादव-मुस्लिम गठजोड़ का जादू बिहार में टूट गया। अब वही लहर बंगाल पहुँच रही है। बाबा की आँधी यहाँ भी चली तो अखिलेश का वंशवादी साम्राज्य हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। अखिलेश को बस इसी बात का डर है। यही वजह है कि सपा मुखिया मैदान छोड़कर भाग रहे हैं।

दरअसल, अखिलेश यादव को अब उनके अपने गठबंधन वाले भी नहीं पूछ रहे। बिहार में रैली की थी तो क्या हुआ? वहाँ भी PDA फ्लॉप हो चुका है। अब बंगाल में महुआ मोइत्रा जैसे ट्वीट को रीट्वीट करके अपना अहंकार सहला रहे हैं। इसमें टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला, जिसे अखिलेश यादव ने तुरंत रीट्वीट कर दिया। जैसे कोई बड़ी जीत हासिल कर ली हो। जबकि असलियत यह है कि अखिलेश खुद मैदान में उतरने की हिम्मत नहीं रखते। डरपोक वंशवादी सिर्फ ट्विटर पर बहादुरी दिखाते हैं। असली नेता तो मैदान में लड़ेगा। बाबा लड़ रहे हैं और अखिलेश भाग रहे हैं।

अखिलेश जानते हैं कि अगर बाबा की सुनामी आई तो यादव-मुस्लिम गठजोड़ का अंत निश्चित है। इसलिए लखनऊ में छिपे बैठे हैं। पत्नी के साथ व्यक्तिगत यात्रा का ढोंग रच रहे हैं। अखिलेश यादव जानते हैं बिहार में हार गए, बंगाल में भी हारने वाले हैं। 2027 में उत्तर प्रदेश में भी यही तस्वीर दोहराएगी। वंशवादियों को लखनऊ से निकलने की हिम्मत नहीं रहेगी।

कैंपेन स्लोगन अब हकीकत बन चुके हैं। अखिलेश यादव डर के मारे बंगाल नहीं जा रहे… क्योंकि बिहार में बाबा की बढ़ती लोकप्रियता ने अखिलेश को दहला दिया। योगी का जादू बिहार जीत गया, तो अब बंगाल में भी वंशवादियों का दिल डर रहा है। बंगाल में हिंदुओं की एकजुटता देख अखिलेश यादव के होश उड़े हुए हैं। ऐसे में अगले ही साल यानी 2027 में सत्ता जाने के डर ने उन्हें लखनऊ में ही कैद कर लिया है।

जो नेता डर से मैदान छोड़ दे, वह कभी नेता नहीं बन सकता। अखिलेश ने बंगाल से दूरी बना ली है। यह दूरी उनकी हार की दूरी है। बाबा की लोकप्रियता हर दिन बढ़ रही है। उनकी हर रैली में जनसैलाब उमड़ रहा है। हिंदू एकजुटता की दीवार खड़ी हो रही है। अखिलेश इस दीवार को देखकर ही कांप रहे हैं। इसलिए बंगाल नहीं जा रहे। इसलिए सिर्फ रीट्वीट कर रहे हैं।

बाबा योगी की बढ़ती लोकप्रियता ने न सिर्फ अखिलेश को दहला दिया है, बल्कि पूरे विपक्ष को हिला दिया है। इंडी गठबंधन के नेता अब एक-दूसरे को भी नहीं पूछ रहे। अखिलेश अकेले पड़े हैं। ट्विटर पर महुआ मोइत्रा का ट्वीट रीट्वीट करके खुद को संतोष दे रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि मैदान खाली है। बंगाल का मैदान बाबा के लिए तैयार है।

अखिलेश यादव को अब समझ आ जाना चाहिए कि समय बदल चुका है। वंशवादी राजनीति की उम्र खत्म हो रही है। लोगों को अब चेहरा नहीं, काम चाहिए। बाबा योगी काम दिखा रहे हैं। अखिलेश सिर्फ ट्वीट दिखा रहे हैं। एक तरफ मैदान में संघर्ष, दूसरी तरफ एसी कमरे में छुपना। यह अंतर बहुत बड़ा है। यह अंतर ही 2026 बंगाल और 2027 यूपी का फैसला करेगा।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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