ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने एक तरफ जहाँ पश्चिम एशिया की स्थिति को अस्थिर किया है, वहीं इसका सीधा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
खासकर होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है, वहाँ जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में कमी आई है और कई देशों में ऊर्जा संकट जैसे हालात बनने लगे हैं। इसी वजह से पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे आम लोगों पर महँगाई का दबाव और बढ़ गया है।
ऐसे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच दुनिया भर के देश अब ऊर्जा के वैकल्पिक और स्थायी स्रोतों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसी दिशा में भारत भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर पावर) पर खास जोर दे रहा है।
इसी कड़ी में देश के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्रोजेक्ट कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (KKNPP) की यूनिट 5 और 6 को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। इस प्रोजेक्ट को परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने मंजूरी दे दी है। यह बोर्ड परमाणु ऊर्जा के उपयोग से होने वाले जोखिमों को नियंत्रित करता है। इस मंजूरी का मतलब है कि अब न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड प्लांट के बड़े-बड़े उपकरण लगा सकती है।
कुडनकुलम यूनिट 5 और 6 को मिली अहम मंजूरी
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट की यूनिट 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है। यह अनुमति 30 अप्रैल 2026 को जारी की गई है। इस मंजूरी के बाद अब न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) इन दोनों यूनिट्स में महत्वपूर्ण उपकरणों की इंस्टॉलेशन का काम शुरू कर सकेगा।
AERB grants permission for major equipment erection at Kudankulam Nuclear Power Project Units 5 and 6
— All India Radio News (@airnewsalerts) May 2, 2026
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इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर प्लांट के निर्माण का एक बेहद महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, क्योंकि इसके बाद ही रिएक्टर के मुख्य सिस्टम को स्थापित किया जाता है। इस मंजूरी के तहत रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और कूलेंट पंप जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण लगाए जाएँगे, जो किसी भी न्यूक्लियर रिएक्टर के सुरक्षित और स्थिर संचालन के लिए जरूरी होते हैं।
AERB ने यह अनुमति विस्तृत और मल्टी-लेवल सुरक्षा समीक्षा के बाद दी है, जिसमें रिएक्टर डिजाइन, निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की गहन जाँच की गई।
तमिलनाडु में भारत का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित 6000 मेगावाट का बनने वाला ये परमाणु ऊर्जा केंद्र भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट है। केंद्र है। इस परियोजना में कुल 6 प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (VVER डिजाइन) बनाए जा रहे हैं, जिनमें हर रिएक्टर की क्षमता 1000 मेगावाट है।
अब तक की स्थिति के अनुसार
- यूनिट 1 और 2: पहले से चालू (2013 और 2015 से)
- यूनिट 3 और 4: निर्माण के उन्नत चरण में
- यूनिट 5 और 6: अब उपकरण इंस्टॉलेशन की मंजूरी मिली
यह पूरा प्रोजेक्ट भारत और रूस के तकनीकी सहयोग से बनाया जा रहा है। इसमें VVER तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। रूस भारत का एक प्रमुख साझेदार है और इस परियोजना को दोनों देशों की मजबूत परमाणु साझेदारी का उदाहरण माना जाता है।
NPCIL के अनुसार, कुडनकुलम की यूनिट 1 और 2 अब तक 121 बिलियन यूनिट बिजली पैदा कर चुकी हैं। इसके साथ ही लगभग 104 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका गया है। यह दिखाता है कि परमाणु ऊर्जा न सिर्फ बिजली उत्पादन में मदद करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है।
भारत ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए लगातार नए प्रोजेक्ट्स और मौजूदा संयंत्रों का विस्तार किया जा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा है कि रूस भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार है और कुडनकुलम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।


