केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार में 2012 से 2014 तक गृह मंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में शिंदे ‘भगवा आतंकवाद’ को लेकर बड़ा बयान दे रहे हैं। उन्होंने माना कि यह शब्द इस्तेमाल नहीं होना चाहिए था और इसके पीछे पार्टी का हाथ बताया। अब सच्चाई सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कॉन्ग्रेस को खूब लताड़ लगा रहे हैं।
वीडियो में सुशील कुमार शिंदे से जब पूछा गया कि ‘भगवा आतंकवाद‘ टर्म सही था या नहीं तब वह कहते हैं, “पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने बताया था कि भगवा आतंकवाद बोलना है, मैंने वही किया। गलत तो था। मैं यह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहता था। ऐसा नहीं होना चाहिए था। ये उस पार्टी की विचारधारा होती है। ये चाहे भगवा हो या रेड हो या सफेद हो। ऐसा कोई आतंकवाद नहीं होता है।”
हालाँकि, सुशील शिंदे का यह बयान डेढ़ साल पुराना है। जब यूट्यूबर और पत्रकार शुभांकर मिश्रा ने सुशील कुमार शिंदे के साथ पॉडकास्ट किया था। तब भी ऑपइंडिया ने उस समय भी इस मामले को उठाया था। अब इस वीडियो के एक अंश वायरल हो रहा है, जिसमें शिंदे ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे भद्दे प्रोपेगेंडा को गलत बताकर अपना कबूलनामा सौंप रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना
अब डेढ़ साल बाद सोशल मीडिया पर शिंदे के इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मच गया है। लोग इसे कॉन्ग्रेस की ‘झूठों’ से पर्दा उठाने और कॉन्ग्रेस की हिंदू-घृणा जैसी बातें कह रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का कबूलनामा बताया है। बीजेपी ने सवाल उठाया कि क्या यह सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कांग्रेस की एक सोची-समझी साजिश थी?
पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का कबूलनामा। 🚫
— BJP (@BJP4India) June 13, 2026
"भगवा और आतंकवाद को एक साथ जोड़ना बिल्कुल गलत था…" देखिए कैसे पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे ने खुद माना कि राजनीतिक फायदे के लिए 'भगवा आतंकवाद' शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जो कि पूरी तरह गलत था।
क्या… pic.twitter.com/1rglInFTmc
बीजेपी नेता डॉ. निखिल आनंद कहते हैं कि सुशील कुमार शिंदे का बयान कॉन्ग्रेस की वैचारिक सोच को उजागर करता है। उनके मुताबिक कॉन्ग्रेस और उससे जुड़ी विचारधारा ने हमेशा भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन आस्था को निशाना बनाया है तथा राजनीतिक हितों के लिए कट्टरपंथी ताकतों के साथ समझौता किया है। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों के प्रति सतर्क रहने और लोकतांत्रिक तरीके से उनका जवाब देने की बात कही।
भारत के पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के इस वीडियो बयान को गंभीरता से सुनिए और समझिए, जो कांग्रेस के राजनीति की वैचारिक हकीकत को प्रदर्शित करती है। भारत में कांग्रेस पार्टी तथाकथित वामपंथी- उदारवादी- धर्मनिरपेक्ष- प्रगतिशील विचारधारा की समर्थक रही है। वास्तव में यही विचारधारा… pic.twitter.com/eAUU4d5Zfa
— Dr. Nikhil Anand (@NikhilAnandBJP) June 14, 2026
कपिल बिश्नोई कहते हैं, “कॉन्ग्रेस पार्टी की हिंदुओं और भगवा रंग से नफरत किसी से ढकी छिपी नहीं है। रह रह कर ये नफरत किसी न किसी रूप में बाहर आ ही जाती है।”
सुशील कुमार शिंदे…!!
— kapil bishnoi (@Kapil_Jyani_) June 13, 2026
इन्हीं के गृहमंत्री रहते हुए…
भगवा आतंकवाद शब्द इस्तेमाल किया गया था…
आज यही कितनी बेशर्मी से कह रहे हैं…
भगवा आतंकवाद शब्द क्यों इस्तेमाल किया गया मुझे पता नहीं…
लेकिन ऐसा कुछ था नहीं…!!
कांग्रेस पार्टी की हिंदुओं और भगवा रंग से नफ़रत किसी से ढकी… pic.twitter.com/nJfrYaof8p
एक्स हैंडल ‘जनार्दन मिश्रा’ ने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा, “अब तो पूर्व कॉन्ग्रेसी भी सच बोलने लगे लेकिन चमचे फिर भी नहीं मानेगे…!!”
“मैं भगवा आतंकवाद पर झूठा बयान नहीं देना चाहता था, लेकिन पार्टी कांग्रेस ने मुझे ऐसा करने को कहा।”
— Janardan Mishra (@janardanmis) June 14, 2026
—सुशीलकुमार शिंदे, पूर्व गृह मंत्री
अब तो पूर्व कांग्रेसी भी सच बोलने लगे लेकिन चमचे फिर भी नहीं मानेगे…!! pic.twitter.com/O7xj0y6ZOo
‘भगवा आतंकवाद’ पर शिंदे ने क्या कहा था?
बता दें कि भारत के गृहमंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने साल जनवरी 2013 में कहा था कि भाजपा और आरएसएस के कैंपों में ‘हिंदू आंतकवादियों’ को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस बयान को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई थी। हालाँकि, इन आलोचनाओं के बाद भी वे अपने बयान पर कायम थे।
तब गृहमंत्री शिंदे ने कहा था, “ये सब इतनी बार अख़बार में आ गया है। ये कोई नई चीज़ नहीं है जो मैंने आज कही है। ये भगवा आतंकवाद की ही बात मैंने की है, कोई दूसरी बात नहीं कही है।” दरअसल, 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान शिंदे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आरोप लगाया था।
अपने बयान के पीछे शिंदे ने एक कथित रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था, “हमारे पास रिपोर्ट आ गई है। जाँच में भाजपा हो या आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप, हिंदू आतंकवाद बढ़ाने का काम देख रहे हैं।समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी का धमाका हो, मक्का मस्जिद ब्लास्ट हो या फिर मालेगाँव, हिंदू चरमपंथियों ने वहाँ जाकर बम धमाके करवाए और फिर कह दिया कि ये धमाके अल्पसंख्यकों ने करवाए।”
सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि ऐसी कोशिशों से देश को सतर्क रहना चाहिए। शिंदे के इस बयान पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकवाद दी थी। इससे पहले गृहमंत्री रहते हुए कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने साल 2010 में सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।
भगवा आतंकवाद पर केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में 25 अगस्त 2010 को डीजीपी और आईजी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”


