हाल के वर्षों में अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) और कई अन्य OTT प्लेटफॉर्म लगातार रचनात्मक स्वतंत्रता (creative liberty) की आड़ में भारतीय कहानियों में हिंदू-विरोधी और विभाजनकारी रंग भरते रहे हैं। बॉलीवुड की उस पुरानी प्रवृत्ति को आगे बढ़ाते हुए जिसमें तिलक लगाने वाले, धार्मिक और ऊँची जाति के हिंदुओं को अक्सर खलनायक दिखाया जाता है, कई OTT शो वास्तविक घटनाओं को अलग नजरिए से पेश करते हैं।
OTT शोज भी वास्तविक घटनाओं को दलित पीड़ितता, मुस्लिमों की अच्छाई और हिंदुओं के उपहास वाले विकृत नजरिए से पेश करते हैं। Amazon Prime Video की नई ओरिजिनल सीरीज ‘राख’ (Raakh) को लेकर भी विरोध हो रहा है। इस पर 1978 के गीता और संजय चोपड़ा अपहरण व हत्या मामले जिसे रंगा-बिल्ला केस के नाम से जाना जाता है में झूठी जातिगत उत्पीड़न की कहानी जोड़ने का आरोप है।
प्रमुख किरदारों की जाति और धर्म बदले गए, ऊँची जाति के हिंदुओं की जगह दलित और मुस्लिम, असली सिख रंगा-बिल्ला को हिंदू राज्जो और बाबू बना दिया गया
12 जून 2026 को रिलीज हुई ‘राख’ एक 8 एपिसोड की क्राइम थ्रिलर सीरीज है। इसमें अभिनेता अली फजल, सोनाली बेंद्रे, आमिर बशीर और राकेश बेदी मुख्य भूमिकाओं में हैं। इस सीरीज को 1978 के वास्तविक रंगा-बिल्ला अपहरण और हत्या मामले से प्रेरित बताया गया है।
हालाँकि, इस शो में वास्तविक पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों की जातियों, धर्मों और उनकी भूमिकाओं को बदलकर जबरन ‘भीम-मीम’ नैरेटिव फिट किया गया है।
Prime Video की इस सीरीज ने व्यवस्थित जातिगत उत्पीड़न ‘मुस्लिम ईमानदार हैं’ और ब्राह्मण हिंदू बुरे हैं’ जैसे नैरेटिव गढ़े हैं जबकि असल मामले के रिकॉर्ड में ऐसी कोई बात मौजूद नहीं है।
शो में अभिनेता अली फजल ने सब-इंस्पेक्टर जयप्रकाश जाटव नाम के एक दलित अधिकारी की भूमिका निभाई है। उसके घर में ज्योतिबा फुले और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की तस्वीरें दिखाई गई हैं। रंगा-बिल्ला मामले या उस समय के वास्तविक सब-इंस्पेक्टर से इसका कोई संबंध नहीं है। सीरीज में SI जयप्रकाश जाटव को पुलिस विभाग में जातिगत भेदभाव झेलते हुए दिखाया गया है। उसके सेवानिवृत्त हवलदार पिता को भी जातिगत भेदभाव का शिकार दिखाया गया है। जाटव के पिता को ‘जय भीम’ के नारे लगाते हुए भी दिखाया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि शो में जावेद मुर्तजा नाम का एक मुस्लिम अधिकारी जाटव के मुख्य सहयोगी के रूप में दिखाया गया है, जो अपने स्वभाव में फिल्म शोले के ‘ईमान का पक्का’ रहीम चाचा की याद दिलाता है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ध्यान दिलाया कि Amazon Prime Video की ओरिजिनल सीरीज ‘राख’ में एक आलसी हवलदार को मिश्रा ब्राह्मण के रूप में दिखाया गया है।
उम्मीद के मुताबिक ‘ईमानदार’ और ‘निडर’ पत्रकार का किरदार एक मुस्लिम महिला के रूप में दिखाया गया है। जबकि वास्तविक घटना में बाबूलाल नाम के एक व्यक्ति ने अपहृत भाई-बहन को बचाने की कोशिश की थी, शो में बाबूलाल के किरदार को सलीम बना दिया गया है।
और मुख्य खलनायकों को हिंदू पहचान दी गई है तथा उनके नाम बाबू और राज्जो रखे गए हैं। इनमें से एक को हरियाणवी और दूसरे को महाराष्ट्र का दिखाया गया है। जबकि वास्तविकता में हत्यारे कुलजीत सिंह और जसबीर सिंह नाम के सिख पुरुष थे।
रंगा-बिल्ला केस: 1978 के संजय और गीता चोपड़ा अपहरण-हत्या की कहानी
यहाँ रंगा-बिल्ला मामले के बारे में जानना जरूरी है, जिससे Amazon Prime Video की वेब सीरीज ‘राख’ को ‘कुछ हद तक प्रेरित’ बताया गया है। 26 अगस्त 1978 को नौसेना अधिकारी मदन मोहन चोपड़ा के बच्चे 16 वर्षीय गीता और 13 वर्षीय संजय ऑल इंडिया रेडियो के ‘युवा वाणी’ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए घर से निकले थे।
रास्ते में भारी बारिश के कारण उन्होंने एक कार से लिफ्ट ली। बाद में लोगों ने दोनों को कार के अंदर अपहरणकर्ताओं से संघर्ष करते देखा। एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना भी दी लेकिन पुलिस ने कार का नंबर गलत दर्ज कर लिया।
इसी बीच गीता और संजय के माता-पिता को लगा कि बच्चे कार्यक्रम में पहुँच गए होंगे। जब वे ऑल इंडिया रेडियो पहुँचे तो पता चला कि दोनों वहाँ कभी पहुँचे ही नहीं। इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई।
दो दिन बाद एक ग्वाले को दोनों के शव मिले। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि अपहरण और हत्या के पीछे जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला और कुलजीत सिंह उर्फ रंगा थे। दोनों ने चोटों का इलाज भी नकली पहचान से कराया था। इसके बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया और बड़े पैमाने पर तलाश अभियान चलाया गया। 31 अगस्त 1978 को पुलिस को अपहरण में इस्तेमाल की गई फिएट कार भी बरामद हो गई।
सीरीज ‘राख’ में दिखाया गया है कि दलित पुलिस अधिकारी जयप्रकाश जाटव राज्जो और बाबू का पीछा करते हुए आगरा तक पहुँचता है। लेकिन वास्तविक मामले में रंगा और बिल्ला को किसी एक पुलिस अधिकारी ने नहीं पकड़ा था। असल में सेना के जवानों जिनमें लांस नायक गुरतेज सिंह और ए.वी. शेट्टी शामिल थे, ने आगरा के पास कालका मेल ट्रेन में दोनों को पहचान लिया था। बाद में 8 सितंबर 1978 को उन्हें दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

रंगा और बिल्ला को अदालत ने दोषी ठहराया और दोनों को फाँसी की सजा सुनाई गई। बाद में तिहाड़ जेल में उन्हें फाँसी दे दी गई। गीता चोपड़ा के साथ यौन उत्पीड़न का भी आरोप लगा था लेकिन पोस्टमॉर्टम में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी।
एक क्राइम थ्रिलर में बेजा जाति जोड़ने पर विवाद, लोगों ने उठाए सवाल
‘राख’ में दलित सब-इंस्पेक्टर जयप्रकाश जाटव को मुख्य किरदार के रूप में दिखाया गया है जबकि असल में जाँच का नेतृत्व दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर वी.पी. गुप्ता ने किया था। उनकी टीम में सब-इंस्पेक्टर राम चंदर उनके मुख्य सहयोगी थे। लेकिन शो में SI राम चंदर की जगह SI जावेद मुर्तजा को दिखाया गया है।
इसी तरह, गीता और संजय चोपड़ा को बचाने की कोशिश करने वाला प्रत्यक्षदर्शी बाबूलाल नाम का एक हिंदू व्यक्ति था लेकिन शो में बाबूलाल की जगह सलीम नाम का एक मुस्लिम किरदार दिखाया गया है। वास्तविक रंगा-बिल्ला मामले को विस्तार से कवर करने वाली पत्रकार प्रभा दत्त नाम की एक हिंदू महिला थीं। हालाँकि, सीरीज में उनकी जगह निसार नाम की एक मुस्लिम पत्रकार को दिखाया गया है।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने वास्तविक घटनाओं से प्रेरित इस कहानी में जाति और धर्म आधारित वैचारिक रंग दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।
राहुल त्यागी नाम के एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने लिखा, “इस सीरीज में अली फजल द्वारा निभाए गए मुख्य जाँच अधिकारी को एक दलित के रूप में दिखाया गया है जिसके पिता सेवानिवृत्त हवलदार हैं और उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था। उसका मुख्य सहयोगी एक मुस्लिम अधिकारी है जबकि आलसी हवलदार एक ब्राह्मण है और ईमानदार पत्रकार एक मुस्लिम महिला है। लेकिन वास्तविक मामले में मुख्य जाँच अधिकारी वी.पी. गुप्ता थे, उनके सहयोगी राम चंदर थे और पुलिस आयुक्त जे.एन. चतुर्वेदी थे। मुझे फिल्मों में जातिगत उत्पीड़न दिखाने से कोई समस्या नहीं है लेकिन समस्या तब है जब इसे प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जाए।”

X यूजर ‘स्किन डॉक्टर’ ने लिखा, “…यह रचनात्मक स्वतंत्रता नहीं है। रचनात्मक स्वतंत्रता का उद्देश्य कहानी को बेहतर बनाना होता है, न कि किसी खास वैचारिक एजेंडे के अनुरूप ऐतिहासिक तथ्यों को बदलना। यह एक और उदाहरण है कि कैसे रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर इतिहास को खुलेआम बदला जा सकता है।”

एक अन्य एक्स उपयोगकर्ता ने ‘राख’ के लेखकों अनुशा नंदकुमार और संदीप सकेत की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने इस भयावह अपहरण और हत्या के मामले को ‘जातिगत मोड़’ दे दिया।
यूजर ने लिखा, “लेखकों ने अली फज़ल के किरदार को दलित पुलिस अधिकारी, उसके सहयोगी को मुस्लिम, ईमानदार पत्रकार को मुस्लिम महिला और आलसी हवलदार को ब्राह्मण के रूप में दिखाने का फैसला किया। यह सब ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ के नाम पर और कुछ खास वर्गों को खुश करने के लिए जानबूझकर किया गया लगता है। वामपंथी प्रोपेगेंडा इसी तरह काम करता है। एक बेहद महत्वपूर्ण और भयावह अपराध को जातिगत रंग दे दिया गया।”

हिंदुओं के खिलाफ इस्लामो-लेफ्टिस्ट एक्टिविज्म को बढ़ावा दे रहा Prime Video
अमेजन प्राइम वीडियो बार-बार ऐसा करता रहा है। इस ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने लगातार ऐसे लेखकों, निर्देशकों और अभिनेताओं को मंच दिया है जिनका झुकाव ऊँची जातियों के खिलाफ नैरेटिव की ओर रहा है। ‘राख’ ऐसा पहला शो नहीं है जिसमें बेवजह जाति या धर्म आधारित पीड़ितता की कहानी जोड़ी गई हो। यह भी पहली बार नहीं है जब किरदारों की पहचान बदलकर उत्पीड़क-पीड़ित का ढाँचा तैयार किया गया हो और खासकर ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया जैसे तथाकथित ऊँची जाति के हिंदुओं को निशाना बनाया गया हो।
चाहे प्राइम वीडियो हो, नेटफ्लिक्स हो या अन्य बड़े OTT प्लेटफॉर्म इनमें से ज्यादातर अलग-अलग स्तर पर ऐसे कंटेंट ला रहे हैं। जिनमें हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह, मुस्लिम पीड़ितता और ‘भीम-मीम’ नैरेटिव देखने को मिलते हैं।
साल 2020 में ‘राख’ के निर्देशक प्रोसित रॉय ने प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘पाताल लोक’ का भी आंशिक निर्देशन किया था। बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा द्वारा निर्मित इस शो को खुलकर हिंदू-विरोधी बताया गया था और इसमें सिखों को भी नकारात्मक रूप में दिखाया गया था। वेब सीरीज में ऐसे दृश्य शामिल थे, जिनमें सिखों द्वारा दलितों और पिछड़ी जातियों पर अत्याचार दिखाया गया था। इसके अलावा सिख समुदाय से जुड़े बलात्कार वाले आपत्तिजनक दृश्य भी शामिल थे।
इस शो में अभिनेता जयदीप अहलावत ने इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी की भूमिका निभाई है। एक एपिसोड में देखने को मिलता है कि इंस्पेक्टर चौधरी एक मेले में चल रहे भक्त प्रह्लाद के नाटक तक पहुँच जाता है। गुंडे उसका पीछा कर रहे होते हैं और उनसे बचने के लिए वह मंच पर चढ़ जाता है। संयोग से उसी समय भगवान विष्णु का अवतार नरसिंह खंभे को चीरकर राक्षस हिरण्यकश्यप के सामने प्रकट होता है। इंस्पेक्टर चौधरी भाग रहे नरसिंह का किरदार निभा रहे कलाकार को धक्का देता है, जिससे वह सीधे हिरण्यकश्यप के ऊपर जा गिरता है।
यह शो एक मुस्लिम, एक दलित, एक हिंदू और एक ट्रांसजेंडर चार अपराधियों की कहानी के इर्द-गिर्द घूमता था। शो के निर्माताओं ने अपराधियों के ‘मानवीय पक्ष’ को उभारा और उन्हें ऐसे बेबस लोगों के रूप में दिखाया जो केवल इसलिए परेशान हैं क्योंकि उन्हें ISI और पाकिस्तान से जुड़े मामलों में फँसाया जा रहा है।
मुस्लिम अपराधी कबीर अपनी धार्मिक पहचान छिपाता है। कबीर का पिता हाथीराम से कहता है कि उसके बड़े बेटे की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वह एक खास धर्म से था। उस दृश्य में भगवा झंडे लिए हिंदू उग्रवादी नरसंहार करते हुए दिखाई देते हैं। कबीर का पिता कहता है कि इसी कारण उसने अपने दूसरे बेटे को मुस्लिम तक नहीं बनने दिया लेकिन तुम लोगों ने उसे आतंकवादी बना दिया।

शो का खलनायक ‘त्यागी’ महादेव का कट्टर भक्त दिखाया गया है।
साल 2021 में प्राइम वीडियो ने ‘मुंबई डायरीज 26/11’ नाम का शो रिलीज किया। यह शो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामी आतंकी हमले के दौरान डॉक्टरों, नर्सों, वार्ड बॉय, सुरक्षा कर्मियों, पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स की कठिनाइयों पर केंद्रित था।
हालाँकि, यह शो धर्मनिरपेक्षता दिखाने में हद से आगे निकल गया। उस समय कई दर्शकों ने अभिनय की तारीफ की लेकिन भी दिखा कि ‘मुंबई डायरीज’ ने मुस्लिम किरदार डॉ अहान मिर्जा को सहिष्णु और उदार व्यक्ति के रूप में महिमामंडित किया जबकि हिंदू वार्ड ब्याय समर्थ को नफरत से भरा कट्टरपंथी दिखाया गया।
समर्थ को असभ्य, असहिष्णु और खुलकर सांप्रदायिक दिखाया गया है। वह कई मौकों पर गरीब मुस्लिम डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार भी करता है। पत्रकार मानसी का किरदार शो के निर्देशक के मुखपत्र जैसा दिखाई देता है और अंतिम एपिसोड में वह 26/11 हमलों के पीछे मौजूद इस्लामी जिहादी मानसिकता पर सफाई देते हुए एक लंबा संवाद तक बोलती है।
साल 2021 में प्राइम वीडियो ने एक और हिंदू-विरोधी शो ‘तांडव’ रिलीज किया। इस शो का निर्देशन अली अब्बास जफर ने किया था। 14 जनवरी 2021 को रिलीज हुई वेब सीरीज ‘तांडव’ में हिंदू-विरोधी कंटेंट और हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले दृश्यों भर-भर के थे। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अमेजन इंडिया, निर्देशक, निर्माता और कलाकारों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं।
सैफ अली खान और कुख्यात इस्लामो-वामपंथी मोहम्मद जीशान अय्यूब अभिनीत इस शो के पहले एपिसोड में अय्यूब को भगवान शिव का किरदार निभाते हुए और हाथ में त्रिशूल लिए दिखाया गया। मंच संचालक मजाकिया अंदाज में उसके सोशल मीडिया फॉलोअर्स का जिक्र करता है और कहता है कि उसे अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए ट्वीट करना चाहिए या तस्वीरें अपलोड करनी चाहिए। इसके बाद दर्शकों द्वारा ‘आजादी’ के नारे लगाए जाते हैं।
प्राइम वीडियो की सुपरहिट सीरीज ‘मिर्जापुर’ ने ससुर-बहू और देवर-भाभी के रिश्तों की पूरी मर्यादा को तार-तार कर दिया। इतना ही नहीं, अक्टूबर 2020 में यह भी सामने आया था कि मेवात में निकिता नाम की एक हिंदू लड़की को परेशान करने और इस्लाम में धर्मांतरण के लिए मजबूर करने वाले तौसीफ नाम के एक मुस्लिम युवक ने वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ देखने के बाद उसकी हत्या करने का फैसला किया था।
साल 2023 में प्राइम वीडियो ने सोनाक्षी सिन्हा, गुलशन देवैया, विजय वर्मा और वारिस अहमद जैदी अभिनीत वेब सीरीज ‘दहाड़’ रिलीज की। इस क्राइम थ्रिलर में दो कहानियाँ समानांतर रूप से चलती हैं। पहली कहानी एक ऊँची जाति की हिंदू लड़की रजनी की है, जो अल्ताफ नाम के एक मुस्लिम युवक के साथ भाग जाती है। दूसरी कहानी सायनाइड मोहन पर आधारित एक सीरियल किलर की है।
प्रेम और रेप जिहाद के अनगिनत पीड़ितों का मजाक उड़ाने जैसा प्रतीत होने वाली इस सीरीज में उस पैटर्न के अस्तित्व से इनकार किया गया जिसमें मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू लड़कियों को इस्लाम में धर्मांतरित करने के लिए प्रेम और यौन संबंधों को हथियार बनाने तथा हिंदू आस्था का अपमान करने के आरोप लगते रहे हैं।

उस समय ऑपइंडिया के एक रिव्यू में बताया गया था कि सीरीज में राजपूतों को गुंडों के रूप में दिखाया गया, हिंदू संगठनों (बजरंग दल और ऐसे अन्य संगठनों) को नकारात्मक रूप में पेश किया गया, लव जिहाद को सामान्य दिखाया गया, जातिगत भेदभाव की काल्पनिक कहानियाँ जोड़ी गईं और मुख्य खलनायक के रूप में एक ऊँची जाति के हिंदू को चुना गया।
इससे पहले प्राइम वीडियो ने ‘शेरनी’ नाम की एक सीरीज रिलीज की थी। विद्या बालन अभिनीत यह वेब सीरीज वास्तविक घटनाओं पर आधारित थी। हालाँकि, ‘राख’ की तरह ही ‘शेरनी’ में भी हिंदू IFS अधिकारी के. आभारना को बदलकर विद्या बालन द्वारा निभाए गए ईसाई किरदार विन्सेंट के रूप में दिखाया गया। वहीं, वास्तविक जीवन के शिकारी असगर अली खान की जगह कलावा पहनने वाले रंजन राजहंस को दिखाया गया।

2020 में अमेजन प्राइम की तत्कालीन क्रिएटिव हेड अपर्णा पुरोहित को उनके वामपंथी झुकाव के लिए सोशल मीडिया पर घेरा गया था। उनके सोशल मीडिया पेज हिंदू-विरोधी प्रचार, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के प्रति नफरत भरी पोस्टों से भरे हुए थे।
ये OTT प्लेटफॉर्म मनोरंजन को ब्रेनवॉश करने के औजारों में बदल रहे हैं, हिंदुओं को ‘गैसलाइ’ कर रहे हैं और एक विभाजनकारी एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। ‘राख’ को भी प्राइम वीडियो के उसी तरीके की अगली कड़ी माना जा रहा है, जहाँ कहानी में तथ्यों से ज्यादा वैचारिक संदेशों को महत्व दिया गया है।
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)


