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जानिए दुबई के उस ‘Botim’ ऐप की कहानी, जिसके जरिए कनेक्टेड थे राँची में RSS दफ्तर पर बम फेंकने वाले पाकिस्तानी एजेंट

रांची हमले के दो मुख्य आरोपित सैफ अंसारी और अमन अंसारी भी कुछ समय पहले रोजगार की तलाश में दुबई गए थे। वहाँ रहते हुए उन्होंने अपनों से बात करने के लिए इस ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड किया था। इसी दौरान दुबई में वे शाहबाज राणा उर्फ भट्टी नाम के एक पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में आए।

झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दफ्तर पर हुए हालिया पेट्रोल बम हमले ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस गंभीर मामले की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस हमले के तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और दुबई से जुड़े हुए पाए गए हैं।

इस पूरी आतंकी साजिश को रचने, स्थानीय स्तर पर लड़कों को तैयार करने और विदेशों में बैठे आकाओं से खुफिया बातचीत करने के लिए एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया गया था। इस प्लेटफॉर्म का नाम ‘Botim’ (बोटिम) ऐप है। इस नए और बेहद चालाक तरीके ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक बिल्कुल नई चुनौती खड़ी कर दी है। आइए इस पूरे मामले का एक-एक पहलू बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।

क्या हुआ था रांची के संघ कार्यालय में

यह घटना 16 जून की आधी रात के वक्त की है। रांची के निवारणपुर (चुटिया थाना क्षेत्र) में स्थित संघ कार्यालय में करीब बीस लोग अंदर मौजूद थे। इसी दौरान दो युवक पैदल चलकर दफ्तर के बाहर पहुँचते हैं। उनके हाथों में पेट्रोल से भरी शीशे की बोतलें थीं। एक युवक लाइटर से बोतल के मुँह पर बंधी पट्टी में आग लगाता है और उसे संघ कार्यालय की तरफ फेंक देता है। हमलावरों ने कुल दो पेट्रोल बम फेंके थे, जिनमें से एक मुख्य गेट के बाहर गिरा और दूसरा इमारत की छत पर जा गिरा।

गनीमत यह रही कि इस हमले में किसी को चोट नहीं आई, वरना बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। बम फेंकने के तुरंत बाद आरोपित वहाँ से भाग निकले। वारदात को अंजाम देकर ये लोग ट्रेन से दिल्ली भागने की फिराक में थे। हालाँकि, रांची पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और अलर्ट जारी करके आरोपितों को बिहार के गया रेलवे स्टेशन से धर दबोचा। इस मामले में पुलिस ने मुख्य हमलावरों सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सैफ अली अंसारी उर्फ रोहित, अमन अंसारी और सायम सुजान शामिल हैं।

क्या है यह ‘Botim’ ऐप और इसका पूरा सच

Botim‘ (बोटिम) मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE का एक बहुत ही बड़ा और लोकप्रिय डिजिटल संचार प्लेटफॉर्म है। इसकी शुरुआत काफी समय पहले हुई थी और शुरुआत में यह केवल सुरक्षित Voice और Video कॉलिंग करने के लिए बनाया गया था। आज के समय में दुनिया भर में इसके 15 करोड़ से भी ज्यादा एक्टिव यूजर्स हो चुके हैं। वक्त बदलने के साथ यह ऐप अब सिर्फ बातचीत करने का माध्यम नहीं रहा है, बल्कि यह एक ‘सुपर ऐप’ बन चुका है।

इसके जरिए लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजते हैं, अपने रोजमर्रा के बिलों का भुगतान करते हैं और घरेलू पेमेंट ट्रांसफर भी करते हैं। इस पूरे डिजिटल सिस्टम को एस्ट्रा टेक नाम की कंपनी संचालित करती है। दुबई और खाड़ी देशों में यह ऐप वहाँ के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा माना जाता है।

दुबई कनेक्शन और कैसे भारत आया इसका नेटवर्क

इस खतरनाक नेटवर्क के भारत आने की कहानी काफी पेचीदा और चौंकाने वाली है। दुबई और पूरे UAE में सरकार के बहुत कड़े कानून और नियम लागू हैं। वहाँ पर सुरक्षा कारणों से व्हाट्सएप कॉलिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। इस वजह से भारत, पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी देश से जो लोग दुबई कमाने या घूमने जाते हैं, वे अपने घर पर Video या वॉयस कॉल करने के लिए अनिवार्य रूप से बोटिम ऐप का ही इस्तेमाल करते हैं।

रांची हमले के दो मुख्य आरोपित सैफ अंसारी और अमन अंसारी भी कुछ समय पहले रोजगार की तलाश में दुबई गए थे। वहाँ रहते हुए उन्होंने अपनों से बात करने के लिए इस ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड किया था। इसी दौरान दुबई में वे शाहबाज राणा उर्फ भट्टी नाम के एक पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में आए। शाहबाज राणा ही इस पूरी साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड है, जो ISI के इशारे पर भारत विरोधी नेटवर्क चला रहा है।

पाकिस्तानी आकाओं ने कैसे किया इस ऐप का इस्तेमाल

दुबई में व्हाट्सएप कॉलिंग बंद होने के कारण मास्टरमाइंड शाहबाज राणा ने इन दोनों भारतीय लड़कों से संपर्क बनाए रखने के लिए बोटिम ऐप का ही इस्तेमाल करना शुरू किया। उसने इन युवाओं की आर्थिक लाचारी का फायदा उठाया और धीरे-धीरे इनका ब्रेनवॉश कर दिया। उसने इन्हें पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) के लिए काम करने के लिए पूरी तरह राजी कर लिया।

जब सैफ और अमन भारत वापस लौटे, तो वे अपने मोबाइल में इस ऐप के जरिए पाकिस्तानी आका के सीधे संपर्क में थे। शाहबाज राणा ने बोटिम ऐप के जरिए ही इन्हें रांची में RSS दफ्तर की रेकी करने, टारगेट चुनने और हमला करने के निर्देश दिए थे। यहाँ तक कि हमले के लिए पेट्रोल बम कैसे बनाया जाता है, इसके वीडियो ट्यूटोरियल भी सोशल मीडिया और इसी ऐप के जरिए इन तक पहुँचाए गए थे।

हमला करके हैंडलर को सबूत भेजने का खेल

इस पूरी आतंकी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात CCTV फुटेज और जाँच में सामने आई है। जब एक आरोपित दफ्तर पर पेट्रोल बम फेंक रहा था, तब उसका दूसरा साथी अपने मोबाइल फोन से इस पूरी घटना का लाइव वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। आरोपियों ने दफ्तर को पूरी तरह से आग के हवाले करने की नियत से यह कदम उठाया था। बम फेंकने की वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद, उन्होंने भागते हुए इस पूरी घटना का वीडियो बोटिम ऐप के जरिए दुबई में बैठे अपने पाकिस्तानी हैंडलर शाहबाज राणा को भेज दिया।

यह वीडियो इसलिए भेजा गया था ताकि वे अपने आका को यह सबूत दे सकें कि उन्होंने दिए गए टास्क को पूरी तरह पूरा कर दिया है। यह इस बात का साफ सबूत है कि यह कोई मामूली तोड़फोड़ नहीं थी, बल्कि विदेशों से संचालित होने वाला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने खड़ी हुई नई चुनौतियां

बोटिम ऐप का इस तरह आतंकी घटना में इस्तेमाल होना भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है। यह ऐप खुद को पूरी तरह से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित होने का दावा करता है, जिससे इसकी चैट और कॉल्स को आसानी से ट्रैक करना मुश्किल होता है। सबसे बड़ी चिंता इस ऐप के फाइनेंशियल टूल्स को लेकर है। चूंकि इस ऐप के जरिए विदेशों से सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

इसलिए जाँच एजेंसियाँ अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि कहीं इन आतंकियों को हमले के लिए इसी रास्ते से फंडिंग तो नहीं की गई थी। पाकिस्तानी एजेंसियाँ अब बहुत ही कम खर्च में स्थानीय युवाओं को सोशल मीडिया और ऐसे ऐप्स के जरिए बहकाकर छोटे-छोटे आतंकी मॉड्यूल तैयार कर रही हैं, जिन्हें ट्रैक करना बेहद कठिन होता जा रहा है।

सख्त कानूनी कार्रवाई और एनआईए की तैयारी

रांची पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। गिरफ्तारी के बाद जब मुख्य आरोपित सैफ अंसारी ने कोतवाली थाने के पास से पुलिसकर्मियों पर हमला करके भागने की कोशिश की, तो पुलिस ने पीछा करके मंडला टोल प्लाजा के पास मुठभेड़ में उसके पैर में गोली मार दी। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने पकड़े गए सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और देश का सबसे कड़ा आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए (UAPA) लगा दिया है।

यूएपीए की धाराएँ लगने के बाद अब इन आरोपितों को आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी। मामले की गहराई और इसके अंतरराष्ट्रीय तथा पाकिस्तानी कनेक्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है, और बहुत जल्द इस पूरे नेटवर्क की जाँच NIA को सौंपी जा सकती है ताकि देश के भीतर छिपे इसके अन्य मददगारों को भी बेनकाब किया जा सके।

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