भारत ने कतर के ‘फादर अमीर’ हिज हाइनेस शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन पर एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। 13 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय झंडा आधा झुका रहेगा। तिरंगा उन सभी इमारतों पर एक दिन तक आधा झुका रहेगा, जहाँ राष्ट्रीय झंडा नियमित फहराया जाता है।
इस दिन कोई आधिकारिक मनोरंजन वाले कार्यक्रम भी नहीं आयोजित होंगे। संसदीय मामलों और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू जल्द ही कतर जाएँगे और भारत सरकार की ओर से कतर को शोक संदेश देंगे और संवेदना जताएँगे।
#WATCH | Delhi | National flag atop Samvidhan Sadan (Old Parliament Building) flies at half mast to mourn the passing away of His Highness Sheikh Hamad bin Khalifa Al-Thani, Father Amir of the State of Qatar, who passed away on July 12th pic.twitter.com/htUFE0FhVJ
— ANI (@ANI) July 13, 2026
पीएम मोदी ने फादर अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन पर शोक व्यक्त किया है और कहा है कि वह भारत के सच्चे दोस्त थे। उन्होंने कहा कि वे दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिन्होंने कतर को विकास और खुशहाली को नई ऊँचाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कतर के फादर अमीर को श्रद्धांजलि दी और कतर के नेतृत्व, शाही परिवार और वहाँ की जनता के प्रति अपनी संवेदना जताई।
अपने पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, हम उन्हें एक सच्चे दोस्त के रूप में याद करते हैं। पीएम ने फरवरी 2024 की अपनी कतर यात्रा को याद किया और ‘फादर अमीर’ के प्रति संवेदना जताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
نشعر بحزن عميق لوفاة الأمير الوالد لدولة قطر، صاحب السمو الشيخ حمد بن خليفة آل ثاني.
— Narendra Modi (@narendramodi) July 12, 2026
لقد كان قائداً صاحب رؤية، قاد قطر إلى مستويات عظيمة من التطور والازدهار. ونتذكره أيضاً كصديق حقيقي تشرفت بلقائه خلال زيارتي الأخيرة لقطر في فبراير 2024.
أقدم خالص التعازي لأمير قطر، صاحب السمو…
2024 की प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान भारत-कतर के आपसी रिश्तों में और मजबूती आई। कतर भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला अहम देश है। पीएम मोदी के दौरे के दौरान द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा के क्षेत्र में अहम समझौते हुए । कतर की जनसंख्या में अप्रवासी भारतीयों का बड़ा भाग है, जो कतर के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। इससे दोनों देश की नजदीकियाँ भी बढ़ी हैं।
कौन थे शेख हमद बिन खलीफा अल थानी
1995 से 2013 तक कतर के अमीर के रूप में अपनी सेवा देने वाले शेख हमद बिन खरीलाफ अल थानी को आधुनिक कतर का निर्माता कहा जाता है। कतर को आर्थिक राजनयिक और वैश्विक स्तर पर उन्होंने पहचान दिलाई। उनके शासनकाल में कतर ने अपने नेचुरल गैस के व्यापक भंडार के दम पर तेजी से प्रगति की और वैश्विक स्तर पर संपन्न देश के रूप में अपनी पहचान बना। उन्होंने इसके बाद अपनी सत्ता बेटे शेख तमीन बिन हमद अल थानी को सौंप दी। 12 जुलाई 2026 को 74 वर्ष में उनका निधन हो गया।
शेख हमद बिन खलीफा अल थानी को कतर में ‘फादर अमीर’ कहा जाता है। दरअसल ये कोई पारिवारिक संबोधन नहीं, बल्कि कतर में दिया जाने वाला एक सम्मानजनक आधिकारिक खिताब है। जब कोई शासक या अमीर अपनी सत्ता स्वेच्छा से अपने उत्तराधिकारी को सौंप देता है, तब उसे ‘फादर अमीर’ कहा जाता है। शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने 2013 में स्वेच्छा से अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद अल-थानी को सत्ता सौंप दी थी। इसलिए उन्हें कतर में सम्मान से ‘फादर अमीर’ कहते हैं। खाड़ी देशों में इस तरह का स्वैच्छिक सत्ता हस्तांतरण बहुत कम देखने को मिलता है।
उनका जन्म 1952 में हुआ था। उनके अब्बू का नाम शेख खलीफा बिन हमद अल-थानी था जो कतर के शासक थे। उनकी अम्मी शेखा आयशा बिंत हमद अल अत्तिया था। कतर पर अली थानी राजवंश की शुरुआत 19वीं सदी के मध्य से है। जब कतर को 1971 में ब्रिटेन से आजादी मिली, तो उसके कुछ ही महीनों बाद 1972 में शेख हमद के पिता शेख खलीफा कतर के अमीर बन गए थे। इसलिए फादर अमीर को बचपन से ही सत्ता का उत्तराधिकारी माना जाता था।
यूके के प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री एकेडमी सैंडहर्स्ट से 1971 में ग्रेजुशन करने के बाद वह कतर आकर सेना में शामिल हो गए। धीरे-धीरे वह सेना के कमांडर इन चीफ के पद तक पहुँचे। 1977 में उन्हें कतर का ‘क्राउन प्रिंस’ आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया। जून 1995 में कतर में उन्होंने रक्तहीन सत्तापलट किया। हुआ यूँ कि उनके पिता शेख खलीफा जब स्विटजरलैंड की यात्रा पर थे तो उन्होंने सेना के समर्थन से तख्तापलट किया और खुद को ‘अमीर’ घोषित कर दिया। इसकी वजह से दोनों के रिश्तों में दरार आ गई। लंबे समय तक अब्बा फ्रांस में निर्वासित रहे, लेकिन आपसी सुलह के बाद 2004 में वे कतर लौटे, जहाँ 2016 में उनका निधन हुआ।
दरअसल फादर अमीर का मानना था कि उनके पिता प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर रहे और पुराने तरीके से शासन चला रहे हैं।
आधुनिक कतर के निर्माता
उन्होंने कतर को अपने शासनकाल में पूरी तरह बदल दिया।कतर के प्राकृतिक संसाधनों खासकर गैस भंडार का व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। उनके नेतृत्व में कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल हो गया। इसका असर ये हुआ कि देश में समृद्धि आई और प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे अव्वल श्रेणी में पहुँच गई। उन्होंने कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड के जरिए दुनिया भर में बड़े निवेश कराए। इससे कतर की आर्थिक और रणनीतिक पहुँच कई देशों तक बढ़ी। उनके शासन में अल जजीरा न्यूज नेटवर्क की स्थापना हुई, जिसने कतर को वैश्विक मीडिया शक्ति के रूप में पहचान दिलाई।
उनके नेतृत्व में कतर ने 2022 फीफा विश्व कप की मेजबानी का अधिकार हासिल किया। इसके लिए देश में मेट्रो, स्टेडियम, सड़कें और दूसरे बुनियादी ढाँचे का व्यापक विकास हुआ। उन्होंने कतर को मध्य-पूर्व की कूटनीति में महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया। हालाँकि कुछ क्षेत्रीय नीतियों और इस्लामी संगठनों के साथ संबंधों को लेकर उनकी सरकार विवादों में भी रही।
भारत और कतर के बीच ऊर्जा, व्यापार, तकनीक के क्षेत्र में मजबूत रिश्ते हैं। प्रवासी भारतीयों की बड़ी संख्या यहाँ रहती है जिससे दोनों देशों के संबंध और गहरे हो गए हैं। लाखों भारतीय वहाँ काम करते हैं और कतर के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। खासकर शेख हमद के शासनकाल के दौरान दोनों देशों के संबंध बेहद मजबूत हुए थे। यही वजह है कि भारत सरकार ने उनके निधन पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
तिरंगा कब आधा झुकाया जाता है?
भारत में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को राष्ट्रीय शोक के वक्त आधा झुकाया जाता है। यह शोक के साथ-साथ उनके प्रति सम्मान का प्रतीक है।
आम तौर पर देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश और दूसरे उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों के निधन पर झंडा आधा झुकाया जाता है।
भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार ऐसा किया जाता है। वैश्विक गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर गृह मंत्रालय विशेष निर्देश जारी करता है, तब झंडा झुकाया जाता है।
किसी राज्य के राज्यपाल या मुख्यमंत्री के निधन पर उस राज्य में झंडा आधा झुकाया जाता है। किसी राष्ट्रीय त्रासदी पर या असाधारण घटना पर जब केन्द्र सरकार राष्ट्रीय शोक घोषित करती है तो झंडा आधा झुका रहता है।
इसके अलावा किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के मुखिया या महत्वपूर्ण वैश्विक नेता के निधन पर यदि भारत सरकार राष्ट्रीय शोक घोषित करती है, तो उस दिन सभी सरकारी इमारतों पर तिरंगा आधा झुका रहता है। इस दिन सरकारी कामकाज तो सामान्य रूप से होते हैं लेकिन कोई मनोरंजन कार्यक्रम नहीं होता है। हालाँकि राष्ट्रीय अवकाश भी नहीं होता है।


