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मैदान में CM योगी, बूथ तक सक्रिय संगठन और भ्रम में विपक्ष… UP में BJP ऐसे कर रही 2027 में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी

केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट या सरकार विरोधी बयान चुनावी जमीन तैयार नहीं करते बल्कि उसके लिए बूथ स्तर तक सक्रिय संगठन और जनता के बीच लगातार मौजूदगी भी चाहिए। राजनीति में मैदान कभी खाली नहीं रहता… जो जमीन पर उतरता है, अक्सर बढ़त भी वही बना लेता है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में करीब 9 महीने बाकी हैं लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी संगठनात्मक मशीनरी को अभी से चुस्त-दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भाजपा की चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा आधार उसका संगठन रहा है और इस बार भी पार्टी उसी मॉडल पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक साथ आयोजित बूथ सम्मेलन इस बात का संकेत है कि भाजपा ने चुनावी मशीनरी को समय से पहले सक्रिय कर दिया है।

बूथ स्तर से शुरुआत

भाजपा ने 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक साथ बूथ स्तरीय सम्मेलन आयोजित किए। पार्टी के अनुसार, यह प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा बूथ-स्तरीय संगठनात्मक अभियान था जिसमें राज्य के 1,77,516 मतदान केंद्रों को कवर किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में तो बरेली में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और शाहजहाँपुर में ब्रजेश पाठक ने बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित किया। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी अलग-अलग जिलों में पहुँचे हैं।

भाजपा के लिए बूथ केवल मतदान का केंद्र नहीं बल्कि पूरे चुनाव अभियान की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। यही कारण है कि बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र प्रमुखों और मंडल स्तर के पदाधिकारियों को लगातार प्रशिक्षण, संवाद और समीक्षा बैठकों के माध्यम से सक्रिय किया जा रहा है। पार्टी का प्रयास है कि प्रत्येक बूथ पर ऐसा कार्यकर्ता तंत्र तैयार हो जो अपने क्षेत्र के मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखे, नए मतदाताओं तक पहुँचे और सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुँचाए। भाजपा का संगठन वर्षों से इसी मॉडल पर काम करता आया है और 2027 के चुनाव में भी यही उसकी पहली प्राथमिकता दिखाई दे रही है।

कमजोर सीटों पर खास फोकस

पार्टी की रणनीति सिर्फ मजबूत इलाकों तक सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तों राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए जा रहे चुनावी खाके में प्रदेश की सभी 403 सीटों को 4 श्रेणियों में बाँटा गया है और खास नजर उन करीब 61 विधानसभा सीटों पर है जहाँ भाजपा पिछले तीन विधानसभा चुनावों 2012, 2017 और 2022 में जीत दर्ज नहीं कर सकी।

इन सीटों पर नए सिरे से बूथ प्रबंधन, जातीय समीकरण का आकलन, लाभार्थी संपर्क अभियान और संभावित उम्मीदवारों का सर्वे कराए जाने की योजना है। पार्टी का लक्ष्य इन कमजोर सीटों पर संगठन को बिल्कुल नए सिरे से खड़ा करना है ताकि लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का रास्ता और पुख्ता हो सके।

कुछ दिनों पहले ही बदले थे क्षेत्रीय अध्यक्ष

पिछले कुछ महीनों में केवल बूथ सम्मेलन ही नहीं हुए बल्कि संगठन के भीतर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अभी करीब महीनेभर पहले ही भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदल दिए थे। राजनीतिक दृष्टि से यह केवल पदों का परिवर्तन नहीं माना था बल्कि इसे सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश थी। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि हर क्षेत्र में ऐसा नेतृत्व सामने आए जो स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चुनावी तैयारी को और मजबूत कर सके।

सरकार और संगठन साथ-साथ

यह भी गौर करने वाली बात है कि यह पूरी कवायद सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे हैं। CM योगी एक-एक दिन में कई शहरों को कवर कर रहे हैं। सैकड़ों करोड़ की सौगात दे रहे हैं। कुल मिलाकर कहें तो सरकार का कामकाज और संगठन का विस्तार दोनों मोर्चों पर एक साथ काम हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार जिन विकास परियोजनाओं, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, धार्मिक पर्यटन, निवेश, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढाँचे के कार्यों को आगे बढ़ा रही है और संगठन उन्हें लोगों तक पहुँचाने का काम कर रहा है। भाजपा यह मानकर चल रही है कि यदि सरकार के काम का संदेश सीधे मतदाता तक पहुँचेगा तो उसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। इसलिए कार्यकर्ताओं को केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जा रहा बल्कि उन्हें लाभार्थियों से संपर्क और जनसंवाद की जिम्मेदारी भी दी जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि BJP अपने करीब 2.5 करोड़ प्राथमिक सदस्यों का एक डेटाबेस तैयार कर रही है और इसका मकसद हर एक वोटर तक पहुँचना है। इसके लिए प्रदेश पदाधिकारियों को जिलों में, जिला पदाधिकारियों को मंडलों में और मंडल स्तर के पदाधिकारियों को बूथों का दौरा कर सत्यापन रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वृक्षारोपण अभियान, डिजिटल प्रशिक्षण और कारगिल विजय दिवस जैसे आयोजनों के जरिए भी कार्यकर्ताओं को लगातार सक्रिय बनाए रखने की कोशिश हो रही है।

विदेश घूम रहे विपक्षी, नहीं मिल रहे मुद्दे

इन सबके बीच बड़ा सवाल विपक्ष की भूमिका को लेकर भी खड़ा होता है। क्योंकि चुनाव के बाद वोट चोरी से लेकर EVM हैकिंग जैसे आरोप राजनीतिक दल लगाते हैं तो आज वो दल क्या कर रहे हैं। एक तरफ भाजपा बूथ से लेकर मंडल और जिले तक पूरे संगठन को मैदान में उतार चुकी है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष अभी तक प्रदेश में ठोस राजनीतिक एजेंडा ही तलाशता नजर आ रहा है।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी दोनों हाल ही में विदेश यात्राओं से छुट्टी मनाकर लौटे हैं और अब उनके पास कोई ऐसा मुद्दा नहीं नजर आ रहा है जिसके दम पर योगी सरकार को लगातार घेरा जा सके।

एक असलियत यह भी है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय विपक्ष के लिए सरकार को घेरना पहले जितना आसान नहीं दिख रहा। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा लगातार अपनी सख्त छवि पेश कर रही है। एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, निवेश, औद्योगिक परियोजनाएंँ धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढाँचे के विकास को सरकार अपनी उपलब्धियों के तौर पर सामने रख रही है।

भाजपा का संगठन इन्हीं उपलब्धियों को घर-घर तक पहुँचाने में लगा है। ऐसे में विपक्ष के पास फिलहाल ऐसा कोई बड़ा नैरेटिव नजर नहीं आता, जो इन दावों का प्रभावी राजनीतिक जवाब बन सके। केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट या सरकार विरोधी बयान चुनावी जमीन तैयार नहीं करते बल्कि उसके लिए बूथ स्तर तक सक्रिय संगठन और जनता के बीच लगातार मौजूदगी भी चाहिए। राजनीति में मैदान कभी खाली नहीं रहता… जो जमीन पर उतरता है, अक्सर बढ़त भी वही बना लेता है।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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