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जहाँ युवा, वहाँ PM मोदी… एक ही Reel से बना डाला रिकॉर्ड: मंत्रियों को संदेश- अब Insta करें इस्तेमाल, जानें- कैसे ‘फोटो शेयरिंग ऐप’ बन गया GenZ का फेवरेट

मंत्रियों को दिए गए इस निर्देश के पीछे एक बहुत बड़ी राजनीतिक दूरदर्शिता छिपी है, जिसे जंतर-मंतर पर सुलग रहे आंदोलन को शांत करने के एक शांत और प्रभावी जरिया के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार यह अच्छी तरह समझ चुकी है कि सड़कों पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और युवाओं के गुस्से को केवल पुलिस या बयानों से नहीं दबाया जा सकता, बल्कि इसके लिए पारदर्शी संवाद और उनकी भाषा में बात करना जरूरी है।

जंतर-मंतर की भीड़ में एक युवा खड़ा था। उसके हाथ में प्लेकार्ड था, आँखों में गुस्सा और दिल में सवाल। NEET पेपर लीक की खबरों ने हजारों सपनों को हिला दिया था। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले युवाओं और GenZ की टोली जमा थी। वे कह रहे थे- सिस्टम बदलो, जवाब दो। दूर दिल्ली के किसी कमरे में एक आदमी यह सब देख रहा था। उम्र में फर्क बहुत था, लेकिन बात समझने में कोई फर्क नहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया- पुराने तरीके छोड़ो, वहाँ जाओ जहाँ युवा हैं। इंस्टाग्राम खोलो, सेल्फी मोड ऑन करो, और सीधे बात करो। पिछले 24 घंटे में उन्होंने दो Reels अपलोड किए। और फिर जो हुआ, वह सोशल मीडिया की दुनिया में नया रिकॉर्ड बन गया। यह सिर्फ वीडियो नहीं था। यह एक नई कोशिश थी- उम्र के फासले को पार करके युवाओं के दिल तक पहुँचने की।

जंतर-मंतर से शुरू हुई कहानी

देखिए, हालात ऐसे थे कि युवा सड़क पर उतर आए थे। कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से चला यह आंदोलन NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उन परिवारों के मुआवजे की माँग कर रहा था, जहाँ छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी। सरकार कह रही थी कि गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं, दोबारा परीक्षा कराई गई, लेकिन युवा संतुष्ट नहीं थे। ऐसे में PM मोदी ने पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस या लंबे भाषण का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने वह तरीका अपनाया जो आज के Gen-Z को सबसे ज्यादा पसंद है– छोटा वीडियो, सीधी बात, सेल्फी स्टाइल।

पहले Video में उन्होंने साफ कहा कि पेपर लीक कोई छोटी बात नहीं है। लाखों छात्रों और उनके माता-पिता को बहुत दर्द हुआ है। पिछले ढाई महीने में कई कदम उठाए गए, दोषियों को गिरफ्तार किया गया, करीब 22 लाख छात्रों को दोबारा परीक्षा का मौका मिला। अब और सख्त कार्रवाई होगी। कैबिनेट में बिल आएगा, फास्ट ट्रैक कोर्ट होंगे। यह वीडियो रात के समय आया, जब ज्यादातर युवा फोन स्क्रॉल कर रहे होते हैं। भाषा साधारण थी, लहजा अपनापन वाला। जैसे कोई बड़ा भाई या चाचा समझा रहा हो। उम्र का फासला तो था, लेकिन बात जेन-जी की भाषा में थी।

फिर दूसरा वीडियो, युवाओं तक पहुँचना का मकसद

दूसरा Video सिर्फ 24 घंटे के अंदर आया। इसमें PM मोदी ने धन्यवाद दिया। ‘थैंक यू फ्रेंड्स। कल रात आप सभी से मिलने का मौका मिला। जिस तरह आपने Video पर रिएक्ट किया, सकारात्मक सुझाव दिए, सबका शुक्रिया। आपका प्यार बना रहेगा और हमारा रिश्ता और मजबूत होगा।’ इतनी सी बात, लेकिन असर गहरा। युवाओं ने महसूस किया कि उनकी बात सुनी जा रही है। सुझाव माँगे जा रहे हैं। यह सिर्फ एकतरफा संदेश नहीं था। यह बातचीत की शुरुआत लग रही थी।

पीएम मोदी बार-बार यही कह रहे हैं कि वे युवाओं के साथ जुड़ना चाहते हैं, उनकी बात सुनना चाहते हैं और उन्हें भरोसा दिलाना चाहते हैं कि सरकार उनके साथ है। परीक्षाओं में धांधली उनके भविष्य से खिलवाड़ है, इसलिए सख्त कानून लाए जाएँगे। कैबिनेट ने पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी। न्यूनतम पाँच साल की सजा, संगठित गिरोहों के लिए 10 साल तक और एक करोड़ रुपए तक जुर्माना। NEET, JEE, CUET, UPSC, SSC सब कवर होंगे। PM ने कहा था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस पुरानी बात हो गई। अब लाइव जाकर युवाओं से सीधा संवाद बेहतर है। उन्होंने हर रविवार रात आठ बजे इंस्टाग्राम लाइव का ऐलान भी किया।

PM के 2 वीडियो के आँकड़े– चौंकाने वाली संख्या

बता दें कि PM मोदी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोअर्स अब 103 मिलियन यानी 10 करोड़ 30 लाख हो चुके हैं। पहली वीडियो 23 जुलाई को आधी रात को आई थी। इसमें 17.9 मिलियन यानी 1 करोड़ 79 लाख लाइक्स आए, 1.7 मिलियन यानी 17 लाख कमेंट्स पड़े और इम्प्रेशन 346 मिलियन यानी 34 करोड़ 60 लाख तक पहुँच गए। यह Video खुद PM मोदी ने अपने हाथ में फोन लेकर रिकॉर्ड किया था। छात्रों को आश्वासन दिया कि पेपर माफिया पर सख्ती होगी और उनकी मेहनत बर्बाद नहीं होगी।

दूसरी Video 24 जुलाई को अपलोड हुआ। इसमें 10.4 मिलियन यानी 1 करोड़ 4 लाख लाइक्स, 1 मिलियन यानी 10 लाख कमेंट्स और इम्प्रेशन 158 मिलियन यानी 15 करोड़ 80 लाख आए। इसमें PM ने युवाओं का आभार जताया। दोनों वीडियो मिलकर साबित करते हैं कि जब बात दिल से और सही प्लेटफॉर्म पर हो, तो युवा सुनते हैं। ये आँकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं। ये दिखाते हैं कि युवा सरकार की बात सुनने को तैयार हैं, बशर्ते बात उनकी भाषा में हो।

अब PM मोदी का मंत्रियों को साफ संदेश– इंस्टाग्राम पर आओ, रील्स बनाओ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद युवाओं तक पहुँचने का रास्ता तो बना ही लिया, साथ ही उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों को भी यह संदेश जारी किया। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से यह सवाल किया कि उनमें से कितने लोग इंस्टाग्राम जैसी आधुनिक सोशल मीडिया साइट्स पर एक्टिव है और इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने मंत्रियों को साफ शब्दों में हिदायत दी कि केवल सरकारी फाइलों के आँकड़े या कागजी योजनाएँ पेश करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें भी रील्स और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना होगा। प्रधानमंत्री का मानना है कि देश की एक बहुत बड़ी युवा आबादी अपना वक्त इन्हीं प्लेटफॉर्म्स पर बिताती है, इसलिए सरकार को उनके साथ सीधे जुड़ने की अपनी क्षमता को और ज्यादा मजबूत करना चाहिए।

मंत्रियों को दिए गए इस निर्देश के पीछे एक बहुत बड़ी राजनीतिक दूरदर्शिता छिपी है, जिसे जंतर-मंतर पर सुलग रहे आंदोलन को शांत करने के एक शांत और प्रभावी जरिया के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार यह अच्छी तरह समझ चुकी है कि सड़कों पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और युवाओं के गुस्से को केवल पुलिस या बयानों से नहीं दबाया जा सकता, बल्कि इसके लिए पारदर्शी संवाद और उनकी भाषा में बात करना जरूरी है।

इसी रणनीति का हिस्सा है कि सरकार ने पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए एक बेहद कड़े कानून का मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत संगठित अपराधियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही NTA में बड़े स्तर पर संस्थागत सुधार भी किए जा रहे हैं, जिनकी जानकारी अब सरकार सीधे इन डिजिटल माध्यमों से युवाओं तक पहुँचा रही है।

इंस्टाग्राम कैसे बना GenZ का सबसे पसंदीदा ठिकाना?

अब बात करते हैं उस प्लेटफॉर्म की, जिसने यह सब मुमकिन बनाया। इंस्टाग्राम की शुरुआत 6 अक्टूबर 2010 को हुई थी। इसे दो युवकों ने बनाया– केविन सिस्ट्रॉम और माइक क्रीगर। दोनों स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। पहले उन्होंने बर्बन नाम का एक ऐप बनाया था, जिसमें लोकेशन चेक-इन और फोटो शेयरिंग दोनों थे। लेकिन उन्होंने देखा कि लोग फोटो वाले हिस्से को ज्यादा पसंद करते हैं। तो बाकी सब हटाकर सिर्फ फोटो शेयरिंग पर फोकस किया। नाम रखा इंस्टाग्राम– इंस्टेंट कैमरा और टेलीग्राम का मेल। मकसद साधारण था– मोबाइल से अच्छे फिल्टर वाली तस्वीरें आसानी से दोस्तों के साथ शेयर करना। पुरानी पोलरॉइड फोटो की याद दिलाने वाला अंदाज़।

शुरुआत में सिर्फ आईफोन के लिए था। पहले दिन 25 हजार यूजर्स जुड़ गए। एक महीने में दस लाख, एक साल में एक करोड़। 2012 में फेसबुक ने इसे करीब एक अरब डॉलर में खरीद लिया। आज यह मेटा के अधीन है। शुरुआत फोटो शेयरिंग से हुई थी, लेकिन समय के साथ स्टोरीज, रील्स, लाइव, शॉपिंग, क्लोज फ्रेंड्स जैसे फीचर्स जुड़ते गए।

आज 2026 में इंस्टाग्राम GenZ का फेवरेट बन चुका है। यह बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि 13 से 27 साल की उम्र के युवाओं यानी GenZ के बीच इंस्टाग्राम ने अपनी एक बेहद खास जगह बना ली है। आज का इंस्टाग्राम सिर्फ तस्वीरें शेयर करने वाला पुराना ऐप नहीं रहा, बल्कि यह आज के युवाओं की डिजिटल पहचान, शॉपिंग करने का जरिया, मनोरंजन का साधन और कई बार गूगल जैसे सर्च इंजन की जगह लेने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है। रिपोर्ट्स और आँकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि यह बड़ा बदलाव रातों-रात नहीं आया, बल्कि कंपनी द्वारा समय पर किए गए नए बदलावों, छोटे वीडियो की सोच और भारत जैसे विशाल देशों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता का नतीजा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 58 प्रतिशत Gen-Z यूजर हर रोज इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि दूसरे वीडियो ऐप्स के बाजार में होने के बावजूद यह टॉप पर बना हुआ है। एक अन्य स्टडी से यह भी सामने आया कि साल 2025 तक इंस्टाग्राम युवाओं के बीच अपने से पुरानी पीढ़ी यानी मिलेनियल्स से भी ज्यादा पॉपुलर हो चुका था और इस पीढ़ी के करीब 5.24 करोड़ लोग इससे जुड़े हुए थे। अगर अमेरिका के 18 से 29 साल के युवाओं की बात करें, तो यूट्यूब के बाद इंस्टाग्राम दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म है, जिसे करीब 80% युवा पसंद करते हैं।

भारत की तस्वीर इस मामले में और भी ज्यादा दिलचस्प और हैरान करने वाली है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक, 2026 में भारत दुनिया का वह देश बन चुका है जहाँ सबसे ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स मौजूद हैं, और यहाँ एक्टिव यूजर्स की संख्या 47.2 करोड़ के आँकड़े को पार कर चुकी है। भारत में तेजी से बढ़ती युवा आबादी इस प्लेटफॉर्म को बुलंदियों पर पहुँचाने में सबसे अहम भूमिका निभा रही है।

रील्स (Reels): वो जादुई फीचर जिसने पूरी बाजी ही पलट दी

अगर यह तलाश की जाए कि इंस्टाग्राम युवाओं के बीच इतना लोकप्रिय क्यों हुआ, तो सबसे बड़ा नाम ‘रील्स’ का आता है। छोटे, तेज और लोगों की पसंद के हिसाब से चलने वाले इस वीडियो फॉर्मेट ने पूरे ऐप का रूप ही बदल कर रख दिया है। मेटा और IPSOS की एक साझा रिपोर्ट बताती है कि भारत में 98 प्रतिशत Gen-Z यूजर, 85 प्रतिशत महिलाएँ और 88 प्रतिशत प्रीमियम दर्शक रोज बिना चूके रील्स देखते हैं। इसके अलावा मेटा का यह भी दावा है कि लोगों को जोड़ने के मामले में रील्स अन्य छोटे वीडियो प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले लगभग 60 प्रतिशत ज्यादा असरदार साबित हो रहा है।

एक और रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 84% युवा किसी भी नए सामान या ब्रांड की खोज इसी प्लेटफॉर्म के जरिए करते हैं, जबकि 89% यूजर रोज रील्स देखते या उनसे बातचीत करते हैं। इससे साफ पता चलता है कि रील्स अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की पसंद, सोच और खरीदारी के फैसलों को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही ट्रेंड है, जहाँ रील्स देखने वाले 74 प्रतिशत लोग 18 से 34 साल की उम्र के यानी युवा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।

गूगल को टक्कर: जानकारी ढूँढने का नया सर्च इंजन बन रहा ऐप

आज की युवा पीढ़ी के लिए इंस्टाग्राम सिर्फ खाली समय में रील्स स्क्रॉल करने की जगह नहीं है, बल्कि यह किसी भी नई जानकारी को ढूँढने का पहला माध्यम बनता जा रहा है। एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका के 46% युवाओं ने माना कि वे गूगल जैसे पुराने सर्च इंजन पर जाने के बजाय सोशल मीडिया पर चीजें खोजना ज्यादा पसंद करते हैं, और इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले विषयों में फैशन और ब्रांड्स सबसे आगे रहे हैं। इसके अलावा टिक टॉक और रेडिट के साथ-साथ युवा खबरों से अपडेट रहने के लिए भी इसी का सहारा लेते हैं।

पारंपरिक सर्च इंजन की जगह इस विज़ुअल ऐप का लेना इस बात का पक्का संकेत है कि आज का युवा लंबे लेख पढ़ने के बजाय तस्वीरों और छोटे वीडियो पर ज्यादा भरोसा करता है। छुट्टियों की योजना बनाने में भी यही हाल है, जहाँ भारतीय युवा अलग से यात्रा की जगह नहीं तलाशते, बल्कि इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम खुद-बखुद उनकी फीड को खूबसूरत जगहों के वीडियो से भर देता है, जिसे युवा भविष्य के लिए अपने ‘कलेक्शन’ में सेव कर लेते हैं।

असली कनेक्शन की तलाश और छोटे-छोटे फीचर्स का कमाल

Gen-Z की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे केवल चुपचाप वीडियो देखने वाले दर्शक नहीं हैं, बल्कि वे इस प्लेटफॉर्म पर अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस पीढ़ी का लगभग आधा हिस्सा टीवी पर आने वाले बड़े सेलिब्रिटीज के मुकाबले सोशल मीडिया क्रिएटर्स के साथ ज्यादा अपनापन महसूस करता है। इंस्टाग्राम ने ‘क्लोज फ्रेंड्स’, ‘स्टोरीज’ और ‘नोट्स’ जैसे फीचर्स लाकर इसी चाहत को पूरा किया है, जिससे लोग पूरी दुनिया के सामने आने के बजाय अपने खास और भरोसेमंद दोस्तों के छोटे दायरे में खुलकर बात कर पाते हैं।

हालाँकि इस मामले में इंस्टाग्राम को दूसरे ऐप्स से कड़ी टक्कर भी मिल रही है। मेटा का ही दूसरा ऐप ‘थ्रेड्स’ युवाओं के बीच तेजी से पैर पसार रहा है और इसके करीब 4.2 करोड़ एक्टिव युवा यूजर हैं। वहीं, ‘बीरियल’ (BeReal) जैसे पूरी तरह असली पल दिखाने वाले ऐप के भी 4 करोड़ से ज्यादा युवा यूजर हैं, जो यह दिखाता है कि आज का युवा किसी एक ऐप पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहता, बल्कि मनोरंजन के लिए अलग और निजी पलों के लिए दूसरे ऐप का इस्तेमाल करता है।

शॉपिंग का नया अड्डा: Reels से सीधे सामान खरीदने का दौर

इंस्टाग्राम की ताकत का एक और बड़ा पहलू ‘सोशल कॉमर्स’ यानी खरीदारी से जुड़ा है। भारत में मेटा की स्टडी बताती है कि Reels अब केवल टाइमपास नहीं बल्कि ऑनलाइन शॉपिंग का बहुत बड़ा जरिया बन चुका है, जो 81 प्रतिशत नए सामान की खोज और 47 प्रतिशत खरीददारी के फैसलों को सीधे तौर पर तय करता है। पूरी दुनिया में भी यही हाल है, जहाँ 72 प्रतिशत युवाओं ने किसी न किसी सोशल ऐप के जरिए सीधे सामान खरीदा है और लगभग सभी ने अपने स्मार्टफोन से ही पेमेंट की है।

सिक्के का दूसरा पहलू: डेटा की चिंता और मानसिक सेहत का सवाल

हालाँकि, यह चमक-धमक वाली तस्वीर ही सब कुछ नहीं है, क्योंकि इस सिक्के का एक दूसरा पहलू भी है। Gen-Z का एक बड़ा तबका इंस्टाग्राम और इसकी मुख्य कंपनी मेटा द्वारा यूजर के डेटा के इस्तेमाल के तरीकों को लेकर काफी डरा हुआ रहता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 67 प्रतिशत युवा इंस्टाग्राम और फेसबुक को यूजर के डेटा का गलत इस्तेमाल करने वाला मानते हैं, जिसकी वजह से कई लोग अब टेलीग्राम या रेडिट जैसे ऐप्स की तरफ भी जा रहे हैं।

इसके अलावा मानसिक सेहत को लेकर भी युवाओं में जागरूकता बहुत बढ़ गई है। एक अध्ययन के मुताबिक, सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने के बावजूद यह पीढ़ी इसके दिमाग पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर भी सबसे ज्यादा सजग है। एक सर्वे में सामने आया कि अमेरिका के एक-तिहाई युवा अब सोशल मीडिया पर अपना समय कम करना चाहते हैं, भले ही वे इसके मौजूदा इस्तेमाल से खुश हों।

युवाओं से जुड़े, युवाओं की आवाज में…

कुल मिलाकर देखा जाए तो इंस्टाग्राम के युवाओं का सबसे पसंदीदा ठिकाना बनने की यह पूरी कहानी किसी एक फीचर का कमाल नहीं है, बल्कि यह एक पूरे सिस्टम की सफलता है। Reels ने वीडियो देखने का तरीका बदला, स्टोरीज ने आपसी रिश्तों को जोड़ा, शॉपिंग फीचर्स ने इसे बाजार बना दिया और एल्गोरिदम ने इसे गूगल जैसा सर्च इंजन अनुभव दे दिया। भारत जैसे देशों में जहाँ मोबाइल इस्तेमाल करने वाले युवाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, वहाँ यह ट्रेंड और भी मजबूत होता दिख रहा है। फिर भी, डेटा की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएं यह बताती हैं कि युवा किसी एक ऐप के गुलाम नहीं हैं।

PM मोदी बार-बार यही बता रहे हैं कि वे युवाओं की बात सुनना चाहते हैं। सुझाव माँग रहे हैं। भरोसा दिला रहे हैं कि पेपर लीक जैसी समस्या पर सख्ती होगी। आंदोलन को सिर्फ पुलिस से नहीं, संवाद से भी शांत करने की कोशिश दिख रही है। उम्र का फासला है, लेकिन तकनीक ने उसे पाट दिया। जेन-जी की भाषा में बात करके वे कह रहे हैं – मैं तुम्हारे साथ हूँ।

यह सिर्फ 2 Video की कहानी नहीं है। यह बदलते समय की कहानी है। जब नेता युवाओं के पास जाएँ, उनकी भाषा बोलें, उनकी प्लेटफॉर्म पर आएँ, तो दूरी कम होती है। जंतर-मंतर की आवाज अब इंस्टाग्राम रील्स तक पहुँच गई है। आँकड़े चौंका देने वाले हैं, लेकिन असली परीक्षा आगे है– कानून कितना सख्त लागू होता है, परीक्षा प्रणाली कितनी साफ होती है और युवा कितना भरोसा महसूस करते हैं। PM मोदी ने रास्ता दिखाया है।

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