बॉम्बे हाईकोर्ट ने मशहूर अभिनेता दिवंगत राजेश खन्ना के घर ‘आशीर्वाद’ को भुतिया, शापित, मनहूस या अशुभ कहने पर रोक लगा दी है। राजेश खन्ना के निधन के 14 साल बाद ये फैसला आया है। कोर्ट का कहना है कि ये मानहानि से जुड़ा मामला है और मकान मालिक के गरिमा से जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है।
दरअसल ये अर्जी अब घर के मालिक बिजनेसमैन शशि किरण शेट्टी ने लगाई थी। उन्होंने कई मीडिया हाउस और यूट्यूब चैनलों पर इस घर को मनहूस, भुतिया कहने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह घर उन्होंने राजेश खन्ना के निधन के बाद उनकी बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार से 90 करोड़ रुपए में खरीदी थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘भूतिया बंगला’ कहने पर लगाई रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने सुनवाई करते हुए घर को लेकर कहे गए अपशब्द पर रोक लगा दी। ये घर मुंबई के बांद्रा इलाके के कार्टर रोड पर स्थित है। शेट्टी ने पुराने बंगले को गिरा कर नया ढाँचा खड़ा करवाया था, लेकिन नए घर का नाम भी आशीर्वाद ही रखा। हालाँकि कुछ मीडिया आउटलेट्स और सोशल मीडिया पर वीडियो में इसे शापित और भूतिया बताया गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वेबसाइट इंडियाडॉटकॉम ने हाल में ’19 रियल हॉन्टेड हाउसेस इन इंडिया दैट विल गिव यू ए कोल्ड स्वीट’ टाइटल से एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें आशीर्वाद बंगले को भी शामिल किया गया था। इससे परेशान होकर शेट्टी ने कोर्ट में अर्जी लगाई।
शेट्टी के वकील वीरेन्द्र सराफ ने अर्जी में माँग की कि मीडिया आउटलेट्स या यूट्यूब ऐसे सोशल मीडिया पर रोक लगाए, क्योंकि इससे उनकी गरिमा और निजता का उल्लंघन होता है। उन्होंने आपत्तिजनक वीडियो हटाने की माँग की।
अर्जी पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने कहा, “प्रथम दृष्टया ये मजबूत मामला बनता है। वादी की माँग उचित है। घर पर ऐसी टिप्पणी वादी के लिए अपमानजनक है, क्योंकि इससे ऐसा लगता है कि वादी एक भूतिया और शापित बंगले में रहता है। इसके अलावा ये वादी के शांति और गरिमा से रहने के अधिकार का भी उल्लंघन करता है।”
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मीडिया आउटलेट्स गलत और सनसनी फैलाने के लिए करते हैं। इससे वादी को नुकसान हुआ है। वादी ने अपना पक्ष सही तरीके से रखा है। ऐसे वक्तव्य पर रोक लगनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को होगी। सुनवाई के दौरान मीडिया आउट्लेट्स और यूट्यूब के बचाव के लिए कोई वकील मौजूद नहीं था।
डिंपल ने दिया ‘आशीर्वाद’ नाम
राजेश खन्ना का बंगला ‘आशीर्वाद’ बॉलीवुड के सबसे चर्चित घरों में से एक रहा है। शुरुआत में इसकी चर्चा शानोशौकत के लिए होती थी। हर लग्जरी चीजें यहाँ होने का दावा किया जाता था। इसे खरीदने के बाद ताउम्र राजेश खन्ना यहाँ रहे।
डिंपल कपाड़िया से शादी उन्होंने इस घर से ही की थी। उनकी दोनों बिटिया यहाँ पैदा हुई और फिर आपसी विवाद की वजह से डिंपल इसे छोड़कर चली गई। राजेश खन्ना के अंतिम दिनों में उनकी देखभाल अनीता आडवाणी किया करती थी। उन्होंने राजेश खन्ना के निधन के बाद इस घर पर दावा किया और खन्ना परिवार से कानूनी लड़ाई लड़ी। इस दौरान भी ये घर सुर्खियों में रहा।
कोर्ट से घर का मालिकाना हक डिंपल की बेटियों को मिलने के बाद इसे परिवार ने बेच दिया। इस दौरान इस घर में कोई नहीं रहता था। यह जर्जर हो चुका था और इसे कई जगहों पर ‘भूतिया बंगला’ कहा गया। इस वजह से आशीर्वाद चर्चा में रहा। 2014 में बिजनेसमैन शेट्टी ने इसे खरीदा और ढाँचे को गिरा कर नए घर का निर्माण किया, लेकिन आशीर्वाद नाम नहीं बदला। एक बार फिर ये घर हाईकोर्ट में ‘भूतिया घर’ कहे जाने पर रोक लगाने की वजह से चर्चा में आ गया है।
राजेश खन्ना ने राजेन्द्र कुमार से लिया था ‘आशीर्वाद’
राजेन्द्र कुमार के घर खरीदने से पहले ये घर काफी जर्जर अवस्था में था। कोई खरीदार नहीं मिल रहा था। समुद्र के नजदीक होने की वजह से काफी सुनसान रहता था। तब कार्टर रोड के स्थानीय लोग इसे ‘भूत बंगला’ कहकर बुलाते थे। यह बात बाद में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अली पीटर जॉन ने 2012 में विस्तार से लिखी। उन्होंने बताया कि बंगला वर्षों तक खाली पड़ा था, इसलिए आसपास के लोगों में इसके बारे में ‘भूतिया बंगला’ कह कर अफवाहें फैला दी थी। मीडिया में भी इसे ‘भूतिया बंगला’ कहा जाने लगा।
1960 के दशक में जब राजेन्द्र कुमार ने इस बंगले को 65000 रुपए ने खरीदा, तो इसकी हालत सुधरी। उन्होंने गृहप्रवेश के वक्त पूजा करवाई। वे सालों तक यहाँ रहे और इस दौरान कई हिट फिल्में दीं। उन्हें जुबली कुमार नाम दिया गया। बाद में नया घर बनाकर वे इस घर में शिफ्ट हो गए।
इसे राजेश खन्ना ने 3.5 लाख रुपए में खरीदा। वे घर का नाम ‘डिंपल’ रखना चाहते थे, लेकिन राजेन्द्र कुमार ने इस पर आपत्ति जताई। दरअसल राजेन्द्र कुमार ने अपने नए बंगले का नाम ‘डिंपल’ रख दिया था। इसके बाद राजेश खन्ना ने पत्नी डिंपल के कहने पर इस घर का नाम आशीर्वाद रख दिया। इस बंगले में ही राजेश खन्ना के सिनेमा का स्वर्णिम काल रहा। उन्होंने एक से बढ़ कर एक सुपर हिट फिल्में दी और देखते ही देखते सुपर स्टार बन गए। राजेश खन्ना अपने निधन तक यहाँ रहे।
राजेश खन्ना के करियर और निजी जीवन से घर को जोड़ा गया
हालाँकि लोगों ने उनके करियर के ढलान को घर से जोड़ दिया। लोगों ने यह कहना शुरू किया कि सुपरस्टार बनने के बाद उनका करियर इस घर में आने के बाद गिरा। निजी जीवन में परेशानियाँ आईं। पत्नी डिंपल कपाड़िया उन्हें छोड़कर चली गई और वे तन्हा रह गए। उनके जीवन में घटी घटनाओं को लोगों ने ‘भूतिया बंगले’ की कहानी से जोड़ दिया, हालाँकि इसका कोई प्रमाण नहीं है।
राजेश खन्ना को अंतिम वक्त में साथ रहने वाली अनीता आडवाणी ने घर पर दावा किया था। उनका कहना था कि वे लगभग 10–12 वर्षों तक राजेश खन्ना के साथ रहीं। उनकी बीमारी के दौरान उन्होंने उनकी देखभाल की। घर संभाला। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि वे करवा चौथ का व्रत रखती थीं और दोनों पति-पत्नी की तरह रहते थे। हालाँकि अनीता आडवाणी के दावे को खन्ना परिवार ने कभी नहीं माना। परिवार का कहना था कि अनीता केवल परिचित थीं और राजेश खन्ना की कानूनी पत्नी नहीं थीं। इसलिए बंगले या संपत्ति पर उनका कोई अधिकार नहीं है। घरेलू नौकरों ने भी मीडिया से कहा कि अनीता स्थाई तौर पर घर में नहीं रहती थी।
अनीता आडवाणी ने खन्ना परिवार को कानूनी नोटिस भेजा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बंगले से जबरन निकाल दिया गया।
अनीता ने संपत्ति में हिस्सा माँगते हुए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। बाद में यह भी कहा कि बंगले को बेचना नहीं चाहिए, बल्कि इसे राजेश खन्ना का संग्रहालय यानी म्यूजियम बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे ऐसा चाहते थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अनीता आडवाणी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपने संबंध को वैवाहिक मान्यता देने की माँग की थी। कोर्ट ने उन्हें राजेश खन्ना की कानूनी पत्नी या उत्तराधिकारी नहीं माना।
इसके बाद खन्ना परिवार ने घर को बेच दिया। इसे तोड़कर फिर से मकान मालिक शेट्टी ने फिर से ‘आशीर्वाद’ बनाया। जुलाई 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने वर्तमान मालिक की याचिका पर यह माना कि बिना आधार के बंगले को ‘भूतिया’ कहना उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना है। अदालत ने ऐसे दावों पर रोक लगाने का निर्देश दिया।


