भारत में हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ पारंपरिक कपड़ों का उत्सव नहीं, बल्कि उन लाखों बुनकरों और कारीगरों को सम्मान देने का अवसर भी है, जो पीढ़ियों से देश की समृद्ध बुनाई परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से #NationalHandloomDay के साथ अपने ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) वीडियो साझा कर भारतीय हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की है।
एक ओर सरकार नई योजनाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाजार के जरिए इस क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दे रही है, वहीं आधुनिक डिजाइन और फैशन की दुनिया में भी भारतीय हथकरघा अपनी अलग पहचान बना रहा है।
1905 के स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस तारीख का संबंध 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन से है। उस समय देशवासियों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर भारतीय उत्पादों को अपनाने का संकल्प लिया था। हथकरघा उद्योग उस आंदोलन का एक मजबूत आधार बना था।
इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2015 में पीएम मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की। तब से यह दिन बुनकरों के योगदान को सम्मान देने और लोगों को भारतीय हथकरघा उत्पाद अपनाने के लिए प्रेरित करने का अवसर बन गया है।
हथकरघा उद्योग से भारत में जुड़े हैं कितने लोग ?
हथकरघा उद्योग सिर्फ सांस्कृतिक पहचान नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का भी आधार है। 2019-20 की चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना के अनुसार देश में लगभग 31.45 लाख हथकरघा परिवार हैं और करीब 35.22 लाख बुनकर एवं संबद्ध श्रमिक इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
इनमें लगभग 8.48 लाख लोग बुनाई से पहले और बाद के काम, जैसे धागा तैयार करना, रंगाई, वार्पिंग और फिनिशिंग जैसी गतिविधियों में लगे हैं। सबसे खास बात यह है कि इस क्षेत्र में 72 प्रतिशत से अधिक यानी लगभग 25.46 लाख महिलाएँ काम करती हैं। यही वजह है कि हथकरघा उद्योग महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी बड़ा माध्यम माना जाता है।
इसके अलावा लगभग 28.20 लाख करघों में से करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद हैं, जिससे साफ है कि यह उद्योग गाँवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
सरकार किन योजनाओं से दे रही है बुनकरों को सहारा?
सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें सबसे प्रमुख राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (NHDP) और कच्चा माल आपूर्ति योजना (RMSS) हैं।
NHDP के तहत छोटे क्लस्टरों को आधुनिक करघे, बेहतर कार्यशाला, डिजाइन सहायता, उत्पाद विकास और विपणन जैसी सुविधाएँ दी जाती हैं। वर्ष 2021-22 से जून 2026 तक 357 क्लस्टर स्वीकृत किए जा चुके हैं। वर्कशेड निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक जैक्वार्ड जैसी तकनीकों से बुनकरों की उत्पादकता और आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार रियायती ब्याज दर पर ऋण, बीमा योजनाएँ, छात्रवृत्ति, मेगा क्लस्टर विकास और विशेष अवसंरचना परियोजनाओं के जरिए भी बुनकरों की मदद कर रही है। जनवरी 2025 में शुरू किए गए ई-पहचान पोर्टल के माध्यम से नए बुनकरों का पंजीकरण आसान हुआ है और जुलाई 2026 तक करीब 84 हजार अतिरिक्त श्रमिकों को ई-पहचान कार्ड की मंजूरी मिल चुकी है।
पारंपरिक बुनाई को मिल रही आधुनिक पहचान
आज भारतीय हथकरघा सिर्फ पारंपरिक साड़ियों या कपड़ों तक सीमित नहीं है। आधुनिक फैशन, डिजाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इसे नई पहचान दी है।
हाल के वर्षों में फेमिना मिस इंडिया, भारत टेक्स, IFFI गोवा और ‘वीव द फ्यूचर 4.0’ जैसे आयोजनों में भारतीय हथकरघा को नए अंदाज में प्रस्तुत किया गया। चंदेरी, बनारसी, जामदानी, महेश्वरी, इकत, कोटा डोरिया और कई अन्य पारंपरिक बुनाई शैलियों को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर दुनिया के सामने पेश किया गया।
इसी दिशा में हैंडलूम हैकाथॉन 2026 भी शुरू किया गया है, जिसमें विद्यार्थी, स्टार्टअप, डिजाइनर और बुनकर मिलकर इस क्षेत्र के लिए नए तकनीकी और व्यावहारिक समाधान तैयार कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार में बढ़ रही भारतीय हथकरघा की पहचान
भारतीय हथकरघा उत्पादों की माँग अब विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 में भारत का हथकरघा निर्यात लगभग 1330.96 करोड़ रुपए रहा। संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और स्पेन प्रमुख निर्यात बाजार रहे।
सरकार खरीदारों का भरोसा बढ़ाने के लिए हैंडलूम मार्क, इंडिया हैंडलूम ब्रांड और जीआई टैग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत कर रही है। जून 2026 तक 29402 हैंडलूम मार्क पंजीकरण और 2305 इंडिया हैंडलूम ब्रांड पंजीकरण जारी किए जा चुके थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। GeM पोर्टल से करीब 1.50 लाख बुनकर और संस्थाएँ जुड़ चुकी हैं, जबकि IndiaHandmade प्लेटफॉर्म हजारों कारीगरों को सीधे ग्राहकों तक पहुँचने का अवसर दे रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर स्थानीय कपड़ों को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया।
इसमें उन्होंने जनता से अपील करते हुए देश की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय बुनाई को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने नागरिकों से स्थानीय कपड़ों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए हैशटैग के साथ अपने ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) वीडियो शेयर करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने गुरुवार को एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा, “7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। आइए भारत की हथकरघा विविधता को लोकप्रिय बनाएँ। अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के वीडियो, जिनमें GRWM वीडियो भी शामिल हैं, सोशल मीडिया पर साझा करें। #NationalHandloomDay का उपयोग करना न भूलें।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 7 अगस्त 2026 को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के अवसर पर देश के 22 उत्कृष्ट बुनकरों और शिल्पकारों को प्रतिष्ठित संत कबीर हथकरघा और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “हमारे कृषि क्षेत्र में भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सबसे सुंदर और मानवीय उद्योग बनने की संभावनाएँ बढ़ी हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक प्रौद्योगिकी और सामाजिक प्रशिक्षण के तरीकों से जोड़ा जा रहा है। किसानों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने कई पारदर्शी कदम उठाए हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “किसानों ने अपनी मेहनत का सीधा लाभ प्राप्त करने के रास्ते खोज लिए हैं। जैसा कि कानून मंत्री ने उल्लेख किया है, भारतीय कृषि क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय छवि उभर रही है। सरकार इसे एक सत्यापित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। हथकरघा और घरेलू वस्त्र क्षेत्रों में आर्थिक विकास की संभावनाएँ हैं।”
LIVE: President Droupadi Murmu addresses the 12th National Handloom Day Celebrations at Rashtrapati Bhavan Cultural Centre https://t.co/q80nCtcc6Z
— President of India (@rashtrapatibhvn) August 7, 2026
भविष्य की ओर बढ़ता भारतीय हथकरघा
भारतीय हथकरघा केवल कपड़ा बनाने की कला नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। समय के साथ यह क्षेत्र भी तेजी से बदल रहा है। नई तकनीक, बेहतर डिजाइन, सरकारी योजनाएँ, डिजिटल बाजार और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलकर इसे नई दिशा दे रहे हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 इस बात का संदेश देता है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। यदि बुनकरों को लगातार तकनीकी सहायता, बेहतर बाजार और मजबूत सरकारी समर्थन मिलता रहा, तो भारतीय हथकरघा आने वाले वर्षों में न केवल देश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक वस्त्र बाजार में भी अपनी अलग और स्थायी जगह बनाएगा।


