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काँवड़ियों को धर्मशाला, गंगा कुंड, पार्क समेत मिलेंगी आधुनिक सुविधाएँ: योगी सरकार के धार्मिक कायाकल्प के बीच रामपुर का पातालेश्वर महादेव मंदिर लेगा नया रूप, ₹101 करोड़ से होगा जीर्णोद्धार

महाभारत काल से जुड़ी मान्यता वाले रामपुर के पातालेश्वर महादेव मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार जारी है। 101 करोड़ रुपए से मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। 151 फीट ऊँचे शिखर के साथ प्रस्तावित शिव कॉरिडोर इसे प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी है।

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, महाभारत कालीन इतिहास की एक जीवंत मिसाल है। रामपुर शहर से लगभग पाँच किलोमीटर दूर भमरौआ गाँव में स्थित यह शिवालय सदियों से शिवभक्तों की अगाध श्रद्धा का केंद्र रहा है।

द्वापर युग की ऐतिहासिक जड़ों को अपने में समेटे यह मंदिर आज एक भव्य और आधुनिक स्वरूप लेने जा रहा है। स्थानीय शिवभक्तों के आपसी सहयोग और राज्य की उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के तालमेल से यह मंदिर देश के चुनिंदा भव्य धार्मिक स्थलों में शुमार होने की राह पर है।

सावन के पवित्र महीने में हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने आते हैं। आज यह प्राचीन शिवालय अपनी पौराणिक पहचान को बनाए रखते हुए एक राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।

महाभारत कालीन पौराणिक इतिहास और गजेटियर के प्रमाण

भमरौआ के पातालेश्वर महादेव मंदिर की मान्यता द्वापर युग यानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और स्वयं प्रकट हुआ यानी पाताल से निकला हुआ माना जाता है, इसी कारण इसे पातालेश्वर महादेव कहा जाता है। सदियों तक यह शिवालय एक छोटे से स्वरूप में लोक आस्था का केंद्र बना रहा।

इस ऐतिहासिक तथ्य की प्रामाणिकता तब और मजबूत हुई जब मुरादाबाद मंडल के गजेटियर भाग दो के प्रकाशन के सिलसिले में ऐतिहासिक दस्तावेजों की गहन खोजबीन की गई।

करीब तीन सौ साल पुराने नवाबों के शासनकाल के अभिलेखों और गजेटियर के शोध कार्यों से यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि भमरौआ का यह मंदिर अति प्राचीन और महाभारत कालीन इतिहास से जुड़ा हुआ है।

मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के अनुसार, पुरातात्विक शोध और सरकारी गजेटियर में दर्ज अभिलेख इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्राचीन काल में यह एक छोटा सा लेकिन अत्यंत प्रभावकारी और पवित्र शिवालय हुआ करता था, जो कालांतर में जन-जन की आस्था का विशाल केंद्र बन गया।

चमत्कारिक घटनाओं का भय और नवाब अहमद अली खान द्वारा मंदिर की नींव

पातालेश्वर शिव मंदिर का इतिहास एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक घटना से जुड़ा हुआ है। भमरौआ गाँव घनी मुस्लिम आबादी के बीच बसा हुआ था। समय के साथ जब मंदिर की सही पहचान और देखरेख में कमी आई, तो आसपास के लोग शिवलिंग के वास्तविक महत्व और उसकी पवित्रता से अनजान थे।

इस अज्ञानता के कारण कई ग्रामीण अनजाने में उस स्वयंभू शिवलिंग के पत्थर को अपने लोहे के औजारों में धार लगाने के लिए इस्तेमाल करने लगे थे। इस पावन शिवलिंग के साथ हुए इस व्यवहार के बाद क्षेत्र में कई तरह के भयंकर दुष्प्रभाव, अनहोनी घटनाएँ और रहस्यमयी हादसे देखने को मिलने लगे, जिससे स्थानीय लोगों में भारी खौफ पैदा हो गया।

जब क्षेत्र में घट रही इन भयानक घटनाओं, उनके दुष्प्रभावों और स्वयंभू शिवलिंग के चमत्कारिक अस्तित्व की जानकारी तत्कालीन रामपुर रियासत के शासक नवाब अहमद अली खान को हुई, तो वह भी इन अलौकिक घटनाओं से भयभीत हो गया।

नवाब ने ईश्वर के प्रकोप और घट रही अप्रिय घटनाओं से राहत पाने के लिए सन 1822 में स्वयं आगे बढ़कर इस मंदिर की औपचारिक बुनियाद रखवाई। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर के सुचारू संचालन और भव्यता के लिए कई एकड़ उपजाऊ जमीन भी दान कर दी।

श्री पातालेश्वर शिवालय सेवा ट्रस्ट के सेवादार संदीप अग्रवाल भी बताते हैं कि भमरौआ में जिस स्थान पर श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर है वहाँ पर जंगल हुआ करता था। एक दिन यहाँ पर ज्योर्तिलिंग प्रकट हुआ। जिसे कुछ लोगों द्वारा उसे उखाड़ने की कोशिश की गई और जब कामयाब नहीं हुए तो शिवलिंग को धारदार हथियारों से काटने की कोशिश की गई। 

संदीप अग्रवाल कहते हैं कि इस पर शिवलिंग से पहले दूध और बाद में रक्त बहने लगा। जो कि चर्चा का विषय बन गया। सूचना पर उस वक्त का शासक नवाब अहमद अली खाँ मौके पर पहुँचा और उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए करीब 35 बीघा जमीन दान दी।

101 करोड़ का जनसहयोग और मंदिर का अत्याधुनिक जीर्णोद्धार

वर्तमान समय में श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार अत्यंत तेज गति से चल रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस विशाल जीर्णोद्धार परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 101 करोड़ रुपए है, जो शिवभक्तों और आम जनता के आपसी आर्थिक सहयोग से पूरी की जा रही है।

मंदिर के पुनरुद्धार के लिए ‘श्री पातालेश्वर सेवा ट्रस्ट’ का गठन किया गया है, जिसके सेवादार और स्थानीय जनप्रतिनिधि दिन-रात इस कार्य में जुटे हैं। जीर्णोद्धार के तहत प्राचीन मंदिर के मुख्य गर्भगृह को बढ़ाकर 1296 वर्ग फीट तक चौड़ा किया जा रहा है, जिससे हजारों श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकें।

गर्भगृह का शिखर 151 फीट ऊँचा बनकर तैयार हो चुका है, जिस पर भव्य धर्म ध्वजा फहरा रही है। इस विशाल शिखर के ऊपर 11 फीट ऊँचा स्वर्ण कलश स्थापित किया गया है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में 11 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में एक विशाल धर्मशाला का निर्माण पहले ही जन सहयोग से पूरा किया जा चुका है।

आधुनिक सुविधाएँ और भव्य कॉरिडोर की परिकल्पना

भमरौआ के इस शिवालय को देश के अग्रणी और आधुनिक मंदिरों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। जीर्णोद्धार योजना के पूरा होने पर मंदिर में श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ मिलेंगी। मंदिर का मुख्य गर्भगृह पूरी तरह से वातानुकूलित होगा, जहाँ आरती और पूजन के समय श्रद्धालुओं के बैठने के लिए एक विशाल हॉल बनाया जा रहा है।

गर्भगृह के ठीक सामने एक सुंदर और पवित्र ‘शिव गंगा’ कुंड का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालु जलाभिषेक से पहले स्नान कर सकेंगे। दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों के ठहरने के लिए लिफ्ट की आधुनिक सुविधा से युक्त पाँच मंजिला पूरी तरह वातानुकूलित धर्मशाला बनाई जा रही है।

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए सीधे हरिद्वार से लाया गया गंगाजल उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही परिसर के बाहर सुंदर हरे-भरे पार्क, 25 फीट ऊँचे संगीतमय फव्वारे, आधुनिक कैंटीन, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था और सुव्यवस्थित प्रसाद वितरण केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है।

मंदिर तक पहुँचने वाले यातायात को सुगम बनाने के लिए मुख्य मार्ग को 40 फीट चौड़ा किया जा रहा है और हाईवे के किनारे पनवड़िया नामक स्थान पर एक भव्य और नक्काशीदार मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जा रहा है।

योगी सरकार का विजन और राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकास

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के पौराणिक और धार्मिक स्थलों के कायाकल्प और उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है। राज्य सरकार की धार्मिक पर्यटन नीति के तहत रामपुर के इस महाभारत कालीन पातालेश्वर महादेव मंदिर को एक राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

नगर विधायक आकाश सक्सेना और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से मंदिर के आसपास के क्षेत्र को एक विशाल कॉरिडोर के रूप में ढाला जा रहा है। योजना के अनुसार, काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर भमरौआ में लगभग 100 बीघा जमीन पर भव्य ‘शिव कॉरिडोर’ तैयार करने की रूपरेखा बनाई गई है।

राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र की सड़कों के चौड़ीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और पर्यटकों की सहूलियत से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।

स्थानीय विधायक और सेवादारों का मानना है कि जब यह कॉरिडोर और जीर्णोद्धार का काम पूरी तरह संपन्न हो जाएगा, तो भमरौआ का यह पातालेश्वर शिवालय न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
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