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CAA विरोध की भेंट चढ़ी 43 दिन की दुधमुँही बच्ची: प्रदर्शन के लिए रोज ईदगाह लेकर जाती थी अम्मी

दिल्ली के शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के दौरान ही 4 महीने की एक नवजात बच्ची की मृत्यु हो गई थी। नवजात की मृत्यु के बाद देशभर में शाहीन बाग़ में विरोध के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने वालों की काफी निंदा की गई थी।

बीते दिनों दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे सीएए विरोधी प्रदर्शन से एक बच्ची की मौत की खबर आई थी। अब ऐसी ही खबर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आ रही है। बताया जा रहा है कि जिले के देवबंद स्थित ईदगाह में चल रहे सीएए और एनआरसी विरोधी धरना-प्रदर्शन में आ रही 43 दिन की बच्ची की मौत हो गई है। इस दुधमुॅंही बच्ची को लेकर उसकी मॉं रोज प्रदर्शन में शामिल हो रही थी।

देवबंद के मोहल्ला बडजियाउलहक़ स्थित कुएँ वाली गली निवासी नौशाद की पत्नी नौशाबा पिछले कुछ दिनों से अपनी तकरीबन डेढ़ माह की बच्ची को लेकर प्रदर्शन में शामिल हो रही थी। कई बार नौशाबा ने प्रदर्शन स्थल पर रात में भी रुकने की कोशिश की थी। हालॉंकि उसकी बच्ची छोटी होने के कारण अन्य महिलाओं ने उसे ऐसा नहीं करने दिया। बावजूद इसके नोशाबा सुबह से लेकर देर शाम तक बच्ची के साथ धरनास्थल पर रहती थी। शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को मासूम बच्ची की मौत की सूचना मिलने पर धरना स्थल पर शोक का माहौल बन गया।

नौशाबा गुरुवार (मार्च 12) को वह धरनास्थल पर नहीं पहुँची। शुक्रवार को पता चला कि उसकी बच्ची की तबीयत खराब होने के बाद उसका इंतकाल हो गया। इसके बाद मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी की अध्यक्ष आमना रोशनी, फौजिया सरवर, इरम उस्मानी, फरीहा उस्मानी और सलमा अहसन सहित काफी संख्या में महिलाएँ नौशाबा के घर पहुँचीं और बच्ची की मौत पर दुख का इजहार किया और फिर उन्होंने जुमे की नमाज के बाद धरनास्थल पर कुरआन ख्वानी कर बच्ची को खिराज-ए-अकीदत पेश की। 

गौरतलब है कि 30 जनवरी को राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के दौरान ही 4 महीने की एक नवजात बच्ची की मृत्यु हो गई थी। नवजात की मृत्यु के बाद देशभर में शाहीन बाग़ में विरोध के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने वालों की काफी निंदा की गई थी। बच्ची की मौत के बाद उसकी अम्मी ने कहा था कि उसने सीएए के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन में अपनी बच्ची को कुर्बान कर दिया। अन्य प्रोटेस्टरों का कहना था कि वो अल्लाह की बच्ची थी और उसे अल्लाह ने ले लिया। ऐसे कई बयान दिए गए, जिससे पता चलता है कि बच्ची मरी नहीं, उसकी ‘हत्या’ की गई।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा था कि हमारे मन में मातृत्व के प्रति उच्च-कोटि का सम्मान है और बच्चों के लिए उनके मन में काफ़ी चिंताएँ हैं। सीजेआई ने कहा कि बच्चों के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “क्या एक 4 महीने का बच्चा विरोध-प्रदर्शन करने के लिए जा सकता है? मैं तो कहता हूँ कि सभी माँओं की इस मामले में एक राय होनी चाहिए, बच्चों के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। कृप्या आपलोग और समस्या पैदा न करें।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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