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अमर सिंह के ‘चौकीदार’ बनने के बाद, जया प्रदा हो सकती हैं BJP में शामिल

2014 में भाजपा ने रामपुर लोकसभा सीट से नेपाल सिंह को मैदान में उतारा था। उस समय उन्होंने एसपी के क़द्दावर नेता आज़म ख़ान के प्रत्याशी नसीर अहमद ख़ान को हराया था।

लोकसभा चुनाव की घोषण के साथ ही राजनीतिक पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों की फ़ेहरिस्त को वास्तविक रूप देने में जुटी हुई है। तमाम नेता एक पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी का दामन थामने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी से निष्काषित नेता जया प्रदा के भाजपा में शामिल होने की ख़बर आ रही है। साथ ही रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। बता दें कि अगर ऐसा हुआ तो चुनावी मैदान में वो आज़म ख़ान को टक्कर देंगी।

इससे पहले 2014 में भाजपा ने रामपुर लोकसभा सीट से नेपाल सिंह को मैदान में उतारा था। उस समय उन्होंने एसपी के क़द्दावर नेता आज़म ख़ान के प्रत्याशी नसीर अहमद ख़ान को हराया था।

जया प्रदा ने सपा में शामिल होने से पहले टीडीपी (तेलुगू देशम पार्टी) के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 2009 में रामपुर की महत्वपूर्ण लोकसभा सीट जीती थी। 2010 में सपा में गुटबाज़ी और आज़म ख़ान के साथ उनके बिगड़ते रिश्तों के चलते उन्हें पार्टी से निकलना पड़ा। बाद में 2014 में, उन्होंने बिजनौर से रालोद (राष्ट्रीय लोक दल) के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

जया प्रदा और आज़म खान के बीच आपसी ज़ुबानी जंग लंबे समय तक जारी थी। हाल ही में, एक कार्यक्रम में बोलते हुए, जया प्रदा ने ख़ुलासा किया था कि आज़म ख़ान ने उन पर एसिड हमले का प्रयास किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि ख़ान की वजह से उन्हें एक बार अपनी जान का ख़तरा भी हो गया था जिससे वो सदमें में चली गई थी।

समाजवादी पार्टी ने इस बार कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने की बजाए बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन किया। 2014 में, सपा और बसपा को केवल 5 और 0 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने यूपी के साथ-साथ देश में भी ऐतिहासिक जनादेश हासिल करते हुए 71 सीटें जीती थीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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