Homeराजनीति'मुस्लिमों के नाम पर सड़कें टू नेशन थ्योरी वाली सोच': तेजस्वी सूर्या ने कहा-...

‘मुस्लिमों के नाम पर सड़कें टू नेशन थ्योरी वाली सोच’: तेजस्वी सूर्या ने कहा- गैर मुस्लिम महापुरुषों पर रखें नाम

"मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सड़कों का नामकरण मुस्लिमों के नाम पर करना टू नेशन थ्योरी वाली सोच है। यह उसी तरह की सांप्रदायिक सोच है, जब मुस्लिम लीग ने हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची की माँग की थी। यह खतरनाक है जिसकी निंदा होनी चाहिए।"

बेंगलुरु में सड़कों का नामकरण मुस्लिमों के नाम पर किए जाने पर भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने आपत्ति जताई है। उन्होंने बृहत बेंगलुरु महानगरपालिका (बीबीएमपी) के आयुक्त एन मंजूनाथ प्रसाद को पत्र लिखकर इस पर विचार करने को कहा है। बीजेपी सांसद ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह पत्र साझा किया है।

तेजस्वी सूर्या ने मामले को उठाते हुए कहा, “मेरे संज्ञान में आया है कि बृहत बेंगलुरु महानगरपालिका ने पदारायणपुरा के वार्ड नंबर 135 की कई सड़कों का नाम कुछ तय हस्तियों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है। जिसमें BBMP ने केवल मुस्लिमों के नाम दिए हैं।”

भाजपा सांसद ने पत्र में अपनी आपत्ति जताते हुए कहा, “मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सड़कों का नामकरण मुस्लिमों के नाम पर करना टू नेशन थ्योरी वाली सोच है। यह उसी तरह की सांप्रदायिक सोच है, जब मुस्लिम लीग ने हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची की माँग की थी। यह खतरनाक है जिसकी निंदा होनी चाहिए।”

उनका मत है कि देश में गैर मुस्लिम महापुरुषों और राष्‍ट्रभक्तों की कमी नहीं है और उन्हीं नामों में से सड़कों का नामकरण होना चाहिए। अपने पत्र में उन्होंने सड़कों के नाम की सूची दोबारा से ठीक करने को कहा है। अनुरोध किया है कि सूचीगत सड़कों के नाम सिर्फ व्यापक सार्वजिनक चर्चा के बाद ही निर्धारित होने चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीबीएमपी के अधिकारियों ने पत्र पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन विवाद का कारण बताया गया है कि पिछले दिनों बीबीएमपी द्वारा शहर के इंदिरानगर में 100 फुट चौड़ी सड़क का नामकरण डॉ. एस के करीम खान के नाम पर करने पर इस मामले पर बहस शुरू हुई थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -