Homeदेश-समाजलाल किले के दंगाइयों की तलाश में पंजाब पहुॅंची दिल्ली पुलिस और NIA की...

लाल किले के दंगाइयों की तलाश में पंजाब पहुॅंची दिल्ली पुलिस और NIA की टीम, बॉर्डर पर इंटरनेट बंद

''जानकारी मिली थी कि दिल्ली हिंसा में शामिल तरनतारन के दो युवक जालंधर में छिपे है। NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। हालाँकि, दोनों इलाके में नहीं मौजूद मिले।"

दिल्ली में 26 जनवरी पर हिंसा मामले में एक्शन की शुरुआत हो गई है। घटना में शामिल आरोपितों की धर-पकड़ के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी की जा रही है। खबर है कि दिल्ली पुलिस ने लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने के मामले में वांछित तरनतारन के 2 आरोपितों की तलाश में जालंधर में दबिश दी है।

न्यूज़ एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, जालंधर के डीसीपी का कहना है, ”जानकारी मिली थी कि दिल्ली हिंसा में शामिल तरनतारन के दो युवक जालंधर में छिपे है। NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। हालाँकि, दोनों इलाके में नहीं मौजूद मिले।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस लाल किले पर झंडा लहराने वाले जुगराज की तलाश में कई जगहों पर लगातार छापेमारी कर रही है। इसी छानबीन के तहत दिल्ली पुलिस और एनआईए की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को भी जालंधर के बस्ती बावा खेल में छापेमारी की थी। हालाँकि, उनके पहुँचने से पहले आरोपित और उसके घर के सदस्य फरार हो चुके थे। घर पर ताला लगा हुआ था।

इंटरनेट पर लगा रोक

रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजीपुर, सिंघु और टिकरी बॉर्डर व आस-पास के इलाकों में 31 जनवरी यानी कल तक के लिए सभी टेलीकॉम सर्विसेज पर रोक लगा दी गई है। यानी कल तक इन इलाकों में फोन, इंटरनेट की सेवा नहीं मिल सकेगी। प्रशासन ने यह फैसला किसान के प्रदर्शन की स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए किया है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, 29 जनवरी की रात 11 बजे से ही इंटरनेट सेवाएँ रोक दी गईं। ये सेवाएँ 31 जनवरी तक बाधित रहेंगी। सुरक्षा कारणों की वजह से सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। सबसे शर्मनाक बात ये थी कि दंगाई किसानों ने लाल किले के प्राचीर पर चढ़कर एक विशेष संगठन का झंडा लगा दिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। इस घटना में 394 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। घटना की जाँच उसी दिन से जारी है।

बता दें कि लाल किले में हुई हिंसा और बर्बरता की घटना की जाँच के लिए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को नया इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इस घटना के कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें सभी प्रदर्शनकारियों के हाथों में डंडे देखे जा सकते हैं। वहीं कई लोग घोड़े पर सवार देखे जा सकते हैं। इन वीडियोज में कहीं दंगाई पुलिस की गाड़ियों को तोड़फोड़ रहे हैं तो कहीं आक्रामक तरीके से ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -