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‘गुलाब के फूल’ पर गुल पनाग को क्यों किया गया ट्रोल… वो भी उनके अपने ही वामपंथी जमात से

वामपंथी पत्रकारों में सबा नकवी, विनोद कापड़ी, स्वाति चतुर्वेदी और अभिसार शर्मा जैसे लोग जब खुशी मना रहे थे तो गुल पनाग ने गुलाब से स्वागत किया। बस ये काफी था उन्हें गालियाँ पड़ने के लिए... 'छुपा संघी' भी कहा गया।

ट्विटर पर एक लोकप्रिय एकाउंट है – The Skin Doctor (@theskindoctor13), जिसे राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थक माना जाता है और इस एकाउंट को अक्सर ही लेफ्ट-लिबरल नैरेटिव को तोड़ने और तर्कों के माध्यम से भारत और हिन्दू विरोधी एजेंडे को ध्वस्त करने के लिए भी जाना जाता है। पिछले कुछ दिनों में इसी वामपंथी और लिबरल गिरोह के द्वारा मास रिपोर्ट किए जाने के कारण ट्विटर ने यह एकाउंट सस्पेंड कर दिया था लेकिन गुरुवार (05 अगस्त 2021) को यह एकाउंट एक बार फिर वापस आ गया। The Skin Doctor के ट्विटर एकाउंट वापस आने पर आम आदमी पार्टी (AAP) की समर्थक गुल पनाग ने उन्हें बधाई दे दी, जिसके बाद से उनकी आलोचना शुरू हो गई और उन्हें छुपा हुआ ‘संघी’ भी कहा जाने लगा।

The Skin Doctor के एकाउंट के सस्पेंड किए जाने पर कई वामपंथी पत्रकार खुश हो गए और उन्होंने ‘टीम साथ’ (ट्विटर पर भाजपा समर्थकों और वामपंथ विरोधियों के पीछे पड़ने वाला एक ट्विटर एकाउंट) को बधाई दी। बधाई देने वाले वामपंथी पत्रकारों में सबा नकवी, विनोद कापड़ी, स्वाति चतुर्वेदी और अभिसार शर्मा जैसे पत्रकार शामिल रहे। हालाँकि इन सभी के खुशी के ये पल पानी के बुलबुले की तरह बहुत देर तक नहीं टिक पाए और जल्दी ही ट्विटर द्वारा The Skin Doctor का एकाउंट रिस्टोर कर दिया गया।

स्वाति चतुर्वेदी और अभिसार शर्मा की बधाई
विनोद कापड़ी के बधाई ट्वीट का स्क्रीनशॉट
सबा नकवी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

The Skin Doctor के वापस आने पर उनके समर्थक खुश दिखाई दिए। उन्हें लगातार बधाईयाँ मिलीं और इसी क्रम में AAP समर्थक और बॉलीवुड अभिनेत्री गुल पनाग ने एकाउंट रिस्टोर होने पर The Skin Doctor को बधाई दे दी।

गुल पनाग की दो अक्षरों की बधाई भी सोशल मीडिया पर बैठे लेफ्ट-लिबरलों को रास नहीं आई और उन्होंने उनको ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुछ ने उन्हें छुपा हुआ संघी कहा तो कुछ यूजर्स ने लिखा कि AAP और हिंदुत्व आतंकियों का रिश्ता पुराना है और इसी बहाने कपिल मिश्रा को भी आतंकी कहा गया।

अपनी आलोचनाओं को देखते हुए गुल पनाग ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि लेफ्ट-लिबरल की यही समस्या है कि ये धीरे-धीरे दक्षिणपंथियों (हालाँकि यह तर्क उनका कमजोर ही है और शायद फिर से वामपंथी खेमे में जाने का प्रयास भर हो) की तरह होते जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई उनके (लेफ्ट-लिबरल) नैरेटिव से सहमत है तब तक सब सही है लेकिन जैसे ही कोई असहमत हुआ तो सारे के सारे टूट पड़ेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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