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जजों के साथ मंत्रियों जैसा व्यवहार करें, अदालत का काम रुकने पर मद्रास HC ने सरकारी अधिकारियों को लगाई फटकार

हाईकोर्ट के समन के बाद गृह सचिव एसके प्रभाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायाधीश के समक्ष पेश हुए और इस घटना पर खेद जताया। उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसके लिए कदम उठाए जाएँगे।

मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने शुक्रवार (1 अक्टूबर 2021) को सरकारी अधिकारियों से हाईकोर्ट के जजों से मंत्रियों के समान व्यवहार करने और उस प्रोटोकॉल का पालन करने का आग्रह किया, जिसके वे हकदार हैं। अदालत ने शहर में यातायात पाबंदियों के कारण काम करने में देरी होने के संबंध में यह टिप्पणी की।

न्यायाधीश ने पुलिस द्वारा सड़कों पर बैरिकेड्स लगाने और उनके वाहन सहित अन्य वाहनों को रोकने पर नाराजगी जताई। न्यायाधीश ने उन्हें बिना किसी बाधा के जाने देने लिए कोई व्यवस्था नहीं करने को लेकर पुलिस को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “इसकी वजह से हमें आज देर से अदालत का काम शुरू करना पड़ा।”

दरअसल, दिवंगत दक्षिण भारतीय अभिनेता शिवाजी गणेशन की 94वीं जयंती के अवसर पर आरए पुरम में अड्यार पुल के पास उनके स्मारक पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया था। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और अन्य मंत्री भाग लेने पहुँचे थे।

इस दौरान न्यायाधीश की गाड़ी वहाँ करीब 30 मिनट तक रुकी रही। उन्होंने कहा कि उनके पीए द्वारा संबंधित पुलिस अधिकारियों को पहले से सूचित करने के बावजूद ऐसा हुआ। हाईकोर्ट के समन के बाद गृह सचिव एसके प्रभाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायाधीश के समक्ष पेश हुए और इस घटना पर खेद जताया। उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसके लिए कदम उठाए जाएँगे।

न्यायाधीश ने इस पर कहा कि वह इस आधार पर अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू कर सकते थे कि उन्हें अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोका गया। हालाँकि, उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं कर रहे हैं और मामले को यहीं खत्म किया जाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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