Homeदेश-समाज14 साल का था महेश, नग्न कर पेड़ से बाँध दिया: आठ साल बाद...

14 साल का था महेश, नग्न कर पेड़ से बाँध दिया: आठ साल बाद लोहे की जंजीरों से आजाद होने की जगी आस

महेश के पिता प्रागजी ओलकिया ने बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार है। इसके चलते वह हिंसक हो जाता है। ऐसे में अगर कोई उसके पास जाता है तो वह पथराव शुरू कर देता है।

गुजरात के राजकोट ज‍िले में पिछले आठ सालों से एक व्यक्ति नग्न अवस्था में एक पेड़ में लोहे की जंजीरों में बँधा हुआ है। रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना बोटाद तालुका के सर्वा गाँव की है। यहाँ 22 वर्षीय महेश ओलकिया बीते आठ सालों से एक पेड़ से बँधे हुए अपना जीवन जी रहा है। सर्दी हो, गर्मी या फिर बरसात, कोई भी उन पर रहम नहीं दिखाता है। लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता के प्रयासों की बदौलत महेश को जल्द ही अपना अपना जीवन गौरव के साथ जीने का मौका मिल सकता है।

बताया जाता है कि आठ साल पहले महेश ने लोगों से हिंसक व्यवहार करना शुरू कर दिया था। हर क‍िसी को मारना, उस पर पत्‍थर फेंकना उसकी आदत बन गई थी। ऐसे में गरीबी से त्रस्त झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवार ने अपने बेटे को 14 साल की उम्र में ही नग्न अवस्था में एक पेड़ से बाँध दिया था। महेश के पिता प्रागजी ओलकिया ने बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार है। इसके चलते वह हिंसक हो जाता है। ऐसे में अगर कोई उसके पास जाता है तो वह पथराव शुरू कर देता है। उन्‍होंने यह भी कहा क‍ि हम बहुत गरीब हैं और उसके इलाज या उसे कहीं भी रखने के लिए हमारे पास कोई संसाधन नहीं है। इसलिए, हमने उसे एक पेड़ से जंजीर से बाँधकर रखा हुआ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यबू पर खजुभाई के नाम से मशहूर सोशल मीडिया कॉमेडियन नितिन जानी को हाल ही में अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस परिवार के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद वह उस परिवार से मिलने उनके गाँव गए थे। नितिन जानी को लोग सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जानते हैं। इससे पहले भी उन्होंने बेसहारा और गरीब परिवारों की मदद की है।

परिवार और मानसिक रूप से बीमार महेश से मिलने के बाद जानी बताया क‍ि हमने गाँव के बाहरी इलाके में परिवार के लिए एक घर बनाया है। हमने वहाँ ब‍िजली और पंखे की व्यवस्था भी की है। महेश को खाना-पानी भी दिया है। वह मौजूदा समय में हिंसक है। इसलिए हम एक-दो दिन में उसे इलाज के लिए किसी साइकोलॉज‍िस्‍ट के पास ले जाएँगे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -