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‘ईसाइयत का हो रहा जोर-शोर से प्रचार… सिखों को अर्थव्यवस्था पर कब्जा करना होगा’ : अकाल तख्त के जत्थेदार ने दी ‘आधुनिक हथियार’ रखने की सलाह

ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि 1947 के बाद से ही सिखों को दबाने की नीतियाँ बन गई थीं। आजादी ने सिखों को धार्मिक और राजनीतिक रूप से कमजोर किया है। इसलिए सिखों को मजबूत होकर देश की अर्थव्यवस्था पर कब्जा करना होगा। तभी सिखों का राज होगा।

पंजाब के अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह एक बार फिर अपने बयान के कारण चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने सिखों से अपील की है कि वे मजबूत होकर देश की अर्थव्यवस्था पर कब्जा करें। दैनिक जागरण के मुताबिक, ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि 1947 के बाद से ही सिखों को दबाने की नीतियाँ बन गई थीं। आजादी ने सिखों को धार्मिक और राजनीतिक रूप से कमजोर किया है। इसलिए सिखों को मजबूत होकर देश की अर्थव्यवस्था पर कब्जा करना होगा। तभी सिखों का राज होगा।

उन्होंने आगे कहा, “सिखों के सामने वर्तमान में बहुत सी चुनौतियाँ सामने खड़ी हैं। ये हमें धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर कमजोर कर रही हैं। इसी कड़ी में ईसाइयत का प्रचार जोर-शोर से हो रहा है। इस पर अंकुश लगाने के लिए हमें एकजुट होकर मैदान में उतरना होगा। गाँव-गाँव जाकर सिख समुदाय की आवाज बुलंद करनी होगी। अब एसी कमरों से बाहर निकलने का समय आ गया है। अगर हम धार्मिक रूप से मजबूत नहीं होंगे, तो आर्थिक रूप से ताकतवर नहीं बन पाएँगे। इससे राजनीतिक रूप से भी कमजोर होंगे।”

मालूम हो कि बीते दिनों पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य भर के 424 वीआईपी लोगों को दी गई सुरक्षा तत्काल प्रभाव से हटा ली थी। इन 424 लोगों में रिटायर्ड पुलिस अधिकारी, धार्मिक नेता, नेता और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह भी शामिल थे।

गौरतलब है कि पिछले म​हीने ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिखों से आधुनिक हथियार रखने की अपील की थी। हरप्रीत सिंह ने कहा था कि हर सिख आधुनिक हथियार का लाइसेंस रखने की कोशिश करे। उन्होंने मीरी-पीरी के संस्थापक गुरु हरगोबिंद साहिब के गुरुता गद्दी दिवस पर संगत के नाम जारी संदेश में इस तरह की अपील की थी, जिस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आपत्ति जताई थी।

सिंह ने दावा किया था कि गुरु हरगोविंद ने चार युद्ध लड़े और चारों में ही उन्होंने जीत दर्ज की। उन्होंने यह भी कहा था कि अब समय आ गया है जब सिख बाणी पढ़ कर बलवान बनें और हर सिख शस्त्रधारी भी बने। उन्होंने मीरी-पीरी के सन्देश को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा था कि सिखों को आधुनिकतम गतका, तलवारबाजी, तीरंदाजी का अभ्यास करने के साथ गुरुओं का नाम जपने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने हथियार को समय की जरूरत करार दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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