Homeदेश-समाज'एबॉर्शन कराने के लिए शादीशुदा होना जरूरी नहीं' : SC ने MPT Act के...

‘एबॉर्शन कराने के लिए शादीशुदा होना जरूरी नहीं’ : SC ने MPT Act के तहत सुनाया फैसला, कहा- 20 से 24 हफ्ते तक का गर्भ गिरवाया जा सकता है

कोर्ट ने हालात को देखते हुए असुरक्षित गर्भपात पर भी चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "असुरक्षित गर्भपात मातृ मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। भारत में किए जाने वाले 60% गर्भपात असुरक्षित हैं। सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक पहुँच से इनकार करने से प्रतिबंधात्मक गर्भपात प्रथाएँ असुरक्षित हो जाती हैं।"

एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अविवाहित महिलाओं को भी गर्भपात का अधिकार दिया है। कोर्ट ने विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच अंतर को मिटाते हुए कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट (MPT Act) के तहत अविवाहितों महिलाओं को भी गर्भपात का अधिकार है। कोर्ट का यह निर्णय MTP एक्ट के नियम 3B में विस्तार है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब किसी कारणवश गर्भवती हुई अविवाहित महिलाएँ अपने 24 सप्ताह तक के गर्भ को चिकित्सकों को सहायता से गिरवा सकती हैं। इससे पहले सामान्य हालातों में 20 सप्ताह से अधिक और 24 सप्ताह से कम के गर्भ के एबॉर्शन का अधिकार अब तक विवाहित महिलाओं को ही था।

सुप्रीम कोर्ट ने विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच गर्भपात के अधिकार को मिटाते हुए अपने फैसले मे कहा है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट से अविवाहित महिलाओं को लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर करना असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि एक अविवाहित महिला को हक है कि वह विवाहित महिला की तरह एक बच्चे को जन्म दे ना नहीं।

शीर्ष अदालत ने कहा, “विवाहित महिलाएँ भी यौन उत्पीड़न या बलात्कार के पीड़ितों के वर्ग का हिस्सा बन सकती हैं। एक महिला अपने पति के साथ गैर-सहमति वाले यौन संबंधों के कारण गर्भवती हो सकती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 20 से 24 सप्ताह का गर्भ रखने वाली अविवाहित महिला को गर्भपात से रोकना और विवाहित महिला को यही अधिकार देना, संविधान में दिए गए अनुच्छेद 14 की आत्मा का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक स्थिति एक महिला के अधिकार को नहीं छिन सकता।

कोर्ट ने हालात को देखते हुए असुरक्षित गर्भपात पर भी चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “असुरक्षित गर्भपात मातृ मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। भारत में किए जाने वाले 60% गर्भपात असुरक्षित हैं। सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक पहुँच से इनकार करने से प्रतिबंधात्मक गर्भपात प्रथाएँ असुरक्षित हो जाती हैं।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -