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कर्णप्रयाग के घरों में भी जोशीमठ की तरह दरारें, उत्तरकाशी के एक गाँव में खेत-खलिहान भी धँस रहे: मोदी सरकार ने अध्ययन के लिए भेजा दल

केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने शुक्रवार (6 जनवकी 2023) को जोशीमठ में भू-धंसाव का तेजी से अध्ययन करने के लिए एक पैनल का गठन किया। इस पैनल में पर्यावरण और वन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के प्रतिनिधि शामिल हैं।

उत्तराखंड (Uttarakhand) प्राकृतिक आपदा के एक बड़े दौर से गुजर रहा है। जोशीमठ (Joshimath) के बाद अब कर्णप्रयाग (Karnaprayag) में भी लोगों के घरों में दरारें पड़ने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। भूमि धँसने और भूस्खलन के कारण इस पहाड़ी राज्य के कई क्षेत्रों में पड़ रही दरारों से लोग भय की स्थिति में जी रहे हैं। वे किसी प्राकृतिक आपदा को लेकर भयभीत हैं।

कर्णप्रयाग के बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड और सब्जी मंडी के ऊपरी भाग में रहने वाले 50 से अधिक परिवारों के घरों में दरारें आ गई हैं। यहाँ बरसात के मौसम में भू-धंसाव देखने को मिला था। अब जोशीमठ की तरह यहाँ के घरों में भी दरारें पड़ने लगी हैं।

बदरीनाथ हाईवे के किनारे बसे इस क्षेत्र के लगभग 25 मकानों में 2 फीट तक दरारें पड़ी हैं। ऐसे घरों में रहने वाले कई परिवारों ने खतरे को देखते हुए इसे छोड़ दिया है। वहीं, अभी भी कुछ परिवार इन घरों में रहने को विवश हैं, लेकिन हर पल इन्हें डर का अहसास होते रहता है।

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एमएस बुटोला के अनुसार, इस क्षेत्र का दो बार प्रशासन के अलावा रुड़की आईआईटी के वैज्ञानिक भी निरीक्षण कर चुके हैं। कर्णप्रयाग के प्रभावित इलाके के आसपास के लिए ट्रीटमेंट का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। भूगर्भीय सर्वे भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि पैसा स्वीकृत होते ही जल्दी काम शुरू करवाया जाएगा। 

इसी तरह उत्तरकाशी जिले के मस्ताड़ी गाँव भी 31 वर्षों से भू-धंसाव की मार झेल रहा है। यहाँ के घर ही नहीं, रास्ते और खेत-खलिहान भी धँस रहे हैं। साल 1991 में आए भूकंप के बाद से यह स्थिति शुरू हुई थी। भूकंप में गाँव के लगभग सभी मकान ध्वस्त हो गए थे। इसके बाद साल 1997 में प्रशासन ने यहाँ का भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया था।

रिपोर्ट में कहा था कि भू-धंसाव वाले क्षेत्र में सर्वेक्षण कराकर चेकडैम, सुरक्षा दीवार का निर्माण और पौधा रोपण कराया जाए। मकानों के चारों ओर पक्की नालियों का निर्माण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए। हालाँकि, इस तरह का कोई उपाय नहीं किए गए।

इसको देखते हुए वहाँ के ग्रामीण विस्थापन के लिए लंबे समय से माँग कर रहे हैं, जो अब तक लटका हुआ है। हालाँकि, जोशीमठ की घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने कहा है कि विस्थापन के लिए भूमि का चुनाव कर लिया गया है और भूगर्भीय सर्वे के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि जोशीमठ में भूमि धँसने की घटना के बाद प्रशासन एक-घर का सर्वे करा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह विस्थापित भी किया जा रहा है। इन लोगों को दूसरी जगह किराए पर मकान लेने के लिए राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 4,000 रुपए महीने अगले 6 महीने तक देने का ऐलान भी किया है।

उधर, केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने शुक्रवार (6 जनवकी 2023) को जोशीमठ में भू-धंसाव का तेजी से अध्ययन करने के लिए एक पैनल का गठन किया। इस पैनल में पर्यावरण और वन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के प्रतिनिधि शामिल हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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