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‘प्यार करता हूँ, निकाह करना चाहता हूँ…’ अलीगढ़ में 11 साल की हिंदू छात्रा का यौन शोषण कर रहा था प्रिंसिपल शकील अहमद, प्राइवेट पार्ट छेड़ता था: पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल शकील अहमद ने 11 वर्ष की हिंदू लड़की के साथ नीच हरकतें की हैं। शकील अपने स्कूल की 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली इस बच्ची पर निकाह करने का दबाव बनाने लगा था। उसके प्राइवेट पार्ट्स से छेड़छाड़ करता था और बच्ची विरोध करती, तो उसे फेल करने की धमकी देता था।

यह मामला अलीगढ के जवां ब्लाक के तालिबनगर स्थित प्राथमिक जूनियर हाईस्कूल का है। इसी स्कूल का प्रधानाचार्य शकील अहमद अपनी छात्राओं पर हैवानियत भरी नजरें रखता है, जिसे अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 23 अगस्त की शाम बच्ची स्कूल से उदास और परेशान हालत में अपने घर लौटी। माँ ने सहमी हुई बच्ची के पास जाकर उससे हालचाल पूछा तो वह टूट गई और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाने लगी। उसने जो बताया उसे सुनकर माँ के पैरों तले जमीन खिसक गई।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी के अनुसार, बच्ची ने अपनी माँ से कहा, “स्कूल का प्रधानाचार्य शकील अहमद मुझे बुरी नीयत से पकड़ता है और मेरे प्राइवेट पार्ट्स को छूता है। वह मेरे प्राइवेट पार्ट्स में उंगली भी करता है। जब मैं उसका विरोध करती हूँ, तो वह मुझे डराता है और कहता है कि अगर मैंने किसी को कुछ बताया तो वह मुझे परीक्षा में फेल कर देगा।”

बच्ची ने आगे बताया कि अधेड़ उम्र का शकील अहमद उसे अपने जाल में फँसाने के लिए मीठी-मीठी बातें करता था। FIR में दर्ज है कि बच्ची ने रोते-रोते अपनी माँ से कहा, “प्रधानाचार्य कहता है कि वह मुझसे बहुत प्यार करता है और मुझसे निकाह करना चाहता है।” बच्ची की माँ ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर शकील अहमद के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

पीड़िता की माँ ने इस मामले में जिलाधिकारी और एसएसपी के पास भी शिकायत दी है। साथ ही, इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने भी थाने पर जाकर हंगामा किया है।

पीड़िता की माँ द्वारा दर्ज कराई गई FIR का हिस्सा

पुलिस ने आरोपित को किया गिरफ्तार

पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसपी अमृत जैन का कहना है कि आरोपी शकील को देर रात गिरफ्तार किया गया है।

आरोपित शकील को किया गया सस्पेंड

बच्ची की माँ ने पुलिस के अलावा बीएसए से भी इस मामले की शिकायत की थी। जिसके बाद जवां के ब्लाक शिक्षा अधिकारी ने इस मामले की जाँच की।

बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने जाँच में दोषी मिलने के बाद शकील को निलंबित कर दिया है। राकेश कुमार ने कहा कि सस्पेंड करने के बाद आरोपित के खिलाफ विस्तृत जाँच की जा रही है और आरोपित को बर्खास्त करने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।

अधेड़ उम्र के हवस से भरे शकील जैसे दरिंदगों की यह सोच समाज के सामने सबसे बड़ा कलंक है। इंसानी शक्ल में छिपे शकील जैसे भेड़िए को सबसे क्रूर दंड दिए जाने की जरूरत है। ऐसे लोगों की यह सोच कहाँ से आती है, इसको भी देखने की आवश्यकता है और इसे जड़े से नष्ट किए जाने की जरूरत है।

हिंदू लड़की का धर्मांतरण कर तुर्क हम्माद से कराया निकाह, तो जश्न में इस्लामी कट्टरपंथियों ने की ग्रैंड वलीमा पार्टी: संभल हिंसा रिपोर्ट में हिंदुओं को जलील करने की बात, गजवा-ए-हिंद के टारगेट पर करते थे काम

संभल हिंसा की जाँच के लिए बनाई गई न्यायिक समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में संभल के हिंदू परिवारों का बड़े स्तर पर पलायन का जिक्र है। रिपोर्ट में लव जिहाद की बात भी सामने आई हैं। बताया गया कि मुस्लिम युवकों ने हिंदू लड़कियों ने इस्लाम कबूलने के लिए ब्रेनवॉश किया।

450 पन्‍नों की रिपोर्ट में गजवा-ए-हिंद, आतंकी मॉड्यूल और हिंदूओं की घटती आबादी के बारे में चिंता जताई गई है। संभल हिंसा की जाँच पर बनी इस रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बनाने के आदेश दिए थे, जिसमें संभल में हिंदू पर अत्याचार को लेकर अहम खुलासे हुए हैं।

मुस्लिम युवक से निकाह के बाद छोड़ा हिंदू धर्म

न्यायिक जाँच समिति की इस रिपोर्ट में संभल के उस परिवार के भी बयान हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को लव जिहाद का शिकार होने के बाद खो दिया था। पीड़ित पिता ने समिति को बताया कि साल 2013 में संभल के दीपा सराय निवासी मोहम्मद हम्माद (तुर्क) से निकाह के बाद छोटी बेटी में बदलाव देखा।

पिता ने कहा कि निकाह के एक साल बाद उनकी बेटी ने फोन कर रोते हुए कहा था, “मुझे बचा लो।” लेकिन डर और धमकियों के चलते परिवार उसकी कोई सहायता नहीं कर सका। निकाह के बाद बेटी का नाम बदलकर सिदरा रखा दिया गया।

उन्होंने कहा कि निकाह से पहले उनकी बेटी पहले सनातन धर्म के प्रति खास जुड़ाव रखती थी। वह मंदिर में भगवान की प्रतिमाओं के लिए पोशाक बनाती, व्रत-उपवाह रखती और काफी धार्मिक गतिविधियों में लीन थी। लेकिन निकाह के बाद सब कुछ बदल गया।

पिता ने बताया कि आज सिदरा पूरी तरह मुस्लिम बन चुकी है। वह मदरसों में मजहबी भाषण देती है और उसकी तकरीरें अब मौलवियों से भी प्रभावशाली मानी जाती है।

गाजियाबाद की छात्रा के कमरे में मिली उर्दू किताबें

रिपोर्ट में यह कोई एकलौता मामला सामने नहीं आया है। गाजियाबाद में रहकर MBA की पढ़ाई कर रही एक युवती के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कॉलेज में उसका संपर्क मोहम्मद हम्माद (तुर्क) से हुआ। मुस्लिम युवक से मिलने के बाद से युवती का इस्लामी गतिविधियों में जुड़ाव बढ़ने लगा। युवती के कमरे से उर्दू की किताबें मिली।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुँचा। फैसला मुस्लिम युवक के पक्ष में सुनाया गया। पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद संभल में दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया गया। युवती के परिजन ने बताया कि इसका उद्देश्य हिंदू परिवार को अपमानित करना था।

परिवार ने बताया कि जब भी हिंदू लड़की किसी मुस्लिम युवक से निकाह करती थी तो दावत-ए-वलीमा आयोजित किया जाता था। इससे हिंदू परिवारों को पलायन के लिए मजबूर किया जाता था।

संभल के युवकों को ब्रेनवॉश कर आतंकी संगठनों से जोड़ा

न्यायिक जाँच समिति की रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। यह भी सामने आया कि संभल में आतंकी संगठनों के मॉड्यूल पनपते गए। संभल के कुछ युवाओं को ब्रेनवॉश कर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी संगठनों में भर्ती किया गया। इन युवाओं के नाम अमेरिका की शीर्ष आतंकियों की सूची में भी हैं।

उस वक्त पाकिस्तान खुफिया एजेंसी ISIS ने भी संभल में अपना नेटवर्क खड़ा करने में सफलता पाई। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन, तहरीक-ए-तालिबान, अल-कायदा, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी उस वक्त संभल में काफी सक्रिय थे।

संभल में आजादी के बाद 15 दंगे, हिंदुओं का पलायन

गजवा-ए-हिंद के मंसूबे भी संभल में धड़ल्ले से आगे बढ़ते गए। इसके लिए सांप्रदायिक दंगे करवाए गए और हिंदू के धर्मस्थलों को निशाना बनाया गया। इस अपराध में प्रदेश की पूर्व सरकार के नेताओं का भी हाथ सामने आया, जिसपर सरकार ने चुप्पी साधी थी।

रिपोर्ट में आजादी के बाद संभल में 15 बड़े दंगों का जिक्र किया गया है, जिसमें इस्लामी कट्टरपंथियों को संरक्षण दी गई थी और हिंदुओं की ओर से मुकदमे तक दर्ज नहीं किए गए। इसमें CAA के विरोध में जबरन 6 दिन तक बाजार बंद करने का भी जिक्र किया गया है।

इन दंगों का उद्देश्य संभल में हिंदुओं को भगाना था और ऐसा हुआ भी। रिपोर्ट में संभल में हिंदुओ की घटती आबादी पर भी चिंता जताई गई। जब दंगाइयों के डर से मजबूरन हिंदुओं को पलायन करना पड़ा और हिंदू धर्मस्थलों पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने कब्जा कर लिया।

संभल हिंसा के बारे में

न्यायिक जाँच समिति की यह रिपोर्ट नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा की है। जब कोर्ट ने इस मस्जिद के सर्वेक्षण का आदेश दिया तो इस्लामी कट्टरपंथ ने पूरे शहर में दंगे किए। दंगे में आगजनी की गई और लाठी-डंडे लेकर इस्लामी कट्टरपंथी हिंदुओं में दहशत फैलाने लगे। इस दौरान कई हिंदुओं के घर तोड़ दिए गए।

रजिस्टर्ड न होने से अमान्य नहीं होता हिंदू विवाह, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलाक के मामले में निचली अदालत का आदेश किया रद्द: कहा- अनिवार्य नहीं रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह को लेकर एक अहम फैसला देते हुए कहा कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के ना होने से कोई विवाह अमान्य नहीं हो जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ही शादी को साबित करने का इकलौता साक्ष्य नहीं है। हाई कोर्ट ने विवाह के पंजीकरण का सर्टिफिकेट माँगने वाले निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

सुनील दुबे और उनकी पत्नी मीनाक्षी ने अक्टूबर 2024 में हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(बी) के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए आजमगढ़ की फैमिली कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इस कार्रवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों को आदेश दिया कि वे अपनी शादी का प्रमाणपत्र जमा करें।

इस पर पति ने एक आवेदन दिया कि उनके पास विवाह प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है क्योंकि उनकी शादी रजिस्टर्ड नहीं है। उन्होंने दलील दी कि हिंदू विवाह अधिनियम में विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है और इसलिए उन्हें इस नियम से छूट दी जाए।

फैमिली कोर्ट ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह और तलाक नियमावली, 1956 के नियम 3(क) के अनुसार विवाह प्रमाणपत्र जरूरी है और इस फैसले के खिलाफ दुबे ने हाई कोर्ट का रुख किया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा है कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के ना होने से कोई विवाह अमान्य नहीं हो जाता है। जस्टिस मनीष कुमार निगम की पीठ ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स के फैसलों से यह स्पष्ट है कि विवाह का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट केवल विवाह को साबित करने का एक सबूत है। अगर विवाह रजिस्टर्ड नहीं भी है, तो भी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 8(5) के तहत वह विवाह अमान्य नहीं हो जाएगा।”

हालाँकि, हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों को विवाह पंजीकरण के लिए नियम बनाने का अधिकार है, इसमें हिंदू विवाह रजिस्टर बनाए रखने का प्रावधान भी शामिल है जिसमें विवाह से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह का पंजीकरण केवल विवाह का सुविधाजनक सबूत उपलब्ध कराने के लिए होता है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और 1956 के नियमों के नियम 3(क) को देखते हुए मेरा मानना है कि फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश द्वारा विवाह प्रमाणपत्र दाखिल करने पर जोर देना पूरी तरह अनावश्यक था…निचली अदालत का आदेश रद्द किया जाता है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आजमगढ़ फैमिली कोर्ट को जल्द से जल्द इस मामले पर सुनवाई करने को कहा है। हाई कोर्ट ने कहा, “तलाक की याचिका 2024 से लंबित है इसलिए आजमगढ़ फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई और निर्णय करें। दोनों पक्षों को अपना पक्ष और सबूत पेश करने का पूरा मौका दिया जाए लेकिन अनावश्यक तारीखें किसी भी पक्ष को न दी जाए।”

हाई कोर्ट ने कहा, “हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 8(1) से 8(4) के तहत बनाए गए किसी भी नियम के बावजूद अगर विवाह का पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज नहीं हुआ है तो भी विवाह की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र दाखिल करने की आवश्यकता केवल उसी स्थिति में होती है जब विवाह धारा 8 के तहत रजिस्टर्ड हो।”

अब हैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री, कभी कॉन्ग्रेस ने ही ‘धोखे’ से हराया था: सिद्दारमैया ने खोली ग्रैंड ओल्ड पार्टी की पोल, ‘वोट चोरी अभियान’ के बीच राहुल गाँधी को दिखाया आईना

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कॉन्ग्रेस के कथित ‘वोट चोरी’ आरोपों की पोल खोल दी है। सीएम ने कहा कि 1991 में ‘वोट फ्रॉड’ के चलते हार मिली थी। इसके साथ ही जो कॉन्ग्रेस बीजेपी और चुनाव आयोग पर फर्जी आरोप लगा रही है, सिद्दारमैया का यह बयान अब कॉन्ग्रेस पर सवाल खड़े कर रहा है।

बीजेपी ने भी सिद्दारमैया के बयान पर कॉन्ग्रेस को जमकर घेरा। बीजेपी के अमित मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा, “जो सिद्दारमैया एक समय पर कॉन्ग्रेस की ‘वोट चोरी’ के खिलाफ लड़े थे, आज उसी पार्टी के मुख्यमंत्री हैं। साथ ही बिहार में कॉन्ग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ रैली का समर्थन कर रहे हैं। ये कैसी विडंबना है।”

सिद्दारमैया का यह बयान कर्नाटक में एक कार्यक्रम में बोलते हुए सामने आया, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस की पोल खोलते हुए खुद पर बीती ‘वोट चोरी’ का रोना रोया। उन्होंने कहा, “मैं 1991 में धोखे से हारा। मेरे वकील रविवर्मा कुमार ने मेरी मदद की थी।” उन्होंने खुद को कॉन्ग्रेस की ‘वोट चोरी’ का पीड़ित बताया। सीएम के इस बयान से कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ हंगामे का फैक्टचेक हो गया है।

साल 1991 में सिद्दारमैया के साथ क्या धोखा हुआ?

कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने साल 1991 में हुए लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। जब 34 साल पहले सिद्दारमैया ने जनता दल सेक्युलर (JDS) के टिकट पर कर्नाटक के कोप्पल से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में सिद्दारमैया को कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार बसवराज पाटिल अनवारी के सामने हार मिली। चुनाव में अनवारी को 2.41 लाख वोट मिले और जीत का अंतर सिर्फ 11,200 वोटों का था।

सिद्दारमैया ने इसके खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में भी लड़ाई लड़ी। सिद्दारमैया ने हाई कोर्ट में वोटों की गिनती में धाँधली का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि 22,423 वोटों को गलत तरीके से खारिज किया गया, जिनमें से ज्यादात उनके पक्ष में थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने यह भी आरोप लगाए कि अनवारी गैर-कानूनी ढंग से उम्मीदवार बना है क्योंकि लोकसभा स्पीकर ने अनवारी को पहले ही अयोग्य घोषित कर दिया था। आखिर में हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था।

कर्नाटक मंत्री ने भी कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा के खिलाफ दिया था बयान

सीएम सिद्दारमैया से पहले कर्नाटक के मंत्री केएन राजन्ना भी कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ वाले फर्जी दावे की पोल खोल चुके हैं। इसका फल उन्हें सरकार में अपना मंत्री पद गवाकर चुकाना पड़ा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया को कैबिनेट से बर्खास्त करने के आदेश दिए थे।

दरअसल, केएन राजन्ना ने राहुल गाँधी के फैलाए गए कर्नाटक में ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा के खिलाफ अपनी ही पार्टी को घेरा था। उन्होंने कहा था, “मतदाता सूची तब बनाई गई थी, जब कर्नाटक में हमारी पार्टी सत्ता में थी।”

क्या कर्नाटक सीएम को भी देना पड़ेगा इस्तीफा?

ऐसे में बीजेपी ने अब कॉन्ग्रेस से सवाल किया है कि क्या कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया के बयान पर भी उनका हश्र केएन राजन्ना जैसे ही किया जाएगा। यानि क्या सीएम राजन्ना को भी उनके पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। यह सवाल बीजेपी के अमित मालवीय ने एक्स पर की गई एक पोस्ट में किया।

अमित मालवीय ने लिखा, “कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद राहुल गाँधी के तथाकथित ‘वोट चोरी’ अभियान की पोल खोल दी। क्या उनका भी वही हश्र होगा जो वरिष्ठ मंत्री केएन राजन्ना का हुआ था, जिन्हें सच बोलने के कारण बर्खास्त कर दिया गया था? एक बात तो साफ है: कांग्रेस के भीतर भी, राहुल गाँधी की अंतहीन हरकतों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।”

झारखंड में ST समाज की जमीनों को गलत तरीके से हड़पा, पूर्व मंत्री एनोस एक्का समेत 10 को कोर्ट ने पाया दोषी: हाई कोर्ट ने दिए थे CBI जाँच के आदेश

राँची की CBI कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का और 8 अन्य को शुक्रवार (29 अगस्त 2025) जनजातीय जमीन घोटाले में दोषी ठहराया। यह मामला 2006-2008 का है, जब एनोस ने अपनी पत्नी के नाम पर 1.18 करोड़ की जनजातीय जमीन खरीदी, जो CNT एक्ट के खिलाफ है। इस कानून में जनजातीय जमीन गैर-जनजातीय को बेचना मना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी पर CNT एक्ट (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908) का उल्लंघन कर जनजातियों की जमीन धोखे से खरीदने का आरोप था। कोर्ट ने फैसला सुनाने के बाद सभी दोषियों को जेल भेज दिया। फर्जी दस्तावेज और गलत अनुमति के जरिए यह सौदा हुआ। 2008-09 में जनहित याचिकाओं के बाद हाई कोर्ट ने CBI जाँच के आदेश दिए। CBI ने 2010 में केस दर्ज किया और 2012 में चार्जशीट दाखिल की।

दोषी ठहराए गए 10 लोगों में एनोस एक्का (पूर्व मंत्री), उनकी पत्नी मेनन एक्का, कार्तिक कुमार प्रभात, राज किशोर सिंह, फिरोज अख्तर, बृजेश मिश्रा, अनिल कुमार, मणिलाल महतो, ब्रजेश्वर महतो, परशुराम करकेट्टा शामिल हैं। वहीं, गोवर्धन बैठा नाम के एक आरोपित को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

क्या है मामला?

CBI के मुताबिक, 2006 से 2008 के बीच एनोस एक्का ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रांची में करीब 1.18 करोड़ रुपये की जमीन अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी। ये जमीन जनजातीय समुदाय से संबंधित थी, जिसे CNT एक्ट के तहत गैर-जनजातीय को बेचना मना है।

इसके बाद भी फर्जी पते और गलत दस्तावेजों के आधार पर यह जमीनें खरीदी गईं। कई मामलों में विक्रेताओं ने भूमि सुधार उपसमाहर्ता (LRDC) से गलत तरीके से अनुमति भी ली थी।

साल 2008 और 2009 में दो जनहित याचिकाएँ दायर की गई थीं, जिनके आधार पर झारखंड हाई कोर्ट ने CBI जाँच के आदेश दिए। इसके बाद CBI ने 11 अगस्त 2010 को एनोस एक्का, हरिनारायण राय और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। 10 दिसंबर 2012 को CBI ने 16 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

क्या है CNT एक्ट?

CNT एक्ट 1908 (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम) जनजातीय समुदाय की जमीन की सुरक्षा के लिए बना कानून है। इसके तहत जनजातीय जमीन को गैर- जनजातीय को बेचना या ट्रांसफर करना प्रतिबंधित है। यह कानून अंग्रेजों के समय, 1908 में लागू किया गया था और आज भी झारखंड में लागू है।

एनोस एक्का का राजनीतिक और आपराधिक इतिहास

2005, 2009 और 2014 में एनोस एक्का कोलेबिरा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। वे 2005 से 2008 तक मधु कोड़ा सरकार में मंत्री भी रहे। साल 2014 में एनोस एक्का को एक पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

जुलाई 2018 में कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस तरह अब एनोस एक्का पर हत्या मामले के बाद जमीन घोटाले में भी दोष सिद्ध हो चुका है।

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने अमेरिका की वैश्विक साख को ‘गटर’ में पहुँचाया: US के पूर्व NSA जेक सुलिवन, कहा – दशकों की मेहनत पर फिरा पानी, बीजिंग के करीब जा रहा भारत

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इन टैरिफ ने अमेरिका की वैश्विक साख को ‘गटर में’ पहुचा दिया है। सुलिवन ने चेतावनी दी कि ये कदम भारत को चीन के करीब ले जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों की मेहनत से बनी रणनीतिक साझेदारी खतरे में पड़ गई है।

सुलिवन ने ‘द बुलवर्क पॉडकास्ट’ में टिम मिलर से बात करते हुए कहा कि ट्रंप की नीतियों ने अमेरिका को अपने सहयोगियों के लिए ‘भरोसेमंद साथी’ की बजाय ‘बड़ा बाधक’ बना दिया है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के नेता अब अमेरिका से दूरी बनाने की बात कर रहे हैं।

सुलिवन ने कहा, “पहले अमेरिका को स्थिर और भरोसेमंद माना जाता था, लेकिन अब कई देशों में चीन की साख बढ़ गई है। लोग कह रहे हैं कि अमेरिका की छवि खराब हो चुकी है और चीन ज़िम्मेदार खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।”

भारत पर बात करते हुए सुलिवन ने कहा कि अमेरिका ने सालों तक भारत के साथ गहरे और टिकाऊ रिश्ते बनाने की कोशिश की, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए। लेकिन ट्रंप के 50% टैरिफ (25% रूस से तेल खरीदने की सजा) की वजह से भारत अमेरिका से इतर भी सोच रहा है।

सुलिवन ने कहा, “भारत अब सोच रहा है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए हमें बीजिंग जाकर चीन के साथ बात करनी पड़ रही है।” ये टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गए हैं और इससे भारत के टेक्सटाइल, ज्वैलरी और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में नौकरियों और विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

सुलिवन ने ये भी बताया कि भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिशें दोनों पार्टियों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) ने मिलकर की थीं, लेकिन ट्रंप की नीतियों ने इसे नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी को खोना अमेरिका के लिए बड़ा नुकसान होगा, खासकर जब भारत को चीन के खिलाफ एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखा जाता है।

इसके अलावा, एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी ट्रंप की नीतियों को ‘उलझा हुआ’ बताया। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते अभी ‘बुरे दौर’ में हैं।

बोल्टन ने सवाल उठाया कि जब चीन भी रूस से तेल खरीदता है, तो सिर्फ भारत को ही 25% अतिरिक्त टैरिफ की सजा क्यों दी जा रही है? उन्होंने ट्रंप को ‘असामान्य राष्ट्रपति’ कहा और सुझाव दिया कि उनके बचे हुए कार्यकाल में द्विपक्षीय रिश्तों को और नुकसान से बचाने की कोशिश होनी चाहिए।

जेफ़रीज़ की एक रिपोर्ट ने भी कहा कि टैरिफ की एक वजह ट्रंप की नाराज़गी है, क्योंकि भारत ने उन्हें भारत-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता करने से मना किया था। साथ ही, भारत के कृषि क्षेत्र को आयात से बचाने की नीति भी टैरिफ का कारण बनी। भारत ने इन टैरिफ को ‘अनुचित और गलत’ बताया है।

सुलिवन और बोल्टन जैसे विशेषज्ञों की चेतावनी साफ है कि ये टैरिफ न सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि भारत को चीन के करीब धकेल रहे हैं, जो अमेरिका के लिए रणनीतिक तौर पर बड़ा झटका हो सकता है।

लव जिहाद की फंडिंग करने वाले कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत को वकीलों ने कूटा, कोर्ट ने दी 8 दिन की रिमांड: हिंदू लड़कियों को फाँसने के लिए मुस्लिम लड़कों को देता था लाखों रुपए

इंदौर में लव जिहाद की फंडिंग करने वाला कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वह डाढ़ी और मूंछ कटाकर बदले हुए वेश में कोर्ट पहुँचा। यहाँ कोर्ट ने पुलिस को कादरी की 8 दिन की रिमांड दी है। कोर्ट से बाहर निकलते ही कादरी को वकीलों ने घेरकर पीटना शुरू कर दिया।

पुलिस हिरासत में कादरी को किसी तरह छुड़ाया गया। पुलिस उसे भगाते हुए कोर्ट के गेट के बाहर ले गई और गाड़ी में बिठाकर रवाना हो गई। अब पुलिस हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम लड़कों को पैसे देने के मामले में उससे पूछताछ करेगी।

दरअसल, 14 जून 2025 को सामने आए लव जिहाद के मामले में आरोपित साहिल खान और अल्ताफ खान ने स्वीकार किया था कि कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने उन्हें लड़िकयों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए ₹3 लाख रुपए दिए थे। दोनों आरोपितों को रेप समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था।

अनवर कादरी पर ₹40 हजार का इनाम था

लव जिहाद की फंडिंग में नाम आने के बाद से ही कॉन्ग्रेस पार्षद फरार चल रहा था। इंदौर के बाणगंगा पुलिस ने पिछले दो महीने में उसकी तलाश में उसके रिश्तेदारों और करीबियों के घर दबिश दी। उसका कुछ पता ना लगने पर पुलिस ने ₹10 हजार इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में ₹40 हजार कर दिया गया।

वहीं पुलिस ने लव जिहाद फंडिंग मामले में आरोपित उसकी बेटी आयशा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालाँकि, फिलहाल आयशा जमानत पर जेल से बाहर है।

अनवर कादरी पर 19 अपराधिक मुकदमे दर्ज

कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी पर इंदौर के तमाम थानों में 19 अपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जानलेवा हमला, डकैती, बलवा, अवैध हथियार रखना और जमीन कब्जा करना शामिल है। इन्हीं मामलों में पहले इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार करने का आदेश भी जारी किया था।

लव जिहाद फंडिंग मामले में अनवर कादरी का नाम सामने आया

इतने अपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद अनवर कादरी बेखौफ जुर्म की दुनिया में पैर-पसार रहा था। वह मुस्लिम लड़कों को पैसे देकर हिंदू लड़कियों से रेप और धर्म परिवर्तन करवाता था। इंदौर के ही एक लव जिहाद मामले के आरोपितों ने उसका नाम लिया, जिसके बाद से उसकी गिरफ्तारी के आदेश जारी हो गए। हालाँकि, अनवर तभी से फरार हो गया।

यह मामला 14 जून 2025 को दो पीड़िता की शिकायत का है, जिसमें दो आरोपित साहिल खान और अल्ताफ खान पर लव जिहाद और धर्मांतरण का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों आरोपितो को गिरफ्तार किया। दोनों ने पुलिस की पूछताछ में कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पैसे दिए जाने की बात कबूली थी।

पाकिस्तान से आए हिंदुओं को SC से बड़ी राहत, 800+ के विस्थापन पर लगाई रोक: दिल्ली के मजनू का टीला में रहने वाले परिवारों को मिली राहत, HC ने दिया था बेदखली का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को दिल्ली के मजनू का टीला में रह रहे लगभग 800 पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को हटाने के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंदू शरणार्थियों को हटाने का आदेश जारी किया था।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी किया है और दिल्ली हाई कोर्ट के मई 2025 में दिए गए आदेश को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है।

DDA ने मार्च और जुलाई 2024 में शरणार्थी शिविर को खाली करने के नोटिस जारी किए थे, लेकिन उस समय कार्रवाई नहीं की गई। जुलाई 2025 में फिर से नोटिस चिपकाए गए, जिससे यह अंदेशा बना कि किसी भी वक्त उनको यहाँ से हटाया जा सकता है।

यह याचिका धर्मवीर बागड़ी और अन्य लोगों द्वारा एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है। यह जीने के अधिकार और सम्मान के साथ जीवन जीने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि बिना छत के इंसान की गरिमा नहीं रह सकती और यह उनके रोजगार के अधिकार को भी प्रभावित करता है।

बता दें कि ये शरणार्थी पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा प्रताड़ना से बचने के लिए भारत आए हैं। शिविर में करीब 250-260 परिवार रह रहे हैं, जिनमें से कुछ को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, जबकि बाकी के आवेदन प्रक्रिया में हैं। इनमें से अधिकतर लोग बहुत गरीब हैं और दिहाड़ी मजदूरी, घरेलू काम आदि करके जीवन यापन करते हैं। अधिकांश लोग अनुसूचित जातियों से आते हैं।

याचिका में कहा गया कि हाई कोर्ट ने 12 दिसंबर 2019 को लागू नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि DDA को इन शरणार्थियों के लिए वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए, क्योंकि इन्हें जबरन हटाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

url – Supreme Court suspends the order to remove about 800 Pakistani Hindus living in the refugee camp built in Majnu Ka Tila, Delhi

जापान दौरे के दूसरे दिन PM मोदी ने की बुलेट ट्रेन की सवारी, ट्रेनिंग ले रहे भारतीय ड्राइवरों से भी की मुलाकात: 16 राज्यों के गवर्नर्स से भी मिले, आतंकवाद के खिलाफ दोनों देश आए साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जापान दौरे के दूसरे दिन टोक्यो में 16 जापानी प्रांतों के गवर्नर से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के तहत राज्य-प्रांत सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया।

इस चर्चा में टेक्नोलॉजी, नवाचार, निवेश, कौशल, स्टार्टअप और छोटे-मध्यम उद्यमों (SME) के क्षेत्र में भारत के राज्यों और जापानी प्रांतों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर ध्यान दिया गया।

इसके बाद पीएम मोदी बुलेट ट्रेन से जापान के पीएम शिगेरु इशिबा के साथ टोक्यो से सेंदाई गए। इससे पहले पीएम मोदी ने भारतीय ट्रेन ड्राइवरों से भी मुलाकात की, जो जापान में रहकर ट्रेनिंग ले रहे हैं।

जापान के पीएम शिगेरू इशिबा ने पीएम मोदी के साथ बुलेट ट्रेन में सफर करते हुए तस्वीरें एक्स पर पोस्ट की। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंडई की ओर जा रहा हूँ। कल रात से ही सिलसिला जारी है और मैं आपके साथ कार में रहूँगा।”

जापान के अपने दूसरे दिन के दौरे पर अब पीएम मोदी जापानी प्रधानमंत्री के साथ लंच करेंगे। फिर 4 इलेक्ट्रोन फैक्ट्रियों का दौरा करेंगे, जिनमें से एक E10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन का प्रोटोटाइप है। इसे भारत के खरीदने की भी उम्मीद जताई जा रही हैं। इसके बाद पीएम मोदी चीन के लिए रवाना होंगे।

पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की

जापान ने भारत में पहलगाम आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की। साथ ही कहा कि इस हमले के जिम्मेदार आतंकी, उनके आयोजक और फाइनेंसर को बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। पीएम मोदी और जापान के पीएम शिगेरु इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को जारी संयुक्त बयान में यह बात कही गई।

दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र ने घोषित किए आतंकी संगठनों और उनके सहयोगी जैसे लश्कर-ए-तैयबा(LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), अल कायदा और ISIS के खिलाफ ठोस और सामूहिक कार्रवाई की अपील भी की।

दोनों नेताओं ने यह भी दोहराया कि इन आतंकी संगठनों के ठिकानों को तोड़ना, आतंकी फंडिंग चैनलों को खत्म करना और आतंकवाद के नेटवर्क को तोड़ना बहुत जरुरी है।

चंद्रयान-5 जापान के रॉकेट से होगा लॉन्च

पीएम नरेंद्र मोदी 15वें भारत-जापान समिट में हिस्सा लेने पहुँचे। यहाँ दोनों देशों के बीच कई MoU एक्सचेंज किए गए। इसमें चंद्रयान-5 को लेकर भी भारत-जापान के बीच समझौता हुआ है। यह मिशन दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों, ISRO और JAXA का संयुक्त मिशन होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मिशन के तहत चाँद के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन किया जाएगा। इस मिशन में JAXA के H3-24L रॉकेट को भेजा जाएगा, जिसमें ISRO द्वारा बनाए गए चंद्र लैंडर होंगे। जो जापान में बने चंद्र रोवर को ले जाएगा।

ट्रंप की टैरिफ नीति संविधान के खिलाफ, शक्तियों का किया गलत इस्तेमाल… US कोर्ट ने ‘वसूली’ को बताया गैरकानूनी: डोनाल्ड बोले – ये फैसला अमेरिका को कर देगा बर्बाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कोर्ट ने उनके द्वारा लगाए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स ने कहा कि ट्रंप ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पॉवर्स एक्ट का सहारा लेकर कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए, जो संविधान के खिलाफ है।

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

अमेरिका की बड़ी अदालत यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट का कहना था कि अमेरिकी संविधान के मुताबिक, टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कॉन्ग्रेस के पास है। राष्ट्रपति को हर देश पर अपनी मर्जी से टैरिफ लगाने की छूट नहीं दी जा सकती।

डोनाल्ड ट्रंप ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लिया था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में कुछ खास कदम उठा सकते हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि ट्रंप का यह कदम इस कानून के दायरे से बाहर था।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ट्रंप की टैरिफ नीति उनकी शक्तियों का अतिक्रमण थी। इसका मतलब है कि उन्होंने उस अधिकार का इस्तेमाल किया, जो उनके पास था ही नहीं। हालाँकि कोर्ट ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तुरंत टैरिफ हटाने का आदेश नहीं दिया। इसके बजाय ट्रंप प्रशासन को अक्टूबर 2025 तक का समय दिया गया है, ताकि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। इससे पहले न्यूयॉर्क की फेडरल ट्रेड कोर्ट ने भी ऐसा ही फैसला सुनाया था, जिसे अब इस अपील कोर्ट ने बरकरार रखा है।

ट्रंप को टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार खतरनाक

अमेरिकी कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट का यह फैसला अमेरिकी व्यापार के हित में है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को बरकरार रखता है, तो यह ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी होगी। यह साफ हो जाएगा कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर टैरिफ हटाए गए, तो सरकार को कुछ आयात करों को वापस करना पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी को नुकसान हो सकता है। लेकिन कोर्ट का मानना है कि ट्रंप को दुनिया के हर देश पर टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं दिया जा सकता।

ये फैसला अमेरिका को कर देगा बर्बाद: ट्रंप

कोर्ट के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण और गलत बताया। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर ट्रंप ने लिखा, “सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं। एक अति पक्षपातपूर्ण अपील कोर्ट ने गलत फैसला सुनाया, लेकिन हमें यकीन है कि अंत में अमेरिका की जीत होगी। अगर ये टैरिफ हटाए गए, तो यह अमेरिका के लिए विनाशकारी होगा। यह हमें आर्थिक रूप से कमजोर कर देगा।”

ट्रंप का कहना है कि टैरिफ अमेरिकी मजदूरों और कंपनियों की रक्षा करते हैं। उनके मुताबिक, दूसरे देशों ने सालों तक अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं का इस्तेमाल किया, जिससे अमेरिकी निर्माता और किसान कमजोर हुए। अब वे टैरिफ के जरिए अमेरिका को फिर से मजबूत और समृद्ध बनाना चाहते हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोर्ट का फैसला लागू हुआ, तो अमेरिका को भारी व्यापार घाटे का सामना करना पड़ेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।

टैरिफ का मतलब और ट्रंप का फैसला

अब इस टैरिफ का मतलब समझ लें। टैरिफ यानी आयात कर, जो किसी देश से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। इससे सामान की कीमत बढ़ जाती है और उस देश का सामान खरीदना महँगा पड़ता है। ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए, खासकर उन देशों पर जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा था। व्यापार घाटा यानी जब कोई देश दूसरे देश से ज्यादा सामान खरीदता है और कम बेचता है।

ट्रंप का कहना था कि ये टैरिफ अमेरिकी कंपनियों और मजदूरों को फायदा पहुँचाएँगे, क्योंकि इससे विदेशी सामान महंगा होगा और लोग अमेरिकी सामान खरीदेंगे। 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने करीब 60 देशों और व्यापारिक समूहों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह पिछले 100 सालों में अमेरिका द्वारा टैरिफ में की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। उन्होंने इसे ‘मुक्ति दिवस’ का नाम दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया यही फैसला, तो ट्रंप को हटाने पड़ जाएँगे टैरिफ

ट्रंप अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनके पास 14 अक्टूबर 2025 तक का समय है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी अपील कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो ट्रंप को अपने टैरिफ हटाने पड़ सकते हैं। इससे उनकी नीतियों को बड़ा झटका लगेगा। ट्रंप का मानना है कि टैरिफ अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं, लेकिन कोर्ट और कई जानकार इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि टैरिफ से उपभोक्ताओं को नुकसान होता है, क्योंकि सामान की कीमतें बढ़ जाती हैं।