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पत्थर पूजने वाला नहीं होता ‘ईमानदार’, गाली देने वाला मुसलमान ‘बेचारा’ होता है: हैदराबाद में हिंदू दुकानदार के लिए इस्लामी कट्टरपंथी ने उगला जो जहर, उसके बचाव में उतरा ‘मुस्लिम मिरर’

हैदराबाद में हाल ही में एक घटना घटी जिसे ‘मुस्लिम मिरर’ नाम की सोशल मीडिया पर गलत तरीके से दिखाया गया। ‘मुस्लिम मिरर’ ने एक मुस्लिम व्यक्ति को पीड़ित बताया और कहा कि हिंदू लोगों ने उस पर हमला किया।

मुस्लिम मिरर‘ लिखता है कि मुस्लिम व्यक्ति पर हमला इसलिए हुआ क्योंकि उसने अपने धर्म की बात कही और दुकानदारों से ज़्यादा पैसे लेने पर सवाल उठाया।

CCTV फुटेज ने बताई सच्चाई

असलियत में CCTV फुटेज कुछ और ही दिखाती है। शुक्रवार (27 जून 2025) की रात हुई इस घटना में मुस्लिम व्यक्ति का एक दुकान मालिक और वहाँ मौजूद ग्राहकों से झगड़ा हुआ। वह कह रहा था कि दुकानदार ने उससे ज्यादा पैसे ले लिए हैं।

झगड़ा तब और बढ़ गया जब उस मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धर्म के बारे में गलत बातें कहीं। उसने दुकानदार को ‘पत्थर पूजने वाला’ बताया। उसकी इन बातों से वहाँ मौजूद लोग नाराज हो गए और फिर हाथापाई शुरू हो गई।

पुलिस कार्रवाई और झूठी रिपोर्ट

दुकानदार की शिकायत पर पुलिस ने उस मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। उसे 14 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। ‘मुस्लिम मिरर’ ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना के असली तथ्यों को छिपाया और आरोपित व्यक्ति को बेवजह पीड़ित दिखाया, जबकि CCTV फुटेज से साफ है कि विवाद धार्मिक टिप्पणी के कारण ही शुरू हुआ था।

‘शहाबुद्दीन जी अमर रहें’… चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाने वाले गैंगस्टर को RJD नेता तेजस्वी यादव ने दिया सम्मान: Video वायरल, पहले घर जाकर पूछा था परिवार का हाल

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 05 जुलाई 2025 को स्थापना दिवस मनाया। बिहार की राजधानी पटना स्थित बापू सभागार में भव्य समारोह आयोजित किया गया। समारोह में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ उनके बेटे तेजस्वी यादव भी सम्मिलित हुए।

आरजेडी के स्थापना दिवस समारोह में तेजस्वी यादव ने ‘शहाबुद्दीन जी अमर रहे’ के नारे लगाए। उनका साथ देते हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव की लय में जोश से नारे को दोहराया।

इसका वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो को इस्लामी कट्टरपंथी खूब पसंद कर रहे हैं। वहीं, कुछ समर्थक यूँ हैरान है कि आखिर तेजस्वी यादव इससे क्या हासिल करना चाहते हैं। उनके समर्थकों का जानना भी जरूरी है, क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

तेजस्वी यादव पहले मोहम्मद शहाबुद्दीन के लिए दयाभाव दिखा चुके हैं। कुछ दिनों पहले तेजस्वी यादव मोहम्मद शहाबुद्दीन के घर पहुँच गए। यहाँ उसकी बेगम हीना शहाब और बेटे ओसामा शहाब से मुलाकात की। उनके साथ डिनर का आनंद लिया।

इससे तीन साल पहले साल 2021 में तेजस्वी यादव शहाबुद्दीन के बेटी हेरा शहाब के निकाह में शिरकत करने पहुँचे थे। अब्बू के इंतकाल के कुछ समय बाद ही बेटी हेरा शहाब ने निकाह किया था। बताया गया कि शाही अंदाज में निकाह समारोह आयोजित किया गया था।

कौन है शहाबुद्दीन ?

मोहम्मद सैयद शहाबुद्दीन सीवान शहर से पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में उसने शहर में गुंडाराज चलाया। विभिन्न ठेकों का टेंडर हो या फिर मुखिया से लेकर जिला परिषद तक के चुनाव, हर जगह उसकी ही पसंद चलती थी। उसने 1996, 98, 99 और 2004 में यहाँ से सांसद बन कर जीत का चौका लगाया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन पर सीधे राजद सुप्रीमो और 15 साल तक बिहार में सत्ता के सर्वेसर्वा रहे लालू प्रसाद यादव का हाथ था। वो राजद की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी का हिस्सा था। उसके समर्थक उसे ‘साहेब’ कहकर बुलाते थे। गैंगस्टर शहाबुद्दीन पर अपहरण, हत्या और लूटे के कई मामलों में जेल जा चुका था।

चंदा बाबू के 2 बेटों की तेजाब से नहला कर की हत्या

शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने और उनकी जमीन शहाबुद्दीन के हवाले न करने के कारण चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया।

फिर अगस्त 16, 2004 को वहाँ जो हैवानियत का नंगा नाच हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहलाया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

लेकिन, इस मामले में शहाबुद्दीन को अभियुक्त बनने में 5 वर्ष लग गए। 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया और सभी को उम्रकैद की सजा हुई।

ये मामला स्थानीय कोर्ट और हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ कुछ ही मिनटों में तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी और फैसला बरकरार रखा।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

चंदा बाबू कई सालों तक भय में जीते रहे। उनको डर लगा रहता था कि शहाबुद्दीन उन्हें मरवा देगा। ऐसे में इतने बड़े अपराधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना उनके हार न मानने वाले जज्बे की ओर इशारा करता है। वहीं, शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने इस मामले में केंद्र सरकार को दोषी माना।

मई 2021 में शहाबुद्दीन की कोविड से मौत

शहाबुद्दीन कई मामलों में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था। इसी दौरान कोरोनाकाल का वक्त आया। तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन कोरोना पॉजिटिव निकला। उसे दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाँ अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की 01 मई, 2021 को मौत हो गई।

साल 2021 में मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत के बाद राजद के तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन से दूरी बनाई। तब शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने लोकसभा चुनाव 2024 निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया था।

बाद में तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव ने शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब और बेटे ओसामा शहाब को राजद पार्टी में शामिल कर लिया था। बीवी हीना शहाब ने अपने पति शहाबुद्दीन की जगह सीवान सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उसकी हार के बाद राजद को ये सीट गवानी पड़ी।

अब दोबारा से खबरें सामने आ रही हैं कि शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा शहाब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दावेदार के तौर पर खड़ा हो रहा है। तेजस्वी यादव का शहाबुद्दीन के घर पहुँचना भी इसका संकेत देता है।

SC-ST ही नहीं, OBC-दिव्यांगजनों को भी सुप्रीम कोर्ट की नौकरियों में मिलेगा आरक्षण: 64 साल बाद नियमों में बदलाव, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को भी मिलेगा कोटा

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) ने एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब सुप्रीम कोर्ट अपने स्टाफ की भर्ती में SC\ST के अलावा OBC, दिव्यांजनों, पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को आरक्षण का फायदा देगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला 64 साल बाद आया है और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि सुप्रीम कोर्ट में भी समाज के सभी वर्गों के लोगों को नौकरी के बराबर मौके मिलें। इससे पहले कोर्ट में इस तरह का आरक्षण नहीं था।

क्या है नया फैसला?

यह फैसला चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता में लिया गया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफिसर्स एंड सर्वेंट्स (कंडीशन्स ऑफ सर्विस एंड कंडक्ट) रूल्स, 1961 के नियम 4A में बदलाव किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 146(2) के तहत अपने कर्मचारियों की भर्ती के नियम खुद तय करता है। अब इन सभी आरक्षित वर्गों को केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए आरक्षण के अनुसार फायदा मिलेगा।

किसे कितना मिलेगा आरक्षण?

इस नए नियम के तहत OBC को 27%, SC को 15% और ST को 7.5% आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण सीनियर पर्सनल असिस्टेंट, असिस्टेंट लाइब्रेरियन, जूनियर कोर्ट असिस्टेंट, चैंबर अटेंडेंट जैसे पदों के लिए होगा।

OBC के लिए यह फैसला 33 साल बाद आया है। 1992 में इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने OBC को 27% आरक्षण को सही ठहराया था। लेकिन अब तक सुप्रीम कोर्ट की अपनी भर्तियों में OBC को यह फायदा नहीं मिला था।

व्यवस्था होगी और पारदर्शी

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील पी विल्सन ने इसे एक ‘ऐतिहासिक सुधार’ बताया है। विल्सन ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट की भर्तियाँ राष्ट्रीय आरक्षण नीति के हिसाब से होंगी।

चीफ जस्टिस गवई ने SC\ST के लिए 200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम भी लागू करने की पहल की है। यह सिस्टम आरके सबरवाल बनाम हरियाणा राज्य केस (1995) में सुझाया गया था। इससे आरक्षण व्यवस्था और भी साफ और न्यायसंगत बनेगी।

ग्लास फेंका, मोबाइल मारा और BJP की महिला नेता से की बद्तमीजी: गुजरात में AAP विधायक चैतर वसावा गिरफ्तार

गुजरात के डेडियापाड़ा में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (5 जुलाई 2025) को एक सरकारी बैठक में AAP विधायक की बीजेपी नेता संजय वसावा से बहस हुई, जो मारपीट में बदल गई।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेता ने चैतर वसावा पर मारपीट और एक महिला पंचायत अध्यक्ष के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई।

बैठक में विवाद की जड़

यह घटना डेडियापाड़ा तालुका पंचायत कार्यालय में हुई। यहाँ एक समन्वय बैठक चल रही थी, जिसमें कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। चैतर वसावा ने एक विकास समिति में कुछ लोगों के शामिल होने पर आपत्ति उठाई।

AAP विधायक ने कहा कि विधायक से बिना पूछे समिति बनाई गई थी और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। वसावा का तर्क था कि समिति में किसी व्यापारी को शामिल नहीं करना चाहिए।

मुझ पर पानी का गिलास फेंका- BJP नेता

यह समिति कथित तौर पर बीजेपी नेता संजय वसावा के निर्देश पर बनी थी। इसी बात पर चैतर वसावा और संजय वसावा के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि हाथापाई शुरू हो गई। मौजूद अधिकारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवाया और पुलिस को बुलाया गया।

संजय वसावा ने चैतर वसावा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। संजय वसावा ने बताया कि AAP विधायक ने महिला नेता चंपाबेन वसावा के साथ बदतमीजी की, जिसका मैंने विरोध किया था। लेकिन विधायक ने गुस्से में उन पर मोबाइल और पानी का गिलास फेंक दिया।

संजय वसावा ने कहा कि बैठक में विधायक और चंपाबेन वसावा के बहस हो गई थी। इस पर चैतर वसावा को भाषा पर संयम रखने के लिए कहा गया था। लेकिन चैतर वसावा ने गुस्से में आकर हमला कर दिया।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

घटना के बाद चैतर वसावा अपने समर्थकों के साथ थाने पहुँचे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ जमा हो गई।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और विधायक को राजपीपला ले गई। वहाँ भी उनके समर्थक इकट्ठा हो गए, जिन्हें पुलिस को हटाना पड़ा।

पुलिस ने चैतर वसावा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। इनमें हत्या की कोशिश, महिला का अपमान, जानबूझकर चोट पहुँचाना, हथियार से चोट पहुँचाना, आपराधिक धमकी और शांति भंग करने की नीयत से अपमान जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं।

कहीं चले लाठी-डंडे तो कहीं गाड़ियों में तोड़फोड़… BJP नेता को भी मारा: मुहर्रम में जुलूस के नाम पर कुंभलगढ़ से लेकर कोलकाता तक हिंसा

देशभर में मुहर्रम के जुलूस निकाले जा रहे हैं। इन जुलूसों को लेकर अब विवाद सामने आ रहे हैं। कई जगहों पर मारपीट की घटनाएँ हुई हैं। कुछ जगहों पर मनमानी अनुमति माँगने और गाली-गलौच की शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है और भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

राजस्थान के राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ किले में मुहर्रम के जुलूस की अनुमति को लेकर पाँच दिनों से विवाद चल रहा है। मुस्लिम संगठन मुहर्रम का जुलूस निकालने पर अड़े हैं, वहीं हिंदू संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि अगर हनुमान जयंती और महाराणा प्रताप जयंती पर किले में जाने की अनुमति नहीं मिलती तो मुहर्रम पर भी ताजियों को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

05 जुलाई 2025 को हिंदू संगठनों और व्यापारियों ने बाजार बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात है।

यूपी के रायबरेली में हिंसा

यूपी के रायबरेली के कुढ़ा गाँव में शुक्रवार (04 जुलाई 2025) रात बिना अनुमति से निकाले गए मुहर्रम के जुलूस के दौरान जमकर विवाद हुआ था। घरों के बाहर से जुलूस निकाला जा रहा था। इसमें शामिल लोगों ने आपत्तिजनक नारेबाजी भी की। लोगों ने विरोध किया तो मुस्लिम लोग उग्र हो गए और हिंसा शुरू कर दी।

उन्होंने लाठी-डंडों और हथियारों से हमला किया। उपद्रवियों ने 4 बाइक, एक ऑटो और एक ट्रैक्टर तोड़ डाले। पुलिस ने पूरे फाजिल गाँव निवासी साजिद अली, सोनू, फूलबाबू, अट्टू, अमरोज, शब्बीर समेत 150 लोगों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़ करने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

कुंडा में राजा भैया के पिता नजरबंद

मुहर्रम से पहले शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूपी के कुंडा में पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह समते 13 लोगों को नजरबंद किया गया।

उन्हें शनिवार (05 जुलाई 2025) सुबह 5 बजे से लेकर रविवार (06 जुलाई 2025) रात 9 बजे तक हाउस अरेस्ट किया गया है। कुंडा प्रशासन साल 2016 से यह कार्रवाई कर रहा है।

रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा जाँच

मुहर्रम के मद्देनजर RPF, GRP और LIU की टीमों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की जाँच की। आनंदनगर रेलवे स्टेशन पर डेमू ट्रेन नंबर 75117 में यात्रियों के सामान और संदिग्ध वस्तुओं की तलाशी ली गई।

सुरक्षाबलों ने संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की और यात्रियों से किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत देने की अपील की है।

महाराजगंज में बीजेपी नेता से मारपीट

यूपी के महाराजगंज में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बीजेपी नेता शिवभूषण चौबे से मारपीट की गई। घर लौटते समय जुलूस की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और गाली-गलौज कर हाथापाई की।

सूचना पर पहुँची पुलिस ने बीजेपी नेता को सुरक्षित निकाला और तीन लोगों को हिरासत में लिया है।

फिलीस्तीन की टीशर्ट पहने दिखे इस्लामी कट्टरपंथी

इसके अलावा पहले श्रीनगर से मामला सामने आया था कि मोहर्रम जुलूस के नाम पर फिलीस्तीन के झंडे लेकर घूमते लोग देखे गए हैं लेकिन अब खबर है कि देवरिया में भी जुलूस के नाम पर एक कट्टरपंथी जुलूस में फिलीस्तीन की टीशर्ट पहने नजर आया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।

आजमगढ़ में जुलूस में आपस में भिड़े मुस्लिम

आजमगढ़ के भुजी गाँव में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम युवक आपस में भिड़ गए। एक तरफ शहाबुद्दीन और दूसरी तरफ साहिल, समीर उर्फ सद्दाम, महबूब, साजिद, सोनू उर्फ शेर अली, अफजल और अज्ञात लोगों के बीच लाठी-डंडे चले और धारदार हथियारों से वार किया गया। इसमें 7 लोग घायल हुए हैं।

पुलिस का कहना है कि एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी के बाद विवाद शुरू हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर विवाद शांत कराया। शहाबुद्दीन की शिकायत के बाद मामले में दोनों पक्षों के 6 लोगों को हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

कोलकाता में सियालदह रेलवे स्टेशन पर खूनी संघर्ष

कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन पर कई मुस्लिम युवक तलवारों से लैस होकर लोकल ट्रेन में चढ़ गए। उन्होंने हथियार लहराते हुए एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के वीडियो में व्यक्ति को खून से लथपथ देखा जा सकता है। वहीं, रेलवे स्टेशन पर भी जगह-जगह खून पड़ा दिखा।

यह घटना मुहर्रम से पहले हुई, जिसमें शिया मुसलमान कर्बला की लड़ाई की याद में तलवारें और अन्य घातक हथियार लहराते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी स्थिति देखी गई हो। मुहर्रम में हर साल खून-खराबा और पथराव की खबरें सामने आती हैं। हिंदू त्योहार को भी मुस्लिमों की उग्र भीड़ निशाना बनाती है।

तिरंगा लहराए, मोदी-मोदी चिल्लाए, लगाते रहे ‘भारत माता की जय’ के नारे: प्रधानमंत्री के ब्राजील पहुँचते ही खुशी से झूमे भारतीय प्रवासी, ऑपरेशन सिंदूर को याद करके दिया सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा के चौथे चरण में रविवार (6 जुलाई 2025) को ब्राजील पहुँच गए हैं। गैलेओ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का राष्ट्रीय सम्मान के साथ स्वागत हुआ।

रियो डी जनेरियो में भारतीयों प्रवासी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर नृत्य किय। ये थीम भारत के आतंकवाद-रोधी प्रयासों को दर्शाता है। इस दौरान कलाकारों ने ‘ये देश नहीं मिटने दूँगा’ गाने पर शानदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन देखकर प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए।

प्रधानमंत्री मोदी के होटल पहुँचते ही माहौल बदल गया। वहाँ सैकड़ों भारतीय समुदाय के लोग थे। उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। सबने तिरंगे लहराए और पीएम का जोरदार स्वागत किया।

BRICS सम्मेलन में भागीदारी

पीएम मोदी 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्राजील गए हैं। यह सम्मेलन राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के निमंत्रण पर हो रहा है। BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी शामिल हो गए हैं।

प्रधानमंत्री 6 और 7 जुलाई 2025 को इस सम्मेलन में भाग लेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि वह इन देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। पीएम मोदी शांति, सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और फाइनेंस जैसे बड़े मुद्दे उठा सकते हैं।

ब्रासीलिया और नामीबिया का दौरा

ब्राजील में चार दिन रुकने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ब्रासीलिया की राजकीय यात्रा पर जाएँगे। यह छह दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ब्रासीलिया यात्रा होगी। अपनी यात्रा के आखिरी चरण में पीएम मोदी 9 जुलाई 2025 को नामीबिया जाएँगे।

वहाँ पीएम मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। इससे पहले, पीएम मोदी घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और अर्जेंटीना का दौरा कर चुके हैं।

कोलकाता लॉ कॉलेज की छात्रा को नोचने के बाद मोनोजीत ने जमकर पी थी शराब, ढाबे पर दोस्तों संग खाना भी खाया: अगले दिन खबरें देख उड़े होश, जान बचाने पूरा शहर घूमा

कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामले में मुख्य आरोपित मोनोजित मिश्रा ने वारदात के बाद अपने साथियों के साथ घंटों शराब पी थी। जब यह खबर फैलने लगी तो वह डर गया और मदद माँगने भटकता रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गैंगरेप के बाद मोनोजित मिश्रा, जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी ने गार्ड रूम में खूब शराब पी। फिर उन्होंने ढाबे पर खाना खाया और अपने-अपने घर चले गए। अगले दिन गैंगरेप की खबर सामने आने पर मोनोजित घबरा गया।

मोनोजित ने कई प्रभावशाली लोगों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। सबने उसे सरेंडर करने की सलाह दी।

दर-दर भटका मोनोजित

मोनोजित ने शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमकर मदद की भीख माँगी। मोनोजित देशप्रिय पार्क, रासबिहारी एवेन्यू, गरियाहाट और बल्लीगंज स्टेशन रोड भी गया। पुलिस ने उसके मोबाइल की लोकेशन से यह जानकारी निकाली।

कॉलेज के सिक्योरिटी गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी गिरफ्तार किया गया है। गार्ड ने बताया कि मोनोजित ने उससे कमरे में पानी और साफ चादर रखने को कहा था। मोनोजित ने उसे धमकी भी दी गई थी कि मेन गेट बंद करके चाबियाँ दे दे और कहीं और ड्यूटी करे।

गार्ड ने बताया कि गार्ड रूम में अक्सर शराब पार्टियाँ होती थीं, इसलिए उसे शक नहीं हुआ कि इतनी बड़ी घटना होगी।

क्राइम सीन रीक्रिएट

पुलिस ने शुक्रवार (04 जुलाई 2025) को घटनास्थल पर जाकर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया। इस दौरान सभी आरोपित और पीड़िता मौजूद थे। पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी और 3डी मैपिंग की गई।

क्या था मामला?

25 जून 2025 को कोलकाता लॉ कॉलेज में एक छात्रा से गैंगरेप हुआ था। आरोपितों ने तीन घंटे तक रेप किया और उसका वीडियो भी बनाया। पुलिस ने मोनोजित मिश्रा, जैब अहमद, प्रमित मुखर्जी और सिक्योरिटी गार्ड पिनाकी बनर्जी को गिरफ्तार किया है।

CCTV फुटेज में छात्रा को घसीटते हुए दिखाया गया है। पीड़िता के मेडिकल टेस्ट में भी रेप की पुष्टि हुई है। पुलिस को आरोपितों से घटना का वीडियो भी मिल गया है।

ब्राह्मण-क्षत्रिय लड़कियों को फँसाने पर मिलेंगे ₹15-16 लाख, दलित बच्चियों का रेट ₹10-12 लाख: UP-ATS ने धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले ‘छांगुर पीर’ को किया गिरफ्तार, विदेश से पा चुका ₹100 करोड़ तक की फंडिग

उत्तर प्रदेश में एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यूपी ATS ने इस मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को बलरामपुर के उटरौला कस्बे से गिरफ्तार किया है। जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर पर हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में नीतू रोहरा उर्फ नसरीन को भी गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह बलरामपुर के उटरौला में लंबे समय से सक्रिय था। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को विदेशों से ₹100+ करोड़ की फंडिंग मिली है।

छांगुर पीर और उसका नेटवर्क

जलालुद्दीन खुद को हाजी पीर जलालुद्दीन बताता था। वह अपने एजेंटों के जरिए हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए उकसाता था। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से फीस तय थी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपए, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपए मिलते थे।

विदेशी फंडिंग और संपत्तियाँ

ADGP (लॉ एंड ऑर्डर) ने बताया कि छांगुर पीर ने 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है। जाँच में पता चला है कि बलरामपुर में उसने कई संपत्तियाँ खरीदी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फंडिंग से जलालुद्दीन पीर ने लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और शोरूम की खरीदारी की है।

गिरोह के पास 40+ बैंक खाते हैं। इनमें ₹100 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ है। यह पैसा कथित तौर पर धर्मांतरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। खासकर खाड़ी देशों से फंडिंग आने की बात सामने आई है।

ब्रेनवॉश कर करवाया इस्लाम कबूल

जलालुद्दीन पीर का नेटवर्क गरीब और असहाय लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें पैसों और विदेश में नौकरी का लालच दिया जाता था। अगर कोई बात नहीं मानता तो उसे मुकदमे में फँसाने की धमकी दी जाती थी।

इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने और ब्रेनवॉश करने के लिए जलालुद्दीन पीर ने ‘शिजर-ए-तैय्यबा‘ नाम से किताब भी छपवाई थी। वह खुद को पीर या हजरत पीर नाम से बुलवाना पसंद करता था।

मुंबई के एक सिंधी परिवार का ब्रेनवाश कर इस्लाम कबूल करवाया गया था। परिवार में नवीन घनश्याम रोहरा, उनकी पत्नी नीतू और बेटी का नाम बदलकर जलालुद्दीन, नसरीन और सबीहा रख दिए गया था।

लखनऊ की एक गुंजा गुप्ता हिंदू लड़की को एक मुस्लिम लड़के ने ‘अमित’ बनकर प्रेमजाल में फँसाया। फिर छांगुर पीर की दरगाह ले जाकर उसका ब्रेनवॉश किया और उसे अलीना अंसारी बना दिया गया था।

नेटवर्क के दो लोग गिरफ्तार

फिलहाल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ATS का कहना है कि यह नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है। पुलिस इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जोड़कर देख रही है।

जाँच एजेंसियाँ इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। ADGP ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

कट्टरपंथी मुस्लिम छात्रों ने रोका हिंदू प्रोफेसर का प्रमोशन, VC ऑफिस में प्रदर्शन कर दिखाई ताकत: विरोध में उतरे सनातनी, बांग्लादेश के चटगाँव यूनिवर्सिटी का मामला

बांग्लादेश में कई सरकारी अधिकारियों को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने के बाद अब यूनिवर्सिटीज में ये आग पहुँच गई है। यहाँ एक प्रोफेसर का न सिर्फ प्रमोशन रोका गया, बल्कि उनपर इस्तीफे का भी दबाव डाला। दरअसल, चटगाँव यूनिवर्सिटी में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को संस्कृत के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुशल बरन चक्रवर्ती के साथ कुछ मुस्लिम छात्रों ने अभद्रता की। डॉ. चक्रवर्ती को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन के लिए इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था।

लेकिन उसी दौरान, यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर ऑफिस के बाहर कट्टरपंथी संगठन ‘इस्लामी छात्र शिबिर’ से जुड़े मुस्लिम छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस हंगामे की वजह से इंटरव्यू प्रक्रिया रुक गई और प्रोफेसर का प्रमोशन भी रोक दिया गया।

मुस्लिम छात्रों ने न सिर्फ डॉ. कुशल बरन चक्रवर्ती का प्रमोशन रोकने की माँग की, बल्कि उन्हें यूनिवर्सिटी से निकालने की भी माँग उठाई। दबाव बनाने के लिए छात्रों ने यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग को घेर कर ताला लगा दिया।

यही नहीं, इस्लामी छात्र शिबिर का नेता हबीबुल्लाह खालिद वाइस-चांसलर के ऑफिस के अंदर पहुँच गया और डॉ. चक्रवर्ती के साथ ऊँची आवाज में बदसलूकी करने लगा। डॉ. चक्रवर्ती ‘सनातनी जागरण जोट’ और ‘सनातन विद्यार्थी संसद’ से जुड़े हुए हैं और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खुलकर बोलते हैं।

इसी वजह से उन्हें बदनाम करने की कोशिश हो रही है। उन पर झूठे आरोप लगाए गए कि वे हत्या से जुड़े हैं और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। यह घटना न सिर्फ एक प्रोफेसर के साथ अन्याय है, बल्कि इससे यह भी पता चलता है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की आवाज दबाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

मुस्लिम छात्रों ने हिंदू प्रोफेसर की पदोन्नति रद्द करवाने में सफलता पाई

मीडिया से बात करते हुए डॉ कुशल बरन चक्रवर्ती ने कहा, “छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे और बेबुनियाद हैं। मेरा किसी भी आपराधिक मामले से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा लगता है कि कोई छात्रों को उकसा रहा है।” करीब 3 घंटे तक डॉ चक्रवर्ती को वाइस-चांसलर के ऑफिस में रोका गया और परेशान किया गया।

बाद में शाम को उन्हें यूनिवर्सिटी की गाड़ी से उनके घर पहुँचाया गया। छात्रों के दबाव के चलते यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रमोशन बोर्ड को रद्द कर दिया। डॉ चक्रवर्ती ने बताया कि एसोसिएट वाइस-चांसलर मोहम्मद कमाल उद्दीन ने उन्हें धमकी भी दी।

यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक रजिस्ट्रार मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने भी छात्रों की हरकत को सही ठहराया और इसे प्रोफेसर के ‘बीते कामों का नतीजा’ बताया। प्रशासन के एक और सदस्य डॉ शमीम उद्दीन ने कहा, “जब छात्रों ने आरोप लगाए कि वह हत्या की कोशिश के केस में नामजद हैं, तब हमने प्रमोशन बोर्ड की बैठक रद्द करने का फैसला लिया।” यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे एक शांतिप्रिय प्रोफेसर को धार्मिक आधार पर निशाना बनाकर उनके करियर को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

हिंदुओं ने किया विरोध प्रदर्शन

ढाका यूनिवर्सिटी में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को ‘सनातनी जागरण जोट’ से जुड़े हिंदुओं ने डॉ कुशल बरन चक्रवर्ती के साथ हुए अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रोफेसर की सुरक्षा की माँग भी की।

हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया, छवि प्रोथोम एलो के माध्यम से

कार्यकर्ता सुमन कुमार रॉय ने कहा, “आज देश में तानाशाही का माहौल है। यहाँ कानून का राज नहीं बचा है। ऐसा लगता है जैसे देश में लोकतांत्रिक सरकार ही नहीं रही।” 5 अगस्त 2024 को जब हिंसक छात्र आंदोलनों के जरिए शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया, तब से कई हिंदू शिक्षकों को जबरन इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू प्रोफेसरों को घेरकर डराया-धमकाया जाता है और अगर वे इस्तीफा नहीं देते, तो उन्हें हिंसा की धमकी दी जाती है। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद कट्टर इस्लामी ताकतों को बढ़ावा मिला।

उन्होंने सबसे पहले प्रतिबंधित संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ से बैन हटा दिया और ‘अंसरुल्लाह बांग्ला टीम’ के नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन रहमानी को रिहा कर दिया। साथ ही, उन्होंने हिंदुओं पर हो रहे हमलों को नज़रअंदाज़ करते हुए यह तक कह दिया कि इन घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। यह स्थिति बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की बढ़ती असुरक्षा और प्रशासनिक अनदेखी की गम्भीर तस्वीर पेश करती है।

‘भारत माता’ कैसे हो सकती हैं धार्मिक प्रतीक? : फोटो देख यूनिवर्सिटी प्रोग्राम को कैंसिल करने वाले रजिस्ट्रार से केरल HC ने पूछा सवाल, निलंबित होने पर आदेश के खिलाफ पहुँचा था कोर्ट

केरल में भारत माता की तस्वीर को धार्मिक प्रतीक बताकर यूनिवर्सिटी का कार्यक्रम कैंसिल करने वाले निलंबित रजिस्ट्रार से हाईकोर्ट ने सवाल किया है। कोर्ट ने 4 जुलाई 2025 को उनसे पूछा ‘भारत माता’ को धार्मिक प्रतीक कैसे माना जा सकता है। कोर्ट ने केरल विश्वविद्यालय के निलंबित रजिस्ट्रार केएस अनिल कुमार से पूछा कि फोटो लगाना कानून-व्यवस्था की समस्या कैसे हो सकती है।

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस एन नागरेश ने यह सवाल रजिस्ट्रार की ओर से दायर उस याचिका की सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें उन्होंने अपने निलंबित किए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी है। दरअसल, अनिल कुमार को बुधवार (2 जुलाई 2025) को केरल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मोहनन कुन्नुम्मल ने निलंबित कर दिया था।

रजिस्ट्रार अनिल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी कार्यक्रम को रद्द करने का नोटिस जारी किया था, जिसमें केरल के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का आयोजन यूनिवर्सिटी के सीनेट हॉल में किया गया था। कार्यक्रम में ‘भारत माता’ की एक फोटो लगी थी, जिसमें उनके हाथ में भगवा रंग का ध्वज भी था।

निलंबित रजिस्ट्रार ने कोर्ट को बताया कि फोटो को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच विवाद हुआ था। एक सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें इसकी सूचना दी थी कि कार्यक्रम में धार्मिक प्रतीक लगाया गया है, जिसे लेकर विवाद हो रहा है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने ऐसी स्थिती में कार्यक्रम को रद्द करने की भी सलाह दी थी।

उन्होंने आगे कोर्ट से कहा कि कुलपति ने उन्हें निलंबित कर दिया जबकि कुलपति केवल आपातकालीन स्थितियों में ही रजिस्ट्रार को निलंबित कर सकते हैं। मामले में कोर्ट ने अनिल कुमार की अंतरिम याचिका को खारिज करते हुए पूछा है कि भारत माता धार्मिक प्रतीक कैसे हो सकती हैं? यह उत्तेजक तस्वीर कौन सी थी? और इसे लगाने से केरल में कानून-व्यवस्था की कौन-सी समस्या पैदा हो सकती थी?

कोर्ट का कहना है कि कुलपति उस स्थिति में आदेश जारी कर सकते हैं, जब यूनिवर्सिटी सिंडिकेट का सत्र न चल रहा हो। कोर्ट के फैसले के अनुसार निलंबन के फैसले को सीनेट से स्वीकृति मिलनी चाहिए। कोर्ट ने सवाल किया है कि जब राज्यपाल जैसे विशिष्ट अतिथि को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया हो, तो क्या उस कार्यक्रम को इस तरह से रद्द करना उचित है?

कोर्ट की तरफ से रजिस्ट्रार से विस्तार से जवाब दाखिल करने को कहा है। केरल हाई कोर्ट के अनुसार वास्तविक समस्या क्या है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। मामले की अगली सुनवाई को 7 जुलाई को होनी है।