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मुहर्रम जुलूस की भीड़ ने महावीर मंदिर पर किया हमला, ताजिया निकालने के दौरान हिन्दू-पुलिसवालों पर चलाए पत्थर… 20 घायल: FIR दर्ज, बिहार के कटिहार का मामला

बिहार के कटिहार में 6 जुलाई 2025 की दोपहर मुहर्रम के जुलूस के दौरान कट्टरपंथियों ने नया टोला स्थित महावीर मंदिर पर पथराव करना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि वार्ड नंबर 34 और 35 से ताजिया जुलूस निकल रहा था। तभी अचानक मंदिर और वहाँ रह रहे लोगों पर कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि मुहर्रम जुलूस शांति से निकाला जा रहा था, पर नया टोला में पहुँचते ही यह उग्र हो गया।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कट्टरपंथी महावीर मंदिर पर पत्थर फेंक रहे हैं। वे सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों और घरों पर भी पत्थर बरसा रहे हैं।

कुछ लोगों और पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। हिंसा सिर्फ नया टोला तक सीमित नहीं रही, यह पानी टंकी चौक, दौलत राम चौक और आजाद चौक जैसे अन्य इलाकों तक भी फैल गई।

कट्टरपंथियों के उपद्रव की अलग-अलग वीडियो

ये मुहर्रम जुलूस के नाम पर कट्टरपंथियों के जरिए हिंसा हो रही है। 3 अलग-अलग वीडियो है। एक वीडियो में स्थानीय लोगों ने अपने घर की बालकनी से पत्थरबाजी करते हुए रिकॉर्ड किया है, जिसमें ईंट के बड़े-बड़े टुकड़े लोगों पर और पुलिसकर्मियों पर फैंके जा रहे हैं।

दूसरी वीडियों में महावीर मंदिर के पास खड़े स्थानीय लोगों को कट्टरपंथी लाठी-डंडों से मारने के लिए दौड़े चले आ रहे हैं।

तीसरी वीडियो में देखा जा सकता है कि महावीर मंदिर के सामने कट्टरपंथी तोड़फोड़ कर रहे हैं। हाथों में लाठी-डंडे लिए हुए है। स्थानीय लोग अपने घरों से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

इस घटना पर पुलिस ने प्रतिक्रिया दी है। डीएम मनीष कुमार मीणा और एसपी वैभव कुमार शर्मा मौके पर पहुँचे। उन्होंने नगर वासियों से घरों में रहने और सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने की अपील की।

बिहार गृह सचिवालय ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि गलत और भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। कटिहार शहर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

पुलिस और प्रशासन ने हिंसा में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। वर्तमान माहौल तनावपूर्ण है पर पुलिस की भारी तैनाती के बाद स्थिति नियंत्रण में है।

पुलिसकर्मी समेत लोग घायल

कट्टरपंथियों के पथराव का शिकार वहाँ की पुलिसकर्मी और आम जनता हुई। इसमें कई पुलिसकर्मियों समेत 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और एमएलसी अशोक अग्रवाल भी मौके पर पहुँचे।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की ढीली व्यवस्था के कारण बवाल बढ़ा। डीएसपी और नगर विधायक इलाके में कैंप कर रहे हैं।

देशभर में मुहर्रम पर अन्य हिंसक घटनाएँ

देश के कई हिस्सों में 6 जुलाई 2025 को मुहर्रम के ताजिया जुलूसों के दौरान हिंसा और सांप्रदायिक तनाव की खबरें सामने आई हैं।

  • मध्य प्रदेश- उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान खजूर वाली मस्जिद के पास हंगामा हुआ। उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और प्रतिबंधित मार्ग पर घोड़ा ले जाने की जिद की। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो हमला किया गया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जुलूस के आयोजक इरफान खान उर्फ लल्ला समते 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
  • राजस्थान- राजसमंद के कुंभलगढ़ किले में मुहर्रम जुलूस की अनुमति को लेकर पाँच दिनों से विवाद चल रहा है। हिंदू संगठनों और व्यापारियों ने 5 जुलाई 2025 को बाजार बंद कर विरोध प्रदर्शन किया।
  • उत्तर प्रदेश- रायबरेली में 4 जुलाई 2025 को कुढ़ा गाँव में बिना अनुमति निकाले गए मुहर्रम जुलूस के दौरान आपत्तिजनक नारेबाजी हुई। विरोध करने पर मुस्लिम लोग उग्र हो गए और लाठी-डंडों व हथियारों से हमला किया। 4 बाइक, एक ऑटो और एक ट्रैक्टर तोड़ दिए गए। 150 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
  • कुंडा- मुहर्रम से पहले शांति व्यवस्था के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोगों को नजरबंद किया गया।
  • महाराजगंज- मुहर्रम जुलूस के दौरान बीजेपी नेता शिवभूषण चौबे से मारपीट की गई। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकाला और तीन लोगों को हिरासत में लिया।
  • देवरिया– मुहर्रम जुलूस में एक कट्टरपंथी को फिलिस्तीन की टीशर्ट पहनने पर हिरासत में लिया गया। श्रीनगर में भी ऐसे ही झंडे दिखे थे।
  • आजमगढ़– भुजी गांव में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम युवक आपस में भिड़ गए, जिसमें 7 लोग घायल हुए। 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
  • कुशीनगर- गुलहरिया रेगुलेटर पर मुहर्रम जुलूस के दौरान एक प्राचीन शिव मंदिर के सामने इस्लामिक झंडा फहराया गया और भड़काऊ नारे लगाए गए, जिससे तनाव फैल गया। रामकोला में डीजे की आवाज को लेकर विवाद में एक बच्चा घायल हुआ।
  • बरेली– साहूकारा बाजार में ताजिया रखने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव हुआ। हिंदू व्यापारियों ने विरोध में बाजार बंद कर दिया।
  • बिहार- गोपालगंज माँझा थाना क्षेत्र में ताजिया मिलान के दौरान हिंसक झड़प और पत्थरबाजी हुई, जिसमें 6 से अधिक लोग घायल हुए।
  • भागलपुर में दो पक्षों में भिड़ंत हुई। इसमें 8 लोग घायल हुए। एक वीडियो में एक युवक फायरिंग करते देखा गया था।
  • वैशाली में दो अखाड़ों के बीच झड़प हुई। इसमें आजाद अखाड़ा और पगला अखाड़ा शामिल था।

पिछली घटनाएँ और उठते सवाल

कटिहार की इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। खासकर सांसद तारिक अनवर के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं का होना चिंताजनक है। साल 2017 में भी मुहर्रम के समय ही दुर्गा पूजा के दौरान हिंसा हुई थी।

अब 8 साल बाद फिर से मुहर्रम पर यह घटना हुई है। 2017 की घटना के बाद हिंदू संगठनों ने त्योहारों पर कोई अनहोनी न हो, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली थी। 2022 और 2025 में बजरंग दल ने हिंदू शोभायात्राओं के दौरान मस्जिद पर रंग गुलाल पड़ने से रोकने के लिए ह्यूमन चेन भी बनाई थी।

प्रशासन की सतर्कता और पीस कमेटी पर सवाल

इन सभी घटनाओं के बाद प्रशासन अलर्ट पर है। बिहार और यूपी में सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं। बिना अनुमति जुलूस निकालने पर रोक है। भड़काऊ हरकतों पर सख्ती बरती जा रही है।

कई जिलों में ड्रोन और CCTV से निगरानी हो रही है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। डीएम और एसपी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तनाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

हैरानी की बात यह है कि इन सभी जगहों पर पीस कमेटियों (शांति समितियों) की बैठकें हुई थीं। लेकिन इसके बावजूद हिंसा का दौर नहीं थमा।

ऑपइंडिया ने अपने लेख में बताया था कि इन पीस कमेटियों की बैठकों का इस्तेमाल अक्सर हिंदुओं को कटघरे में खड़ा करने के लिए होता है। जबकि घटना को अंजाम हमेशा इस्लामी पक्ष देता है।

महाराष्ट्र में ईरान समर्थक बैनर

महाराष्ट्र के पुणे में लोनी खलबोर गाँव में मुहर्रम पर ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और रुहोल्ला खुमैनी के ईरान के झंडे वाले बैनर लगाए गए।

बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस और नगर निगम ने बैनर हटाए। पुलिस ने बताया कि बैनर लगाने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

साथ में हर्षवर्धन

वामपंथी सरकार ने ISI जासूस ज्योति मल्होत्रा को बनाया था मेहमान, सरकारी खर्चे पर कन्नूर-कोच्चि और अलप्प्पुझा में मौज करवाई… RTI से खुलासा: भाजपा बोली- CM का दामाद चलाता है टूरिज्म विभाग

हरियाणा की व्लॉगर और ISI जासूस ज्योति मल्होत्रा का केरल सरकार से कनेक्शन उजागर हुआ है। आरटीआई से ये सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि ज्योति मल्होत्रा को केरल सरकार ने टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम पर मुफ्त में केरल के पर्यटन स्थल की सैर करवाई।

ज्योति को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के लिए जासूसी करने और सेना से जुड़ी कई खुफिया जानकारियाँ पाकिस्तान को भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ज्योति 2022 से 4 बार पाकिस्तान जा चुकी है। उसने और उसके पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों से कनेक्शन के सबूत मिले थे।

आरटीआई के मुताबिक ज्योति मल्होत्रा केरल टूरिज्म विभाग के खास कैंपेन का हिस्सा थी। इसके तहत ज्योति 2024 से 2025 के बीच मुन्नार, कन्नूर, कोच्चि, कोझिकोड, अलप्पुझा जैसे खूबसूरत इलाकों का मुफ्त में लुत्फ उठाया।

उसके ठहरने, खाने-पीने का पूरा खर्च केरल पर्यटन विभाग ने वहन किया। ये सब कुछ केरल सरकार के इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम के तहत किया गया। इस पर केरल के पर्यटन मंत्री पी ए मोहम्मद रियास ने कहा कि केरल के पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए व्लॉगर्स को लाया गया था।

केरल के बीजेपी नेता के सुरेंद्रन ने आरटीआई पर हुए खुलासे पर केरल सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा: “अब आरटीआई दस्तावेज मेरे द्वारा कहे गए हर शब्द को साबित करते हैं। सीएम के दामाद द्वारा नियंत्रित केरल पर्यटन ने पाक से जुड़े जासूस की यात्रा को प्रायोजित क्यों किया?”

उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा सीएम का पारिवारिक मामला नहीं है।

कौन है ज्योति मल्होत्रा

ज्योति मल्होत्रा हरियाणा के हिसार की रहने वाली एक यूट्यूबर और ट्रैवल व्लॉगर है। उसका यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ और इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@travelwithjoone’ काफी लोकप्रिय हैं। उसके यूट्यूब पर 3.77 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर और इंस्टाग्राम पर 1.31 लाख फॉलोअर्स हैं।

ज्योति मल्होत्रा को भारतीय खुफिया जानकारी पाकिस्तान को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सेना से जुड़ी कई गुप्त सूचनाएँ पाकिस्तान भेजी हैं।

जाँच में पता चला है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में थी और पाकिस्तान हाई कमीशन, दिल्ली में उसकी मुलाकात एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई थी। दानिश को बाद में भारत से निष्कासित कर दिया गया था।

ज्योति ने कई बार पाकिस्तान की यात्रा की है और अपनी यात्राओं के वीडियो भी बनाए हैं। उसके वीडियो और रील्स में भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए संवेदनशील सूचनाएँ साझा करने का भी आरोप है। पुलिस ने उसके डिजिटल डिवाइस और खातों से 12 टेराबाइट्स से अधिक डिजिटल फॉरेंसिक डेटा बरामद किया है, जिसमें पाकिस्तानी कनेक्शन के सबूत शामिल हैं। उस पर सरकारी गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भारत को संयुक्त राष्ट्र में मिले स्थायी सदस्यता…BRICS देशों ने की माँग, पहलगाम हमले की भी निंदा: PM मोदी बैठक में बोले- आतंकवादियों के खिलाफ एक्शन लेने से हिचके नहीं

रियो शिखर सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र में प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले 11 सदस्यीय ब्रिक्स ने पहलगाम हमले की निंदा की है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का पुरजोर समर्थन किया है।

भारत के लिए संयुक्त घोषणापत्र में कही गयी दोनों बातें काफी अहम है, क्योंकि भारत लंबे समय से यूएनएससी में नए देशों को शामिल करने की माँग करता रहा है।

रियो शिखर सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के साथ दोहरने मापदंडों को खारिज किया गया है। इससे पहले क्वाड देशों ने भी पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की थी।

अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ पर चिंता जताते हुए इसे डब्लूटीओ के नियमों का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही इससे विकासशील देशों को होने वाले नुकसान की बात कही गई है।

आतंकियों को पनाह देने वालों की आलोचना

ब्रिक्स देशों की ओर से कहा गया है, ‘हम 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई घायल हो गए। हम आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं, जिसमें आतंकवादियों का सीमा पार आवागमन, आतंकवाद का वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देना शामिल हैं।’

ब्रिक्स देशों ने एकजुट होकर आतंकवाद से लड़ने की इच्छा जताई है। साथ ही यूएन से आतंकवाद पर सम्मेलन बुलाने का आग्रह भी किया गया है। भारत के लिए ब्रिक्स का ज्वाइंट स्टेटमेंट काफी संतोष देने वाला है और इसे भारत की जीत के रूप में लिया जाना चाहिए।

इससे पहले पीएम मोदी ने ब्रिक्स में पीस एंड सिक्योरिटी एंड रिफॉर्म ऑफ ग्लोबल गवर्नेंस सत्र के दौरान पड़ोसी मुल्क पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवाद पर दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं है। अगर कोई देश आतंकवाद का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने से किसी देश को हिचकना नहीं चाहिए। आतंकवाद का समर्थन या इसकी मौन सहमति बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी देशों को मिलकर इस पर फैसला करना होगा।

भारत के आर्थिक संबंध सचिव दम्मू रवि ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, “…प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पहलगाम में हुआ हमला पूरी मानवता पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों को वित्तपोषित करने, बढ़ावा देने और सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए… प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुध्रुवीय विश्व को आकार देने में ब्रिक्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने ब्रिक्स समूह में विज्ञान मऔर अनुसंधान कोष स्थापित करने पर विचार करने के संदर्भ में कुछ सुझाव भी दिए…”

दम्मू रवि ने कहा, ” सभी सदस्यों ने भारत का समर्थन किया है। उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की।”

यूएनएससी के विस्तार की माँग

ब्रिक्स सम्मेलन में यूएनएससी में सुधार का समर्थन किया गया है। सुरक्षा परिषद को और लोकतांत्रिक, प्रभावी और कार्यकुशल बनाने के लिए बदलाव की माँग की गई है।

घोषणापत्र में कहा गया है, “हम यूएनएससी के व्यापक सुधार के लिए अपना समर्थन दोहराते हैं, ताकि इसे और अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि, प्रभावी और कुशल बनाया जा सके, और परिषद की सदस्यता में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके, ताकि यह मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का पर्याप्त रूप से जवाब दे सके और ब्रिक्स देशों सहित अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के उभरते और विकासशील देशों की आकांक्षाओं का समर्थन कर सके, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मामलों में यूएनएससी में अपनी भूमिका निभा सकें। हम अफ्रीकी देशों की आकांक्षाओं को मान्यता देते हैं, जैसा कि एज़ुल्विनी सर्वसम्मति और सिर्ते घोषणा में परिलक्षित होता है।”

इसमें कहा गया है, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषध में सुधार से विश्वस्तर पर दक्षिण की आवाज पहुँच पाएगी। इसलिए भारत और ब्राजील की आकांक्षाओं को अपना समर्थन देते हैं।”

बकवास दल है ये, कभी नहीं होगा कामयाब… डोनाल्ड ट्रंप ने मस्क की ‘अमेरिका पार्टी’ का उड़ाया मजाक: वित्त मंत्री ने अरबपति पर कसा तंज, कहा- राजनीति छोड़ें, कंपनी पर ध्यान दें

अरबपति एलन मस्क ने हाल ही में ‘अमेरिका पार्टी’ बनाई है। इस पर तुंरत प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि यह ‘बेहूदा’ कदम है, जो देश की राजनीति में भ्रम फैलाएगा। ट्रंप ने ये भी कहा कि मस्क पटरी नीचे उतर गए है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तीसरी पार्टी बनाना बेहूदा है, क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी सफल रही है और अमेरिका में हमेशा से दो-दलीय प्रणाली रही है। तीसरी पार्टियाँ कभी सफल नहीं हुई हैं, इसलिए मस्क इससे मजे ले सकते हैं, लेकिन मुझे यह बेहूदा लगता है।”

ट्रंप का मस्क के कारोबार पर निशाना

ट्रंप ने कहा कि मस्क का नया राजनीतिक कदम रिपब्लिकन पार्टी की हाल की नीतियों के खिलाफ है। ट्रंप ने अपने एक बिल की तारीफ की, जिसने संघीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नियम को खत्म कर दिया।

यह नियम लोगों को इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए मजबूर करता था, और इस बदलाव से मस्क की कंपनी टेस्ला सीधे प्रभावित हुई।

ट्रंप ने कहा कि जब मस्क ने उन्हें समर्थन दिया था, तो उन्होंने मस्क से पूछा था कि क्या उन्हें पता है कि वह ईवी नियम खत्म करने वाले हैं। ट्रंप को हैरानी हुई जब मस्क ने कहा कि उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है।

नासा प्रमुख की नियुक्ति का दावा

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि मस्क ने स्पेस इंडस्ट्री से अपने एक करीबी दोस्त को नासा प्रमुख बनाने की कोशिश की थी।

ट्रंप का कहना है कि उन्होंने मस्क के बड़े स्पेस कॉन्ट्रेक्ट को देखते हुए हितों के टकराव से बचने के लिए इस अनुरोध को मना कर दिया।

मस्क का जवाब और बेस्सेंट की राय

मस्क ने ट्रंप की बातों पर ‘ड्यून‘ किताब से एक लाइन कही, “डर दिमाग को मारने वाला है।” ट्रंप की टिप्पणियों के बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेस्सेंट ने भी मस्क पर हमला किया।

बेस्सेंट ने कहा कि मस्क को राजनीति छोड़कर अपनी कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। बेस्सेंट ने बताया कि मस्क ने पहले ‘डोगे’ (एक सरकारी विभाग) का नेतृत्व किया था, लेकिन तब उनकी बजट कटौती से टेस्ला की बिक्री को नुकसान हुआ था।

बेस्सेंट को लगता है कि मस्क की नई पार्टी की घोषणा से उनकी कंपनियों के बोर्ड खुश नहीं होंगे और वे चाहेंगे कि मस्क अपने कारोबार पर ध्यान दें।

मस्क के आरोप

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘अमेरिका पार्टी’ शुरू करने का एलान किया। मस्क ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों पर ‘फालतू खर्च’ का आरोप लगाया।

मस्क ने लिखा कि देश में बर्बादी और भ्रष्टाचार के कारण हम एक-दलीय प्रणाली में जी रहे हैं, लोकतंत्र में नहीं। उनकी पार्टी का लक्ष्य लोगों को आजादी वापस दिलाना है।

मस्क ने ट्रंप के नए टैक्स बिल की भी आलोचना की। मस्क का कहना है कि यह बिल 2034 तक देश के कर्ज में $3.3 ट्रिलियन और बढ़ा देगा।

मस्क की योजना है कि उनकी पार्टी हाउस और सीनेट चुनावों में हिस्सा लेगी, ताकि कॉन्ग्रेस में संतुलन बनाया जा सके। मस्क ने एक सर्वे भी शेयर किया, जिसमें ज़्यादातर लोगों ने दो-दलीय प्रणाली से अलग होने का समर्थन किया था।

MP-UP से लेकर बिहार तक, मुहर्रम जुलूस में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को बनाया निशाना, तो कहीं पुलिस पर बरपाया कहर: कटिहार में मंदिर पर पथराव, हर तरफ तनाव

देश के कई हिस्सों में मुहर्रम के ताजिया जुलूस के दौरान रविवार (6 जुलाई 2025) को हिंसा और सांप्रदायिक तनाव की खबरें सामने आई हैं। खास तौर पर मध्य प्रदेश के उज्जैन और बिहार के कटिहार में हालात सबसे ज्यादा बेकाबू रहे, जहाँ जुलूस में शामिल कुछ उपद्रवियों ने मंदिरों को निशाना बनाया, पुलिस पर हमले किए और इलाकों को तनाव की चपेट में ला दिया।

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई अन्य जिलों में भी छोटी-बड़ी झड़पें हुईं, जिनमें कई लोग घायल हुए। स्थानीय लोग पुलिस की ढीली व्यवस्था से नाराज हैं, और प्रशासन ने अब अतिरिक्त फोर्स तैनात कर हालात काबू करने की कोशिश शुरू की है। लोग इस बात से आहत हैं कि मातम का दिन हिंसा का दिन बन गया।

उज्जैन में इस्लामी भीड़ का बवाल, पुलिस बैरिकेड तोड़े, जवाब में लाठीचार्ज

उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान खजूर वाली मस्जिद के पास भारी हंगामा मच गया। जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड तोड़ डाले और तय रास्ते से हटकर प्रतिबंधित मार्ग पर घोड़ा ले जाने की जिद पकड़ ली। पुलिस ने जब रोकने की कोशिश की, तो भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस घटना ने पूरे शहर में तनाव फैला दिया।

बताया जा रहा है कि जुलूस से तीन दिन पहले पुलिस और मुस्लिम समाज के नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें रास्ता तय किया गया था। सभी ने लिखित सहमति भी दी थी, लेकिन कुछ उपद्रवियों ने नियम तोड़कर माहौल खराब कर दिया।

पुलिस ने जुलूस के आयोजक इरफान खान उर्फ लल्ला और उसके 15 साथियों पर केस दर्ज किया है। एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि नियम तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इस घटना पर गुस्सा जताया है और सख्त कार्रवाई की माँग की है। लोग कह रहे हैं कि मुहर्रम जैसे पवित्र दिन को हिंसा में बदलने की साजिश की गई।

बिहार के कटिहार में मुहर्रम जुलूस के दौरान महावीर मंदिर पर पथराव

बिहार के कटिहार में मुहर्रम जुलूस के दौरान हालात और भयावह हो गए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने महावीर मंदिर पर पथराव कर दिया, जिससे मंदिर के शीशे टूट गए। जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया, तो उनके घरों पर भी ईंटें फेंकी गईं। इस हमले में कई घरों को नुकसान पहुँचा और इलाके में डर का माहौल बन गया। घटना के बाद पूरा क्षेत्र छावनी में बदल गया और पुलिस ने भारी फोर्स तैनात कर दी।

डीएम मनीष कुमार और एसपी वैभव शर्मा ने मौके पर पहुँचकर हालात संभाले। पथरबाजी में कई पुलिसकर्मियों समेत 20 से ज्यादा लोग घायल हुए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस पहले से सतर्क नहीं थी, जिसकी वजह से बवाल बढ़ गया। डीएसपी और नगर विधायक ने इलाके में कैंप किया, लेकिन लोग अभी भी डरे हुए हैं। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं और प्रशासन ने अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

कुशीनगर में मंदिर के सामने झंडा फहराने को लेकर बवाल

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के खड्डा थाना क्षेत्र स्थित गुलहरिया रेगुलेटर पर उस समय तनाव फैल गया, जब मुहर्रम के ताजिया जुलूस के दौरान कुछ युवकों ने एक प्राचीन शिव मंदिर के सामने इस्लामिक झंडा फहराया और भड़काऊ नारे लगाए। इससे हिंदू समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे मामला और बिगड़ गया। पुलिस मौके पर समय से नहीं पहुँच सकी, जिससे विवाद ने उग्र रूप ले लिया। हालाँकि बाद में थाना प्रभारी हर्षवर्धन सिंह के नेतृत्व में कुछ युवकों को हिरासत में लिया गया और पुलिस ने हालत पर काबू पाया।

इसी जिले के रामकोला थाना क्षेत्र के टेकुआटार बाजार में भी ताजिया जुलूस के दौरान डीजे की आवाज को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते दो पक्षों के बीच कहासुनी हुई और भगदड़ मच गई, जिसमें 8 वर्षीय एखलाक नामक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर पुलिस समय से मौके पर होती तो यह घटना टाली जा सकती थी।

गोपालगंज में ताजिया मिलान के दौरान हिंसक झड़प

बिहार के गोपालगंज जिले के माँझा थाना क्षेत्र में स्थित छवही तकी और सिकमी गाँव के बीच ताजिया मिलान के दौरान हिंसक झड़प और पत्थरबाज़ी हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सिकमी गाँव के लोगों ने छवही तकी के जुलूस पर पत्थरों से हमला किया, जिससे 6 से अधिक लोग घायल हो गए। एसडीपीओ राजेश कुमार के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति संभाली। गाँव में पुलिस कैंप तैनात किया गया है।

भागलपुर और वैशाली में भी हिंसा, फायरिंग का वीडियो वायरल

भागलपुर में दो पक्षों में भिड़ंत हो हुई, जिसमें 8 लोग घायल हुए है। घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक युवक फायरिंग करते देखा जा सकता है। वहीं वैशाली जिले में दो अखाड़ों आजाद अखाड़ा और पगला अखाड़ा  के बीच झड़प हुई और कुछ लोग घायल हो गए।

इन सभी घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सभी जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।

बरेली में तनाव के बाद बाजार बंद

उत्तर प्रदेश के बरेली में साहूकारा बाजार में ताजिया रखने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव हो गया। हिंदू व्यापारियों ने विरोध में बाजार बंद कर दिया और दोषियों की गिरफ्तारी की माँग की। पुलिस ने इलाके में फोर्स बढ़ा दी है ताकि हालात और न बिगड़ें। इस घटना ने भी मुहर्रम के मातम को हिंसा और तनाव में बदल दिया।

इन सभी घटनाओं के बाद प्रशासन हर जगह अलर्ट हो गया है। बिहार और यूपी में पुलिस ने सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। बिना अनुमति जुलूस निकालने पर रोक है, और भड़काऊ हरकतों पर सख्ती बरती जा रही है। कई जिलों में ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी हो रही है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। डीएम और एसपी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तनाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

हैरानी की बात ये है कि इन सभी जगहों पर पीस कमेटियों (शांति समितियों) की बैठकें हुई थी। इन बैठकों के बावजूद हिंसा का दौर थमा नहीं। ऑपइंडिया ने अपने लेख में विस्तार से बताया था कि कैसे इन पीस कमेटियों की बैठक का इस्तेमाल सिर्फ हिंदुओं को कटघरे में खड़े करने के लिए होता है, जबकि घटना को अंजाम हमेशा इस्लामी पक्ष देता है। शांति समितियों पर आधारित ऑपइंडिया की खास रिपोर्ट को यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

आगरा में नाबालिग बच्ची के साथ घर में घुसकर छेड़छाड़, आरोपित अस्लान गिरफ्तार: पीड़िता के परिवार को आरोपित के परिजनों ने धमकाया, पुलिस ने दर्ज की FIR

आगरा के ट्रांस यमुना इलाके में संजीवनगर कॉलोनी में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की सुबह एक 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई। तीन युवक जबरन लड़की के घर में घुस आए और उसके साथ छेड़छाड़ की। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।

लड़की के पिता को जैसे ही इसकी खबर मिली, वो फौरन घर पहुँचे और एक आरोपित अस्लान को पकड़ लिया। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर आई और अस्लान को गिरफ्तार कर लिया।

पूरा मामला क्या है

ये घटना 4 जुलाई 2025 की सुबह करीब 8 बजे की है। पीड़िता के पिता एक पारिवारिक कार्यक्रम में गए थे। उनकी पत्नी, बेटा और 16 साल की बेटी उससे पहले घर लौट आए थे। लड़की घर के बाहर वाले कमरे में काम कर रही थी, जबकि उसकी माँ अंदर के कमरे में आराम कर रही थी।

इसी दौरान इस्लामनगर, टेढ़ी बगिया के रहने वाले अस्लान पुत्र इकबाल अपने दो साथियों के साथ जबरन घर में घुस आया। अस्लान ने लड़की के साथ छेड़छाड़ शुरू की। जब लड़की ने विरोध किया, तो तीनों ने उसे पीटा और उसके कपड़े फाड़ दिए। लड़की ने जोर-जोर से चीखना शुरू कर दिया।

लड़की की चीख सुनकर उसकी माँ दौड़कर आई। तभी पीड़िता का पिता भी घर पहुँच गया। उन्होंने फौरन दरवाजा बंद कर अस्लान को पकड़ लिया, लेकिन बाकी दो युवक भाग निकले। परिवार ने तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बुलाया।

पुलिस मौके पर पहुँची और अस्लान को गिरफ्तार कर थाने ले गई। लड़की के पिता ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जाँच कराई, जिसमें उसके हाथों और शरीर पर चोट के निशान पाए गए।

पुलिस ने अस्लान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) (जानलेवा हमले की कोशिश), धारा 351(3) (महिला के साथ अभद्र व्यवहार), धारा 74 (बलात्कार), धारा 64(1) (जबरन घर में घुसना) और धारा 333 (साजिश और अपराध में भागीदारी) के तहत मामला दर्ज किया।

चूँकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए अस्लान के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत भी केस दर्ज किया गया, जो बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़ा है। पुलिस ने बताया कि बाकी दो फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है।

पीड़िता के परिवार ने बताया कि घटना के बाद अस्लान के परिवार वालों ने उन पर समझौता करने का दबाव बनाया और केस न करने की धमकी दी।

पीड़िता के परिवार का बयान

पीड़िता के पिता ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया, “मेरी बेटी घर के आगे वाले कमरे में अकेली थी। अचानक तीन लड़के घर में घुस आए। अस्लान ने मेरी बेटी के साथ छेड़छाड़ की और बाकी दोनों भी उसे परेशान कर रहे थे। अगर मैं समय पर घर न पहुँचता, तो कुछ भी हो सकता था। हमें न्याय चाहिए।” इस घटना से जुड़ी FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

महाराष्ट्र में वोटबैंक के लिए मराठी vs हिंदी विवाद भड़काने की सियासत: ‘नॉर्थ इंडियन’ हिंदी का विरोध, लेकिन ‘फॉरेन मिक्स्ड नॉर्थ इंडियन’ से प्यार, उर्दू का इतिहास जानते हैं आप?

भारत में कुछ राजनीतिक दल फिर से भाषा के नाम पर हंगामा मचाकर अपनी रोटियाँ सेंकने में जुटे हैं। कभी कन्नड़ का मुद्दा, कभी तमिल का, कभी मराठी का तो कभी कुछ और। इन दिनों महाराष्ट्र खासकर मुंबई को भाषाई झगड़े का अड्डा बनाने की कोशिश हो रही है। यहाँ मराठी के सामने हिंदी को जबरदस्ती खड़ा किया जा रहा है, जैसे दोनों में कोई जंग हो। लेकिन अगर गहराई से देखें, तो ये सारा खेल सियासी फायदे और वोटबैंक की राजनीति का हिस्सा है।

सच तो ये है कि महाराष्ट्र में मराठी के अलावा कोंकणी और उर्दू भी खूब बोली जाती हैं और ये दोनों भाषाएँ हिंदी से कहीं ज्यादा प्रचलित हैं। हिंदी ज्यादातर वो लोग बोलते हैं, जो वहाँ रोजी-रोटी कमाने आए हैं।

ये वो मेहनतकश लोग हैं, जिनके लिए भाषा सिर्फ़ एक जरिया है, न कि पहचान का मुद्दा। लेकिन उर्दू? वो तो महाराष्ट्र में सदियों से बोली जा रही है। पुराने शासकों – खासकर मुगलों और उनके बाद के नवाबों के साथ ये भाषा यहाँ आई और उनके संरक्षण में खूब फली-फूली। उर्दू न सिर्फ़ बोली गई, बल्कि प्रशासन और दरबारों की भाषा बन गई।

हालाँकि देश के कई राज्यों में उर्दू को खूब बढ़ावा मिला। बात सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं, यूपी से लेकर एमपी, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी उर्दू को विशेष दर्जा मिला। लेकिन हिंदी, जो संस्कृत से निकली है और देश की जमीन से जुड़ी है, उसे ‘उत्तर भारतीय’ कहकर बदनाम किया जाता है। हकीकत में हिंदी उतनी ही नॉर्थ इंडियन है, जितनी उर्दू।

दरअसल, उर्दू की उत्पत्ति इस्लामी आक्रमणों के समय हुई थी, जब विदेशी शासकों को स्थानीय जनता से संवाद के लिए एक मिली-जुली भाषा की जरूरत थी। उर्दू में फारसी और अरबी के शब्द शामिल हैं, लेकिन इसकी व्याकरण हिंदी की है। मुगलों और उनके बाद कई शासकों ने इसे बढ़ावा दिया, जिससे यह शासन और प्रशासन की भाषा बनी।

शरीर विदेशी लेकिन आत्मा देसी – व्याकरण पर ध्यान दें

यहाँ ये बताना जरूरी है कि उर्दू का लेखन पूरी तरह से विदेशी लिपि – नस्तालिक में किया जाता है। नस्तालिक लिपि में ही फारसी जैसी भाषा भी लिखी जाती है, तो अब विदेशी बन चुकी पश्तो भी। पश्तो पाकिस्तान से लेकर अफगानिस्तान तक लिखी-बोली जाती है। भारत में उर्दू के अलावा कश्मीरी भी नस्तालिक लिपि में लिखी जाती है।

ये बात रही लिपि की। जो विदेशी है। इसे बढ़ाने वाले मुगल, अफगानी मूल के नवाब-बादशाह रहे। जिन्होंने इसे दरबारी भाषा बनाया, क्योंकि उन्हें आम हिंदूस्तानियों को ‘उच्च पदों’ से फिल्टर करना था। ऐसे में उन्होंने ‘उर्दू’ को खास बताते हुए उसका न सिर्फ संरक्षण किया, बल्कि दरबारी इस्तेमाल के लिए अनिवार्य बनाकर दक्षिण भारत तक भी पहुँचाया। उर्दू को महाराष्ट्र-तेलंगाना-कर्नाटक के कुछ हिस्सों में दक्कनी (दक्षिणी उर्दू) के तौर पर भी जाना जाता है।

वैसे, उर्दू कभी आम जन की भाषा थी भी नहीं। उत्तर भारत में पढ़े-लिखे तबके ने इसे इसलिए अपनाया, क्योंकि ये राजकीय यानी कामकाज की भाषा थी। ये अलग बात है कि इसका व्याकरण हिंदी वाला रहा, तो आम लोग लिखने की लिपि अपनी सुविधानुसार सीखते रहे, लेकिन बोलने-समझने के लिए जरूरी व्याकरण वो हिंदी से ही लेते रहे। वाक्य विन्यास से लेकर सबकुछ। ऐसे में उर्दू का न सिर्फ जन्म उत्तर भारत में हुआ, बल्कि इसका व्याकरण भी हिंदी वाला है।

ऐसे में आम लोग तो अपनी बोलियों-अवधी-ब्रज-रोहिला-बुंदेलखंडी-हरियाणवी-मेवाड़ी-मेवाती का इस्तेमाल करते रहे, लेकिन ‘प्रशासनिक’ कामकाज के लिए उर्दू सीखते रहे। फिर जैसे ही बदशाहों-नवाबों का दौर बीता और उर्दू की अनिवार्यता खत्म हुई, तो लोग अपनी जड़ों, अपनी बोलियों, अपनी भाषा की तरफ लौटने लगे।

हाँ, ये अलग बात है कि अपनी भाषा और अपनी बोलियों की तरफ लौटने वाले लोग ‘गैर मुस्लिम’ ही थे। क्योंकि मुस्लिमों ने इसे अपनी ‘एक्सक्लूसिव’ भाषा बनाए रखी। आज के समय में ऐसे ‘गैर-मुस्लिम’ मुट्ठी भर होंगे, जो स्तरीय उर्दू बोल-लिख पाते होंगे।

लाहौरी सिनेमा वालों ने किया बेड़ा गर्क

हालाँकि मौजूदा समय में उर्दू के कुछ शब्द बेहद प्रचलित हैं। जैसे- शादी, निकाह, जन्नत, काफिर (इसका मतलब बताने की जरूरत तो नहीं), महबूब, महबूबा, मोहब्बत, तकल्लुफ, सनम, कसम, आशिकी, रहम, करम… इत्यादि… इत्यादि। दरअसल, इसके पीछे कल्चरल घुसपैठ बड़ी वजह है, जिसका जरिया बना बॉलीवुड यानी हिंदी सिनेमा।

एक अहम बात जान लीजिए – भारत में मुंबइया सिनेमा से पहले लाहौरी सिनेमा ही प्रचलित था। बॉलीवुड के शुरुआती बड़े नाम या आजादी के बाद बॉलीवुड में नाम कमाने वाले बड़े एक्टर, राइटर, डायरेक्टर… ये सारे लाहौरी सिनेमा से जुड़े थे। सिनेमा लाहौरी और मिजाज लखनउवा। जब दोनों मिले, तो कल्चरल घुसपैठ शुरू हुई। हर आम बोलचाल वाले शब्दों को नफासत से ‘परोसा’ गया। ये नफासत आई कहाँ से? लाहौरी-लखनउवा कोठे वाली तहजीब, मुशायरों वाली तहजीब से।

कपूर खानदान से लेकर खान-पठान तक… सबकी जड़ें पेशावर-लाहौर-दिल्ली-लखनऊ वाली नफासत-सूफियाना रही। उन्होंने अपने सिनेमा में भी ऐसा ही कुछ दिखाया। ‘खुदा का बंदा’ बरक्कत देने वाला रहता था, तो पंडित-धोखेबाज और ठाकुर-बलात्कारी और शोषक।

ऐसे में उस दौर की सिनेमा में उर्दू को नफासत और नजाकत की भाषा के तौर पर दिखाया गया, जिसका इस्तेमाल ‘सलीके’ से रहने वाले या ‘कुलीन’ नवाब टाइप लोग करते रहे। आजादी के बाद के 2 दशकों और फिर सलीम-जावेद के अलावा आजमी, मजरूह सुल्तानपुरी, कादर खान जैसे लोगों ने इसे खूब बढ़ाया।

अल्लाह के बंदों ने जमकर ‘दरियादिली’ दिखाई, तो भगवान के पूजने वाले बलात्कारी बनते रहे। यकीन न हो, तो कुछ पुराना सिनेमा खुद ही देख लीजिए।

एक्सक्लूसिव होते जाना उर्दू की दिक्कत

बहरहाल, आजादी के बाद एक तरफ आम जन उर्दू से दूर अपनी स्थानीय बोली-भाषा, रोजी-रोटी और संपर्क की भाषाओं की तरफ तरफ भागने लगा। तो दूसरी तरफ उर्दू उसी एक्सक्लूसिवनेस की तरफ बढ़ गई, जहाँ से उसके हिस्से आई तारीफे, गुटबंदी, वोटबैंक की ताकत और ‘तहजीबी’ बढ़त।

इसका असर ये हुआ कि तकरीबन सभी पार्टियों में ‘अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ’ या पार्टी के पैरलल ‘अल्पसंख्यक मोर्चा’ बना दिए गए। हर तरह के कार्यक्रम उर्दू में किए जाने लगे। इन कार्यक्रमों से इस्लामी जनता को जोड़ा गया। राज्यों में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए अकादमियाँ भी बनाई गई। ‘मदरसे’ जैसे पैरलल सिस्टम भारत में विदेशी भाषा यानी अरबी तो पढ़ाते रहे, लेकिन इस पूरी तालीम का जरिया ‘उर्दू’ बना रहा।

अपनी क्षेत्रीय भाषा पर गर्व करना गलत नहीं, लेकिन दूसरी भाषाओं के अस्तित्व को नकारना या उसे अपमानित करना नैतिकता के लिहाज से कैसे सही हो सकता है? महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु या अन्य किसी भी जगह जितनी लोग हिंदी बोलते हैं उतने उर्दू भी बोलते होंगे।

आम बोलचाल की भाषा हो या फिर साहित्य की। हिंदी की तरह उर्दू का भी प्रयोग है। लेकिन कुछ नेता केवल अपनी राजनीति साधने के लिए हिंदी भाषा सत्ता का प्रतीक मानकर इसके विरोध में जुटे हुए हैं। वहीं एक समुदाय के वोट की लालच में उर्दू को सामाजिक सौहार्द वाली भाषा करके पेश किया जाता है, क्योंकि ऐसी सेकुलर-लिबरल पार्टियाँ उर्दू को मुसलमान की पर्यायवाची बना देते हैं। मुसलमान का मतलब है वोटबैंक… और फिर वोटबैंक के लिए ही उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के नेता उर्दू को लेकर तुष्टिकरण की राह पकड़ लेते हैं।

उर्दू विशुद्ध नॉर्थ इंडियन, साउथ पर मुगलों-नवाबों ने थोपा

जबकि हकीकत ये है कि उर्दू पर मुस्लिम समुदाय का एकाधिकार नहीं है। ये भाषा भी उत्तरी भारत की भाषा है जैसे हिंदी। बस, ‘गैर मुस्लिम’ लोग अपनी जरूरतों के हिसाब से इसे सीखते हैं। ऐसे में अगर इन नेताओं के लिए उर्दू बाहरी भाषा नहीं है तो फिर पूछा जाना चाहिए कि हिंदी पर इतना बवाल क्यों? क्या सिर्फ इसलिए कि सत्ताधारी पार्टी अन्य भाषाओं की तरह इस भाषा को भी सम्मान देती है और ये बात राजनीति करने वालों को नहीं पसंद आती।

इन सब विवादों के बीच, आपको इस निष्कर्ष की ओर ले जाना चाहता हूँ कि हिंदी न सिर्फ विशुद्ध देसी भाषा है। बल्कि हिंदी की लिपि देवनागिरी भी देसी ही है। संस्कृत से निकली और फिर तमाम स्थानीय भाषाओं की लिपि बनी। मराठी से लेकर बुंदेलखंडी, अवधी से नेपाली तक, मालवा से लेकर राजस्थान तक… सभी भाषाएँ-बोलियाँ देवनागिरी और हिंदी से जुड़ी हैं। वहीं, उर्दू का जुड़ाव ‘मजहब’ विशेष, कोर्ट की भाषा तक सिमट कर रह गई।

कोर्ट वाला मामला इसलिए, क्योंकि अंग्रेजों ने भी अपना शुरूआती कामकाज उर्दू में ही किया और आज भी जमीन या कोर्ट कचहरी से जुड़े 100-150 साल पुराने कागजात उर्दू में ही मिलते हैं। खासकर 1880-98 के बीच अंग्रेजों द्वारा किया गया जमीन की बंदोबस्ती का काम।

झगड़ा खत्म हो सकता है, बशर्ते…

खैर, जमीन-कोर्ट.. ये सबकुछ मुद्दे से भटकना हुआ। मुद्दा ये है कि हिंदी जितनी भारतीय यानी इंडियन है, जिसे द्रविड-मराठी नेता लोग ‘नॉर्थ इंडियन’ बोल रहे हैं, उतनी ही ‘नॉर्थ इंडियन’ भाषा उर्दू भी है। खैर, उर्दू में तो विदेशी जड़ें भी हैं, लिपि की… लेकिन इसका विकास, जन्म, संरक्षण सबकुछ नॉर्थ इंडिया में ही हुआ। बस, लोगों को यही बात समझनी जरूरी है, जो वो समझ नहीं पा रहे या फिर उन्हें समझने नहीं दिया जा रहा। क्योंकि ऐसा समझाने के बाद या तो ‘उर्दू का विरोध’ हिंदी की तरह (वोटबैंक पॉलिटिक्स की वजह से) शुरू हो जाएगा, या फिर हिंदी को भी उर्दू की तरह ‘स्वीकार’ कर लेने से ये झगड़ा ही खत्म हो जाएगा।

चूँकि ऐसा राजनीतिक पार्टियाँ चाहती नहीं है। वो तो देश की आजादी के समय से ही भाषाई, क्षेत्रीय विवाद पैदा कर अपनी राजनीति चमका रही हैं। धर्म के अलावा भाषाई पहचान के नाम पर हुई राजनीति भारत देश की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है।

वैसे, भाषाई विवाद की वजह से पाकिस्तान जैसा देश 2 टुकड़े हो चुका है। ऐसे में जरूरत है हमें सबक लेने की। सबको स्वीकार करने की और मिल जुलकर आगे बढ़ने की। तभी देश आगे बढ़ेगा। तमिल भाषा आगे बढ़ेगी। कन्नड़-तेलुगू भी बढ़ेगी। मलयालम, मराठी, कोंकणी भी बढ़ेगी, कश्मीरी-बंगाली भी बढ़ेगी और हिंदी-उर्दू भी।

दिल्ली, कर्नाटक, केरल… झारखंड हो या UP-उत्तराखंड, मुस्लिम भीड़ बनाती रही है हिंदू पत्रकारों को निशाना: मीडिया पर कट्टरपंथियों के हमलों के 14 मामले

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। बुर्का पहने महिलाओं ने न सिर्फ सुप्रिया को पीटा बल्कि उनके बाल भी खींचे।

मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू पत्रकारों पर हमले की ये घटना ना तो पहली बार हुई है, ना ही इसमें कोई बात ऐसी है, जिसके चलते इसे नई घटना का दर्जा दिया जा सकता हो। यूँ तो अनगिनत घटनाएँ ऐसी रही हैं, लेकिन आइए उदाहरण के तौर पर उनमें से 14 घटनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

सीमापुरी में All India News की पत्रकार सुप्रिया और कैमरामैन श्याम पर मुस्लिम भीड़ का हमला

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर मुस्लिमों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर सुप्रिया रिपोर्टिंग करने के लिए तैयार थी और उनके कैमरामैन श्याम बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रिया के बाल खींचे, भीड़ ने दोनों को पत्थर और बेल्ट से मारा। इस हमले में सुप्रिया का एक पैर भी टूट गया। हमलावरों ने उनके कैमरा और माइक के साथ-साथ उनका फोन और पर्स भी छीन लिया।

दिल्ली में मुस्लिम भीड़ का हिंदू महिला पत्रकार पर हमला

दिल्ली में बुधवार (2 जुलाई 2025) को एक हिंदू महिला पत्रकार अवैध रुप से रह रहे कुछ मुस्लिमों से बात करने पहुँची थी। इसी बीच मुस्लिमों की भीड़ ने उसे घेर लिया और मारना शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों ने महिला पत्रकार पर पत्थरों से हमला किया, जबकि वो केवल रिपोर्टिंग कर रही थी। जब उसने उनके वहाँ अवैध रुप से रहने पर सवाल उठाया तो भीड़ उसे चाकू दिखाकर डराने लगी।

जयपुर में मुस्लिमों के क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रही थी महिला, मुस्लिमों ने सरेआम दी धमकी

राजस्थान के जयपुर में 28 अप्रैल 2025 को एक महिला पत्रकार रिपोर्टिंग करने उस इलाके में पहुँची, जहाँ मुस्लिमों की संख्या हिंदूओं की अपेक्षा अधिक थी। इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने महिला पत्रकार को कैमरा बंद करने के लिए कहा, जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो वे उसे धमकी देकर इलाके से भगाने लगे।

दिल्ली में वक्फ प्रदर्शन कर रही भीड़ का सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों पर हमला

दिल्ली में 17 मार्च 2025 को मुस्लिम प्रदर्शनकारी वक्फ के विरोध में धरनारत थे। अन्य मीडियाकर्मियों की तरह ही सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों ने भी वहाँ इकट्ठा हुए मुस्लिमों से इस बारे में सवाल किया। क्योंकि मुस्लिम जवाब ही नही दे पा रहे थे, इसलिए उन्हें पलट कर पत्रकारों पर ही हमला करना ठीक लगा। और तिलमिलाए कट्टरपंथियों ने सुदर्शन न्यूज के जर्नलिस्ट्स पर हमला कर दिया।

नैनीताल के हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का अमर उजाला के पत्रकार पर हमला

नैनीताल के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में बने अवैध मस्जिद और मदरसों को गिराने के उद्देश्य से प्रशासनिक टीम पहुँची हुई थी। इस दौरान यहाँ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। अवैध होने के बावजूद मस्जिद को ढहाने के फैसले से नाखुश मुस्लिमों ने न सिर्फ प्रशासनिक समूहों से मारपीट की बल्कि पत्रकारों को भी पीटा।

इनमें वे पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने कभी इन्ही कट्टरपंथियों के समर्थन में खबरें छापी थी। इस हमले में अमर उजाला के पत्रकार राजेंद्र सिंह बिष्ट भी चोटिल हुए थे। यही नहीं मुस्लिमों ने पुलिस स्टेशनों और पेट्रोल पंप को भी जलाने के साथ-साथ एक पुलिसकर्मी को भी जिंदा जलाने की कोशिश की थी।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में चुन-चुन कर हुआ था हिंदू पत्रकारों पर हमला

उत्तराखंड के हल्द्वानी में फरवरी 2024 की हिंसा में दंगा करने वाले मुस्लिमों ने पुलिस प्रशासन और वहाँ रिपोर्टिंग कर रहे हिंदू पत्रकारों की पहचान कर उनपर हमला किया था। समाचारपत्र अमृत विचार के पत्रकार संजय भी इसमें घायल हुए थे। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि कई दिनों तक वे ICU में भर्ती थे।

लखनऊ में मोनिस और एहसान ने काट दी थी पत्रकार की उंगलियाँ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 29 अप्रैल 2025 को जाने-माने साहसी पत्रकार कवि तिवारी पर मोहम्मद मोनिस, मोहम्मद एहसान और उसके साथियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इन मुस्लिम हमलावरों ने कवि तिवारी पर उस वक्त हमला किया, जब वे मंदिर जा रहे थे।

अचानक हुए इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई। हमलावरों ने उन पर चाकू से कई बार गंभीर वार किए, जिसके चलते उनकी उंगलियाँ ही नहीं मुँह भी बुरी तरह से कट गया।

झारखंड में मुस्लिमों ने घंटों तक रोके रखी महिला पत्रकार की कार

झारखंड के पाकुड़ में 18 अक्टूबर 2024 को महिला पत्रकार अर्चना अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर रिपोर्टिंग करने पहुँची थी। जिस समय उसकी कार पाकुड़ से गुजर रही थी। उसी समय मुस्लिमों ने अर्चना के पास पहुँचकर उन्हें धमकी दी। मुस्लिमों ने उनकी कार को रोककर काफी देर हंगामा किया। और उन्हें जाने से रोके रखा। वहाँ किसी तरह अर्चना ने खुद की जान बचाई और निकल पाई।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में महिला पत्रकार के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 31 मार्च 2024 को मुख्तार अंसारी के निधन के बाद रिपोर्टिंग करने पहुँची महिला पत्रकार अर्चना तिवारी पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। यहाँ अर्चना को घेरने की कोशिश की गई। रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। इस हमले में अर्चना को चोट भी आई।

दैनिक जागरण के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 10 जुलाई 2024 को दैनिक जागरण के पत्रकार अमित पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धारदार हथियार से हमला किया था। इसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थी। बड़ी मुश्किल से अमित ने मुस्लिम भीड़ से अपनी जान बचाई थी।

रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ के इशारे के बाद हमला

सुदर्शन न्यूज का एक पत्रकार 31 अगस्त 2023 को रिपोर्टिंग कर रहा था। इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं पत्रकार के ऊपर अपनी गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। जिसकी वजह से पत्रकार जमीन पर गिर गया था।

कर्नाटक में गोहत्या का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में 5 दिसंबर 2020 को अवैध रूप से गोहत्या करने वाले गिरोह की सच्चाई सामने लाने वाली एक महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। भीड़ में शामिल बुर्काधारी महिलाओं ने महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार तो किया ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

केरल में रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ का हमला

केरल के पतनमतिट्टा में 17 अक्टूबर 2018 को सबरीमाला मंदिर पर कवरेज के दौरान रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा प्रसन्ना की कार का शीशा तोड़ने की भी कोशिश की।

कर्नाटक में अवैध बूचड़खाने की रिपोर्टिंग करने पर इंडिया टूडे के पत्रकार पर हमला

कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपल्या गाँव में 10 अगस्त 2018 को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ छापेमारी के दौरान इंडिया टुडे के एक पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने बूचड़खाने के बाहर पत्रकार और पुलिस की टीम कर हमला कर दिया। यहाँ छापेमारी के बाद 71 बछड़ों को छुड़ाया गया था, वहीं 7 आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।

सोचने वाली बात है कि आखिर इस्लामी कट्टरपंथियों की ऐसी कौन सी योजना है, जिसको छिपाने की कोशिश में ये इस निर्ममता पर उतर आते हैं। जब किसी अवैध निर्माण के लिए पत्रकार इनसे सवाल करते हैं और इन मुस्लिमों के पास जवाब नहीं होता, तो ये जानलेवा हमला कर अपने गलत मंसूबों की सच्चाई सामने आने से बचाने में जुट जाते हैं।

पत्थर पूजने वाला नहीं होता ‘ईमानदार’, गाली देने वाला मुसलमान ‘बेचारा’ होता है: हैदराबाद में हिंदू दुकानदार के लिए इस्लामी कट्टरपंथी ने उगला जो जहर, उसके बचाव में उतरा ‘मुस्लिम मिरर’

हैदराबाद में हाल ही में एक घटना घटी जिसे ‘मुस्लिम मिरर’ नाम की सोशल मीडिया पर गलत तरीके से दिखाया गया। ‘मुस्लिम मिरर’ ने एक मुस्लिम व्यक्ति को पीड़ित बताया और कहा कि हिंदू लोगों ने उस पर हमला किया।

मुस्लिम मिरर‘ लिखता है कि मुस्लिम व्यक्ति पर हमला इसलिए हुआ क्योंकि उसने अपने धर्म की बात कही और दुकानदारों से ज़्यादा पैसे लेने पर सवाल उठाया।

CCTV फुटेज ने बताई सच्चाई

असलियत में CCTV फुटेज कुछ और ही दिखाती है। शुक्रवार (27 जून 2025) की रात हुई इस घटना में मुस्लिम व्यक्ति का एक दुकान मालिक और वहाँ मौजूद ग्राहकों से झगड़ा हुआ। वह कह रहा था कि दुकानदार ने उससे ज्यादा पैसे ले लिए हैं।

झगड़ा तब और बढ़ गया जब उस मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धर्म के बारे में गलत बातें कहीं। उसने दुकानदार को ‘पत्थर पूजने वाला’ बताया। उसकी इन बातों से वहाँ मौजूद लोग नाराज हो गए और फिर हाथापाई शुरू हो गई।

पुलिस कार्रवाई और झूठी रिपोर्ट

दुकानदार की शिकायत पर पुलिस ने उस मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। उसे 14 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। ‘मुस्लिम मिरर’ ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना के असली तथ्यों को छिपाया और आरोपित व्यक्ति को बेवजह पीड़ित दिखाया, जबकि CCTV फुटेज से साफ है कि विवाद धार्मिक टिप्पणी के कारण ही शुरू हुआ था।

‘शहाबुद्दीन जी अमर रहें’… चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाने वाले गैंगस्टर को RJD नेता तेजस्वी यादव ने दिया सम्मान: Video वायरल, पहले घर जाकर पूछा था परिवार का हाल

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 05 जुलाई 2025 को स्थापना दिवस मनाया। बिहार की राजधानी पटना स्थित बापू सभागार में भव्य समारोह आयोजित किया गया। समारोह में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ उनके बेटे तेजस्वी यादव भी सम्मिलित हुए।

आरजेडी के स्थापना दिवस समारोह में तेजस्वी यादव ने ‘शहाबुद्दीन जी अमर रहे’ के नारे लगाए। उनका साथ देते हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव की लय में जोश से नारे को दोहराया।

इसका वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो को इस्लामी कट्टरपंथी खूब पसंद कर रहे हैं। वहीं, कुछ समर्थक यूँ हैरान है कि आखिर तेजस्वी यादव इससे क्या हासिल करना चाहते हैं। उनके समर्थकों का जानना भी जरूरी है, क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

तेजस्वी यादव पहले मोहम्मद शहाबुद्दीन के लिए दयाभाव दिखा चुके हैं। कुछ दिनों पहले तेजस्वी यादव मोहम्मद शहाबुद्दीन के घर पहुँच गए। यहाँ उसकी बेगम हीना शहाब और बेटे ओसामा शहाब से मुलाकात की। उनके साथ डिनर का आनंद लिया।

इससे तीन साल पहले साल 2021 में तेजस्वी यादव शहाबुद्दीन के बेटी हेरा शहाब के निकाह में शिरकत करने पहुँचे थे। अब्बू के इंतकाल के कुछ समय बाद ही बेटी हेरा शहाब ने निकाह किया था। बताया गया कि शाही अंदाज में निकाह समारोह आयोजित किया गया था।

कौन है शहाबुद्दीन ?

मोहम्मद सैयद शहाबुद्दीन सीवान शहर से पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में उसने शहर में गुंडाराज चलाया। विभिन्न ठेकों का टेंडर हो या फिर मुखिया से लेकर जिला परिषद तक के चुनाव, हर जगह उसकी ही पसंद चलती थी। उसने 1996, 98, 99 और 2004 में यहाँ से सांसद बन कर जीत का चौका लगाया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन पर सीधे राजद सुप्रीमो और 15 साल तक बिहार में सत्ता के सर्वेसर्वा रहे लालू प्रसाद यादव का हाथ था। वो राजद की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी का हिस्सा था। उसके समर्थक उसे ‘साहेब’ कहकर बुलाते थे। गैंगस्टर शहाबुद्दीन पर अपहरण, हत्या और लूटे के कई मामलों में जेल जा चुका था।

चंदा बाबू के 2 बेटों की तेजाब से नहला कर की हत्या

शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने और उनकी जमीन शहाबुद्दीन के हवाले न करने के कारण चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया।

फिर अगस्त 16, 2004 को वहाँ जो हैवानियत का नंगा नाच हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहलाया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

लेकिन, इस मामले में शहाबुद्दीन को अभियुक्त बनने में 5 वर्ष लग गए। 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया और सभी को उम्रकैद की सजा हुई।

ये मामला स्थानीय कोर्ट और हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ कुछ ही मिनटों में तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी और फैसला बरकरार रखा।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

चंदा बाबू कई सालों तक भय में जीते रहे। उनको डर लगा रहता था कि शहाबुद्दीन उन्हें मरवा देगा। ऐसे में इतने बड़े अपराधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना उनके हार न मानने वाले जज्बे की ओर इशारा करता है। वहीं, शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने इस मामले में केंद्र सरकार को दोषी माना।

मई 2021 में शहाबुद्दीन की कोविड से मौत

शहाबुद्दीन कई मामलों में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था। इसी दौरान कोरोनाकाल का वक्त आया। तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन कोरोना पॉजिटिव निकला। उसे दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाँ अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की 01 मई, 2021 को मौत हो गई।

साल 2021 में मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत के बाद राजद के तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन से दूरी बनाई। तब शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने लोकसभा चुनाव 2024 निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया था।

बाद में तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव ने शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब और बेटे ओसामा शहाब को राजद पार्टी में शामिल कर लिया था। बीवी हीना शहाब ने अपने पति शहाबुद्दीन की जगह सीवान सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उसकी हार के बाद राजद को ये सीट गवानी पड़ी।

अब दोबारा से खबरें सामने आ रही हैं कि शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा शहाब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दावेदार के तौर पर खड़ा हो रहा है। तेजस्वी यादव का शहाबुद्दीन के घर पहुँचना भी इसका संकेत देता है।