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भारत ना बन पाए ‘वर्ल्ड फैक्ट्री’, इसके लिए चीन अटका रहा ‘मेक इन इंडिया’ में रोड़े: अब iPhone बनाने वाले 300 इंजीनियर-टेक्नीशियन वापस बुलाए, जानिए क्या होगा असर

तकनीक के क्षेत्र में भारत की तरक्की पड़ोसी देश चीन को पच नहीं रही है। वह आए दिन ऐसे कदम उठा रहा है जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि रुके। अब उसके निशाने पर भारत में बनने वाले आईफोन आए हैं। उसने आईफोन निर्माता फॉक्सकॉन के भारतीय प्लांट में काम करने वाले अपने यहाँ के इंजीनियरों और कर्मचारियों को वापस बुला लिया है। वह इसके जरिए भारत में एप्पल के उत्पादों के निर्माण का बढ़ता दायरा रोकना चाहता है।

चीन ने क्या फैसला लिया?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपने 300 से अधिक इंजीनियर और टेक्नीशियन को वापस बुलाया है। यह कर्मचारी भारत में फॉक्सकॉन के प्लांट में काम कर रहे थे। फॉक्सकॉन में काम करने वाले यह इंजीनियर और टेक्नीशियन चीनी नागरिक बताए गए हैं।

रिपोर्ट बताती है कि उन्हें बीते 2 माह के भीतर वापस बुलाया गया है। चीन ने यह कर्मचारी फॉक्सकॉन के कर्नाटक और तमिलनाडु में स्थित प्लांट से वापस बुलाए हैं। बताया गया है कि यह कर्मचारी कुछ तकनीकों के विशेषज्ञ के तौर पर काम करते थे।

चीन के अपने नागरिकों के भारतीय फैक्ट्रियों में काम ना करने देने की रिपोर्ट्स पहले भी आई थीं। तब बताया गया था कि वह चीन से भारत के लिए कर्मचारियों को जाने ही नहीं दे रहा है। हालाँकि, अब स्पष्ट हो गया है कि वह भारत में काम करने वाले कर्मचारी भी वापस बुला रहा है।

चीन का यह फैसला भारत में एप्पल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। दरअसल, भारत में कुछ ही साल पहले एप्पल ने अपने फोन बनाना चालू किया है और यहाँ इसक विशेषज्ञ टेक्नीशियन और इंजीनियर कम हैं। कुछ तकनीकों में तो यह तो ना के बराबर हैं।

ऐसे में चीन से फॉक्सकॉन इंजीनियर और टेक्नीशियन भारत लाती है। चीन में लम्बे समय से आईफोन और बाकी एप्पल उत्पादों का निर्माण हो रहा है, ऐसे में वहाँ कुशल इंजीनियर और टेक्नीशियन ज्यादा हैं। अब वह इन्हें वापस बुला कर यहाँ की फैक्ट्रियों का काम प्रभावित करना चाहता है।

चीन के इस फैसले का क्या असर?

चीन के इस फैसले का कितना असर भारत में फॉक्सकॉन की निर्माण क्षमता पर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालाँकि, विशेषज्ञों के ना होने के चलते उसे कुछ फर्क जरूर पड़ेगा। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इन फैक्ट्रियों में अभी ताईवान के इंजीनियर और टेक्नीशियन काम कर रहे हैं।

यह भी स्मार्टफोन निर्माण विषय में ही एक्सपर्ट हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह भी बताया गया है कि फॉक्सकॉन ने इस फैसले के विषय में भारत सरकार को सूचित कर दिया है। रिपोर्ट बताती है कि चीन के इस फैसले के चलते आईफोन 17 के भारत में निर्माण पर कुछ दिक्कतें आ सकती हैं लेकिन बाकी कोई विशेष समस्या नहीं होने वाली है।

चीन ने क्यों वापस बुलाए इंजीनियर?

भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग और विशेष कर आईफोन के बढ़ते निर्माण पर चीन चिंतित है। अभी तक इस इंडस्ट्री पर चीन एकक्षत्र राज करता आया है। लेकिन मोदी सरकार के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम लाने के बाद भारत में स्मार्टफोन निर्माण ने तूफानी तेजी पकड़ी है।

एप्पल ने भारत में 2017 में अपने फोन बनाना चालू किया था। उसके लिए फॉक्सकॉन कम्पनी यह काम करती है। लेकिन 2020 के बाद जब चीन पर निर्भर रहने के खतरे सामने आए तो इन कम्पनियों ने तेजी से भारत में अपनी क्षमताएँ बढ़ाना चालू कर दिया।

वर्तमान में एप्पल के लगभग 25% आईफोन का निर्माण भारत में होता है। भारत में एप्पल के फ़ोनों का उत्पादन भारत के लिए विदेशी मुद्रा भी ला रहा है। वर्ष 2024-25 में एप्पल ने भारत से ₹1.48 लाख करोड़ से अधिक के स्मार्टफोन निर्यात किए हैं। यह भारत के कुल स्मार्टफोन निर्यात का लगभग 75% है।

इस सबके चलते भारत में आईफोन का निर्माण चीन के लिए बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है। इस क्षेत्र में उसे अब भारत से कांटे की टक्कर मिल रही है। इसलिए वह इंजीनियर और टेक्नीशियन वापस बुला कर इस गति को रोकना चाहता है।

चीन ने इंजीनियर और टेक्नीशियन अब वापस बुलाए है लेकिन वह इससे पहले भी इस यात्रा में ब्रेक लगाने का प्रयास कर चुका है। कुछ रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि चीन स्मार्टफोन बनाने के लिए आवश्यक कई पार्ट्स की सप्लाई भी रोक रहा है। यह पार्ट इन आईफोन के निर्माण के लिए आवश्यक थे।

सिर्फ फॉक्सकॉन तक सीमित नहीं है कहानी

चीन के भारत की तरक्की में अड़ंगा लगाने की यह कहानी नई नहीं है और ना ही स्मार्टफोन के निर्माण तक सीमित है। कुछ ही दिनों पहले उसने बिना कोई आधिकारिक प्रतिबन्ध लगाए ही विशेष काम में उपयोग होने वाले उर्वरकों की आपूर्ति रोक दी थी। चीन भारत छोड़ कर बाकी देशों को ख़ुशी-ख़ुशी यह उर्वरक भेज रहा है। 

इसके अलावा उसने अहमदाबाद-मुम्बई बुलेट रेल प्रोजेक्ट में उपयोग होने वाली 3 टनल बोरिंग मशीन (TBM) का भारत को आयात रोक दिया है। टनल बोरिंग मशीन, जमीन के नीचे सुरंग बनाने के लिए काम में लाई जाती हैं।

 चीन ने वर्तमान में भारत को आने वाली 3 ऐसी TBM रोक रखी हैं। यह तीनों मशीनें जर्मनी की एक कम्पनी ने बनाई हैं। यह कम्पनी इन्हें चीन के गुआंगझाऊ में बनाती है। इनकी आवश्यकता मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स बनाने में है।

 TBM का मुद्दा कोई नया नहीं है। इसको लेकर केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जर्मनी के मंत्री को सावर्जनिक तौर पर लताड़ चुके हैं। इसमें उन्होंने जर्मन कम्पनी की बनाई TBM के चीन के पोर्ट पर रोके जाने की बात दोहराई थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। 

चीन के पास पृथ्वी के दुर्लभ चुंबकीय तत्वों (रेयर अर्थ मैग्नेट्स) का भंडार है। अमेरिका के साथ टैरिफ वार के बाद चीन ने इन दुर्लभ तत्वों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत में स्थापित ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और अन्य उपकरण निर्माण से जुड़े उद्योगों को इस प्रतिबंध के चलते आपूर्ति बाधित हो गई थी। 

इंडियन स्टेट से लड़ाई, आरक्षण खत्म और 6 हफ्ते विदेश में… ये है राहुल गाँधी के नेता प्रतिपक्ष के तौर पर एक साल का ब्यौरा: हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र भी हारे, चुनाव आयोग-भारत के लोकतंत्र को भी किया बदनाम

राहुल गाँधी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने एक साल से ज्यादा हो गया, लेकिन उनका कार्यकाल विवादों, नाकामियों, और कॉन्ग्रेस की हार से भरा रहा। 40+ दिन विदेश में बिताने, तथ्यहीन और जहरीले बयानों और संसद में औसत से कम उपस्थिति ने उनकी लीडरशिप पर सवाल खड़े किए। दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में हार ने साबित किया कि राहुल का चेहरा अब कॉन्ग्रेस के लिए बोझ बन चुका है। उनके बयानों ने ना सिर्फ पार्टी की साख को ठेस पहुँचाई, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुँचाया।

राहुल गाँधी ने विदेश यात्राओं में बिताए 40+ दिन

पिछले एक साल में राहुल गाँधी ने 40+ दिन विदेश में बिताए। ये वो नेता हैं, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने विपक्ष का चेहरा बनाया, लेकिन वो बार-बार देश छोड़कर विदेशी हवाओं में सैर-सपाटा करने निकल पड़ते हैं। बीजेपी और सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘पार्ट-टाइम पॉलिटिशियन’ कहकर तंज कसते हैं। आइए, उनकी कुछ प्रमुख विदेश यात्राओं पर नजर डालते हैं-

लंदन यात्रा (जून 2025): राहुल जून 2025 में लंदन गए। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि वो अपनी भतीजी मिराया वाड्रा के ग्रेजुएशन समारोह में शामिल होने गए। बीजेपी ने इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार दिया। अमित मालवीय ने X पर लिखा कि राहुल बार-बार ‘गायब’ हो जाते हैं और जनता को जवाब देना चाहिए। सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ीं कि राहुल बहरीन गए, लेकिन कॉन्ग्रेस ने स्पष्ट किया कि उनकी फ्लाइट का रूट दिल्ली-बहरीन-लंदन था। ये यात्रा तब हुई जब कॉन्ग्रेस गोवा में दलबदल की घटनाओं से जूझ रही थी। क्या ये वक्त था विदेश जाने का? इस यात्रा ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया।

वियतनाम यात्रा (मार्च 2025): होली के मौके पर राहुल वियतनाम में थे। बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तंज कसा कि राहुल की ‘गुप्त’ यात्राएँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। कॉन्ग्रेस ने बचाव में कहा कि राहुल वियतनाम के आर्थिक मॉडल का अध्ययन करने गए। लेकिन सवाल ये है कि क्या नेता प्रतिपक्ष को हर बार विदेशी मॉडल सीखने की जरूरत पड़ती है? क्या भारत में बैठकर कुछ नहीं सीखा जा सकता? अमित मालवीय ने X पर दावा किया कि राहुल ने वियतनाम में 22 दिन बिताए, जबकि अपने रायबरेली क्षेत्र में इतना वक्त नहीं दिया। इस यात्रा ने उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।

अमेरिका यात्रा (सितंबर 2024): ये यात्रा सबसे ज्यादा विवादों में रही। टेक्सास, वर्जीनिया और वाशिंगटन में राहुल ने बीजेपी, आरएसएस और पीएम मोदी पर तीखे हमले किए। लेकिन उनके बयानों ने कॉन्ग्रेस को मुश्किल में डाल दिया। उन्होंने भारत के लोकतंत्र को सीरिया और इराक जैसे युद्धग्रस्त देशों से जोड़ा, जिस पर बीजेपी ने उन्हें ‘देशद्रोही’ तक करार दिया। वो अमेरिकी सांसद इल्हान उमर से भी मिले, जिन्हें भारत विरोधी माना जाता है। इस मुलाकात ने सियासी हंगामा मचा दिया। राहुल ने सिख समुदाय और आरक्षण पर भी बयान दिए, जिन्हें सिख संगठनों और मायावती ने अपमानजनक बताया। इस यात्रा ने कॉन्ग्रेस की छवि को भारी नुकसान पहुँचाया।

इन 40+ दिनों में राहुल ने क्या हासिल किया? क्या कोई नीति बनाई? क्या कॉन्ग्रेस को नया रास्ता दिखाया? जवाब है – कुछ भी नहीं। उनकी यात्राएँ निजी कारणों, पारिवारिक समारोहों और विवादित बयानों तक सीमित रहीं। देश की जनता को जवाब देने की बजाय वो विदेशी मंचों पर भारत की छवि खराब करने में व्यस्त रहे। क्या ऐसा नेता प्रतिपक्ष देश की आवाज बन सकता है?

झूठ और जहरीले बयान बने कॉन्ग्रेस के लिए शर्मिंदगी के सबब

राहुल गाँधी के बयानों ने पिछले एक साल में कॉन्ग्रेस को बार-बार बैकफुट पर ला खड़ा किया। उनके बयान ना सिर्फ तथ्यहीन थे, बल्कि देश के खिलाफ जहर उगलने वाले भी साबित हुए। कुछ प्रमुख बयानों पर गौर करते हैं-

मैन्युफैक्चरिंग पर झूठ: सितंबर 2024 में अमेरिका में राहुल ने कहा कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमजोर है और ‘मेक इन इंडिया’ बुरी तरह से हो चुका है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राहुल विदेश में जाकर भारत को बदनाम कर रहे हैं। तथ्य ये है कि भारत का रक्षा निर्यात 19 लाख करोड़ से बढ़कर 75 लाख करोड़ रुपये हो गया है। 2024 में भारत ने 4.5 मिलियन गाड़ियों की बिक्री की, जो वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। राहुल का ये बयान ना सिर्फ झूठा था, बल्कि भारत की प्रगति को कमतर दिखाने की साजिश भी था।

गाड़ी बिक्री पर गलत दावा: राहुल ने दावा किया कि भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर ठप्प है। लेकिन हकीकत ये है कि 2024 में भारत में कारों की बिक्री 4.5 मिलियन यूनिट्स यानी 45 लाख से अधिक गाड़ियों की बिक्री की संख्या को पार कर गई। क्या राहुल को इतने बुनियादी तथ्य भी नहीं पता? उनके इस बयान ने उनकी आर्थिक समझ की पोल खोल दी। बीजेपी ने इसे ‘झूठ का कारखाना’ करार दिया।

आरक्षण पर विवाद: अमेरिका में राहुल ने कहा कि भारत में आरक्षण खत्म हो सकता है। इस बयान पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती भड़क गईं और कॉन्ग्रेस पर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाया। राहुल ने बाद में सफाई दी कि वो जातिगत जनगणना की बात कर रहे थे, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। बीजेपी ने इसे दलित-विरोधी बयान करार दिया।

लोकतंत्र की सीरिया-इराक से तुलना: सितंबर 2024 में अमेरिका में राहुल ने भारत के लोकतंत्र को सीरिया और इराक जैसे युद्धग्रस्त देशों से जोड़ा। बीजेपी ने इसे देशद्रोह करार दिया और कहा कि राहुल विदेशी मंचों पर भारत को बदनाम कर रहे हैं। क्या कोई जिम्मेदार नेता अपने देश की तुलना ऐसे देशों से करेगा? ये बयान राहुल की अपरिपक्वता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का जीता-जागता सबूत है।

सिख समुदाय पर टिप्पणी: अमेरिका में राहुल ने सिखों के अधिकारों पर बयान दिया, जिसे सिख संगठनों ने अपमानजनक माना। बीजेपी ने इसे सिख-विरोधी बयान करार दिया, जिसके बाद कॉन्ग्रेस को सफाई देनी पड़ी। इस बयान ने पंजाब में कॉन्ग्रेस की स्थिति को और कमजोर किया।

विदेश नीति पर बेतुके सवाल: मई 2025 में राहुल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति ‘ध्वस्त’ हो चुकी है। उन्होंने पूछा कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है। जयशंकर ने जवाब में राहुल के बयानों को ‘झूठ’ करार दिया और उनकी समझ पर सवाल उठाए। ये बयान राहुल की अंतरराष्ट्रीय मामलों में अज्ञानता को उजागर करता है।

चुनाव आयोग पर हमला: बोस्टन में राहुल ने महाराष्ट्र चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। राहुल गाँधी ने बोस्टन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ‘कंप्रोमाइज्ड‘ है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके सिस्टम में कुछ तो ‘बहुत गलत’ है। राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि दो घंटे में 65 लाख वोट जुड़ गए। उन्होंने कहा कि यह ‘फिजिकली इंपॉसिबल’ है। चुनाव आयोग ने उनके दावों को खारिज किया। ये बयान उनकी हार को जायज ठहराने की कोशिश थी।

यही नहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गाँधी ने अमेरिका के नेशनल प्रेस क्लब में कहा कि ‘भारत में लोकतंत्र पिछले 10 सालों से टूटा (ब्रोकेन) हुआ था, अब यह लड़ रहा है।’ दरअसल, इन चुनावों में 10 साल बाद कॉन्ग्रेस को लोकसभा चुनावों में विपक्ष के नेता का पद हासिल हो पाया था, क्योंकि वह 99 सीटों पर पहुँची थी। ऐसे में राहुल पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या 2014 और 2019 में देश में जो चुनाव हुए, उसमें देश की जनता ने वोट नहीं डाला था?

इन बयानों से साफ है कि राहुल गाँधी ना तो तथ्यों की परवाह करते हैं, ना ही देश की छवि की। उनके बयान कॉन्ग्रेस को बार-बार मुश्किल में डालते हैं और विपक्ष की एकता को कमजोर करते हैं। विदेशी मंचों पर भारत को बदनाम करने की उनकी आदत ने कॉन्ग्रेस की बची खुची साख को तार-तार कर दिया।

राहुल की नाकामियाँ रही कॉन्ग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार

राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस ने पिछले एक साल में कई महत्वपूर्ण चुनावों में करारी हार झेली। दिल्ली, हरियाणा, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया।

हरियाणा विधानसभा चुनाव (2024): हरियाणा में कॉन्ग्रेस को बीजेपी के सामने मुँह की खानी पड़ी। राहुल गाँधी ने कई रैलियाँ कीं, लेकिन उनकी सिखों और आरक्षण पर टिप्पणियों ने कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाया। बीजेपी ने 48 सीटें जीतीं, जबकि कॉन्ग्रेस 37 पर सिमट गई। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने हरियाणा की 12 विधानसभाओं को कवर किया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 4 पर जीत मिली। क्या ये राहुल की लीडरशिप की हकीकत नहीं दिखाता?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (2024): महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस इंडिया गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन राहुल की अगुवाई में गठबंधन बुरी तरह हारा। बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने 230+ सीटें जीतीं, जबकि कॉन्ग्रेस को 40 से भी कम सीटें मिलीं। राहुल की रणनीति और बयानबाजी ने गठबंधन को कमजोर किया। उनकी अनुपस्थिति और विवादित बयानों ने कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा कर दिया।

दिल्ली (MCD और अन्य चुनाव): दिल्ली में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन MCD चुनावों में भी निराशाजनक रहा। 2022 में ही पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन दर्ज हुआ था और 2024 में भी स्थिति नहीं सुधरी। राहुल की अनुपस्थिति और कमजोर नेतृत्व ने कॉन्ग्रेस को AAP और बीजेपी के सामने बौना बना दिया। दिल्ली में कॉन्ग्रेस का संगठन पूरी तरह बिखर चुका है।

अन्य राज्यों में हार: राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2023 के चुनावों में कॉन्ग्रेस की हार ने भी राहुल की रणनीति पर सवाल उठाए। हालांकि ये हार 2024 से पहले की हैं, लेकिन राहुल की लीडरशिप की कमजोरी उस वक्त भी साफ दिखी।

इन हार के लिए राहुल गाँधी की रणनीति और उनकी अनुपस्थिति को जिम्मेदार ठहराया गया। उनकी विदेश यात्राएँ और विवादित बयान कॉन्ग्रेस के लिए भारी पड़े। पार्टी कार्यकर्ता अब खुलकर सवाल उठाने लगे हैं कि क्या राहुल गाँधी वाकई नेतृत्व के काबिल हैं?

लोकसभा में अटेंडेंस औसत से भी कम

नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गाँधी की संसद में उपस्थिति इतनी कम रही कि ये किसी मजाक से कम नहीं। न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी अटेंडेंस सामान्य सांसदों के औसत से भी कम थी। जब देश के गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, राहुल गाँधी या तो विदेश में थे या संसद से गायब। यही नहीं, संसद में राहुल गाँधी ने सिर्फ 8 बहसों में हिस्सा लिया, जबकि राष्ट्रीय औसत 15 बहसों का है। वहीं, एक भी प्राइवेट मेंबर बिल तक नहीं ला सके। इसके अलावा सवाल पूछने के मामले में भी राहुल गाँधी औसत से बहुत पीछे रहे।

संसद सत्रों में अनुपस्थिति: मॉनसून सत्र और शीतकालीन सत्र में राहुल की उपस्थिति 50% से भी कम रही। बीजेपी ने इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार दिया। ऐसे में जब राहुल संसद में ही नहीं आते, तो जनता के मुद्दे कैसे उठाएँगे?

महत्वपूर्ण बहसों से दूरी: रक्षा, विदेश नीति, और आर्थिक मुद्दों पर बहस के दौरान राहुल अक्सर गायब रहे। जब वो आए, तो उनके बयान तथ्यहीन और विवादित ही रहे। X पर एक यूजर ने लिखा कि राहुल संसद में ‘सोते’ हैं और ‘पाकिस्तान की भाषा’ बोलते हैं।

संसद का अपमान: राहुल ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष की नकल उतारकर वीडियो बनवाए, जिसे बीजेपी ने अपमानजनक बताया। ये हरकत उनकी गैर-गंभीरता को दर्शाती है।

क्या ऐसा नेता प्रतिपक्ष देश की आवाज बन सकता है, जो संसद में ही ना दिखे? जो इंडियन स्टेट से ही लड़ाई की बात करता हो। यही नहीं, राहुल गाँधी ने बीजेपी के सांसद को ऐसा धक्का दिया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। राहुल गाँधी की ये हरकतें कॉन्ग्रेस के लिए शर्मिंदगी का सबब बनी हुई हैं।

  • चुनावी नतीजों पर असर नहीं: हरियाणा में भारत जोड़ो यात्रा के बावजूद कॉन्ग्रेस हारी। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी कोई फायदा नहीं हुआ।
  • महँगा प्रचार: यात्रा पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन इसका असर सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित रहा। कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा, लेकिन वोटर तक बात नहीं पहुँची।
  • विवादों का हिस्सा: यात्रा के दौरान राहुल के सावरकर पर बयान ने महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाया।

यात्रा ने राहुल को प्रचार तो दिलाया, लेकिन कॉन्ग्रेस की हार ने साबित किया कि ये सिर्फ दिखावा था। अगर इतने बड़े अभियान का कोई चुनावी असर नहीं हुआ, तो सवाल उठता है कि ये यात्रा किस काम की थी?

पतन की राह पर कॉन्ग्रेस

कार्यकर्ताओं का टूटता मनोबल: हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हताश हैं। राहुल की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्षी एकता में दरार: राहुल के बयानों ने विपक्षी गठबंधन को भी कमजोर किया। मायावती और अन्य नेताओं ने कॉन्ग्रेस से दूरी बना ली।
संगठनात्मक कमजोरी: कॉन्ग्रेस का संगठन कई राज्यों में बिखर चुका है। दिल्ली, हरियाणा, और महाराष्ट्र में पार्टी का आधार लगातार कमजोर हो रहा है।
आंतरिक कलह: कॉन्ग्रेस में राहुल के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। कई नेता खुलकर कहने लगे हैं कि पार्टी को नया चेहरा चाहिए।

राहुल की लीडरशिप ने कॉन्ग्रेस को एक डूबती नाव बना दिया है। अगर पार्टी को बचाना है, तो उसे कठोर फैसले लेने होंगे।

राहुल गाँधी के बयानों ने ना सिर्फ कॉन्ग्रेस को कमजोर किया, बल्कि देश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनके भारत के लोकतंत्र को सीरिया-इराक से जोड़ने और चुनाव आयोग पर अनियमितताओं के आरोप लगाने जैसे बयानों ने सियासी अस्थिरता को बढ़ावा दिया। बीजेपी ने इसे ‘अराजकता फैलाने की साजिश’ करार दिया। राहुल की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी ने विपक्ष की विश्वसनीयता को भी ठेस पहुँचाई। जब नेता प्रतिपक्ष ही विदेश में जाकर देश की व्यवस्था पर सवाल उठाएगा, तो जनता का भरोसा कैसे बनेगा? उनकी अनुपस्थिति और विवादित बयानों ने कानून-व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया।

कॉन्ग्रेस के लिए बोझ बन चुके हैं राहुल गाँधी

राहुल गाँधी का एक साल का कार्यकाल बतौर नेता प्रतिपक्ष एक फ्लॉप शो रहा। 43 दिन विदेश में बिताने वाले राहुल ने ना तो संसद में कोई प्रभाव छोड़ा, ना ही कॉन्ग्रेस को जीत दिलाई। उनके झूठे और जहरीले बयानों ने भारत की छवि को नुकसान पहुँचाया और कॉन्ग्रेस को बार-बार बैकफुट पर ला खड़ा किया। दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में हार ने साबित किया कि राहुल का चेहरा अब कॉन्ग्रेस के लिए बोझ बन चुका है। उनकी संसद में अनुपस्थिति और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने जनता का भरोसा तोड़ा।

ऐसे में अब सवाल ये है कि क्या कॉन्ग्रेस इस ‘शहजादे’ के भरोसे अपनी साख बचा पाएगी? राहुल गाँधी की हरकतों ने साबित किया कि वो ना तो नेतृत्व के काबिल हैं, ना ही देश की जनता के भरोसे के। कॉन्ग्रेस को अगर बचना है तो उसे राहुल से छुटकारा पाना होगा, वरना ये डूबती नाव और गहरे समंदर में समा जाएगी। राहुल गाँधी की नाकामियाँ कॉन्ग्रेस के लिए एक सबक हैं – या तो नेतृत्व में बदलाव या फिर रहो खत्म होने को तैयार।

नेतृत्व में बदलाव से मतलब है कि मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे रिमोट कंट्रोल से चलने वाले नेता की जगह सचिन पायलट, डीके शिवकुमार या शशि थरूर जैसे नेताओं को पार्टी की कमान सौंपी जाए, जो इस ग्रैंड ओल्ड पार्टी को फिर से चुनावी राजनीति में कम से कम प्रासंगिक तो बना सकें।

घाना साहस के साथ खड़ा, यहाँ भारतीय ‘चाय में चीनी’ की तरह घुले: अफ्रीकी देश की संसद में PM मोदी ने बताई भारत के लोकतंत्र की विविधता, ऋग्वेद के श्लोक का जिक्र कर साझेदारी बढ़ाने की भी वकालत

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 3 जुलाई 2025 को घाना की संसद में को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने घाना की गर्म जोशी से किए गए स्वागत, लोकतांत्रिक दृढ़ता के साथ वैश्विक नेतृत्व और साझेदारी की बात कही।

PM मोदी ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे घाना की धरती पर आकर गर्व महसूस हो रहा है। घाना लोकतांत्रिक, प्रतिष्ठा और दृढ़ता से भरा देश है।‌ विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर मैं 140 करोड़ भारतीयों की तरफ से आपका अभिनंदन करता हूँ। लोकतंत्र पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। लोकतंत्र हमारे लिए केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि घाना की धरती सोने के लिए जानी जाती है। घाना की यह पहचान इसके लिए नहीं है कि उसकी धरती के अंदर क्या है, बल्कि यहाँ के लोगो के दिल के अंदर जो गर्मजोशी है इसके लिए जाना जाता है।

पीएम मोदी ने कहा कि इससे पहले मुझे हमारे दूरदर्शी राजनेता और घाना के प्रिय पुत्र डॉ क्वामे नक्रमाह को श्रद्धांजलि देने का सम्मान मिला। उन्होंने एक बार कहा था कि जो ताकतें हमें एकजुट करती हैं, वे उन अधूरे प्रभावों से अधिक हैं जो हमें अलग रखने की कोशिश करते हैं। उनके ये शब्द हम दोनों देशों की साझा यात्रा का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

इसके अलावा पीएम मोदी को मिले सम्मान पर वह बोले कि बुधवार (2 जुलाई 2025) मेरे लिए बहुत मार्मिक था जब मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति जॉन महामा से मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसे प्राप्त करना मेरे लिए सम्मान की बात है।

ऋग्वेद के श्लोक का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान ऋग्वेद के श्लोक के जरिए लोकतंत्र की गहराई और प्राचीनता पर बात कही। उन्होंने कहा, “ऋग्वेद में कहा गया है – ‘संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्’ — यानी हम साथ चलें, साथ बोलें, और हमारे मन एक जैसे हों।”

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के विश्व की सबसे पुराने वेदों में एक ऋग्वेद में लिखा गया है कि अच्छे विचारों को अपने पास आने दीजिए। ऋग्वेद के यह विचार ही लोकतंत्र का मुख्य बिंदु है।

प्रधान मंत्री ने कहा कि भारत में 2500 सभी अधिक राजनीतिक पार्टियाँ हैं, 20 अलग-अलग पार्टियाँ अलग अलग राज्यों पर शासन कर रही हैं। यहाँ 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं और 1000 से भी अधिक बोलियाँ एक साथ रहती हैं।

यही कारण है कि भारत में लोग आना पसंद करते हैं और भारतीय उनका दिल से स्वागत करते हैं। इसी वजह से भी भारतीयों के लिए भी दुनिया के किसी भी देश में जाना आसान है। यहाँ तक की घाना में भी भारतीय समाज ऐसे घुल गया है जैसे चाय में चीनी।

अनानास से मीठी दोस्ती

अपने भाषण में पीएम मोदी ने घाना से दोस्ती पर कहा, “हमारी मित्रता घाना के मशहूर शुगर लोफ अनानास से भी ज्यादा मीठी है।” इस पर सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। पीएम मोदी ने आगे कहा भारत और घाना साझा मूल्यों, सम्मान, और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

पीएम मोदी ने कहा कि यह कितना सुखद सहयोग है कि भारत के कई गौरव परीक्षणों में अफ्रीका जुड़ा हुआ है। जब भारत ने चंद्रयान के जरिए चाँद के दक्षिणी छोर पर कदम रखा तब भी मैं अफ्रीका में था और आज जब एक भारतीय अंतरिक्षयात्री मानवता के उज्जवल भविष्य के लिए स्पेस स्टेशन में प्रयोग कर रहा है तब भी मैं अफ्रीका की धरती पर हूँ। यह कोई सामान्य संयोग नहीं है बल्कि हमारी साझेदारी में बेहतरी की ओर इशारा है।

वैश्विक उतार चढ़ाव में भारत के विकास की बात

वैश्विक स्तर पर चल रही व्यापारिक उतार चढ़ाव पर कहा कि आज ग्लोबल उठापटक हर किसी के लिए चिंता का कारण है। ऐसे में भारत, लोकतंत्र के लिए आशा की किरण बना हुआ है। इसी तरह भारत की विकास यात्रा ग्लोबल ग्रोथ को गति देने वाली है। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक ऐसा स्तंभ है जो जितना मजबूत होगा, दुनिया को उतना ही सशक्त बनाएगा और वैश्विक स्थिरता को बढ़ाने में योगदान करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम पहले से ही वैश्विक विकास में लगभग 16% योगदान दे रहे हैं। हमारा जनसांख्यिकीय लाभांश फलदायी साबित हो रहा है। भारत में अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। भारत एक नवाचार और प्रौद्योगिकी केंद्र है, जहाँ वैश्विक कंपनियाँ जुड़ना चाहती हैं। हमें दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है। आज, भारतीय महिलाएँ विज्ञान, अंतरिक्ष, विमानन और खेल में आगे हैं।

PM मोदी ने कहा कि जब हम घाना को देखते हैं, तो हम एक ऐसे राष्ट्र को देखते हैं जो साहस के साथ खड़ा है। ये एक ऐसा राष्ट्र है जो हर चुनौती का सामना गरिमा और दृढ़ता के साथ करता है। इस देश की समावेशी प्रगति की प्रतिबद्धता ने घाना को पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए प्रेरणा का केंद्र बना दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती परिस्थितियों के कारण वैश्विक शासन में विश्वसनीय और प्रभावी सुधारों की आवश्यकता है। प्रौद्योगिकी में क्रांति, ग्लोबल साउथ के उभरने और जनसांख्यिकी में बदलाव घाना को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी विश्व व्यवस्था अब तेजी से बदल रही है। भारत और घाना ने भी अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी तक बढ़ाने का फैसला किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि बदल रही परिस्थितियाँ आज वैश्विक शासन के लिए विश्वसनीय और प्रभावशाली सुधारों की राह देख रही है। हमें साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। यही कारण है कि भारत ने G-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकन यूनियन को स्थायी सदस्य बनवाया, ताकि अफ्रीका की आवाज दुनिया में स्पष्ट तौर पर सुनी जा सके।

पर्यावरण और महिलाओं की रखी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घाना की संसद में अपने भाषण के दौरान जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्थिरता को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर बात की। उन्होंने कहा कि हमने जलवायु परिवर्तन से निपटने और जीवन को बढ़ावा देने के लिए मिशन लाइफ की शुरुआत की है। यह समावेशी भावना बेहतर पृथ्वी के लिए के लिए ‘वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड और वन वर्ल्ड, वन हेल्थ’ जैसी हमारी वैश्विक पहलों को शक्ति प्रदान करती है।

इसके बाद पीए मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की बात की। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस द्वारा शुरू की गई यह पहल सौर ऊर्जा के उपयोग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देती है। साथ ही अतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन शेर, बाघ, तेंदुआ जैसे वन्यजीवों की रक्षा के लिए काम करता है। इसके अलावा वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस) का लक्ष्य स्वच्छ जैव ईंधन को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।

अपनी बात में पीएम मोदी ने संस्कृत के श्लोक ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।’ शामिल करते हुए कहा कि हम इस बात में विश्वास रखते हैं कि सभी खुश रहें। सभी बीमारी से दूर रहें। किसी को कोई दुख न हो। ये सोच भारत की वैश्विक कल्याण की सोच दिखाती है। इसी के तहत कोविड महामारी के दौरान भारत ने 150+ देशों को वैक्सीन दी, जिनमें घाना भी शामिल था। भारत के लिए यह पहले मानवता की नीति थी,पहले व्यापार की नहीं।

घाना की संसद में पीएम मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया।

एक साथ 5 नौकरी, ₹2.5 लाख रोजाना की कमाई… ‘मूनलाइटिंग’ के ‘एक्सपर्ट’ सोहम पारेख पर अब बन रहे मीम्स: CEO ने किया ‘फ्रॉड’ का खुलासा, कहा- पहले सप्ताह ही नौकरी से निकाल दिया था

भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और कंसल्टेंट सोहम पारेख इनदिनों इंटरनेट की सनसनी बन गए हैं। सोशल मीडिया में ट्रेंडिंग टॉपिक में उनका नाम आ रहा है। इसकी वजह है उनका एक साथ 5 नौकरियाँ करना और हर दिन करीब 2.5 लाख रुपए कमाना। अचानक सोहम पारेख की क्षमता के बारे में मीम्स इंटरनेट पर छा गए हैं और हर तकनीकी क्षेत्र की शख्सियत उन पर पोस्ट लिख रहा है।

कौन है सोहम पारेख ?

जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर की डिग्री हासिल करने वाले भारतीय टेकी सोहम पारेख पर ‘टेक-ठगी’ करने का आरोप है। उस पर कई अमेरिकी स्टार्टअप कंपनियों में एक ही वक्त में काम करने के आरोप लगे हैं।

Mixpanel कंपनी के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ सुहैल दोशी ने सोहम पारेख पर आरोप लगाया है कि वह एक-साथ कई कंपनियों के लिए काम कर रहा था।

प्लेग्राउंड एआई के संस्थापक ने पारेख का रिज्यूम भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने कहा है कि सीवी की 90% बातें मनगढ़ंत है और लिखे गए लिंक अब एक्टिव भी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सोहम के साथ चर्चा कर समझने की कोशिश की लेकिन परिणाम नहीं निकला। कभी कभी ऐसा होता है कि अपनी बात समझाने के लिए बात करने की जरूरत पड़ती है।

छह से अधिक अन्य कंपनियों ने एक ट्वीट के जवाब में दोशी ने पारेख के धोखे की जानकारी दी और कहा कि उन्होंने कोई सही काम करने के बजाय लगातार धोखाधड़ी की। इस दौरान मूनलाइटिंग का जिक्र किया।

पारेख ने अपने आवास को लेकर भी भ्रम में रखा। दोशी को लगा कि वे अमेरिका के किसी व्यक्ति को नौकरी पर रख रहे हैं। उन्होंने उसके बताए पते पर लैपटॉप भेजा। लेकिन लैपटॉप वापस आ गया। दोषी के मुताबिक शायद यह उनकी बहन का पता था।

किसी के लिए अपने तौर-तरीके बदलना काफी चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन ये असंभव नहीं है। खासकर तब जब कोई धोखाधड़ी में लगा हुआ है। दोशी को अपनी गलतियों का एहसास तभी हुआ जब पारेख की धोखाधड़ी का भंडाफोड़ हुआ।

उद्योगपति दोशी से लोगों ने पूछा

इस बीच, दोशी को कई लोगों के मैसेज मिले। ये लोग दोशी के शुभचिंतक और स्टार्टअप शुरू करने वाले लोग थे। उन्होंने कहा कि पारेख को उनके बायोडाटा के आधार पर उन लोगों ने नौकरी पर रखा था। मामला सामने आने के बाद सोहम को कंपनियों ने नौकरी से निकाल दिया।

फ्लीट एआई के सह-संस्थापक और सीईओ निकोलई ओपोरोव ने एक मीम पर टिप्पणी करते हुए पारेख के धोखे को समझने के लिए वाईसी समुदाय की प्रशंसा की गई। ओपोरोव के मुताबिक उन्होंने सिर्फ सप्ताहभर ही सोहम पारेख के साथ काम किया। जबकि उनके दोस्तों ने उन्हें कई वर्षों तक काम पर रखा था। उन्होंने कहा कि पारेख लंबे समय से यही काम कर रहे हैं और एक साथ चार से अधिक स्टार्टअप से जुड़े हुए थे। इस पर दोशी ने जवाब दिया, “इसे रोकना होगा।”

AIVideo के सह-संस्थापक जस्टिन हार्वे खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे होंगे, क्योंकि वे पारेख को अब तक जॉब पर नहीं रखा था, हालाँकि वो बस रखने ही वाले थे। पारेख ने इंटरव्यू से वो काफी प्रभावित हुए थे और कहा कि वाकई में उसने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

कई यूजर्स ने पोस्ट पर जवाब दिया है और दोशी का समर्थन करते हुए बताया कि पारेख को बाहर कर दिया गया है।

इस बीच ये बात भी सामने आई है कि पारेख ने अपनी संभावित कंपनियों को जो ईमेल भेजा था, वह भी सोशल मीडिया पर सामने आया। इन सब का पैटर्न एक समान था।

पारेख की तमाम आलोचनाओं के बीच एक अकाउंट ने उन्हें इंटरव्यू के लिए टेक्नोलॉजी के डेली शो से संपर्क करने की सलाह दी। उसने कहा, ‘यह जिम्मेदारी उन पर है कि वे सब कुछ ठीक करने का एक मौका खोज लें।

दोशी ने जिस घोटाले को “सोहम-गेट” कहा था, उसे लेकर हँसी-मजाक भी हुआ। किसी ने कहा कि सोहम की धोखाधड़ी को नजरअंदाज करते हुए समाजवादी उन्हें नहीं निकालेंगे

सोहम-गेट पर बन रहे मीम-फेस्ट

सोशल मीडिया पर सोहम गेट नाम से मीम्स की बौछार हो गई है। एक व्यक्ति ने इस बात पर चुटकी ली कि उसने कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अपने ईमेल को उसी तरह बनाने की कोशिश की है जैसा सोहम पारेख का है। उसने घोषणा की कि अगर किसी का सीवी उतना आकर्षक नहीं है, तो उससे संपर्क कर सकता है।

एक नेटिजन ने कई कंप्यूटरों लगे एक डेस्क की तस्वीर साझा की, जिसमें लिखा था कि आप सोहम पारेख हैं जो दिन के लिए चेक इन कर सकते हैं क्योंकि एक साथ यहाँ कई काम संभालने होंगे।

एक व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में बताया कि कैसे पारेख आधुनिक डिजिटल का विकास करने वाली सभी प्रौद्योगिकी कंपनियों के सबसे पसंदीदा व्यक्ति हैं।

एक यूजर्स ने लिखा कि पारेख को कई नौकरियाँ हासिल करने का तजुर्बा है इसलिए इंटरव्यू में अच्छा परफॉर्म करने के लिए उनसे संपर्क करें।

एक यूजर ने पारेख को “10x इंजीनियर बताया जो हर YC कंपनी चला सकता है” उसने मजाक उड़ाया कि वह अपने योगदान से 10 से अधिक स्टार्टअप की सहायता कर रहे हैं।

तकनीकी कंपनियाँ सोहम पारेख की धोखाधड़ी उजागर होने के बाद हैरान हैं और इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाने की माँग कर रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया इस पर मीम्स के मजे ले रहा है।

NSA, गैंगस्टर एक्ट और नुकसान की भरपाई… जिन भीम आर्मी वालों ने चन्द्रशेखर रावण के लिए की थी हिंसा, उन पर पुलिस का एक्शन: 85 गिरफ्तार, 600+ के खिलाफ दर्ज हुआ था केस

प्रयागराज में 29 जून 2025 को आजाद समाज पार्टी (ASP) और भीम आर्मी के सदस्यों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद 85 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 8 नाबालिग भी शामिल हैं।

उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई उपद्रवियों से करवाएगी।

हिंसा के बाद एक वीडियो सामने आया। वीडियो में उपद्रवी सज़ा काटते दिख रहे है। पुलिस स्टेशन में माफी भी माँगते दिखे। वीडियो में कुछ उपद्रवियों के सिर मुंडे हुए थे। वे हाथ जोड़े हुए भी दिख रहे थे। हालाँकि, यह साफ नहीं है कि इन वीडियो का मौजूदा मामले से कोई संबंध है या नहीं।

क्या हुआ था उस दिन?

रविवार (29 जून 2025) को प्रयागराज में ASP प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ को एक बलात्कार पीड़िता के परिवार से मिलने से रोका गया था। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई। भीड़ बेकाबू हो गई।

यमुनानगर के DCP के अनुसार, करछना क्षेत्र के पास के गाँव में लोग इकट्ठा हुए थे। उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ियाँ तोड़ी और आग लगाई। पुलिसकर्मियों पर पत्थर भी फेंके।

चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया था कि यूपी पुलिस ने उन्हें कौशांबी जिले में कथित बलात्कार की शिकार एक नाबालिग लड़की के परिवार से मिलने नहीं दिया। दो घंटे से ज़्यादा इंतजार करवाया।

भीड़ का उत्पात

भीम आर्मी के समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने आधे दर्जन से ज़्यादा बसों, चार पुलिस वाहनों और चार अन्य गाड़ियों पर पथराव कर नुकसान पहुँचाया। उपद्रवियों ने बाजार की दुकानों में भी तोड़फोड़ की और राहगीरों से मारपीट की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्पात वाले दिन पुलिस ने हालात काबू करने की कोशिश की तो उपद्रवियों ने 4,000 से ज़्यादा पत्थर फेंके। पुलिस ने बाजार के आसपास से 42 दोपहिया वाहन भी जब्त किए हैं।

हंगामे से पहले की तैयारी

चंद्रशेखर आजाद के करछना के इसौटा गाँव पहुँचने की खबर पर उनके समर्थकों ने हर घर पर भीम आर्मी का झंडा लगा दिया था। इससे लग रहा था कि चंद्रशेखर आजाद परिवार से मिलने से पहले शक्ति प्रदर्शन करने वाले थे।

गाँव में डॉ भीम राव अंबेडकर की एक प्रतिमा को मंदिर की तरह बनाया गया था और वहाँ भी झंडे लगाए गए थे।

पुलिस चाहती थी कि बलात्कार पीड़िता के परिवार को शहर ले जाया जाए ताकि वे चंद्रशेखर से मिल सकें। लेकिन भीम आर्मी के समर्थक जिद पर अड़े थे कि उनके नेता को करछना आने दिया जाए।

पुलिस का विरोध करते हुए समर्थकों ने हनुमान पुरी मोड़ पर तोड़फोड़ और आगजनी की। यमुनानगर DCP मामले की जाँच कर रही है।

निमिषा, मरियम और प्रयागराज की दलित बच्ची… ‘द केरल स्टोरी’ फिर हो गई रिपीट: इस पर चर्च तक है परेशान, चारों तरफ मौजूद हैं ताज, दरकशा और कैफ

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 साल की नाबालिग दलित बच्ची को एक ‘बेहतर जिंदगी और पैसों’ का सपना दिखाकर उसे बहला फुसला कर उसके ही गाँव से उठाकर दूर केरल ले जाया गया, जहाँ उसके साथ जो हुआ वो किसी डरावने सपने से कम नही था।

यह घटना कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि ये हकीकत है, ठीक वैसी ही जैसे ‘The Kerala Story‘ फिल्म में दिखाया गया था, जिसे कई लोग केवल कल्पना मानते रहे। लेकिन इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इस तरह की घटनाएँ हमारे समाज में सचमुच हो रही हैं और बेहद गंभीर रूप ले चुकी हैं।

लड़की को गाँव की ही 19 साल की कहकशा बानो और 25 साल के मोहम्मद कैफ ने मिलकर बहलाया-फुसलाया और फिर उसे केरल ले गए। वहाँ उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवाया फिर उसे आतंकवादी संगठनों में शामिल करने की कोशिश की गई।

इस पूरे षड्यंत्र में ताज मोहम्मद नाम का एक और व्यक्ति शामिल है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। बताया जा रहा है कि लड़की ने जैसे-तैसे हिम्मत जुटाई और पुलिस तक अपनी बात पहुँचाई, जिसके बाद कैफ और कहकशा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

कैफ पर ये भी आरोप है कि उसने लड़की के साथ गलत हरकतें की और उसकी इज्जत को ठेस पहुँचाने की कोशिश की। इस पूरे मामले ने एक बार फिर ‘केरला स्टोरी’ जैसी फिल्मों की सच्चाई को सामने ला दिया है, जिसे पहले कुछ लोगों ने केवल एक काल्पनिक कहानी मानकर नकार दिया था।

इस घटना से साफ है कि कैसे कुछ लोग मासूम लड़कियों को अपने जाल में फँसाकर न सिर्फ उनका बचपन और भरोसा तोड़ते हैं, बल्कि उन्हें एक ऐसे अंधेरे रास्ते पर धकेल देते हैं, जहाँ से वापस आना बेहद मुश्किल होता है।

जिहादियों के मंसूबे खतरनाक

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के फूलपुर क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 15 वर्षीय एक दलित लड़की को बहला-फुसलाकर केरल ले जाया गया। आरोप है कि वहाँ उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया और जिहाद के लिए तैयार करने की कोशिश की गई।

यह मामला शनिवार (28 जून 2025) को तब उजागर हुआ जब लड़की की माँ गुड्डी देवी ने फूलपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि 8 मई को उनकी बेटी अपने गाँव लिलहट में एक राशन डीलर की शादी में शामिल होने गई थी, जहाँ से वह गायब हो गई। उसे आखिरी बार रात करीब 10 बजे देखा गया था।

गुड्डी देवी ने अपनी शिकायत में कहा कि उसी मोहल्ले की रहने वाली कहकशाँ उर्फ दरकशा बानो नाम की महिला ने उनकी बेटी को बेहतर जीवन और पैसे का लालच देकर फुसलाया और इस्लाम की बातें करके ब्रेनवॉश किया।

इसके बाद बानो ने मोहम्मद कैफ नामक युवक से संपर्क किया, जो मोटरसाइकिल से आया और दोनों महिलाओं को प्रयागराज रेलवे स्टेशन ले गया। इस दौरान कैफ ने लड़की से छेड़छाड़ भी की।

फिर बानो लड़की को लेकर ट्रेन से प्रयागराज से दिल्ली और फिर केरल के त्रिशूर पहुँची। सफर के दौरान उनका लगातार संपर्क ताज मोहम्मद नाम के एक व्यक्ति से बना रहा, जिसे बानो ने बताया कि वह लड़की को साथ ला रही है।

गुड्डी देवी का यह भी आरोप है कि बानो ने उसे एक अज्ञात नंबर से फोन कर जान से मारने की धमकी दी, ताकि वे पुलिस में शिकायत न करें। शिकायत में यह भी बताया गया कि लड़की को यह कहकर बहलाया गया था कि केरल में कई दलित लड़कियाँ पहले ही इस्लाम अपना चुकी हैं और अब वों सभी खुशहाल जीवन जी रही हैं, कुछ को तो विदेश भी भेजा गया है।

डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि पुलिस इस पूरे मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और इसमें शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

नाबालिग ने किसी तरह जहन्नुम से बचाई जान

लड़की ने बताया कि जब वह केरल के त्रिशूर पहुँची, तो उसे एक ऐसी जगह ले जाया गया जहाँ पहले से कई और युवा लड़कियाँ और दाढ़ी वाले पुरुष मौजूद थे। वहाँ पर उससे इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया गया और जिहाद की बातें की गई।

लड़की ने कहा कि वह बहुत डर गई थी और किसी तरह वहाँ से भागकर त्रिशूर रेलवे स्टेशन पहुँची। वहीं पर स्थानीय पुलिस को वह मिली, जिन्होंने तुरंत उसके परिवार को इसकी सूचना दी। इसके बाद त्रिशूर में मौजूद केरल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने लड़की को अपनी सुरक्षा में लिया।

फिर फूलपुर पुलिस की मदद से लड़की को उसके परिवार के लोग प्रयागराज वापस लेकर आए। लड़की को इस समय ‘वन स्टॉप सेंटर’ में रखा गया है, जहाँ उसकी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब लड़की ने केरल से अपनी माँ से संपर्क किया, तब पूरी कार्रवाई शुरू हुई। दरकशा बानो, मोहम्मद कैफ और फोन पर धमकाने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने बताया कि फूलपुर थाने में मामले की पूरी जानकारी लेकर संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इसके बाद पुलिस टीम लड़की के घर गई, उससे बात की और परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए। पुलिस मामले की गहराई से जाँच कर रही है और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

खतरनाक हो चला है जिहादी गठजोड़

डीसीपी गुनावत ने बताया कि पीड़ित लड़की कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में आ गई थी, जिन्होंने पहले उसे पैसों का लालच दिया, फिर उसे इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया और बाद में उस पर जिहाद जैसी कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल होने का दबाव बनाया।

उन्होंने बताया कि दरकशा बानो नाम की महिला एक ऐसे संगठन से जुड़ी लगती है, जो केरल में सक्रिय है और लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर उन्हें जिहाद के लिए तैयार करता है।

डीसीपी के अनुसार, बानो किसी संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो खास तौर पर गरीब और दलित लड़कियों को निशाना बनाता है। उन्हें बहला-फुसलाकर उनका ब्रेनवॉश करता है और फिर उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन कराकर आतंकी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल करता है। यह गिरोह बेहद गहरी प्लानिंग के साथ काम करता है।

मामले में एक और आरोपित ताज मोहम्मद जिसे बानो ने यात्रा के दौरान कई बार फोन किया था, अब प्रयागराज पुलिस की जाँच के घेरे में है। पुलिस को शक है कि ताज मोहम्मद केरल के त्रिशूर में रहता है, इसलिए केरल पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।

प्रयागराज पुलिस ने अब तक की शुरुआती जाँच रिपोर्ट केरल पुलिस को भेज दी है ताकि दोनों राज्यों की पुलिस मिलकर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सके। अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि मामले की जाँच के लिए तीन अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया है और ये टीमें लगातार छानबीन कर रही हैं।

प्रयागराज और केरल पुलिस मिलकर गंभीरता से यह जाँच कर रही हैं कि कहीं कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं जो देशभर में गरीब और दलित लड़कियों को इस तरह बहला-फुसलाकर गलत रास्ते पर ले जा रहा हो।

डीसीपी ने कहा कि दरकशा बानो की गतिविधियों की गहराई से जाँच की जा रही है और जो भी व्यक्ति इस गिरोह से जुड़ा पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ की है और जाँच अभी भी जारी है।

प्रयागराज पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर किसी को इस तरह की गतिविधियों की जानकारी है, तो वह तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि पीड़ित लड़की को पूरी सुरक्षा और सभी जरूरी मदद मिले।

एक परेशान करने वाली वास्तविकता

 केरल में इस्लामी कट्टरपंथ की बढ़ती घटनाएँ अब अपवाद नहीं बल्कि एक खतरनाक सामान्य प्रवृत्ति बनती जा रही हैं। इस्लामवादियों, उदारवादियों और उनके समर्थक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा भले ही यह दावा किया जाता हो कि धर्मांतरण और चरमपंथी गतिविधियाँ कुछ गिने-चुने मामलों तक सीमित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं अधिक चिंताजनक है।

खासकर केरल में बीते वर्षों में इस्लामी कट्टरता में तेजी से इजाफा हुआ है। केरल में मुस्लिम युवाओं द्वारा योजनाबद्ध ढंग से हिंदू और ईसाई लड़कियों को प्रेम और शादी के नाम पर फँसाकर उनका जबरन धर्मांतरण कराना आम बात हो गई है।

इन लड़कियों को बाद में सीरिया, इराक जैसे मध्य-पूर्वी देशों में भेज दिया जाता है, जहाँ उन्हें या तो सेक्स स्लेव के रूप में इस्तेमाल किया जाता है या आतंकवादी संगठनों में शामिल किया जाता है।

केरल को अब अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट) के लिए एक सक्रिय भर्ती केंद्र माना जाता है। इसकी जड़ें 2013 से शुरू हुईं, जब राज्य में धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाले कट्टरपंथी मॉड्यूल तैयार किए गए। 2014 से आईएसआईएस ने वहाँ सक्रिय रूप से पैर जमाना शुरू कर दिया।

इस पूरे नेटवर्क को बढ़ावा देने में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की बड़ी भूमिका रही है, जिसने केरल को आईएसआईएस की भर्ती का गढ़ बना दिया। 2008 और 2009 के बीच केरल में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की घटनाएँ सामने आईं, जिनमें कई महिलाएँ मुस्लिम युवकों से शादी के बाद इस्लाम कबूल कर चुकी थी और बाद में उन्हें विदेश भेजा गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर 2016 में यह मुद्दा सबके सामने आया जब कुछ भारतीय महिलाएँ अपने मुस्लिम शौहरों के साथ आईएसआईएस में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान चली गईं। यह मामला तब गंभीर बना जब इन महिलाओं को हिरासत में लिया गया और पूछताछ की गई।

इन महिलाओं में मेरिन जैकब पल्लथ उर्फ मरियम, राफैला और सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा, निमिशा उर्फ फातिमा शामिल थीं। निमिशा, एक हिंदू लड़की थी जो डॉक्टर बनना चाहती थी। उसके परिवार ने लाखों खर्च कर उसे मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलवाया।

वहीं उसकी मुलाकात सज्जाद सलीम से हुई, जो उसी कॉलेज में पढ़ रहा था। सज्जाद और उसके परिवार ने निमिशा को प्रेम जाल में फंसा कर 2012 में उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवा दिया। जिसके बाद उसका नाम फातिमा रखा गया फिर उसका जबरन निकाह भी कराया गया।

जब वह गर्भवती हुई, तो सज्जाद ने उसे तलाक दे दिया। इसके बाद एक मुस्लिम संगठन ने मदद के नाम पर उसे फिर से एक कनवर्टेड मुस्लिम युवक से निकाह कराया। उसी दौरान उसके मन में इस्लाम और जिहाद के नाम पर कट्टरता भरी गई। फिर आखिर में उसे फिदायीन बम के रूप में अफगानिस्तान भेजा गया।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के अनुसार, निमिशा 2016 से लापता है और अब अफगानिस्तान की काबुल जेल में ISIS आतंकी के रूप में बंद है। उसकी माँ बिंदु ने बताया कि उन्होंने बेटी की तलाश के लिए FIR दर्ज कराई, लेकिन जब तक उन्हें सच्चाई का पता चला, बहुत देर हो चुकी थी। निमिशा का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन वह लव जिहाद और आतंकवाद की शिकार बन गई।

सोनिया की शादी कासरगोड निवासी अब्दुल रशीद अब्दुल्ला से हुई थी, जिसे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया है। रफैला की शादी एक स्थानीय डॉक्टर इजास कल्लुकेट्टिया पुरयिल से हुई थी।

इस्लामी खिलाफत की इच्छा

केरल की कुछ युवतियों को 2016 में इस्लाम अपनाने और आतंकवादी संगठन ISIS से जुड़ने के लिए बहकाया गया। ये सभी महिलाएँ अपने शौहरों के साथ भारत से निकलकर ईरान होते हुए अफगानिस्तान पहुँचीं, जहाँ वे इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत (ISKP) का हिस्सा बनना चाहती थीं।

वे कुल मिलाकर 21 लोगों के एक समूह में थीं, जिसमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल थे। इनका मकसद ISIS के समर्थन में लड़ना और खलीफा की स्थापना करना था। 2019 में जब अफगानिस्तान और अमेरिका की संयुक्त सेनाओं ने ISIS के खिलाफ अभियान चलाया, तब इन महिलाओं के आतंकी शौहर मारे गए।

इसके बाद इन महिलाओं ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें उनके बच्चों सहित काबुल की जेल में बंद कर दिया गया। 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया और जेलों के ताले तोड़े, तो ये महिलाएँ वहाँ से रिहा हो गईं। बाद में उन्होंने यह इच्छा जताई कि वे भारत वापस लौटना चाहती हैं।

इस मामले में एक और अहम नाम यास्मीन अहमद जाहिद का है, जिसे 2023 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया। 2016 में पूछताछ के दौरान यास्मीन ने कबूल किया था कि उसने 6 महिलाओं और 3 बच्चों सहित कुल 22 केरलवासियों की भर्ती की थी, जिन्हें बाद में ISIS द्वारा चलाए जा रहे इलाकों में भेजा गया।

उसने बताया कि अब्दुल रशीद अब्दुल्ला नाम के व्यक्ति ने तब तक 40 केरल के युवाओं का धर्म परिवर्तन करवाया और उन्हें ISIS से जोड़ दिया था। यास्मीन खुद भी अब्दुल रशीद और उसकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे मजहबी कक्षाओं में नियमित रूप से भाग लेती थी।

उस पर आरोप है कि उसने कासरगोड ज़िले से ISIS के 15 सदस्यों की भर्ती की थी। उसने आगे बताया कि केरल के इन लोगों को बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई के एयरपोर्ट से कुवैत, दुबई, मस्कट और अबू धाबी भेजा गया, फिर वहाँ से उन्हें ईरान ले जाकर अफगानिस्तान पहुँचाया गया।

इन सभी गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य था – ISIS के खलीफा शासन की स्थापना में सहयोग करना और अबू बकर अल-बगदादी के समर्थन में काम करना। यह पूरी घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कैसे केरल में एक संगठित और कट्टरपंथी नेटवर्क लंबे समय से काम कर रहा है, जो युवाओं को बहला-फुसला कर उन्हें आतंकवादी संगठनों में शामिल कर रहा है।

केरल का चर्च लगातार जता रहा है चिंता

केरल में लव जिहाद को लेकर ईसाई संगठनों और चर्चों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। पहले जहाँ यह मुद्दा मुख्य रूप से हिंदू संगठनों द्वारा उठाया जाता था, वहीं अब  कैथोलिक चर्च और अन्य ईसाई समूह भी इस पर खुलकर सामने आ रहे हैं।

कई पादरियों और बिशपों ने राज्य की वामपंथी सरकार (CPM नेतृत्व) पर लव जिहाद को मूक सहमति देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार और पुलिस इन मामलों की अनदेखी कर रही है, जिससे कट्टरपंथी को बढ़ावा मिल रहा है।

केरल के सबसे बड़े चर्च साइरो मालाबार चर्च ने एक रिपोर्ट में बताया है कि ईसाई लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर जबरन इस्लाम अपनाने को मजबूर किया जा रहा है और कई मामलों में उन्हें सीरिया, अफगानिस्तान जैसे युद्धग्रस्त देशों में भेजा जा रहा है, जहाँ उनका सेक्स स्लेव या आतंकवादी के रूप में इस्तेमाल होता है।

चर्च ने इसे इस्लामिक स्टेट (ISIS) की एक संगठित साजिश बताया, जिसका मकसद राज्य की धार्मिक और सामाजिक एकता को कमजोर करना है। केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) और इसके प्रवक्ता फादर वर्गीज वल्लिकट्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारें महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों की गंभीरता से जाँच नहीं कर रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि लव जिहाद को मूक मंजूरी दी जा रही है। चर्च की रिपोर्ट के अनुसार ISIS द्वारा भर्ती की गई 21 महिलाओं में 12 ईसाई थीं, जिन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया था। पाला बिशप मार जोसेफ कल्लारंगट ने 2021 में अपने एक भाषण में लव जिहाद और नारकोटिक जिहाद की समस्या को उठाया और कहा कि ईसाई लड़कियों को निशाना बनाकर उनका शोषण किया जा रहा है और फिर उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में धकेला जा रहा है।

इसी तरह, मार जोसेफ पैम्प्लेनी ने 2023 में ईस्टर के मौके पर पत्र के जरिए लव जिहाद को एक वास्तविक खतरा बताते हुए इसे लेकर चिंता जताई।

जॉर्ज कुरियन ने लिखा था गृह मंत्री अमित शाह को पत्र

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने भी इस विषय पर गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर ईसाई लड़कियों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाने की माँग की थी। साल 2019 में लिखे पत्र में उन्होंने कहा था कि लव जिहाद और धर्मांतरण के जरिए भोले-भाले लोगों को आतंकवादी गतिविधियों में फंसाया जा रहा है।

कुरियन ने बताया कि उनके बेटे के बाद एनआईए ने केरल के कोझिकोड में एक मामले में हस्तक्षेप कर आरोपित को गिरफ्तार किया। उन्होंने एक अन्य घटना का भी जिक्र किया जिसमें दिल्ली की एक ईसाई लड़की के गायब होने के बाद उसे UAE में खोजा गया। लड़की ने बताया कि उसका जबरन मजहब बदलवाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि लव जिहाद के जरिए युवाओं को प्यार, पैसे और झूठे वादों से फँसाकर कट्टरपंथी एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर, गरीब लोगों को उनका शोषण कर के आतंकवाद फैलाने की कोशिश की जा रही है। कुरियन ने चेताया कि भले ही कुछ लोग लव जिहाद को साजिश कहकर खारिज करें, लेकिन ये एक गंभीर मुद्दा है और देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा भी खासकर केरल जैसे राज्यों में।

अमेरिका में इस्कॉन मंदिर पर चली 20-30 राउंड गोलियाँ, हिंदुओं में दहशत फैलाना था मकसद: हिंदू संगठनों ने की सुरक्षा और न्याय की माँग

अमेरिका के यूटा राज्य के स्पेनिश फोर्क शहर में स्थित विश्वप्रसिद्ध इस्कॉन श्री श्री राधा कृष्ण मंदिर पर अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, कई रातों तक लगातार मंदिर और उसके आस-पास की संपत्ति पर करीब 20 से 30 राउंड गोलियाँ चलाई गई।

स्थानीय समय के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब मंदिर के अंदर भक्त और मेहमान मौजूद थे। गनीमत रही कि किसी को नुकसान नहीं पहुँचा, लेकिन मंदिर की इमारत, विशेषकर हाथ से बनी नक्काशीदार मेहराब और सजावटी संरचनाओं को भारी नुकसान हुआ है। कुल नुकसान हजारों डॉलर में आँका जा रहा है।

मंदिर प्रशासन और हिंदू संगठनों ने आशंका जताई है कि यह हमला सोची समझी सजिश और पहले से पनप रही नफरत का नतीजा हो सकता है, जिसका उद्देश्य हिंदुओं को डराना है। अब तक किसी भी आरोपित की पहचान नहीं हो पाई है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है।

पुलिस मामले की जाँच कर रही है, लेकिन हिन्दुओं की ओर से यह माँग की जा रही है कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और मंदिरों की सुरक्षा पुख्ता की जाए। भारत सरकार ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए एक्स पर कहा कि वह सभी भक्तों और हिन्दुओं के साथ खड़ा है। दूतावास ने स्थानीय प्रशासन से त्वरित और कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है।

इस से पहले भी अमेरिका में किसी हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है, इससे पहले 9 मार्च 2025 को कैलिफोर्निया के चीनो हिल्स स्थित बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) मंदिर को अपवित्र किया गया था।

यह घटना लॉस एंजिल्स में आयोजित खालिस्तान जनमत संग्रह से ठीक पहले हुई थी। उन हमलों में ‘हिंदुओं वापस जाओ’ जैसे नारे भी देखे गए। इसी तरह सितंबर 2024 में सैक्रामेंटो और न्यूयॉर्क के मंदिरों में भी तोड़फोड़ और भड़काऊ बातें लिखी मिली थीं।

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) और अन्य हिंदू संगठनों ने इन हमलों को बढ़ती हिंदू विरोधी भावना की ओर इशारा किया और अमेरिका में रह रहे हिंदुओ की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फिलहाल, इस्कॉन मंदिर पर हुए हमले की जाँच जारी है और हिंदू समुदाय इस हमले को लेकर उचित कार्यवाही की प्रतीक्षा कर रहा है।

‘ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं होनी चाहिए’: प्रयागराज की दलित बच्ची को सऊदी भेजने की थी तैयारी, मौलाना सिखा रहा था इस्लामी रिवायतें-उर्दू, दरकशा-कैफ के बाद UP ATS को ताज की तलाश

प्रयागराज से जिस दलित बच्ची को दरकशा बानो केरल ले गई थी उसे ‘खद्दामा वीजा’ पर सऊदी अरब भेजने की तैयारी थी। यहाँ उसे किसी शेख की खिदमत में लगाया जाना था। धर्मांतरण के बाद उसे केरल में इस्लामी रिवायतों की ट्रेनिंग दी जा रही थी। यह सारी बातें पीड़िता ने खुद बताई हैं। इस पूरे मामले की जाँच UPATS कर रही है।

UPATS और प्रयागराज विजिलेंस ने पीड़ित बच्ची से जानकारी हासिल की है। इस दौरान बच्ची ने केरल में उसके साथ हुए अत्याचार की सारी आपबीती सुनाई। बच्ची ने बताया कि केरल से उसे वर्क वीजा पर सऊदी अरब भेजने वाले थे। ट्रेनिंग सेंटर में इस वीजा को ‘खद्दामा वीजा’ कहकर पुकारा जाता था।

मौलाना सिखा रहा था उर्दू

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल में बच्ची को एक छोटे से कमरे में रखा गया था। जहाँ बाकी लड़कियाँ भी थी, लेकिन किसी को भी आपस में बात करने की अनुमति नहीं दी गई थी। बच्ची ने बताया है कि यहाँ एक मौलाना सभी को उर्दू सिखाता था। मौलाना ही बच्ची को हिजाब डालने का दबाव बनाता था।

बच्ची ने बताया कि उसे यहाँ सारी इस्लाम रिवायतें भी सिखाई जा रहीं थी। पीड़िता ने बताया है कि उसने कुछ लोगों को कमरे के बाहर आपस में बात करते सुना था। बच्ची ने बताया कि वह उसे सऊदी अरब भेजने की बात कर रहे थे। उनका कहना था कि इसलिए ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। बच्ची ने बताया कि यह सुनकर वह खौफ में आ गई थी।

फिर बच्ची ने हिम्मत जुटाई और भागने की योजना बनाई। एक दिन बच्ची को पास वाले कमरे में मोबाइल फोन मिला और बच्ची ने अपनी माँ को फोन मिला दिया। अपनी लोकेशन दी और दोबारा कॉल न करने की बात कही।

ताज की तलाश में जुटी पुलिस

प्रयागराज पुलिस अब तक इस मामले में मोहम्मद कैफ और दरकशा बानो को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन आरोपित ताज उर्फ मोहम्मद ताजउद्दीन अब भी फरार है। उसका नाम भी FIR में शामिल है। दरकशा की दी गई लोकेशन पर केरल में ताज के ठिकाने पर छापेमारी की गई, लेकिन वह यहाँ नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि बताई गई लोकेशन फर्जी थी।

पीड़ित बच्ची ने भी ताज का नाम लिया है। बच्ची ने बताया है कि केरल ले जाते वक्त उसे ताज से मिलवाया गया था। यह भी सामने आया है कि ताज ही उत्तर प्रदेश से लड़कियों को केरल ले जाता था। यह भी पता चला है कि फिर लड़कियों का धर्म परिवर्तन, ट्रेनिंग और खरीद-फरोख्त में अहम भूमिका निभाता था।

पुलिस ताज की तलाश में जुटी हुई है। UPATS की एक टीम को केरल भेजा गया है, वह ताज से जुड़ी जानकारी निकाली जा रही है। हालाँकि, पुलिस को ताज की अपराध हिस्ट्री नहीं मिली है, जिससे ताज की तलाश में मुश्किल हो रही है।

प्रयागराज में आतंकी मॉड्यूल?

दरकशा के धर्मांतरण करवाने और केरल ले जाने की इस प्लानिंग के चलते यह शक हो रहा है कि वह किसी आतंकी मॉड्यूल का भी हिस्सा हो सकती है। उसके स्लीपर सेल की तरह जाँच करने का शक भी गहरा रहा है। दरकशा ने इस बच्ची को कैसे टार्गेट किया, उसके किससे संबंध हैं, इसके लिए पुलिस टीमें फॉरेंसिक जाँच में भी जुटी हैं।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दरकशा का मोबाइल जब्त किया गया है और उसके व्हाट्सएप की भी जाँच हो रही है। वह किससे बात करती थी, इस पर भी जानकारी निकाली जा रही है। मोबाइल डाटा सामने आने पर यह भी पता लग सकता है कि उसने और कितनी बच्चियों को निशाना बनाया है।

जानें पूरा मामला

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली थी।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती थी। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

‘टेक्निकल ग्लिच’ की वजह से दिखने लगे थे पाकिस्तानियों के अकाउंट-यूट्यूब चैनल, दोबारा हो गए भारत में बैन: पहलगाम आतंकी हमले-ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगा था प्रतिबंध

भारत में पाकिस्तानी सेलिब्रिटी के यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट एक बार फिर बैन कर दिए गए हैं। तकनीकी खराबी के कारण ये अकाउंट भारत में कुछ घंटों के लिए दिखने लगे थे, जिसे सुधार लिया गया है।

दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन अकाउंट्स को बैन कर दिया था।

क्या थी ‘अस्थायी वापसी’ की वजह?

जानकारी के अनुसार, 2 जुलाई 2025 को इन हैंडल्स का थोड़ी देर के लिए दिखना एक तकनीकी खराबी के कारण था। सरकार ने साफ किया कि बैन किए गए पाकिस्तानी हैंडल बैन ही रहेंगे।

कई पाकिस्तानी मशहूर हस्तियों में युमना जैदी, अहाद रजा मीर, सबा कमर, दानिश तैमूर, मावरा होकेन, दानानीर मोबीन और शाहिद अफरीदी के इंस्टाग्राम हैंडल आदि शामिल है।

इसके अलावा हम टीवी, शोएब अख्तर के आधिकारिक चैनल जैसे यूट्यूब चैनल कुछ समय के लिए दिखे थे। लेकिन अब इनमें से ज़्यादातर इंस्टाग्राम हैंडल फिर से एक्सेस नहीं हो पा रहे हैं और यूट्यूब चैनलों को भी जल्द ही ब्लॉक कर दिया जाएगा।

ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन की माँग

पाकिस्तानी सेलिब्रिटी हैंडल्स से अस्थायी रूप प्रतिबंध हटाने की जानकारी ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) को मिली तो उन्होंने कड़ा विरोध किया। AICWA ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इसे शहीद जवानों का अपमान बताया।

पत्र में सभी पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट और मीडिया चैनलों को तुरंत दोबारा बैन करने की माँग भी की थी। AICWA ने साफ कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद फैलाता रहेगा, तब तक पाकिस्तानी कलाकारों और सामग्री पर प्रतिबंध नहीं हटेगा।

हैंडल्स क्यों हुए थे ब्लॉक?

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की जान गई थी। इसके बाद पाकिस्तानी हैंडल्स पर भारत विरोधी बातें फैलाने लगी, जिसके बाद भारत सरकार ने कड़ी कार्रवाई की थी। 28 अप्रैल 2025 को 16 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों को बैन कर दिया गया था।

बैन किए गए चैनलों में डॉन न्यूज टीवी, इरशाद भट्टी, समा टीवी, एआरवाई न्यूज जैसे बड़े नाम शामिल थे। जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के सभी एक्स (पहले ट्विटर) और यूट्यूब अकाउंट ब्लॉक हैं और आगे भी ब्लॉक रहेंगे।

यदि कोई उपयोगकर्ता पाकिस्तान के कुछ अकाउंट देख पा रहा था, तो वे अब एक्सेस नहीं कर पाएँगे।

जिन रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन दुनिया को सता रहा, उन्हीं पर PM मोदी ने की घाना से डील: दोनों देश मिलकर करेंगे खनन, UPI पर भी हुआ MoU

प्रधानमंत्री मोदी पाँच देशों की ऐतिहासिक दौरे पर हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने घाना से की है। पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली घाना यात्रा है। पीएम ने यहाँ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें रेयर अर्थ मिनरल्स और माइनिंग से जुड़ा समझौता भी शामिल है।

ये समझौता ऐसे समय हुआ है जब अवैध सोने के खनन को लेकर चीन और घाना आमने-सामने हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति जॉन ड्रमानी महामा की रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन को लेकर सहमति भी बनी है। ये भारत के लिए काफी अहम है क्योंकि चीन ने रेयर मैग्नेट के निर्यात पर लगाम लगा दिया है। चीन में रेयर अर्थ मिनरल्स काफी हैं जिसका भारत में भी निर्यात होता है।

इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माण में किया जाता है। चीन के फैसले की वजह से भारत को धक्का लगा है। भारत ने इसका करारा जवाब देते हुए अफ्रीकन देश से रेयर अर्थ मिनरल्स पर समझौता कर चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की शुरुआत कर दी है।

इसके अलावा भारत और घाना द्विपक्षीय संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ कहा है यानी संबंधों में नए आयाम जुड़ने वाले हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति महामा के बीच चार अहम समझौते हुए हैं। ये संस्कृति, पारंपरिक चिकित्सा, खनिज संसाधन और रक्षा सहयोग को लेकर है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत अब केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि घाना की राष्ट्र-निर्माण यात्रा में एक सहयात्री है.’

पीएम के बयान से भारत की अफ्रीका नीति की स्पष्टता साफ झलकती है। घाना के साथ भारत अगले 5 सालों में व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। भारतीय कंपनियों ने अब तक घाना में 17138 करोड़ रुपए का निवेश किया है। पीएम ने कहा है कि भारत घाना के साथ फिनटेक सेक्टर में सहयोग करने जा रहा है। यूपीआई डिजिटल भुगतान सिस्टम को भी साझा करने जा रहा है।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत घाना के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज में मदद करेगा। दरअसल रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर पूरी दुनिया में घमासान मचा हुआ है। चीन के एकाधिकार और मनमाने रवैये का असर भारत के ऑटो सेक्टर और डिफेंस पर पड़ सकता है इसलिए पीएम ने अफ्रीका से चीन को संदेश दिया है।

इससे पहले घाना ने पहलगाम आतंकी हमले का कड़ा विरोध किया था और भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया था। पीएम मोदी और राष्ट्रपति राष्ट्रपति जॉन ड्रमानी ने बैठक के दौरान यूरोप और पश्चिम एशिया में चल रहे जंग पर चिंता जताई और संवाद के जरिए कूटनीतिक प्रयास से समस्या के समाधान पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी 2 जुलाई से 9 जुलाई के बीच त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया भी जाने वाले हैं। घाना में उन्हें ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से भी सम्मानित किया गया और घाना के बच्चों ने ‘हरे राम हरे कृष्ण’ का मंत्रोच्चार कर स्वागत किया गया।

पीएम मोदी का घाना में शानदार स्वागत हुआ। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर‘ मिला। 21 तोपों की सलामी भी दी गई। पीएम मोदी की घाना की पहली सरकारी यात्रा थी। वह घाना जाने वाले तीसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी गए थे।