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पहलगाम आतंकी हमले के लिए चूँ तक नहीं, सिर्फ कश्मीर मुद्दे पर बवाल: UNSC के सामने फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, आतंकी मुल्क कर रहा मानवाधिकारों की बात

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की जुलाई महीने की अध्यक्षता पाकिस्तान कर रहा है। इस पद पर बैठते ही पाक ने एक बार फिर अपनी नापाक हरकतों पर उतर आया है। UNSC की बुधवार (2 जुलाई 2025) की बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर के मुद्दे को फिर से उठाया है।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) के मुख्यालय में आयोजित बैठक में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने फिर से कश्मीर को लेकर अपना पुराना राग छेड़ दिया है। असीम ने कहा कि कश्मीर विवाद को अब और नहीं टाला जा सकता। सुरक्षा परिषद को इसके समाधान के तौर पर अपनी ओर से प्रस्तावों को लागू कराने जैसे हल निकालने चाहिए।

असीम ने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा तनाव का विषय बना हुआ है। इसके कारण मानवाधिकार, शांति और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ता है। UNSC के स्थायी देशों के साथ दुनिया को इस पर काम करने की जरूरत है।

सदस्यता का हवाला देकर मुद्दे को अपने हित में लाने की कोशिश

UNSC में अपनी अस्थायी सदस्यता का रोना रोते हुए पाक ने कहा कि हम यहाँ महज 2 साल के लिए ही हैं। ऐसे में सुरक्षा परिषद के स्दस्यों को इसके प्रावधानों के हिसाब से समाधान खोजना होगा। यही एकमात्र रास्ता है।

पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर कश्मीर का मुद्दा जब तब उठाता रहता है। जबकि इसे लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते हुआ जिसमें साफ तौर पर कश्मीर के मुद्दे को आपस में ही सुलझाने के प्रयास करने की बात कही गई है।

इसी साल 22 अप्रैल को जब पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 20 से अधिक हिंदू और कुल 26 पर्यटकों की हत्या की। इसके बाद भारत ने पाकिस्तानियों का भारत को लेकर वीजा रद्द किया, सिंधु जल समझौता निलंबित किया और शिमला समझौते को भी खत्म कर दिया। इसके बाद तो पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे को लेकर खुली छूट मिल गई है।

शांति- सुरक्षा पर नजर रखता है UNSC

बताते चलें कि UNSC दुनिया का सबसे मजबूत अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर शांति और सुरक्षा के लिए काम करना है। इसके सदस्य 15 देश हैं। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस इसके स्थायी सदस्य हैं। अन्य 10 अस्थायी देशों की सदस्यता हर दो साल में बदलती है। भारत इसमें सक्रिय रूप से शामिल नहीं है।

सदस्यों के तहत रोटेशन नंबर के जरिए पाकिस्तान को UNSC में जुलाई की अध्यक्षता मिली है। इसका अर्थ होता है कि UNSC में जो भी सदस्य हैं उनमें बारी- बारी से सभी को अध्यक्षता का मौका मिले। इस दौरान पाकिस्तान कम से कम दो बार ओपेन मीटिंग्स कर सकता है।

पाकिस्तान से पहले 2025 में अब तक अल्जीरिया, चीन, डेनमार्क, फ्रांस, ग्रीस और गुयाना देश UNSC की अध्यक्षता कर चुके हैं। पाकिस्तान के बाद अध्यक्षता के लिए कोरिया, रूस, सिएरा लियोन और स्लोवेनिया का नंबर आएगा।

पाकिस्तान UNSC में गैर स्थायी सदस्य को तौर पर 8वीं बार शामिल हुआ है। अब तक 1952-53, 1968-69, 1976-77, 1983-84, 1993-94, 2003-04 और 2012-13 में पाक अस्थायी सदस्य रह चुका है।

अब एक बार फिर अपनी एक महीने की अध्यक्षता में पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे से दुनिया को अपनी ओर करने की हरसंभव कोशिश में लग गया है। हालाँकि ये इतना भी आसान नहीं है। कश्मीर के मुद्दे को उछाल कर पाकिस्तान भले ही प्रस्ताव को अपनी ओर करने की जुगत में हो लेकिन उसके लिए UNSC के 9 देशों की सहमति जरूरी होती है।

इसके साथ ही कोई भी स्थायी सदस्य देश प्रस्ताव के खिलाफ वीटो ना करे ये सबसे जरूरी है। पर ये हो पाना थोड़ा मुश्किल है। भारत को अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन का साथ मिला हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए इस तरह का प्रस्ताव दूर की कौड़ी है।

पहले पति से तलाक, दूसरे की मौत के बाद ससुर-जेठ से अवैध संबंध और सास की हत्या: पूजा जाटव ने प्रॉपर्टी हड़पने के लिए किया सब, झांसी मर्डर केस में नए खुलासे

उत्तर प्रदेश के झांसी में पुलिस ने 29 वर्षीय पूजा जाटव को गिरफ्तार किया है। उसपर अपनी सास सुशीला देवी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। इस मामले में पूजा जाटव, उसकी बहन और बहन के प्रेमी को पुलिस ने पकड़ा है।

सास की हत्या जमीन विवाद को लेकर हुई लेकिन इसे डकैती जैसा दिखाने की कोशिश की गई। इस मामले में जैसे-जैसे पुलिस की जाँच आगे बढ़ी, कई राज सामने आने लगे। हत्या, साजिश, विश्वासघात और अवैध संबंधों की जानकारी मिली।

पूजा ने अपने पति के परिवार में अवैध संबंध बनाए थे। अपनी बहन और उसके प्रेमी के साथ मिलकर सास सुशीला देवी को जहर दिया और गला घोंटकर मार डाला, ताकि परिवार की संपत्ति और कीमती सामान हड़प सके।

24 जून 2025 को झांसी के टहरौली इलाके में रहने वाली 60 वर्षीय सुशीला देवी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं। सुशीला की मौत के बाद से बहू पूजा जाटव गायब थी। घटना को देखकर ऐसा लग रहा था कि घर में डकैती हुई हो।

अंतिम संस्कार के बाद जब पूजा घर नहीं आई तो संदेह पैदा हुआ। पुलिस ने उसकी गैरमौजूदगी, कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया। काफी देर तक पूछताछ के बाद आखिरकार उसने हत्या की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली।

जमीन हड़पने के लिए सास की हत्या की साजिश रची

पूजा जाटव ग्वालियर की रहने वाली है। वह वहाँ स्थायी रूप से बसने और झांसी में अपने ससुराल वालों की अठारह बीघा पारिवारिक जमीन बेचने का मन बना चुकी थी। इस वक्त वो जमीन उसके दिवंगत पति कल्याण के नाम पर थी। सास सुशीला देवी लगातार संपत्ति बेचने का विरोध कर रही थी। पूजा को उसके ससुर और देवर संतोष संपत्ति में हिस्सा देने के लिए तैयार थे। इसको लेकर सुशीला देवी और पूजा जाटव के बीच झगड़ा भी हुआ था। सास के कड़ा विरोध को देखते हुए उसने सास को रास्ते से हटाने के लिए हत्या की साजिश रची।

आरोपित पूजा जाटव ने अपनी बहन कामिनी और उसके प्रेमी अनिल वर्मा को ग्वालियर से बुलाया। कामिनी और अनिल 24 जून की शाम को 125 किलोमीटर दूर झांसी पहुँचे। घर में जब कोई दूसरा नहीं था तो सुशीला देवी को जहर का इंजेक्शन दे दिया और फिर गला घोंटकर हत्या कर दी। ये दोनों 8 लाख के गहने भी चुराकर मौके से फरार हो गए। पूरी घटना इस तरह दिखाने की कोशिश की गई ताकि लगे कि डकैतों ने इस वारदात को अंजाम दिया है। लेकिन पूजा के विरोधाभाषी बयान, मोबाइल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज ने शक पैदा किया। पुलिस की कड़ाई के सामने वह टूट गई और खुद कई चौकानेवाले खुलासे किए।

ग्वालियर में शादी के बाद पहले पति से तलाक लिया

पूजा ने बताया कि उसकी शादी पहले ग्वालियर में ही हुई थी। कथित तौर पर एक झगड़े के दौरान पूजा को उसके पति ने गोली मार दी और मामला अदालत पहुँच गया। कानूनी कार्यवाही के दौरान पूजा की मुलाकात कल्याण से हुई। जल्द ही दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ गईं क्योंकि कल्याण को पूजा से सहानुभूति हो गई और आखिरकार उन्होंने शादी कर ली।

शादी के छह साल बाद कल्याण की कथित तौर पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। पूजा ने बिना समय गँवाए पति कल्याण के बड़े भाई यानी जेठ संतोष के साथ अवैध संबंध बना लिए। वह शादीशुदा था, फिर भी पूजा संतोष के घर चली गई और संतोष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। संतोष की पत्नी ने संतोष और पूजा के अवैध रिश्ते का पूरजोर विरोध किया। इसको लेकर घर में झगड़े होते रहते थे। पूजा ने फिर दावा किया कि वह कल्याण की विधवा है इसलिए संपत्ति में उसे हिस्सा मिले।

बताया जा रहा है कि पूजा की अपने ससुर के साथ भी अवैध संबंध थे। इसका सास सुशीला देवी लगातार विरोध कर रही थी। इसलिए जब संपत्ति की बात आई तो ससुर और जेठ हिस्सा देने के लिए राजी हो गए लेकिन सास अड़ गई। इसके बाद उसने सास को मारने की योजना बनाई। उसने बहन और उसके प्रेमी की योजना में मदद ली।

पुलिस ने पूरे खुलासे के बाद पूजा और कामिनी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। पुलिस ने अनिल वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया। पूजा जाटव का जीवन विश्वासघात और लालच की ऐसी कहानी कहता है जिसने दो शादियाँ की, कई अवैध संबंध बनाए और संपत्ति हड़पने के लिए हत्या की साजिश रची।

21 तोपों की सलामी के साथ पीएम मोदी को मिला ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार’ सम्मान: घाना में ‘हरे राम हरे कृष्ण’ से हुआ स्वागत, वैश्विक साझेदारी के लिए 5 देशों की यात्रा पर प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (2 जुलाई 2025) को पाँच देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पर है। इसका मुख्य उद्देश्य अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में भारत की साझेदारी को मजबूत करना है। यह यात्रा घाना से शुरू हुई।

पीएम मोदी तीन दशकों में घाना का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं। घाना में उन्हें ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से भी सम्मानित किया गया और घाना के बच्चों ने ‘हरे राम हरे कृष्ण’ का मंत्रोच्चार कर स्वागत किया गया।

घाना में ऐतिहासिक शुरुआत

पीएम मोदी का घाना में शानदार स्वागत हुआ। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर‘ मिला। 21 तोपों की सलामी भी दी गई। पीएम मोदी की घाना की पहली सरकारी यात्रा थी। वह घाना जाने वाले तीसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने घाना में कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात की। इसमें निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सुरक्षा शामिल हैं। पीएम मोदी ने घाना की संसद को संबोधित किया और इसे बड़ा सम्मान बताया। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश मजबूत लोकतंत्र हैं। जानकारी के अनुसार, घाना में 15,000 से ज्यादा भारतीय रहते हैं, कुछ परिवार सात दशकों से वहाँ हैं।

आगे की यात्रा

घाना के बाद पीएम मोदी अपनी यात्रा जारी रखेंगे और त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया जाएँगे। 3 से 4 जुलाई 2025 को वह त्रिनिदाद और टोबैगो में संसद में भाषण देंगे और देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ग्रहण करेंगे

इसके बाद 4 से 5 जुलाई 2025 को पीएम मोदी अर्जेंटीना में राष्ट्रपति जेवियर माइली से मिलेंगे, जहाँ व्यापार, ऊर्जा, निवेश और नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा होगी। 5 से 8 जुलाई 2025 तक पीएम मोदी ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और ब्राजील के राष्ट्रपति सहित कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

आखिर में 8 से 9 जुलाई 2025 को नरेंद्र मोदी नामीबिया का दौरा करने वाले भारत के पहले पीएम होंगे, जहाँ वह राष्ट्रपति नंदी-एनडाइटवाघ से मिलेंगे और खनिज व ऊर्जा साझेदारी पर बातचीत करेंगे। यह पूरी यात्रा दिखाती है कि भारत दुनिया के दक्षिणी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है और खास क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है।

स्कूटी टकराने के विवाद में नहीं, मुस्लिम लड़की से प्यार में हुई दिल्ली के यश की हत्या: ऑपइंडिया से बोला परिवार- चाकुओं से गोदा, पड़ोसी बोलने को नहीं तैयार

‘खुद के लिए जीना एक आम कहानी है, दूसरों के लिए जीना इसी का नाम जिंदगानी है।‘

यह लाइन दिल्ली के गीता कॉलोनी के उस स्वागत द्वार पर लिखी हुई हैं यहाँ 27 जून 2025 की रात करीब 8 बजे 20 वर्षीय यश की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस का कहना है कि स्कूटी टकराने के कारण हुए विवाद के बाद युवक की हत्या हुई है। लेकिन परिजन बताते हैं कि यश एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता था, जिसकी सजा उसे अपनी जान देकर भुगतनी पड़ी। इस पूरे मामले की पड़ताल के लिए ऑपइंडिया की टीम गीता कॉलोनी पहुँची।

28 जून 2025 की दोपहर, जब हम दिल्ली के गीता कॉलोनी पहुँचे, तो वहाँ भारी संख्या में सुरक्षा बल के जवान नजर आए। आरएएफ के जवानों की तैनाती बता रही थी कि यहाँ माहौल तनाव भरा है। गली के बाहर लाइन से ऑटो खड़े हैं, प्रवेश करते ही बाएँ तरफ एक बड़ी मस्जिद है तो दाएँ ओर एक छोटा सा पार्क है, जो गंदगी से बदहाल है।

गली में करीब 150 मीटर अँदर जाने के बाद एक और गली में करीब 20 मीटर अंदर यश का छोटा सा मकान है। करीब 4 फीट चौड़ाई वाली अंधेरी गली में 40-50 की संख्या में महिलाएँ दोनों ओर चबूतरे पर बैठी हैं। जमीन पर तीन-चार चटाई बिछी हुई हैं, जिस पर थोड़ी देर पहले ही यश का शव रखा था।

कुछ एक महिलाएँ विलाप कर रहीं थी, तो शेष महिलाओं के चेहरे पर यश की हत्या के आरोपितों के खिलाफ गुस्सा दिख रहा था। इस बीच एक छोटा सा बच्चा(करीब 4 साल) हमसे स्वयँ बात करते हुए कहता है “मैं यश का भाई हूँ। यश को राजघाट ले गए हैं। उसको किसी ने चाकू मार दिया, वो अब इस दुनिया में नहीं है, उसे जलाने ले गए हैं। वो मेरे ऊपर वाली छत पर ही रहते थे, वो मुझे गेम खिलाते थे और मजाक करते थे।”

मोहल्ले की मुस्लिम लड़की से प्यार करता था यश

यश की माँ ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि मेरा लड़का अपने भाई को लेने के लिए गया था, इस बीच रास्ते में उसकी स्कूटी टकराने के कारण चार लड़के उसे मारने लगे। पहले बँदूक से धमकी दी, फिर उनमें से एक लड़के ने चाकू मार दिया। मेरा लड़का गुल्लो (मुस्लिम लड़की) से प्यार करता था। पास में बैठी एक महिला ने कहा, “यश ने ईद वाले दिन मुस्लिम लड़की को किसी और लड़के के साथ आपत्तिजनक अवस्था में बाथरूम में देख लिया था।”

आगे माँ कहती है कि लड़की मेरे बेटे से पैसे ऐंठती थी। उसने बेटे को बुलाकर दो हजार रुपए लिए और फिर बेटे को ही मरवाने की धमकी भी दी। माँ का दावा है कि आरोपित लड़की की बहन मुन्नी शाम को ही घर पर धमकी देकर गई थी कि आज तुम्हारा बेटा मर जाएगा। अब हमें इंसाफ चाहिए मेरे बेटे को मारने वाले लड़कों और मरवाने वाली (लड़की) सबको फाँसी होनी चाहिए।

पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद से हमारे यहाँ पुलिस तक नहीं आई और आरोपितों के घरों पर पुलिस पहरा दे रही है। पास में बैठी पड़ोस की महिला ने कहा, “हिंदू-मुसलमान घटना के कारण पुलिस नहीं आई और यहाँ फोर्स भेज दी है।”

यश हत्याकांड से इलाके में पसरा सन्नाटा

गीता कॉलोनी मिश्रित आबादी है। यश की हत्या के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। यश के घर के बाहर सांत्वना देने वालों का तांता लगा है, तो वहीं यश के घर से करीब 50 मीटर दूर आरोपित रेहान के घर और उसके आस-पास के 6-7 मुस्लिम घरों पर ताला लगा हुआ है। दरवाजे के बाहर कुछ ईंट-पत्थर भी पड़े हैं। जानकारी लेने के बाद पता चला कि यश की हत्या से गुस्साए परिवार के सदस्यों ने आरोपित के घर पर हमला बोला था, लेकिन इससे पहले ही आरोपित का परिवार घर छोड़कर फरार हो गया।

यश के पड़ोस में रहने वाली महिला डरते हुए कहती है कि अब इतना डर लगने लगा है कि पता नहीं कब क्या हो जाए। ऐसा मन होता है कि यहाँ से सबकुछ छोड़कर चले जाएँ। हर महीने इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं। आरोपित रेहान के घर के बाहर खड़ी एक अधेड़ उम्र की महिला कहती है कि पाँच महीने पहले मेरे दो बेटों को मार दिया था। आज तक कुछ नहीं हुआ।

पाँच बड़ी घटनाओं को अंजाम दे चुका है रेहान

इस बीच हमने आरोपित रेहान के आस-पास रहने वाले लोगों से बात की। पड़ोसियों की मानें तो रेहान और उसके साथी दिन में गोलगप्पे बेचने का काम और रात में अपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। मुस्लिम पड़ोसी के मुताबिक मुख्य आरोपित ने पिछले कुछ महीनों में पाँच बड़ी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया है और बेखौफ बाहर घूमता है। वजह पूछने पर बताते हैं कि इनको कोई कठोर सजा नहीं मिलती और न ही पुलिस का कोई डर रहता है।

दूसरे मुस्लिम पड़ोसी ने बताया कि जब से नए लड़के नशा करने लगे हैं, तब से कॉलोनी में इस तरह की वारदातें बढ़ चुकी हैं। एक तीसरे मुस्लिम पड़ोसी ने बताया कि ये लड़के पहले तो नशे का काम करते हैं और फिर अपराध करते हैं। कॉलोनी में रहने वाले मो. कासिम बताते हैं कि पुलिस वालों की कमी से ये सब हो रहा है। बच्चे नशे का कारोबार कर रहे हैं। इलाके में खतरा इतना है कि पेशाब करने से पहले भी चारों ओर देखना पड़ता है कि कोई चाकू मारकर न भाग जाए।

“आपसे बात करना आफत को गले लगाना है”

गली में नाई की दुकान पर बैठे मुस्लिम बुजुर्ग ने कहा हमें किसी बात का डर नहीं है। घटना कारित करने वाला, घटना करके जेल गया, यहाँ सब ठीक है। आरोपितों के बारे में पूछने पर हाथ जोड़कर बोले कि आगे पता कर लीजिए। सड़क किनारे मंदिर की सीड़ियों पर बैठे एक व्यक्ति ने हमसे बात करने से साफ मना कर दिया और कहा कि यहाँ बात करना आफत को गले लगाना है। वहीं पास में खड़े दो और लोगों ने बात करने से इनकार कर दिया।

नाबालिग ने चलाई थी यश पर गोली

दिल्ली पुलिस ने यश हत्याकांड में एक नाबालिग सहित तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि नाबालिग ने ही यश पर पहले गोली चलाई थी, लेकिन गोली नहीं लगने के बाद दूसरे ने यश पर चाकू से वार किया था। दरअसल, यश मुस्लिम लड़की से शादी करना चाहता था। फिलहाल यश इस दुनिया में नहीं है। उसके घर वाले और इलाके के लोगों की एक ही माँग है, हत्यारों को सजा मिले और पीड़ित को न्याय।

अजीब नाली वाला घर, झील में अक्षर और सपना… ऐसे हुई थी 14वें दलाई लामा की खोज: अब पुनः अवतार का किया ऐलान, कहा- ‘आजाद देश’ में होगा जन्म; भड़का चीन बोला- हम करेंगे डिसाइड

तिब्बती बौद्ध समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु दलाई लामा ने ऐलान किया है कि उनका पद उनके निर्वाण के बाद भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा है कि उनके जाने के बाद भी दलाई लामा का पद जारी रहेगा और नए दलाई लामा की खोज उनका ट्रस्ट करेगा। उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया है कि उनका पुनः अवतार किसी ‘आजाद देश’ में होगा। दलाई लामा ने यह घोषणा अपने 90वें जन्मदिन से पहले की हैं। दलाई लामा के बयान पर चीन बौखला भी गया है।

दलाई लामा ने क्या कहा?

दलाई लामा द्वारा बुधवार (2 जुलाई, 2025) को इस संबंध में अपना बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने कहा, “24 सितंबर 2011 को तिब्बती आध्यात्मिक परंपराओं के प्रमुखों की एक बैठक में, मैंने तिब्बत में और उसके बाहर रहने वाले साथी तिब्बतियों, तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायियों के सामने एक बयान दिया था। इसमें मैंने पूछा था कि क्या दलाई लामा की पदवी जारी रहनी चाहिए। 1969 में ही मैंने स्पष्ट कर दिया था कि यह सम्बन्धित लोगों को तय करना होगा कि यह जारी रहे या नहीं।”

उन्होंने 2011 में बताया था, “जब मैं लगभग 90 वर्ष का हो जाऊँगा तो मैं तिब्बती बौद्ध परंपराओं के लामाओं, तिब्बती जनता और तिब्बती बौद्ध धर्म का पालन करने वाले अन्य लोगों से विचार करूँगा कि दलाई लामा की संस्था जारी रहे या नहीं।”

दलाई लामा ने इस बयान में कहा कि उन्होंने कोई सार्वजनिक चर्चा नहीं की है कि लेकिन उनसे अलग-अलग जगह के तिब्बतियों और तिब्बती धर्म गुरुओं और यहाँ तक चीन के लोगों ने यह संस्था बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कह़ा, ” इन सभी अनुरोधों के अनुसार, मैं पुष्टि कर रहा हूँ कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी।”

सर्वोच्च तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु ने यह भी स्पष्ट किया कि अगला दलाई लामा कौन होगा, इसकी प्रक्रिया 2011 में ही तय कर ली गई थी। उन्होंने कहा कि नए दलाई लामा का चुनाव करने की जिम्मेदारी केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट के लोगों पर होगी। यह दलाई लामा का कार्यालय है।

दलाई लामा ने कहा कि इस प्रक्रिया में और कोई दखल नहीं दे सकता है। उन्होंने नए दलाई लामा के चुनाव को लेकर यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी ‘आजाद देश’ में पैदा होंगे। दलाई लामा ने यह ऐलान 6 जुलाई, 2025 को उनके 90वें जन्मदिन से पहले हुए हैं।

दलाई लामा के ऐलान पर चीन भड़का

तिब्बत से बौद्धों और दलाई लामा को बाहर करके 1950 के दशक में कब्जा करने वाला चीन इस ऐलान के बाद भड़क गया है। उसने इसको लेकर एक बयान जारी किया है। चीन ने कहा है कि वर्तमान दलाई लामा के उत्तराधिकारी की नियुक्ति को चीनी सरकार से अनुमति लेनी होगी।

चीन ने यह भी कहा है कि नए दलाई लामा की पहचान भी उसी के यहाँ की जाएगी। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, “दलाई लामा, पंचेन लामा और अन्य महान बौद्ध हस्तियों के पुनर्जन्म का चयन सोने के कलश से लॉटरी निकालकर किया जाना चाहिए और चीन की केन्द्रीय कमिटी द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।”

चीन ने एक और बयान जारी किया है जिसमें उसने एक एक्सपर्ट ली देचेंग के हवाले से कहा है कि कभी भी पवित्र बौद्ध पदवियों का पुनर्जन्म उनके जीवित रहते डिसाइड नहीं होता। उसने कहा है कि यह दलाई लामा के मामले में सीधे सोने के बॉक्स से लॉटरी निकाल कर जारी होता है।

दलाई लामा को चुनने और उनकी नियुक्ति का क्या इतिहास रहा है, इसका पूरा इतिहास बखान करते हुए चीन ने 14वें और वर्तमान दलाई लामा का विरोध किया है।

चीन को दलाई लामा से क्या समस्या?

वर्तमान दलाई लामा 1950 के बाद तिब्बत से भारत आ गए थे। उनके साथ हजारों तिब्बती भी भारत आ गए थे। दलाई लामा तिब्बत के प्रमुख माने जाते हैं। लेकिन चीन के कब्जे खिलाफ जब तिब्बती सेना नहीं लड़ पाई, तो उन्होंने भारत आने का फैसला लिया और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार बनाई।

भारत आते दलाई लामा (फोटो साभार:Dalailama.com)

वह तिब्बत को चीन का हिस्सा नहीं मानते और कम्युनिस्ट सरकार की तिब्बत की संस्कृति मिटाने के प्रयासों के खिलाफ खड़े रहे हैं। तिब्बत की बौद्ध जनता का बड़ा हिस्सा उनके वहाँ से आने के 6-7 दशकों के बाद भी उनके प्रति समर्पित हैं। चीन, तिब्बत को अपना हिस्सा बताता है और दलाई लामा उसका विरोध करते हैं।

दलाई लामा ने चीन की नास्तिक सरकार से समझौता करने से इनकार भी कर दिया था। ऐसे में वहाँ की कम्युनिस्ट सरकार उनके प्रति जहर उगलते रहती है। दलाई लामा के प्रति चीन की सरकार अपमानजनक शब्द भी उपयोग करती है। तिब्बत के लोगों को अपने पाले में करने के लिए वह दलाई लामा के विरोध में खड़ी है।

चीन ने तिब्बत में अपना प्रभाव जमाने को एक फर्जी पंचेन लामा भी नियुक्त किया हुआ है। पंचेन लामा तिब्बती बौद्ध धर्म में दूसरी सबसे बड़ी पदवी है। वर्ष 1995 में 6 वर्ष के एक बच्चे को दलाई लामा ने 11वां पंचेन लामा घोषित किया था। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने उन्हें किडनैप कर लिया और अपना आदमी उनकी जगह नियुक्त कर दिया।

दलाई लामा की नियुक्ति के मामले में भी चीन यही करना चाहता था लेकिन उन्होंने अब पुनः अवतार की बात करके चीन की नींद उड़ा दी है। इसलिए वह अलग-अलग तरह से प्रोपेगेंडा कर रहा है और उन्हें झुठलाने का प्रयास कर रहा है।

कैसे खोजा जाता है नया दलाई लामा?

तिब्बती बौद्ध धर्म में अब तक 14 दलाई लामा हुए हैं। सारे दलाई लामा बोधिसत्व का अवतार माने जाते हैं। दलाई लामा को खोजने के लिए एक प्रक्रिया पहले से ही निर्धारित है। यह प्रक्रिया दलाई लामा की मृत्यु के बाद चालू होती है। मृत्यु के बाद दुख का एक काल होता है, जिसके बाद नए दलाई लामा को ढूंढा जाता है।

यह काम तिब्बती बौद्ध धर्म के बड़े धर्मगुरु या लामा करते हैं। उनका एक समूह इसके लिए संकेतों का सहारा लेते हैं। नए दलाई लामा की तलाश के लिए, निवर्तमान दलाई लामा के अंतिम संस्कार के दौरना उनके सिर की दिशा, उनकी मृत्यु के समय उनके देखने की दिशा समेत तमाम ऐसे संकेत इस्तेमाल किए जाते हैं।

13वें दलाई लामा (फोटो साभार: The treasury of lives)

इसके बाद उस दिशा में तलाश के लिए बौद्ध धर्मगुरु और बाकी विद्वान जाते हैं। सामान्यतः, इन दिशाओं में और संकेत मिलते हैं तथा इसके बाद कुछ बच्चों को इस प्रक्रिया में सेलेक्ट किया जाता है। हालाँकि, असल दलाई लामा पहचानने के लिए मृत हुए दलाई लामा से जुड़ी बातें पूछी जाती हैं और उसने जुड़ी चीजें दिखाई जाती हैं।

बौद्ध धर्मगुरु पूरी संतुष्टि के बाद ही यह ऐलान करते हैं कि नए दलाई लामा का आगमन हो चुका है। दलाई लामा के मिलने के बाद उनकी शिक्षा दीक्षा होती है और उनकी ताजपोशी भी होती है। वर्तमान दलाई लामा को वर्ष 1937 में तिब्बत में ऐसी ही एक प्रक्रिया में ढूँढा गया था।

कैसे ढूंढे गए थे वर्तमान दलाई लामा?

वर्तमान दलाई लामा का जन्म 1935 में हुआ था। उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, दलाई लामा के माता-पिता छोटे किसान थे जो ज़्यादातर जौ, अनाज और आलू उगाते थे। उनके पिता मध्यम बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते थे।

बच्चे के तौर पर दलाई लामा

दलाई लामा के अनुसार, “मुझे याद है कि एक बार मैंने उनकी मूंछें खींची थीं और मेरी इस हरकत के लिए मुझे बहुत मारा गया था… फिर भी वे एक दयालु व्यक्ति थे और उन्होंने कभी किसी से द्वेष नहीं रखा।” दलाई लामा 7 भाई-बहन थे।

दलाई लामा बताते हैं, “किसी को भी इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मैं एक साधारण बच्चे के अलावा कुछ और हो सकता हूँ। यह अकल्पनीय था कि एक ही परिवार में एक से ज़्यादा तुल्कु (लामा) पैदा हो सकते हैं और निश्चित रूप से मेरे माता-पिता को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मुझे दलाई लामा घोषित किया जाएगा।”

उनकी तलाश के लिए 1937 में एक पार्टी भेजी गई थी। इस दौरान तिब्बती सरकार द्वारा दलाई लामा के नए अवतार को खोजने के लिए भेजा गया एक खोज दल कुंबुम बौद्ध मठ में पहुँचा। यह लोग कई संकेतों के आधार पर यहाँ पहुँचे थे।

इनमें से एक उनके पूर्ववर्ती, 13वें दलाई लामा की मौत के बाद मिला था। 13वें दलाई लामा थुप्तेन ग्यात्सो की शव ममीकरण प्रक्रिया के दौरान, सिर दक्षिण की ओर से उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ा हुआ पाया गया। इसके बाद एक वरिष्ठ को एक स्वप्न आया।

इस सपने में उन्होंने दक्षिणी तिब्बत में पवित्र झील, ल्हामोई ल्हात्सो के पानी में तिब्बती अक्षरों आह, का और मा को तैरते हुए देखा। उन्हें इसके बाद एक तीन मंजिला इमारत और एक रास्ता भी दिखा। एक और सपने में उन्हें अजीब सी नालियों वाला एक खर दिखा।

यह पार्टी सपने में दिखे पहले अक्षर ‘अह’ के चलते आमदो राज्य गई। इसके बाद दूसरे अक्षर ‘क’ के चलते कुम्बुम मठ गई। इसके बाद वह आसपास के गाँवों में गए जहाँ उन्हें वर्तमान दलाई लामा का घर दिखा जो अजीब तरह की नालियों वाला था।

दलाई लामा, बौद्ध मठ में ले जाए जाने के बाद

इस सर्च पार्टी में शामिल लोगों ने इसके बाद वर्तमान दलाई लामा, जो तब 2 वर्ष के थे, को ध्यान से देखा और उनकी हरकतें नोटिस की। कुछ दिन बाद यह सर्च पार्टी वापस आई और उन्होंने 13वें दलाई लामा की चीजें भावी दलाई लामा को दिखाई। उन्होंने तुरंत ही यह पहचान ली, और कहा कि वह उनके हैं।

इसके कुछ वर्षों के बाद उन्हें ल्हासा ले जाया गया और बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ दी गईं।

पायलट, TS सिंहदेव, सिंधिया… ‘CM इन वेटिंग’ वाली लाइन में DK शिवकुमार भी शामिल: कर्नाटक में खूब इंतजार के बाद भी नहीं मिली मुख्यमंत्री की कुर्सी, बोले- मेरे पास और ऑप्शन भी क्या?

कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कर दिया है कि वह पूरे पाँच साल तक अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे। इस बयान ने शिवकुमार और उनके समर्थकों के अरमानों पर पानी फेर दिया। शिवकुमार ने मजबूरी में सिद्धारमैया का साथ देने की बात कही, लेकिन उनके बयान में छिपी निराशा साफ झलक रही थी।

चिक्कबल्लापुर में मीडिया से बातचीत में कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सीएम सिद्धारमैया के बारे में कहा, “मेरे पास और क्या चारा है? मुझे उनके साथ खड़ा होना है और उनका साथ देना है। मुझे इसमें कोई ऐतराज नहीं है। पार्टी हाईकमान जो कहेगा, जो फैसला करेगा, वो पूरा होगा… मैं अभी इस पर कुछ बोलना नहीं चाहता। लाखों कार्यकर्ता इस पार्टी के साथ हैं।”

डीके शिवकुमार ने कहा कि मेरे पास और कोई रास्ता नहीं, मुझे उनके साथ खड़ा होना ही है। यह बयान उनकी उस हताशा को दिखाता है, जो बार-बार हाईकमान के फैसलों से उपज रही है। दरअसल, कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सत्ता को मजबूत करने में शिवकुमार की मेहनत को कोई नकार नहीं सकता, फिर भी उन्हें बार-बार इंतजार करने को कहा जा रहा है। क्या वह हमेशा ‘सीएम इन वेटिंग’ बने रहेंगे या कोई बड़ा सियासी कदम भी उठा सकते हैं?

सिद्धारमैया का दावा और शिवकुमार की मजबूरी

सिद्धारमैया ने पत्रकारों से बातचीत में दो टूक कहा, “हाँ, मैं मुख्यमंत्री बना रहूँगा। आपको क्यों शक है?” उन्होंने बीजेपी और जेडी(एस) पर नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के बयान के बाद कहा, “मुख्यमंत्री के सामने मेरा कोई सवाल ही नहीं उठता। मैंने किसी से मेरे पक्ष में बोलने को नहीं कहा।”

डीके ने यह भी जोड़ा कि कॉन्ग्रेस हाईकमान का जो भी फैसला होगा, वह उसे मानेंगे। लेकिन उनके इस बयान में वह जोश और आत्मविश्वास नहीं दिखा, जो पहले उनके भाषणों में झलकता था। यह साफ है कि हाईकमान ने एक बार फिर सिद्धारमैया को प्राथमिकता दी है और शिवकुमार को इंतजार करने को कहा गया है।

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद शिवकुमार को उम्मीद थी कि उन्हें सीएम की कुर्सी मिलेगी। उनकी मेहनत और संगठन कौशल ने पार्टी को 135 सीटें दिलाई थीं। सूत्रों की मानें तो उस वक्त ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की बात हुई थी, जिसमें सिद्धारमैया और शिवकुमार बारी-बारी से सीएम बनते। लेकिन अब सिद्धारमैया ने साफ कर दिया है कि वह पूरे कार्यकाल तक कुर्सी नहीं छोड़ेंगे और हाईकमान ने भी इस पर मुहर लगा दी है।

जातीय समीकरण पर भी हाई कमान का ध्यान

कर्नाटक की सियासत में जाति का एंगल हमेशा से अहम रहा है। डीके शिवकुमार ताकतवर वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जो कर्नाटक की राजनीति में बड़ा प्रभाव रखता है। उनके समर्थकों का मानना है कि पार्टी ने उनके साथ नाइंसाफी की है। हाल ही में वोक्कालिगा समुदाय के कुछ धर्मगुरुओं ने भी शिवकुमार के पक्ष में बयान दिए थे। दूसरी तरफ सिद्धारमैया पिछड़े वर्ग (कुर्मी) से हैं, और उनका सामाजिक आधार भी मजबूत है। कॉन्ग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को समर्थन देकर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया।

कॉन्ग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया था कि 100 से ज्यादा विधायक शिवकुमार को सीएम बनाने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस को 2028 में सत्ता में वापसी करनी है, तो शिवकुमार को मौका देना होगा। लेकिन हाईकमान ने हुसैन को नोटिस थमाकर चुप करा दिया। यह दिखाता है कि पार्टी में अनुशासन की आड़ में शिवकुमार के समर्थकों को दबाया जा रहा है। कर्नाटक विधानसभा में कॉन्ग्रेस के 138 विधायक हैं, जिसमें से करीब 100 शिवकुमार के साथ माने जाते हैं। फिर भी हाईकमान ने सिद्धारमैया को प्राथमिकता दी।

हाईकमान की रणनीति में बहाना बना बिहार विधानसभा चुनाव

कॉन्ग्रेस हाईकमान ने इस पूरे मामले में सधी हुई चाल चली। सूत्रों के मुताबिक, बिहार चुनाव को सिद्धारमैया को बनाए रखने का बहाना बनाया गया। हाईकमान को डर है कि सिद्धारमैया को हटाने से बिहार में पिछड़े वर्ग के बीच गलत संदेश जाएगा और बीजेपी इसे भुनाएगी। साथ ही शिवकुमार के खिलाफ चल रही सीबीआई जाँच को भी फैसले में शामिल किया गया। 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनकी जेल यात्रा को याद दिलाकर कहा गया कि अगर वह सीएम बने, तो बीजेपी जाँच एजेंसियों को और सक्रिय कर सकती है, जिससे कॉन्ग्रेस को नुकसान हो सकता है।

यही नहीं, मल्लिकार्जुन खरगे ने सिद्धारमैया के पक्ष में फैसला लेते हुए यह भी सुनिश्चित किया कि उनके बेटे प्रियांक खरगे का नाम भी सीएम की दौड़ में बना रहे। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया ने शिवकुमार के सामने प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ने की शर्त रखी थी, लेकिन शिवकुमार ने इसे ठुकरा दिया। इसके बाद गेंद हाईकमान के पाले में गई और खरगे ने यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया।

क्या बागी बनेंगे डीके शिवकुमार?

शिवकुमार की स्थिति एमपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया, छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव और राजस्थान में सचिन पायलट जैसी है, जिन्हें भी कॉन्ग्रेस ने लंबे समय तक इंतजार कराया। सिंधिया ने आखिरकार बगावत कर बीजेपी का दामन थाम लिया, जबकि पायलट ने धैर्य रखा। हालाँकि शिवकुमार ने अब तक तो कॉन्ग्रेस के प्रति वफादारी दिखाई है, लेकिन उनके समर्थकों में बेचैनी बढ़ रही है। वोक्कालिगा समुदाय का गुस्सा और उनकी अपनी महत्वाकांक्षा देर-सबेर कोई बड़ा सियासी तूफान ला सकती है।

क्या शिवकुमार बगावत करेंगे? यह संभावना कम लगती है, क्योंकि वह कॉन्ग्रेस के लिए कर्नाटक में एक मजबूत चेहरा हैं। लेकिन अगर हाईकमान बार-बार उनकी अनदेखी करता रहा, तो उनके धैर्य की भी सीमा टूट सकती है। फिलहाल उन्होंने हाईकमान के फैसले को स्वीकार कर लिया है, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि यह शांति ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।

अभी आगे बहुत कुछ होना बाकी

कर्नाटक की सियासत में यह ड्रामा अभी थमा नहीं है। सिद्धारमैया की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित है लेकिन शिवकुमार और उनके समर्थकों की बेचैनी बनी रहेगी। अगर कॉन्ग्रेस 2028 के चुनाव में कमजोर प्रदर्शन करती है, तो शिवकुमार के लिए मौका बन सकता है। लेकिन अगर हाईकमान ने फिर से उनकी अनदेखी की, तो कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की एकता पर सवाल उठ सकते हैं। भविष्य में क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल डीके शिवकुमार को एक बार फिर इंतजार की सजा मिली है।

लैंड फॉर जॉब स्कैम में CBI ने लालू यादव को बताया ‘किंगपिन’, तो RJD नेता ने बता दिया ‘भगवान’ : भोलेनाथ, श्रीराम और परशुराम से कर दी तुलना

लालू प्रसाद यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सीबीआई ने उन्हें लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले का ‘किंगपिन’ बताया, जिसमें उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप को भी ‘लाभार्थी’ कहा गया। दूसरी तरफ, RJD की नेत्री और MLC उर्मिला ठाकुर ने लालू की तुलना भगवान शिव, भगवान राम और भीष्म पितामह से की और उन्हें ‘कलियुग का भगवान’ बता दिया।

सीबीआई ने लालू यादव को बताया घोटाले का किंगपिन

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव को लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है। सीबीआई ने कोर्ट में मंगलवार (1 जुलाई 2025) को दलील दी कि लालू ने रेलवे में नौकरियाँ देने के बदले जमीन ली।

लालू की पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप, बेटी मीसा भारती को भी इस घोटाले का ‘लाभार्थी’ बताया गया। सीबीआई का कहना है कि लालू के निजी सचिव ने उनके इशारे पर नौकरियों के लिए चुने गए लोगों की लिस्ट दी थी। दो गवाहों ने भी दावा किया कि लालू ने उन पर दबाव डाला था।

सीबीआई ने 78 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें लालू और उनके परिवार के लोग शामिल हैं। अब कोर्ट में लालू और अन्य आरोपी अपनी सफाई पेश करेंगे। इसके बाद कोर्ट फैसला करेगा कि मुकदमा शुरू होगा या नहीं। सीबीआई ने पहले भी लालू के खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल की थीं, लेकिन अब सभी रेलवे जोन को मिलाकर अंतिम चार्जशीट दाखिल की गई है।

RJD MLC ने लालू को बताया ‘कलयुग का भगवान’

मुजफ्फरपुर में RJD की MLC उर्मिला ठाकुर ने लालू यादव को ‘कलियुग का भगवान’ कहकर सबको चौंका दिया। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, गायघाट में बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति अनावरण के कार्यक्रम में उन्होंने लालू की तुलना भगवान शिव, भगवान राम और भीष्म पितामह से की।

उर्मिला ने कहा कि जैसे राम का स्थान कोई नहीं ले सकता, वैसे ही लालू का स्थान भी कोई नहीं ले सकता। उन्होंने लालू को राजनीति का भीष्म पितामह और दुनिया का सबसे बड़ा समाजवादी नेता बताया।

उर्मिला ने यह भी कहा कि लालू ने ही उन्हें MLC बनाया, वरना उनके पिता तो 5 किलो अनाज पर दाढ़ी बनाते थे। उन्होंने तेजस्वी की भी तारीफ की और कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि 1990 से पहले सत्ता में रहने वाले अब कभी नहीं आएंगे। इस बयान पर बिहार के सियासी दलों में हलचल मच गई है।

हार्ट अटैक पर बंद हो अब ये भसड़,कोविड वैक्सीन के कारण नहीं हो रहीं अचानक मौतें: ICMR-AIIMS की स्टडी ने बताया- लाइफस्टाइल जैसे कई फैक्टर जिम्मेदार

हाल ही में बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की महज 42 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से ही मृत्यु की बात दुनिया भर में फैली। इसके अलावा पंजाब में क्रिकेट खेल रहे एक खिलाड़ी की भी पिच पर ही हार्ट अटैक से मौत की खबर भी सामने आई। इसके बाद कोरोना की वैक्सीन की वजह से हार्ट अटैक और अचानक मौतों के मामलों की चर्चा फिर से शुरू हो गई।

हालाँकि बुधवार (2 जुलाई 2025) को PIB पर एक रिपोर्ट जारी हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि ICMR और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की ओर से की गई स्टडी में ये पता चला है कि भारत में COVID-19 टीके काफी सुरक्षित और प्रभावी रहे हैं। इनके दुष्प्रभावों की कोई भी बात बहुत कम देखने को मिली है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, अचानक हृदयगति रुकने से हुई मौतें आनुवंशिक परेशानियों, आधुनिक जीवनशैली, पहले से मौजूद बीमारियाँ और कोविड के बाद हुई जटिलताओं में से कई कारणों से हो सकती हैं।

ICMR और NCDC ने 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं में अचानक होने वाली मौतों के कारणों को समझने के लिए रिसर्च शुरू की है। इसके तहत उन्होंने पहले के और वर्तमान जाँचों को भी शामिल किया गया। इसके तहत 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 47 टर्शियरी अस्पतालों में अध्ययन किया।

इसके तहत ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NII) ने ‘भारत में 18-45 वर्ष की आयु के वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों से जुड़े कारक’ शीर्षक पर आधारित एक स्टडी की।

मई से अगस्त 2023 तक इस स्टडी में उन लोगों को शामिल किया गया जो सामने से स्वस्थ दिख रहे थे लेकिन अक्टूबर 2021 और मार्च 2023 के बीच अचानक उनकी मृत्यु हो गई। स्टडी में ये बात निकल कर सामने आई कि कोविड-19 वैक्सीन से युवाओं और वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों का जोखिम नहीं बढ़ता है।

इसी तरह ICMR की वित्तीय सहायता के साथ AIIMS ने भी एक अध्ययन किया जा रहा है। इसका विषय ‘युवाओं में अचानक होने वाली मौतों के कारणों का पता लगाना’ रखा गया है। इस अध्ययन के शुरुआती विश्लेषण से पता चला कि युवाओं में अचानक होने वाली मौतों का असल कारण हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ने से होता है।

इन मौतों के बारे में सबसे अहम बात ये है कि हार्ट अटैक के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। यानी वैक्सीन से जुड़े किसी तरह के बदलाव वाले पैटर्न नहीं देखने को मिला। हालाँकि मरने वालों में आनुवंशिक बदलाव जरूर देखे गए हैं। ये अध्ययन अब भी जारी है। इसमें अन्य पहलू भी सामने आ सकते हैं।

मौतों पर फैलाई गई भ्रामक बातें

2019 में शुरू हुई कोरोना महामारी में दुनिया भर में अपना कहर बरपाया। कई देश अब तक कोरोना के नए वेरिएंट और उसकी भयावहता से जूझ रहे हैं।

कोरोना के मामले शुरू होने के बाद इससे बचाव के लिए वैक्सीन तैयार की गई जिसके कारण लाखों लोगों की जान भी बची। इस बीच 2021 से कई युवाओं की अचानक मौत होने लगी। ज्यादातर मामलों में कहा गया कि मौत का कारण हार्ट अटैक है।

धीरे-धीरे इन मौतों के लिए कोरोना वैक्सीन को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा। प्रोपेगेंडा फैलाने वाले पत्रकारों समेत ज्यादातर लोगों ने यह मान लिया कि कोरोना वैक्सीन लगाए जाने के बाद से ही इन मौतों में इजाफा में देखा गया है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि एक बड़े पैमाने पर डॉक्टर्स और रिसर्चर्स की टीम बनाई जानी चाहिए और इस बात का सर्वेक्षण और रिसर्च किया जाना चाहिए कि कोरोना की वैक्सीन लगाए जाने के बाद लोगों के शरीर में क्या परिवर्तन आए हैं।

विशेषज्ञों ने कहा- बिना वैज्ञानिक आधार की बातें

प्रोपेगेंडा फैला रहे लोगों के लिए वैज्ञानिकों की ये स्टडी एक तमाचा है। इस स्टडी के अधार पर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के लिए बचावरोधी वैक्सीन को अचानक होने वाली मौतों से जोड़ने वाले बयान झूठे और भ्रामक हैं। इनके बयानों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उमके कारण आम लोगों का भरोसा वैक्सीन पर कम हो रहा है।

इसी बीच कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी astrazeneca ने 2024 में ब्रिटिश कोर्ट में यह कबूल किया कि उनकी वैक्सीन के साइड इफेक्ट हैं और इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक भी हो सकता है। इसके बाद तो मानो कॉविड वैक्सीन के नाम पर लोगों को डराए जाने का खेल चरम पर आ गया।

कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक न्यूज़ क्लिप साझा करते हुए मोदी सरकार पर जनता की जान के साथ सौदा किए जाने का आरोप लगा दिया गया। ट्वीट में लिखा गया कि मोदी ने 52 करोड़ का चंदा लेकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया है।

पोस्ट में लिखा गया कि चंद पैसों के लिए देश की जनता की जान को जोखिम में डालने वाले दरिंदों को कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही उनकी असली जगह पहुँचा जाएगा।

इस तरह की बातें लिखकर लोगों के मन में भी कोरोना वैक्सीन को लेकर लगातार जहर बोया गया और उन्हें विश्वास दिला दिया गया कि उन्हें लगी वैक्सीन में ही कुछ गड़बड़ी है।

कोरोना महामारी के दौरान इसी वैक्सीन ने लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में निराधार बातों पर रिपोर्ट और दावे दिखा कर देश में वैक्सीन को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ाने से भविष्य की स्वास्थ्य आधारित किसी भी तरह की विपदा के लिए समस्याएँ और अविश्वास जैसी परिस्थितियाँ हो सकती है।

ब्रेनवॉश ऐसा कि 3 महिलाओं का रेप करने वाले पादरी की ‘दुल्हन’ बनने के लिए माँ-बाप को दुत्कारा, सुबह 5 बजे उठकर 7 घंटे पढ़ती थी बाइबिल: कहानी एक ‘कल्ट ब्राइड’ की

लिज कैमरून एक ऐसी लेखिका जिनकी किताब ‘कल्ट ब्राइड हाउ आई वाज ब्रेनवाश्ड – एंड हाउ आई ब्रोक फ्री’ एक बार फिर सुर्खियों में है। चैनल 7 ने स्पॉटलाइट कार्यक्रम के अंतर्गत ‘द कल्ट नेक्स्ट डोर’ नाम से उनकी कहानी पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है।

दरअसल उनकी कहानी एक सच्चाई है जो 18 साल की उम्र में लिज कैमरून के ईसाइयत का प्रचार करने वाले ग्रुप और पादरी के चंगुल में फँसने और उसके निकलने को मार्मिक तरीके से बयाँ करती है।

शॉपिंग के दौरान दक्षिण कोरियाई लोगों से मिलीं

2011 में जब लिज 18 साल की शर्मीली लड़की थीं और ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के शॉपिंग मॉल में घूम रही थी। उनकी मुलाकात ईसाइयत का प्रचार करने वाली महिला यूजून से हुई। यूजून दक्षिण कोरिया से एक ग्रुप के साथ आई थी। ईसाइयत का प्रचार करने वाली संस्था से ये ग्रुप जुड़ा था। ये संस्था 70 देशों में ईसाइयत का प्रचार- प्रसार करता था। यूजून ने बहुत प्यार से लिज से बातें की और सामान्य से सवाल किए, मसलन तुम्हें ऑस्ट्रेलिया पसंद है या नहीं। अपने धर्म में आस्था है या नहीं । यूजून ने मेल आईडी ली और बातचीत करने लगी।

एक दिन यूजून ने कैमरून को चाय पर बुलाया । इस दौरान उसकी दोस्त भी मौजूद थीं। दोनों ने मिलकर बहुत प्यार से कैमरून से बातें की और खाना भी खिलाया। कैमरून उन दोनों से इंप्रेस हो गईं। अब कैमरून का यूजून के घर आना-जाना बढ़ गया। वह बाइबिल सेशन में भी जाने लगी।

कैमरून के मुताबिक, “मैं काफी खुश रहने लगी। कुछ महीनों में ही मैं सुबह 5 बजे उठ कर प्रार्थना करना और 6 बजे से उनके घर पर घंटों बाइबिल पढ़ने लगी।”

कैमरून के व्यवहार में आए बदलाव को माँ ने नोटिस किया और उससे बातें भी की।

कैसे ब्रेन वॉश किया गया?

धीरे-धीरे ग्रुप का रंग कैमरून पर चढ़ने लगा। उसका ब्रेनवॉश यहाँ तक किया गया कि यौन शोषण के लिए सजा पाए पादरी जोशुआ को वो मसीहा मानने लगीं। पादरी उस वक्त तीन महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में दक्षिण कोरिया की जेल में बंद था।

कैमरून को ये बताया गया कि पादरी जोशुआ को गलत तरीके से कैद किया गया है। कैमरून को पादरी जोशुआ या चर्च से जुड़े सवाल पूछने की इजाजत नहीं थी। उसे ‘समझाने’ के लिए कई लड़कियाँ आती थीं।

2011 की बात है जब चर्च में ब्राइड फैशन शो का आयोजन हुआ। इसमें कैमरून ने भी हिस्सा लिया। कुछ दिनों बाद जेल से पादरी जोशुआ का खत आया जिसमें कहा गया कि पादरी कैमरून के प्यार करते हैं।

चर्च और संस्था में ऐसा माहौल था कि पादरी के पास जाना बहुत ‘बड़ी बात’ मानी जाती थी। ऐसी लड़कियों को ‘खास ब्राइडेल’ कहा जाता था। कैमरून को भी खुद पर गर्व हुआ। वह अब पादरी की खास ब्राइडेल बनने का सपना देखने लगीं।

चर्च द्वारा आयोजित फैशन शो ( फोटो साभार- द सन)

नवंबर आते-आते कैमरून पूरी तरह चर्च के चंगुल में फँस चुकी थी। उसने अपने माता-पिता का घर छोड़ दिया और ईसाइयत का प्रचार करने वाले दक्षिण कोरियाई ग्रुप के साथ रहने लगी। अब चर्च ही कैमरून की जिंदगी बन गई। दोस्तों से उसने बात करना भी बंद कर दिया।

पिता से मिलने नहीं दिया गया

जनवरी 2012 में कैमरून की माँ उसे समझाने और चर्च पर हुए नए रिसर्च की जानकारी देने के लिए उससे मिलीं। कैमरून डर गई लेकिन फिर ग्रुप ने उनका ब्रेनवॉश कर दिया। इसके बाद जब पिता कैमरून से मिलने आए तो उसे छुपा कर भगा दिया गया।

पहली बार पादरी जोशुआ से मिलीं कैमरून

कुछ सप्ताह बाद कैमरून अपने ग्रुप के साथ दक्षिण कोरिया के जेल में बंद पादरी जोशुआ से मिलने पहुँची। इस दौरान वो काफी नर्वस थी।

कैमरून के मुताबिक, “अचानक पादरी जोशुआ पहुँचा। उन्होंने कहा कि वो सबसे मिलकर काफी खुश हैं। इस दौरान मुझसे ‘आई लव यू’ कहा। लेकिन मैं उनसे किसी तरह का प्यार महसूस नहीं कर पा रही थी।”

पादरी ने सेक्स करने को कहा

कैमरून वापस आई तो उसे पादरी का खत मिला। उसे पादरी ने सेक्स करने के लिए आमंत्रित किया था। कैमरून मान गई। वह कहती हैं कि पादरी के साथ सेक्स के बाद उन्हें बुरा नहीं लगा, क्योंकि मसीहा के साथ सबकुछ ‘पवित्र’ था। इसी तरह कई दिन बीत गए।

कैमरून कहती हैं कि वो खुद को फिट रखने के लिए व्यायाम करने लगीं। ज्यादा व्यायाम करने, कम खाने और ज्यादा काम करने की वजह से वह बीमार पड़ गईं। कैमरून का काफी वजन घट गया। जनवरी 2012 में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और वो इटिंग डिसऑर्डर का शिकार हो गई।

माँ ने मुझे बचाया- कैमरून

कैमरून कहती हैं कि माँ ने चर्च के बजाय मुझे अस्पताल से छुट्टी दिलवा कर घर ले गईं और मनोचिकित्सक से संपर्क किया।

दो दिन तक मनोचिकित्सक ये बताते रहे कि कैसे पादरी की संस्था ने उसका ब्रेनवॉश किया? कैसे वो लोग रणनीति बना कर लोगों को बरगलाते हैं? कैमरून को सच का पता चलने पर समझ में आया कि पादरी जोशुआ यानी जंग म्युंग-सोक तीन महिलाओं के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के लिए जेल में बंद था।

कैमरून के मामले के उजागर होने और आरोप साबित होने के बाद 2023 में जंग म्युंग-सोक को रेप और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया और उसे 23 साल और जेल की सजा हुई।

कैमरून को एहसास हुआ कि उन्हें कितना धोखा दिया गया था

2013 में पादरी जोशुआ के चंगुल से छूट कर धीरे-धीरे कैमरून अपने जीवन में आगे बढ़ने लगीं। कार्यक्रमों में जाकर जागरूकता फैलाना, दूसरे पीड़ितों की मदद करना उनके जीवन का मकसद बन गया। लिज कैमरून फिलहाल कैनबरा में रहती हैं। वो वकील भी हैं साथ ही मनोविज्ञान की डिग्री की पढ़ाई कर रही हैं।

चैनल 7 ने स्पॉटलाइट कार्यक्रम के अंतर्गत ‘द कल्ट नेक्स्ट डोर’ नाम से उनकी कहानी पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है। उसको फिल्माने के लिए 2023 में कैमरून दक्षिण कोरिया गई। लिज इन दिनों कट्टरपंथियों का खुलासा, लोगों का ब्रेनवॉश करने के तरीके को दुनिया को बता रही हैं।

कर्नाटक के वाल्मीकि फंड घोटाले की CBI करेगी पूरी इन्वेस्टीगेशन, हाई कोर्ट ने दिया आदेश: कहा- निष्पक्ष जाँच के लिए किया ट्रांसफर, कॉन्ग्रेस के मंत्री को देना पड़ा था इस्तीफ़ा

कर्नाटक में हुए वाल्मीकि फंड घोटाले की पूरी जाँच अब CBI करेगी। अभी तक यह जाँच कर्नाटक की ही SIT के पास थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह आदेश भाजपा नेताओं की याचिका पर दिया है। CBI इस मामले में अब तक सीमित बिन्दुओं पर जाँच कर रही थी।

मंगलवार (1 जुलाई, 2025) को मामले पर कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस M नागप्रसन्ना की बेंच ने भाजपा नेताओं बसनगौड़ा पाटिल यतनाल और अरविंद लिंबावली की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित SIT की जाँच पर्याप्त नहीं है।

हाई कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले को CBI को सौंपा जाए ताकि निष्पक्ष जाँच हो सके। साथ ही हाई कोर्ट ने SIT को आदेश दिया कि वह इस केस से जुड़े सभी दस्तावेज CBI को सौंप दे। हाई कोर्ट ने CBI से पूरे मामले पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी माँगी है।

इस घोटाले से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कार्रवाई की है। जून, 2025 में ED ने कॉन्ग्रेस सांसद ई तुकाराम के ठिकानों पर छापे मारे थे। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के तीन विधायकों, नारा भारत रेड्डी, जीएन गणेश और पूर्व मंत्री बी नागेंद्र के आवासों पर भी छापे मारे गए थे। बी नागेन्द्र को इस मामले में इस्तीफ़ा भी देना पड़ा था।

क्या है वाल्मीकि फंड घोटाला?

कर्नाटक सरकार KMVSTDC प्रदेश की जनजातीय जनता के कल्याण के लिए चलाती है। इसके अंतर्गत जनजातीय जनसंख्या के लिए रोजगार समेत विशेष योजनाएँ लाई जाती हैं। कर्नाटक सरकार इसके लिए अलग से बजट देती है। इसी महर्षि वाल्मीकि फंड में घोटाले की बात सामने आई थी।

यह पूरा मामला एक आत्महत्या से चालू हुआ था। मई, 2024 में इसी निगम से जुड़े एक 48 वर्षीय कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके उच्चाधिकारियों ने उस पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह निगम के खातों से पैसा ट्रांसफर करे।

उसने आरोप लगाया था कि यह काम निगम का पैसा हड़पने के लिए किया गया था। उसका आरोप था कि यह काम एक मंत्री के मौखिक आदेशों के आधार पर किया गया था। उसने अपने विभाग के अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारियों पर भी आरोप लगाए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया था।

आत्महत्या करने वाले कर्मचारी चंद्रशेखर ने सुसाइड नोट में बताया था कि उसे उच्चाधिकारियों ने इस बात के लिए निर्देशित किया था कि वह निगम के एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखे। यह पैसा यूनियन बैंक के वसंत नगर ब्रांच से एमजी रोड ब्रांच में डाला जाना था।

इसी के तहत वाल्मीकि निगम के खातों से निकाला गया पैसा इसके बाद अन्य खातों में भेज दिया गया। इस पूरे खेल में ₹187 करोड़ का लेनदेन हुआ। इसमें से लगभग ₹88 करोड़ अवैध खातों में भेजा गया। जब यह मामला खुला तो चंद्रशेखर डर गया और उसने आत्महत्या कर ली।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद कई बैंक कर्मचारियों समेत KMVSTDC के कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इस मामले में ED ने जाँच किया। जहाँ इस मामले में 25 लोगों को आरोपित बनाया गया था।

ED ने इस मामले में दायर चार्जशीट में बताया था कि बेल्लारी लोकसभा में लगभग 7 लाख वोटरों को इस फंड में घोटाले के पैसे से रिश्वत दी गई। यह रिश्वत उन्हें कॉन्ग्रेस को वोट देने के लिए दी गई। यह पैसा बी नागेन्द्र ने महर्षि वाल्मीकि जनजातीय विकास निगम में घोटाला करके जुटाया था।

बेल्लारी में ₹14 करोड़ की रिश्वत

ED ने बताया था कि बेल्लारी में 7 लाख वोटरों को लगभग ₹200 की रिश्वत दी गई। ED ने कहा था कि घोटाले के पैसे से चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की गई। ED ने यह खुलासा बी नागेन्द्र के पूर्व निजी सचिव विजय गौड़ा के फोन की जाँच के बाद किया था। उसमें बेल्लारी में पैसा खर्च होने के सबूत मिले थे।

ED ने आरोप लगाया था कि बी नागेन्द्र के पास इस घोटाले का अधिकांश पैसा आया। ED को विजय गौड़ा ने बताया था कि उसने घोटाले का यह पैसा नागेन्द्र के कहने पर कई लोगों में बाँटा जो कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए थे। यहाँ कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार ई तुकाराम के लिए घोटाले का पैसा उपयोग किया गया।

यह भी आरोप ED ने लगाया था कि बूथ पर काम करने वाले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को ₹10000 इस घोटाले के पैसे से दिए गए। नागेन्द्र के घोटाले का यह पैसा बंटवाने में कॉन्ग्रेस के विधायकों ने भी सक्रिय रोल निभाया, यह भी ED ने बताया था। जाँच एजेंसी बताया था कि घोटाले में से लगभग ₹15 करोड़ का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया गया।

ED के पास पैसे से लेनदेन की फोटो भी मौजूद हैं। चार्जशीट में यह भी कहा गया था कि बी नागेन्द्र ने इन आरोपों पर कोई साफ़ जवाब नहीं दिया है। बी नागेन्द्र ने बचने के लिए तीन आईफोन तोड़े हैं। ED ने यह भी आरोप लगाए हैं कि बी नागेन्द्र ने जब पैसों की गड़बड़ी की तो इसे वित्त विभाग ने भी नहीं चेक किया।