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नौसेना अधिकारी के मुँह में ‘द वायर’ ने ठूँस दिया अपना एजेंडा, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में लड़ाकू विमान के नुकसान का गढ़ा नैरेटिव: जानिए मोदी सरकार को कैसे किया बदनाम

वामपंथी प्रोपेगेंडा फ़ैलाने वाला मीडिया संस्थान एक बार फिर झूठ फ़ैलाने पर उतर आया है। मोदी सरकार के अंध विरोध और राष्ट्रहित को नुकसान पहुँचाने के अपने ट्रैक रिकॉर्ड को कायम रखते हुए द वायर ने अब दावा किया है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कथित तौर पर ‘राजनीतिक रुकावटों’ के चलते लड़ाकू विमान खोए हैं।

द वायर ने इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास में डिफेन्स अताशे के तौर पर तैनात कैप्टेन शिव कुमार के एक बयान को तोड़ा मरोड़ा और इसी के आधार पर एक लेख प्रकाशित किया है। ‘राजनीतिक नेतृत्व की रुकावटों के चलते भारतीय वायुसेना ने गँवाए पाकिस्तान के हाथों लड़ाकू विमान’ (IAF Lost Fighter Jets to Pak Because of Political Leadership’s Constraints) शीर्षक से यह लेख 29 जून, 2025 को प्रकाशित हुआ है।

द वायर के इस की बखिया उधेड़ने का समय आ गया है। उसकी इस अधपकी स्टोरी और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने की बीमारी का इलाज भी किया जाना जरूरी है। यह भी साफ़ किए जाने की जरूरत है कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर अब तक का सबसे साहसिक मिलिट्री ऑपरेशन रहा है।

पहलगाम हमला और बॉर्डर पार उसका जवाब

ऑपरेशन सिंदूर कोई बिना कारण की गई सैन्य कार्रवाई नहीं थी। यह मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। पहलगाम में पाकिस्तान के पाले इस्लामी आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों को निशाना बनाया था। उन्होंने हिंदुओं की पहचान के लिए खतना चेक किया था और फिर उन्हें बेरहमी से मार डाला था।

यह न केवल नागरिकों पर हमला था, बल्कि भारत के भीतर सांप्रदायिक तनाव को भड़काने का एक खुला प्रयास था। मोदी सरकार ने इस हमले के बाद पिछली सरकारों की तरह ना डोजियर सौंपे और ना ही निंदा वाले लम्बे प्रेस रिलीज दिए। बल्कि उसने सैन्य कार्रवाई की छूट दे दी।

मोदी सरकार ने इससे पाकिस्तान की परमाणु हथियारों की गीदड़भभकी को भी नाकाम कर दिया। लेकिन भारत, एक जिम्मेदार राष्ट्र है। वह नियम-आधारित व्यवस्था में विश्वास करता है,। उसने केवल आतंकी ढाँचे पर हमला किया और पाकिस्तान की फ़ौज पर नहीं।

लेकिन इस तथ्य को द वायर ने मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए आसानी से दरकिनार कर दिया।

कथित राजनीतिक रुकावटें समस्या नहीं, शासन की कला

द वायर के प्रोपेगेंडा का आधार इंडोनेशिया में भारत के डिफेन्स अताशे कैप्टन (नौसेना) शिव कुमार की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है। एक अकादमिक सेमिनार में बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरणों के दौरान, भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लड़ाकू विमानों ने राजनीतिक निर्देशों (सरकार) के तहत काम किया। उन्होंने बताया था कि इसके तहत जिसमें पाकिस्तानी फौजी ढाँचे या एयर डिफेन्स प्रणालियों को निशाना नहीं बनाया जाना था। यह कार्रवाई आतंकी अड्डों तक सीमित थी।

द वायर के अनुसार, यह मोदी सरकार की ‘राजनीतिक रुकावटों’ को साबित करता है, जिसके चलते कारण विमान नष्ट हुए। ऐसा कहना ना केवल वायर की कपटी मानसिकता दिखाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि उसे युद्ध के नियमों, अंतर्राष्ट्रीय कानून और रणनीतिक गणना के बारे में कोई ज्ञान नहीं है।

तथाकथित ‘राजनीतिक रुकावटें’ आतंकवाद पर कार्रवाई करने और बाद युद्ध के बीच अंतर के लिए थी। यह मोदी सरकार का नपा तुला एक्शन था। भारत का प्रारंभिक संयम दुश्मन और दुनिया के लिए एक रणनीतिक संकेत था कि यह लड़ाई भारत बनाम पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत और आतंक की लड़ाई है।

आतंकी कैम्पों पर सटीक हमलों के बाद पाकिस्तान को तुरंत इसकी जानकारी दे दी गई थी। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान अपने आतंकी नेटवर्क के समर्थन में सामने आया, भारत ने लड़ाई के नियमों को बदल दिया और पाकिस्तान के फौजी इन्फ्रा को तबाह करना चालू कर दिया।

विडंबना यह है कि वही वामपंथी टिप्पणीकार जो भारत द्वारा जवाबी कार्रवाई किए जाने पर ‘परमाणु युद्ध’ के खिलाफ रोते हैं, मोदी सरकार के पूरी तौर पर युद्ध में ना उतरने पर भी प्रलाप कर रहे हैं। उनका दोहरापन स्पष्ट है। वे किसी भी भारतीय कार्रवाई का विरोध करते हैं।

अगर मोदी सरकार पाकिस्तान पर हमला करती है तो सीधे तौर पर युद्ध के बादल छा जाते, इससे देश का विकास का पहिया भी रुक सकता था। अगर ऐसा नहीं होता है, तो सरकार को दुश्मन को निर्णायक झटका देने के लिए सशस्त्र बलों के ‘पंख काटने’ के लिए दोषी ठहराया जाता। द वायर मोदी सरकार को किसी भी तरह दोषी बता कर ही छोड़ता।

युद्ध में नुकसान दुखद, लेकिन अप्रत्याशित नहीं

कोई भी सैन्य अभियान, खास तौर पर दुश्मन के इलाके में सटीक हमले, जोखिम से खाली नहीं होता। हालाँकि, यह बात द वायर के मूढ़ बुद्धि लोगों को समझाना मुश्किल है। युद्ध में नुकसान कोई नई बात नहीं है। यहाँ तक ​​कि अमेरिका और NATO जैसी फौजों को भी फाइटर विमानों का नुकसान उठाना पड़ा है।

अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपे ओसामा बिन लादेन को खत्म करने के लिए एक ऑपरेशन में अपने सबसे उन्नत हेलिकॉप्टरों में से एक को खो दिया था। यूक्रेन में चल रहे संघर्ष में रूस ने भी विमान और ड्रोन खो दिए हैं।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना को कितना नुकसान हुआ, यह बात सार्वजनिक नहीं है। लेकिन अगर मान भी लिया जाए कि वायुसेना का कोई नुकसान हुआ भी है तो यह दुखद जरूर है लेकिन यह वायुसेना की कमजोरी का संकेत नहीं देता है।

सफलता का असली पैमाना अपने हर विमान या पूरे नुकसान से बचाना नहीं बल्कि रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करना है। इस पैमाने के हिसाब से, ऑपरेशन सिंदूर एक शानदार सफलता थी। लेकिन भारत विरोध में डूबे वायर के लिए यह मोदी सरकार की विफलता थी।

ऑपरेशन सिंदूर: मिलिट्री मास्टरक्लास

भारत ने जब पकिस्तान में आतंकी इन्फ्रा खत्म किया तो उसकी वायुसेना ने इसे बचाने के लिए अपने जेट्स चला दिए। भारत ने इसके बाद तुरंत रणनीति बदल दी। IAF ने दुश्मन के हवाई बचाव को बेअसर कर दिया। भारत की ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्टैंड-ऑफ हथियारों का लाभ उठाया, और व्यवस्थित रूप से पाकिस्तान के हवाई अड्डों और सैन्य संपत्ति को तबाह किया।

ऑपरेशन सिंदूर के परिणाम निर्विवाद तौर पर स्पष्ट थे:

  • 11 पाकिस्तानी एयर बेस तबाह हुए।
  • पाकिस्तान के एयर डिफेन्स तबाह हुए।
  • पाकिस्तान के आक्रामक ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए।
  • लगातार होते नुकसान के चलते पाकिस्तान सीजफायर के लिए रोने लगा।

पाकिस्तान के DGMO ने कथित तौर पर अपने भारतीय समकक्ष के साथ डी-एस्केलेट के लिए विनती की। अगर भारत बंधा हुआ होता तो पाकिस्तान भला ऐसा क्यों करने लगता। वायर ने यह सब अनदेखा करते हुए अपनी कहानी लेकिन गढ़ दी।

जानबूझ कर तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करता है वायर

वायर ने कोई पहली बार भ्रामक सूचनाएँ नहीं दी हैं और ना पहली बार तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा है। वह इससे पहले में क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका कम करके दिखाना, आतंकी हमलों को इंटेलिजेंस फेलियर दर्शाना आयर बालाकोट स्ट्राइक्स जैसी घटनाओं पर दुष्प्रचार उठाने के कारनामे कर चुका है।

कैप्टन शिव कुमार के मामले में भी उसने यही किया। असल में उन्होंने कहा था, “हमारे पड़ोस के कुछ अन्य देशों के विपरीत भारतीय सेनाएं नागरिक राजनीतिक नेतृत्व के तहत काम करती हैं, … ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बना था और भारत विवाद बढ़ाना नहीं चाहता था।”

वायर ने यह सब नकार दिया और उसने पूरा और यह सब जानते हुए उसने लोकतंत्र के मूल्यों तहत लिए गए फैसलों पर दुष्प्रचार करना चालू कर दिया। वह उस फौजी तानाशाही पर नहीं बोलता जो पाकिस्तान में नागरिकों को अपनी ढाल बना कर रखती है।

वायर को नहीं पच रहा भारत का बदला रुख

वायर अब उस बदलाव पर दुखी है, जो भारत की रणनीति में ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया है। यह बदलाव निम्नलिखित हैं:

  1. पाकिस्तान से आने वाले आतंकी हमलों को अब युद्ध के रूप में माना जाता है।
  2. भारत पाकिस्तान के ब्लैकमेल को नकारते हुए परमाणु धमकियों के तहत भी सैन्य रूप से जवाब देगा।
  3. पाकिस्तान और उसके आतंकियों के साथ गठजोड़ का भी भांडा फूट गया है।

मोदी सरकार ने असल में सिर्फ निंदा वाले डोजियर से आगे बढ़ कर वह रास्ता दिखाया है, जो कोई भी संप्रभु राष्ट्र अपनाएगा। यह बात वायर को नहीं पचने वाली क्योंकि वह इस्लामी कट्टरपंथी सोच का समर्थन करने वाला वामपंथियों का एक समूह है।

नैतिकता का वायर से 36 का आँकड़ा

वायर का असल में नैतिकता से दूर दूर तक लेना नहीं है। अब राजनीतिक रुकावटों पर आंसू बहाने वाला तब भारत को युद्ध के लिए भूखा बताता अगर उसने पहलगाम के तुरंत बाद पाकिस्तान पर हमला बोल दिया होता। अब जब भारत ने संयम दिखाया, तो भी उसे समस्या है।

एक बात और स्पष्ट है कि वायर पाकिस्तान के आतंकियों को संरक्षण देने पर नहीं बोलता। उनकी सबसे बड़ी चिंता मोदी सरकार की कुतर्कों के साथ आलोचना होती है, भले ही इसके लिए कितने ही तथ्य मरोड़ने पड़ें।

रणनीतिक सफलता को मीडिया रही नकार

ऑपरेशन सिंदूर ने साफ़ कर दिया कि भारत पाकिस्तानी आतंक पर चुप नहीं बैठेगा बल्कि वह इसका प्रतिशोध लेगा और पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाएगा। मोदी सरकार का यह नया सिद्धांत वायर की समझ से बाहर है।

ऐसे में वह वैचारिक शत्रुता से अंधा होकर, तथ्यों को मोड़ता है और ऐसे विचार लिखता है जो राष्ट्रीय हित के खिलाफ हों। वायर की ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ दुष्प्रचार की यह कोशिश नाकाम किए जाने के साथ ही उसकी पोल खुलनी चाहिए। वह आलोचना के नाम पर दुशमन के हाथों में काम कर रहा है।

तथ्य स्पष्ट हैं। दुश्मन उजागर हो चुका है। और भारत का संदेश पहले से कहीं ज्यादा लाउड है।

बांग्लादेश में पहले किया घर में घुस कर हिंदू लड़की का रेप, अब केस वापस लेने का ‘दबाव’ बना रहे : इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘अफेयर’ का प्रोपेगेंडा भी चलाया, पीड़ित पिता का दर्द छलका

बांग्लादेश के कुमिल्ला में हिंदू युवती के साथ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) नेता फजोर अली ने रेप किया। इसकी वीडियो भी वायरल की। फजोर अली गिरफ्तार भी हो गया। लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी हिंदू लड़की का चरित्र हनन करने लगे। उसका रेपिस्ट के साथ ‘अफेयर’ बताने का प्रयास करने।

बांग्लादेश में इस घटना के बाद हिंदू संगठन आक्रोश में हैं। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। हालाँकि, पीड़िता ने कहा कि वह अपनी मर्जी से केस वापस लेना चाहती है। पीड़िता ने कहा, ”मैं देश में शांति चाहती हूँ।”

पीड़िता से जब पूछा गया कि वह ऐसा क्यों करना चाहती है तब बताया कि उसने यह अपने पति के कहने पर लिया है। पीड़िता ने कहा, “मेरे पति कहते हैं कि जो इज्जत जानी थी वह जा चुकी है। अब केस करने का फायदा नहीं है, इससे इज्जत वापस नहीं आ जाएगी। इसीलिए मैं अपनी मर्जी से केस वापस लेना चाहती हूँ।”

पीड़िता का फजोर अली से ‘अफेयर’ बताने की रची गई साजिश

जहाँ पीड़िता अपनी इज्जत बचाने के लिए केस तक वापस लेने को तैयार है वहीं कट्टरपंथी पीड़िता का चरित्र हनन करने में तुले हुए हैं। इंटरनेट पर रेप मामले में पीड़िता का लगातार अपमान किया जा रहा है। कट्टरपंथियों ने पीड़िता का आरोपित फजोर अली के साथ ‘अफेयर’ होने की बातें फैलाई।

इन आरोपों को पीड़िता के पिता ने झुठला दिया है। रविवार (30 जून 2025) को हिंदू कार्यकर्ता और वकील सुमोन कुमार रॉय से बात करते हुए पिता ने ‘अफेयर’ के आरोप पर सफाई दी। पिता ने कहा कि उनकी बेटी अपने ससुराल में रहती है और कुछ समय पहले ही घर आई है। पिता ने बताया कि फजोर अली से उसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।

हिंदू कार्यकर्ता और वकील सुमोन कुमार रॉय ने पीड़ित के पिता को हर तरीके की मदद देने का वादा किया। रॉय ने मुरादनगर पुलिस OC जहादुर रहमान से मुलाकात कर इंटरनेट पर पीड़िता के खिलाफ फैल रही अफवाहों की भी जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि पीड़िता का फजोर अली से विवाहेतर संबंध है।

इसके साथ ही रॉय ने पुलिस को पीड़िता की मौत के दावे पर भी सफाई दी। पुलिस को बताया कि इंटरनेट पर पीड़िता के आत्महत्या की खबरें चलाई जा रही हैं, जो कि फर्जी और बेबुनियाद हैं। रॉय ने कहा, “महिला ने कुछ समय पहले ही नया मामला दर्ज कराया था।”

क्या है मामला ?

बांग्लादेश में 21 वर्षीय हिंदू युवती से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता फजोर अली ने चाकू की नोंक पर रेप किया। पीड़िता 21 साल की है और उसके दो बच्चे भी हैं। पीड़िता का पति दुबई में नौकरी करता और वहीं रहता है। वह 15 दिन के लिए मुरादनगर अपने पिता के घर रहने आई थी। तब से ही 38 वर्षीय फजोर अली उसके पीछे पडा था।

गुरुवार (26 जून 2025) रात को पीड़िता घर में अकेली थी। इसका फायदा उठाते हुए रात 10 बजे फजोर अली घर ने घर का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता ने दरवाजा खोलने से इनकार किया तो जबरदस्ती भीतर घुसा। यहाँ बंदूक की नोंक से डराकर महिला से रेप किया। उसके साथियों ने रेप का वीडियो भी बनाया। पीड़िता मदद की गुहार लगाते हुए चिल्लाई। आवाज सुनकर पड़ोसी आए और फजोर अली को जमकर पीटा।

पीड़िता ने मुरादनगर पुलिस में FIR दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने रविवार (29 जून 2025) को मुख्य आरोपित फजोर अली को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही घटना का वीडियो वायरल करने वाले 4 आरोपित अनिक, सुमन, रमजान और बाबू को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद कट्टरपंथी हिन्दू महिला के खिलाफ एजेंडा चलाने में जुटे हुए हैं।

ओमान में बैठे मोहम्मद इस्लाम ने किया हिन्दू युवती का ब्रेनवॉश, बेचने के लिए पासपोर्ट बना राजस्थान से बुलाया: दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने फ्लाइट चढ़ने से रोका, घर का सोना-चाँदी भी किया बरामद

ओमान से मोहम्मद इस्लाम ने भारत में हिंदू युवती को बेचने की साजिश रची। राजस्थान की 18 साल की युवती को सोशल मीडिया पर प्रेम-जाल में फँसाया। फिर ब्रेनवॉश कर ओमान आने की प्लानिंग बनाई। तीन महीने पहले युवती का पासपोर्ट भी बनवा दिया। युवती को दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी पहुँचा दिया। लेकिन समय पर पुलिस ने युवती को रोक लिया।

मामला राजस्थान के चुरू जिले का है। यहाँ तारानगर थाने में युवती के परिजन ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी अचानक घर से गायब हो गई है। साथ में एक लाख रुपए नगद और सोने-चाँदी के आभूषण भी लेकर गई है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी मदद से युवती को ट्रेस किया। युवती की लोकेशन दिल्ली के इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर मिली।

यहाँ युवती ओमान जाने वाली फ्लाइट पर चेक-इन कर चुकी थी। फिर चुरू पुलिस ने दिल्ली पुलिस, एयरपोर्ट सुरक्षा, भारतीय दूतावास से संपर्क किया। समय रहते ही युवती को फ्लाइट में चढ़ने से रोक लिया गया।

मोहम्मद इस्लाम ने ब्रेनवॉश किया

रविवार (29 जून 2025) को पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया। चुरू एसपी जय यादव ने बताया कि युवती की ओमान के मस्कट में रहने वाले मोहम्मद इस्लाम से सोशल मीडिया पर दोस्ती थी। इस्लाम ने ही युवती का ब्रेनवॉश कर प्रेम-जाल में फँसाया। यहाँ तक की ओमान जाने के लिए भी हामी भरवा ली।

युवती इस कदर ब्रेनवॉश हो चुकी थी कि परिजनों से छिपकर तीन महीने पहले पासपोर्ट भी बनवा लिया। फिर अपने ही घर से सोना-चाँदी और एक लाख रुपए नगर चोरी कर ओमान जाने के लिए तैयार भी हो गई। एसपी ने बताया कि इस्लाम ने युवती के ओमान पहुँचने तक की पूरी व्यवस्था कर रखी थी। युवती के लिए घर से एयरपोर्ट तक कैब भी बुक की।

फ्लाइट में बैठने वाली थी युवती, तभी पकड़ा

एसपी जय यादव ने बताया कि युवती दिल्ली एयरपोर्ट में इमिग्रेशन करवा चुकी थी। चुरू पुलिस टीम ने दिल्ली एयरपोर्ट एसीपी को ई-मेल भेजा। इसके बाद एयरपोर्ट एसएचओ से संपर्क हुआ। युवती फ्लाइट में बैठने वाली कतार में लगी हुई थी। उसी समय दिल्ली पुलिस ने युवती को हिरासत में ले लिया। युवती को वापस लाने के लिए चुरू पुलिस भी दिल्ली पहुँची और उसको सुरक्षित परिजन को सौंप दिया गया।

ओमान पहुँचती तो बेच दी जाती: एसपी

एसपी ने बताया कि मोहम्मद इस्लाम पिछले कई समय से युवती को सोशल मीडिया पर बरगला रहा है। साथ ही ओमान आने के लिए ब्रेनवॉश किया, जिसके लिए युवती जा चुकी थी। अगर युवती फ्लाइट में बैठ जाती तो ओमान पहुँच जाती। जहाँ युवती को बेच दिया जा सकता था। या फिर मानव तस्करी में लिप्त करा दिया जाता।

रूस से पैसा लेते थे 150+ कॉन्ग्रेस MP, पत्रकारों ने दलाली में लिखे 16000 आर्टिकल- निशिकांत दुबे ने ‘कठपुतली गैंग’ की खोली पोल: इंदिरा हो या राजीव, DNA में ‘सूटकेस कल्चर’

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि कभी कॉन्ग्रेस के 150 से अधिक सांसद सोवियत संघ के पैसे पर पलते थे। उनका कहना है कि पत्रकारों के एक समूह भी रूस का दलाल था।

ट्विटर/एक्स पर निशिकांत दुबे ने ‘कॉन्ग्रेस, करप्शन और गुलामी’ शीर्षक के साथ किए पोस्ट में ये दावा किया है। उन्होंने कहा है;

  1. ये अवर्गीकृत गुप्त दस्तावेज सीआईए का 2011 में जारी हुआ।
  2. कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एचकेएल भगत की अगुवाई में 150 से ज्यादा कॉन्ग्रेस के सांसद सोवियत संघ के पैसे पर पलते थे, रूस के लिए दलाली करते थे?
  3. पत्रकारों का एक समूह दलाल था, कुल 16000 न्यूज आर्टिकल रूस ने छपवाए?
  4. उस जमाने में रूस के जासूसी संस्थानों के 1100 लोग हिन्दुस्तान में थे जो नौकरशाही, व्यापारी संगठनों, कम्युनिस्ट पार्टियों, ओपिनियन मेकर को अपने पॉकेट में रखते थे और सूचना के आधार पर भारत की नीति बनाते थे?
  5. कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार सुभद्रा जोशी ने लोकसभा चुनाव में उस वक्त 5 लाख रुपए लिए जर्मन सरकार से चुनाव के नाम पर, हारने के बाद इंडो जर्मन फोरम की अध्यक्ष बनीं।

उन्होंने लिखा है, “यह देश था या ग़ुलामों, दलालों या बिचौलियों की कठपुतली। कॉन्ग्रेस इसका जवाब दे, आज इस पर जाँच हो या नहीं?”

यह पहला मौका नहीं है जब रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी से पैसे लेने और उनके इशारे पर काम करने का आरोप कॉन्ग्रेस पर लगा है। इससे पहले भी इंदिरा गाँधी और उनके बेटे राजीव के जमाने में कॉन्ग्रेस के ‘ब्रीफकेस कल्चर’ को लेकर को लेकर तथ्य सामने आ चुके हैं।

2017 की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के कुछ पुराने गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे। इससे पता चलता है कि इंदिरा गाँधी के जमाने में कॉन्ग्रेस के 40 फीसदी सांसदों को सोवियत संघ से पैसा मिला था। 2005 में केजीबी के ही एक पूर्व जासूस वासिली मित्रोकिन की किताब आई थी। इसमें तो बकायदा बताया गया है कि खुद इंदिरा गाँधी को सूटकेसों में भरकर पैसे भेजे गए थे।

साभार: indiafacts.org

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने ऑपइंडिया को बताया था कि जो तथ्य सार्वजनिक हुए, उससे जाहिर होता है कि 1967 के आम चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस सहित देश के ज्यादातर राजनीतिक दलों को विदेश से पैसा मिला था। उन्होंने बताया था कि शीत युद्ध के जमाने में कम्युनिस्ट देश जहाँ भारत में साम्यवाद के फैलाव के लिए पैसे खर्च कर रहे थे, तो पूँजीवादी देश साम्यवाद को रोकने के लिए। ऐसे में जब सत्ताधारी दल का नेता ही बिकने को तैयार हो तो विदेशी ताकतों के लिए चीजें आसान हो जाती है।

किशोर ने ऐसी कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि विदेश से पैसा लेने के मामले की जाँच भी कराई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। जब कुछ विपक्षी सांसदों ने इसे सार्वजनिक करने की माँग की तो तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री यशवंत राव चव्हाण ने संसद में कहा कि जिन दलों और नेताओं को विदेशों से धन मिले हैं, उनके नाम जाहिर नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे उनके हितों को नुकसान पहुँचेगा।

लेकिन, सालों तक जिन तथ्यों को कॉन्ग्रेस छिपाती रही उसे मित्रोकिन ने 2005 में दुनिया के सामने ला दिया। वे सोवियत संघ के जमाने के हजारों गोपनीय दस्तावेज चुराकर देश से बाहर ले गए थे। बाद में इसके आधार पर क्रिस्टोफर एंड्रयू (Christopher Andrew) के साथ मिलकर किताबें लिखी। द वर्ल्ड वॉज गोइंग आवर वे (The World Was Going Our Way) नामक किताब में कहा गया है कि केजीबी ने 1970 के दशक में पूर्व रक्षा मंत्री वीके मेनन के अलावा चार अन्य केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार के लिए फंड दिया था।

2017 में सामने आई दिसंबर 1985 की सीआईए की रिपोर्ट में बताया गया है कि सोवियत संघ ने भारतीय कारोबारियों के साथ समझौतों के जरिए कॉन्ग्रेस पार्टी को रिश्वत दी थी। सोवियत संघ का दूतावास कॉन्ग्रेस नेताओं को छिपकर रकम देने सहित कई खर्चों के लिए बड़ा रिजर्व रखता था। इसके मुताबिक कॉन्ग्रेस के अलावा सीपीआई और सीपीएम को भी सोवियत संघ से काफी पैसा मिलता था। ऐसा नहीं है कि सभी को पैसे ही दिए गए थे। कुछ के साथ तो सोवियत संघ ने बकायदा समझौता भी किया था।

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि केजीबी के पैसे की वजह से भारत के ढेरो नेता सोवियत संघ की मुट्ठी में थे और वे भारतीय राजनीति को अपने हितों के हिसाब से प्रभावित करते थे। मित्रोकिन की किताब में भी यह बात कही गई है। केजीबी के लीक दस्तावेजों में भारत को तीसरी दुनिया की सरकारों में केजीबी के घुसपैठ का एक मॉडल बताया गया था। इन दस्तावेजों में साफ तौर पर भारत सरकार में केजीबी के बहुत से सूत्र होने की बात कही गई थी।

साभार: indiafacts.org

ऐसा भी नहीं है कि इंदिरा के बाद विदेश से पैसा लेने की कॉन्ग्रेस की आदत छूट गई। दस्तावेज बताते हैं कि सोवियत संघ से पैसा लेने का जो सिलसिला इंदिरा गाँधी के जमाने में शुरू हुआ था वह राजीव गाँधी के जमाने में भी जारी रहा है। हालॉंकि इस दौर में सोवियत संघ का प्रभाव कुछ सीमित करने की कोशिश भी हुई थी।

साभार: indiafacts.org

ये दस्तावेज मीडिया में भी केजीबी की घुसपैठ के बारे में बताते हैं। इसके अनुसार सोवियत संघ ने अपने प्रोपेगेंडा के प्रचार के लिए भारत के बड़े मीडिया संस्थानों के साथ व्यापक पैमाने पर साँठगाँठ कर रखी थी। वे उसकी जरूरत के हिसाब से लेख लिखते थे। यहाँ तक की संपादकीय में भी सोवियत संघ की धुन बजाते थे। जिन संस्थानों का जिक्र है उनमें टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द स्टेट्समैन, द हिंदू शामिल है।

मित्रोकिन ने अपनी किताब में बताया है कि सोवियत संघ ने इस काम के लिए भारत में 40-50 पत्रकार रखे थे। बाद के सालों में इनकी संख्या बढ़कर 200 से 300 हो गई थी।

केरल के ‘इस्लामी अड्डे’ में कैद हैं कई लड़कियाँ, लंबी दाढ़ी वाले मर्द दे रहे जिहाद की ट्रेनिंग: प्रयागराज की जिस दलित लड़की को बनाने वाले थे ‘आतंकी’, उसने बताया सब कुछ

प्रयागराज की एक 15 साल की दलित लड़की को एक मुस्लिम महिला केरल लेकर गई। यहाँ उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवाया गया। उसको जिहादी ट्रेनिंग देने का भी प्रयास हुआ। लड़की किसी तरह बच कर वापस पहुँची। पुलिस की जाँच में सामने आया कि मुस्लिम महिला के गैंग में और भी लोग शामिल हैं और उसका काम दलित एवं गरीब बच्चों को आतंकी नेटवर्क में शामिल करवाना है। अब इस मामले में मुस्लिम महिला और उसका साथी गिरफ्तार हो गए हैं।

प्रयागराज की दलित बच्ची को फँसाया

पूरा मामला प्रयागराज के फूलपुर थाने से जुड़ा हुआ है। यहाँ लिलहट गाँव में एक दलित विधवा महिला और उसकी बेटी रहती है। बेटी की आयु मात्र 15 वर्ष है। उसके पड़ोस में ही दरकशा नाम की मुस्लिम लड़की रहती है। दरकशा बानो कथित तौर पर इस हिन्दू बच्ची की सहेली है।

दरकशा हिन्दू बच्ची के साथ रहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरकशा हिन्दू बच्ची को इस्लाम के बारे में ब्रेनवॉश किया करती थी। वह हिन्दू धर्म के प्रति जहर भी भरती थी। 8 मई, 2025 को दरकशा बानो रात 10 बजे हिन्दू बच्ची को एक शादी से लेकर फूलपुर की एक मस्जिद के पास गई।

दरकशा बानो का मददगार मोहम्मद कैफ यहाँ बाइक लेकर खड़ा था। दरकशा ने हिन्दू बच्ची को इस दौरान पाने जाल में फँसा लिया था। कैफ ने इन दोनों को प्रयागराज जंक्शन छोड़ा। रास्ते में कैफ ने हिन्दू बच्ची से छेड़छाड़ भी की। दरकशा प्रयागराज से बाद हिन्दू बच्ची को प्रयागराज से लेकर दिल्ली चली गई।

दरकशा की मंजिल लेकिन दिल्ली नहीं थी। यहाँ से वह हिन्दू बच्ची को लकर केरल के त्रिशूर चली गई। यहाँ हिन्दू बच्ची के साथ प्रताड़नाओं का दौर चालू हो गया। उसका धर्मांतरण करवाया गया। उसे आतंकी ट्रेनिंग की बात भी हुई। बच्ची किसी तरह बच के पुलिस के पास पहुँची, जहाँ से प्रयागराज सूचना परिवार के पास पहुँची। बच्ची वापस इसके बाद आ सकी।

हिन्दू पीड़िता बोली- दाढ़ी वाले जिहाद की बात करते थे

हिन्दू बच्ची ने बरामद होने के बाद बताया कि त्रिशूर में उसे एक ऐसे घर में ले जाया गया था जहाँ और भी कई नाबालिग लड़कियाँ मौजूद थीं। हिन्दू बच्ची ने यह भी बताया कि इसी घर में कई ‘बड़ी दाढ़ी वाले’ मौजूद थे। इन लोगों ने बच्ची पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव बनाया।

बच्ची के अनुसार, ‘बड़ी दाढ़ी वालों’ ने उसको जिहादी ट्रेनिंग देने की बातें भी की। इस दौरान दरकशा वहाँ से गायब हो गई। डरी सहमी बच्ची किसी तरह यहाँ से भाग निकली। यहाँ वाल रेलवे स्टेशन पहुँची जहाँ पुलिस ने उससे जानकारी ली। इसके बाद बच्ची का प्रयागराज लौटना संभव हो पाया।

UP पुलिस बोली- केरल मॉड्यूल से जुड़ी है दरकशा

इस मामले में 28 जून, 2025 को प्रयागराज के फूलपुर थाने में FIR दर्ज करवाई गई है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस से पीड़िता की माँ ने पूरी घटना बताई है, इसके साथ ही कहा है कि उसे अब फोन पर धमकियाँ मिल रही हैं। FIR में पुलिस ने दरकशा, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद ताज समेत 4 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

इनके खिलाफ BNS की कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। इसके अलावा आरोपितों पर SC/ST एक्ट की धाराएँ लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले दरकशा और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जाँच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य पता चले हैं।

प्रयागराज के DCP कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया है कि बानो एक संगठित गिरोह का हिस्सा है जो गरीब और दलित लड़कियों को बहला-फुसलाकर, उनका ब्रेनवॉश करके और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करके आतंकवादी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल करता है।

उन्होंने शक जताया है कि दरकशा बानो केरल के एक मॉड्यूल से जुड़ी हुई है। अब इसकी जाँच 3 टीमें कर रही हैं।

‘रूस-ईरान-चीन ने हमारे साथ की गुपचुप बैठक, भारत को पूछा तक नहीं’: ऑपरेशन सिंदूर की मार से कराह रहा पाकिस्तान, फेक न्यूज की ‘मलहम’ से कम कर रहा सूजन

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत से बुरी तरह मात खाने के बाद अब पाकिस्तान अपनी वाह-वाही के लिए सोशल मीडिया पर प्रोपगेंडा फैला रहा है। पाकिस्तानी अकॉउंट्स से दावा हो रहा है कि चीन, रूस और ईरान के साथ उसने गुपचुप एक बैठक की है जो उनकी कूटनीतिक जीत है और भारत की हार है। इस दावे में क्या सच्चाई है इसके कहीं कोई प्रमाण नहीं हैं, लेकिन आतंकी मुल्क के प्रोपगेंडाबाज इसे सच साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

पूरा मामला

दरअसल, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 25 से 27 जून के बीच चीन के क़िंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने गए थे। इस बैठक में रूस, ईरान, पाकिस्तान और अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्री भी मौजूद थे।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब भारत और चीन अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच यात्रा और वाणिज्य संबंधों के साथ-साथ बातचीत के माध्यमों को भी वापस शुरू किया जा सके।

इसी दौरान, पाकिस्तान से जुड़े कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने एक झूठी खबर फैलाई कि SCO के तहत चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर की एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें भारत को बुलाया नहीं गया। उन्होंने इस फर्जी दावे को भारत की ‘कूटनीतिक हार’ और पाकिस्तान की ‘जीत’ के तौर पर पेश किया।

हालाँकि, सच यह है कि इस खबर की कहीं कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, जिससे यह तो साफ है कि यह खबरें केवल भ्रामक प्रचार का हिस्सा हैं।

एक रिपोर्ट में तो इस घटनाक्रम को “रणनीतिक संरेखण में एक बड़ा बदलाव” तक करार दे दिया गया।

डी-इंटेंट डेटा के अनुसार किसी भी विश्वसनीय स्रोत ने शिखर सम्मेलन में चार देशों के बीच ऐसी किसी बैठक की सूचना नहीं दी।

बता दें कि 26 जून 2025 को चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की जो बैठक हुई थी, उस पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कड़ा रुख अपनाया और उस साझा बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं था, जिसमें 26 निर्दोष हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी।

इस संयुक्त बयान में न तो भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति को दर्शाया गया और न ही पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोई बात की गई। हाँ लेकिन पाकिस्तान के कहने पर बयान में बलूचिस्तान की स्थिति का उल्लेख जरूर किया गया।

राजनाथ सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे आतंकवाद के खात्मे के लिए एकजुट हों, ताकि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इसके बावजूद, SCO ने अपने आधिकारिक बयान में पहलगाम हमले उल्लेख करना जरुरी नहीं समझा।

दलित बच्ची को इस्लामी आतंकी बनाने के लिए प्रयागराज से उठा केरल ले गई दरकशा बानो, करवाया धर्मांतरण: आगरा से गायब हुई बहनें भी इसी तरह बनी थीं ‘शिकार’

उत्तर प्रदेश में एक माह के भीतर द केरल स्टोरी की तरह का एक दूसरा मामला सामने आया है। प्रयागराज की एक नाबालिग दलित लड़की का धर्मांतरण करवा के उसे जिहाद में झोंका गया। यह काम एक मुस्लिम महिला ने किया, जिसने लड़की का ब्रेन वॉश किया। बच्ची किसी तरह बच के अपने घर पहुँची।

क्या है मामला?

प्रयागराज की रहने वाली एक दलित नाबालिग बीते दिनों गायब हो गई थी। उसकी माँ पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुँची थी। महिला ने बताया था कि उसकी बेटी को दरकशा बानो नाम की एक महिला ने ब्रेनवॉश किया है। मामले में पुलिस ने आगे जाँच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।

पता चला कि दरकशा बानो दलित नाबालिग लड़की को इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया और हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरती रही। दरकशा बानो ने दलित लड़की को पैसों का लालच दिया और झाँसे में लेकर केरल चली गई।

दरकशा बानो ने दलित बच्ची को केरल ले जाकर उसका इस्लाम में धर्मांतरण करवा भी दिया। इसके बाद दरकशा ने उसे जिहाद में झोंकने का प्रयास किया। दलित बच्ची को आतंकवादी बनाने की साजिश थी। बताया गया कि दरकशा की सहायता मोहम्मद कैफ नाम के एक युवक ने की। पीड़िता किसी तरह बच कर केरल से निकली और प्रयागराज पहुँची।

पुलिस ने दरकशा बानो और कैफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि दरकशा बानो पहले भी कई नाबालिगों को जिहादी नेटवर्क में शामिल करवा चुकी है। मामले में अब जाँच चल रही है। जाँच के लिए तीन टीमें लगाई गई हैं।

आगरा में गायब हुईं थी दो लड़कियाँ

आगरा के परिवार ने भी हाल ही में अपनी दो बेटियों के इस्लामी धर्मांतरण गैंग में फंसने की शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़ित परिवार ने बताया था कि उनकी बड़ी बेटी 2021 में गायब हो गई थी। पीड़ित परिवार ने बताया था कि यह बेटी आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट से पढ़ी हुई है। इस लड़की की दोस्ती एक मुस्लिम लड़की से थी।

पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी की दोस्ती सायमा नाम की एक लड़की से थी जो कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की रहने वाली थी। इस सायमा उर्फ़ खुशबू ने हिन्दू लड़की का ‘ब्रेनवॉश’ किया था। गायब हो चुकी बड़ी लड़की के पिता ने बताया कि इसी के चलते वह 2021 में गायब हुई थी।

गायब हुई लड़की के पिता ने बताया था कि उनकी बड़ी बेटी सायमा के चलते दूसरे मजहब के प्रभाव में थी।

दूसरी का भी किया ब्रेनवॉश

पीड़ित परिवार ने यह भी बताया था कि उनकी बड़ी बेटी इस कदर प्रभाव में आ गई कि उसने घर आने के बाद अपनी छोटी बहन का ही ब्रेनवॉश करना चालू कर दिया और इसमें सफल भी रही। इसके बाद 25 मार्च, 2025 को दोनों लडकियाँ आगरा स्थित घर से गायब हो गईं थी।

उनका कोई भी पता नहीं लगा। वह किसके साथ गईं और कहाँ गईं, इस संबंध में एक भी जानकारी परिवार के पास नहीं आई है। थक हार कर यह परिवार पुलिस के पास पहुँचा। पुलिस ने दोनों लड़कियों के बालिग़ होने को लेकर कार्रवाई करने में शुरुआत में ढिलाई बरती। हालाँकि, इस मामले में 4 मई, 2025 को FIR दर्ज हो गई।

ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज FIR कॉपी मौजूद है। FIR में पीड़ित पिता ने बताया था कि सायमा ही उनकी दोनों बेटियों को ले गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सायमा उनकी लड़कियों की शादी करवाने के लिए ले गई है।

पुलिस जाँच में धर्मांतरण गैंग का खुलासा

मामले में FIR दर्ज होने के बाद जाँच चालू की गई थी। पुलिस की शुरूआती जाँच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला था कि यह मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जैसा है। पुलिस ने बताया कि यह दोनों बहने अब इस्लामी धर्मांतरण गिरोह का हिस्सा बन गईं हैं।

पुलिस ने इस मामले में यह भी पता किया कि इस केस के तार जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR से भी जुड़े हैं। पुलिस आगे और भी जानकारियाँ निकाल रही हैं। इसके अलावा मामले को आगरा की सायबर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है।

अडानी ग्रीन एनर्जी ने बनाया रिकॉर्ड, 15000 MW अक्षय ऊर्जा के लगाए प्लांट: 79 लाख घरों को किया जा सकता है रोशन, CEO ने कहा- 13 राज्यों को मिलेगा फायदा

अडानी ग्रीन एनर्जी दुनिया के 10 टॉप कंपनियों में शामिल हो गया है। इसे अक्षय ऊर्जा स्वतंत्र बिजली उत्पादक (IPP) में स्थान दिया गया है। कंपनी ने 10,000 मेगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने के बाद 15 महीनों के भीतर 5,000 मेगावाट और अधिक उत्पादन शुरू कर कुल 15,539.9 मेगावाट तक पहुँच गया है।

एजीईएल भारत की पहली और एकमात्र अक्षय ऊर्जा कंपनी है जिसने मुख्य रूप से ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पोर्टफोलियो के मुताबिक कंपनी के पास 11,005.5 मेगावाट सौर, 1,977.8 मेगावाट पवन और 2,556.6 मेगावाट पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता है।

2,140 MW जेसलमेर, Rajasthan                         

AGEL के सीईओ आशीष खन्ना ने कहा, “15,000 मेगावाट की उपलब्धि को पार करना बहुत गर्व की बात है। यह उपलब्धि हमारी टीम के फोकस और समर्पण का प्रमाण है। यह हमारे प्रमोटरों के दूरदर्शी नेतृत्व और हमारे निवेशकों, ग्राहकों, टीम और भागीदारों के अटूट समर्थन के बिना संभव नहीं होता, जो हर कदम पर हमारे साथ खड़े रहे हैं। अक्षय ऊर्जा में वैश्विक नेता के रूप में अदानी को स्थापित करने की श्री गौतम अदाणी की महत्वाकांक्षा से प्रेरित होकर AGEL नवाचार और परिचालन उत्कृष्टता में नए मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है”

AGEL का 15,539.9 मेगावाट बिजली से 79 लाख घरों को रौशन किया जा सकता है। इससे तेरह अलग-अलग भारतीय राज्यों को फायदा मिलेगा। इनमें पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र शामिल हैं।

648 MW कमूथी, तमिलनाडु                            

अडानी ग्रीन एनर्जी गुजरात के कच्छ के खावड़ा में बंजर भूमि पर 30,000 मेगावाट का दुनिया का सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा संयंत्र विकसित कर रही है। 538 वर्ग किलोमीटर में बना यह संयंत्र पेरिस से पाँच गुना है। ये अंतरिक्ष से भी दिखाई देगा। पूरा होने के बाद ये दुनिया पर सबसे बड़ा बिजली संयंत्र होगा।

AGEL ने अब तक खावड़ा में 5,355.9 मेगावाट अक्षय ऊर्जा के भंडारण की क्षमता हासिल की है। खावड़ा में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता को हासिल करने लक्ष्य है।

AGEL के परिचालन पोर्टफोलियो को वाटर पॉजिटिव, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त और जीरो वेस्ट-टू-लैंडफिल के रूप में प्रमाणित किया गया है।

गेट से घसीटकर ले गए अंदर, गार्डरूम में गैंगरेप किया: कोलकाता लॉ कॉलेज की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी दिखी CCTV में, पुलिस सबूतों की जाँच में जुटी

कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। कोलकाता पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि 24 साल की छात्रा को दो आरोपी गेट से घसीटकर दक्षिण कलकत्ता लॉ कॉलेज परिसर के अंदर ले जा रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक छात्रा के साथ कॉलेज परिसर के गार्ड रूम में गैंगरेप किया गया। इसमें दो सीनियर छात्र और एक पूर्व छात्र शामिल था। वीडियो से छात्रा के आरोप की पुष्टि हो रही है। छात्रा ने कहा था कि मुख्य आरोपित मनोजीत मिश्रा ने दो लोगों को उसे जबरन गार्ड रूम में ले जाने का निर्देश दिया था।

एक पुलिस अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, “सीसीटीवी फुटेज महिला के आरोपों की पुष्टि करता है। इसमें तीनों आरोपियों, सुरक्षा गार्ड और पीड़िता की हरकतें दिखाई देती हैं। हम फिलहाल फुटेज की जाँच कर रहे हैं।”

इस मामले में मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके मोबाइल फोन से वीडियो क्लिप भी बरामद किया गया है।

इससे पहले रविवार (29 जून 2025 ) को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने कॉलेज का दौरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छिपाने की कोशिश की गई थी। मजूमदार ने कहा कि पुलिस आयोग के साथ पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रही है।

छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के विरोध में बीजेपी ने रविवार शाम को कोलकाता में महिला सुरक्षा यात्रा निकाली। रैली का नेतृत्व पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने किया। रैली में भाजपा कार्यकर्ता हाथों में मशाल लिए पीड़िता को न्याय देने की माँग कर रहे थे।

मजूमदार ने कहा, “पीड़िता का परिवार भारी दबाव में है। पुलिस को नहीं पता कि वह इस समय कहाँ है। उन्होंने मुझे अपराध स्थल का वीडियो रिकॉर्ड करने से भी रोक दिया।”

इस बीच ये भी बात सामने आई है कि इस मामले के मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके साथ पढ़ने वाले छात्र टीटस मन्ना ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के नेता के रूप में मोनोजीत जाना जाता है। वो छात्राओं को परेशान करने और स्टूडेंट्स के साथ हिंसा करने के लिए जाना जाता था, लेकिन उसका प्रभाव इतना था कि हर बार वह बच निकलता था।

टीटस ने बताया कि वह और मोनोजीत 2012 से साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में टीएमसीपी से जुड़े थे। 2013 में एक हिंसक घटना के बाद वह मोनोजीत से दूर हो गया।

टीटस ने याद करते हुए बताया, “मोनोजीत के खिलाफ 2013 में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था, जब उसने कथित तौर पर एक कैटरिंग कर्मचारी को चाकू मार दिया था और उसकी उंगली काट दी थी।” घटना के बाद, मोनोजीत कुछ सालों के लिए कैंपस से गायब हो गया।

2016 में मामला ‘गुपचुप तरीके से सुलझ’ जाने के बाद वह फिर से कॉलेज आने लगा। हालाँकि जब उसने 2017 में छात्र राजनीति में लौटने की कोशिश की, तो टीएमसीपी नेताओं ने उसे रोक दिया, लेकिन आगे चल कर वह शामिल हो गया।

एक हाथ में त्रिशूल, एक में खप्पर और प्रसाद में मदिरा… 6 हजार साल पुराना है काल भैरव मंदिर का इतिहास, जहाँ होती है शिव के रौद्र रूप की पूजा

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में एक ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान को शराब चढ़ाई जाती है। फिर उसी मदिरा को भक्तों को प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। ये सच्चाई है काल भैरव मंदिर की। जो उज्जैन का न सिर्फ धार्मिक बल्कि रहस्यमयी चमत्कार भी है। काल भैरव को शिव के रौद्र रूप के तौर पर पूजा जाता है। यहाँ हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु शराब की बोतल लेकर आते हैं और काल भैरव को अर्पित करते हैं।

माना जाता है कि पिलाते वक्त शराब मूर्ति के मुँह से गायब हो जाती है। कोई नली, कोई ट्रिक, यहाँ तक की अब तक कोई वैज्ञानिक भी इसका ठोस जवाब नहीं दे सका है। ये मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं बल्कि जिज्ञासा का भी केंद्र है। यहाँ साधारण भक्तों से लेकर तांत्रिक तक सभी बाबा काल भैरव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

काल भैरव की मूर्ति
काल भैरव की मूर्ति को शराब का प्रसाद चढ़ाते महंत ( साभार : TripAdvisor)

मंदिर का इतिहास

काल भैरव मंदिर का इतिहास लगभग छह हजार वर्ष पुराना है। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण और कालिका पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। काल भैरव की पूजा कपालिका और अघोरा संप्रदाय का हिस्सा रही है। इतिहासकार की मानें तो मंदिर का निर्माण शिप्रा नदी के ऊपर राजा भद्रसेन ने करवाया था।

काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य
काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य (साभार : MP Tourism)

हालाँकि वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। यह मंदिर मराठा काल में बनवाया गया था। सन् 1788 में मराठा शासक महादजी शिंदे ने इस मंदिर को फिर से बनवाया और सजाया। उज्जैन प्राचीन अवंतिका नगरी रही है और यहाँ शैव परंपरा का गहरा असर है

मंदिर की संरचना

मंदिर की बनावट बहुत ही साधारण पर प्रभावशाली है। मालवा शैली के अद्भुत चित्र मंदिर की दीवारों को सजाते हैं। मुख्य द्वार पर दो विशाल सिंहों की मूर्तियाँ हैं जो मंदिर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। अंदर प्रवेश करते ही मुख्य गर्भगृह है। जहाँ काले पत्थर से बनी काल भैरव की मूर्ति विराजमान है। इस मूर्ति की खास बात है इसका मुंँह, जिसके जरिए शराब ‘पी’ जाती है।

काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य
काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य ( साभार : MP Tourism)

मूर्ति के दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में खप्पर (खोपड़ी का पात्र) है। मंदिर में दीवारों पर भैरव से जुड़े चित्र और तांत्रिक प्रतीक भी देखे जा सकते हैं। आसपास छोटे-छोटे मंदिर भी हैं जो अन्य भैरव रूपों को समर्पित हैं। मंदिर में एक अलग जगह पर शराब अर्पण की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अपनी बोतल वहीं पुजारी को देते हैं और वो मूर्ति के मुँह से चढ़ाते हैं।

काल भैरव की मूर्ति
काल भैरव की मूर्ति ( साभार : timeofindia)

मंदिर तक कैसे पहुँचे ?

काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या लोकल बस के ज़रिए आसानी से पहुँचा जा सकता है। हवाई यात्रा कर आने वाले भक्तों के लिए नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है। जो मंदिर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहाँ से टैक्सी या बस से उज्जैन पहुँचना बहुत आसान है। शहर में होटल और धर्मशालाओं की भी अच्छी सुविधा है।